पाकिस्तान की किस नई मिसाइल की ब्रह्मोस से की जा रही है तुलना

    • Author, उमैर सलीमी
    • पदनाम, बीबीसी उर्दू
  • पढ़ने का समय: 7 मिनट

पाकिस्तानी सेना ने हाल ही में फ़तह-3 क्रूज़ मिसाइल से पर्दा हटाया है जिसकी तुलना भारत की ब्रह्मोस मिसाइल से की जा रही है.

7 मई को पाकिस्तानी सेना के इंटर सर्विसेज़ पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) ने सैन्य तैयारियों के बारे में एक प्रमोशनल वीडियो में फ़तह-3 क्रूज़ मिसाइल की एक तस्वीर दिखाई थी.

हालांकि आईएसपीआर ने फ़तह-3 क्रू़ज़ मिसाइल की क्षमताओं के बारे में नहीं बताया है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल है, जो ध्वनि की गति से तीन से चार गुना तेज़ है.

रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक़ इसे पाकिस्तान ने भविष्य में सटीक हमलों के लिए विकसित किया है.

अगर आप सोशल मीडिया पर नज़र डालें तो कई टिप्पणीकारों ने इसकी तुलना ब्रह्मोस मिसाइल से की है.

हमने यह पता लगाने की कोशिश की है कि फ़तह-3 और ब्रह्मोस में क्या समानताएं हैं और उनकी क्षमताओं के संदर्भ में उनका इस्तेमाल कैसे किया जाता है.

फ़तह-3 'सुपरसोनिक' क्रूज़ मिसाइल में क्या ख़ास बात है?

टोरंटो स्थित रक्षा समाचार और विश्लेषण समूह 'कुव्वत' के संस्थापक और रक्षा शोधकर्ता बिलाल हुसैन ख़ान का कहना है कि फ़तह-3 के बारे में अब तक सामने आई जानकारी से पता चलता है कि पाकिस्तानी सेना अपनी ख़ुद की सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल पर काम कर रही है.

फ़तह सिरीज़ की मिसाइलें लंबी दूरी के 'सटीक हमलों' के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले पारंपरिक हथियार हैं, जिन्हें रोकना मुश्किल होता है क्योंकि वे कम ऊंचाई पर ही रहती हैं.

इनमें से फ़तह-1 की मारक क्षमता 140 किलोमीटर है, जबकि फ़तह-2 की मारक क्षमता 400 किलोमीटर तक है.

28 अप्रैल, 2026 को जारी एक बयान में पाकिस्तानी सेना ने कहा कि स्वदेशी रूप से विकसित फ़तह-2 मिसाइल का सफल प्रक्षेपण किया गया है.

बिलाल हुसैन बताते हैं कि हालांकि 750 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली फ़तह 4 को ज़मीन से लॉन्च की जाने वाली क्रूज़ मिसाइल के रूप में भी परीक्षण-लॉन्च किया जा चुका है, लेकिन फ़तह- 3 को अब स्पष्ट रूप से एक सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल के रूप में विकसित किया गया है.

उनका कहना है कि आईएसपीआर की ओर से जारी वीडियो और तस्वीरों से पता चलता है कि फ़तह-3 मिसाइल एक विशेष 'रैमजेट इंजन' की बदौलत ध्वनि की गति से भी तेज़ है. वहीं, तस्वीर से यह भी संकेत मिलता है कि इसका डिज़ाइन 'चीन निर्मित एचडी-1 मिसाइल के समान' है.

एचडी-1 एक सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल है, जिसे पहली बार साल 2018 में एक चीनी माइनिंग कंपनी ने विकसित किया था.

कंपनी के अनुसार इसकी रफ़्तार 2,716 से 4,321 किलोमीटर प्रति घंटे की है, जो ध्वनि की गति से कई गुना अधिक है.

बिलाल हुसैन ख़ान का मानना है कि क्योंकि पाकिस्तान अपने अधिकांश रक्षा उपकरण चीन से आयात करता है, इसलिए यह संभव है कि पाकिस्तान ने एचडी-1 मिसाइल का घरेलू स्तर पर निर्माण करने का लाइसेंस हासिल कर लिया हो.

क्या इसकी तुलना ब्रह्मोस से की जा सकती है?

बिलाल हुसैन ख़ान आगे कहते हैं कि भारतीय मिसाइल ब्रह्मोस भी ध्वनि की गति से तेज़ सफ़र तय करने के लिए रैमजेट इंजन का उपयोग करती है और लक्ष्य को ट्रैक करने के लिए इसमें कुछ नेविगेशन सिस्टम भी हैं.

"ब्रह्मोस की तरह, एचडी-1 को ज़मीन और हवा दोनों से लॉन्च किया जा सकता है."

भारतीय मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ब्रह्मोस मिसाइल उड़ान के दौरान सुपरसोनिक गति से 290 किलोमीटर तक की दूरी तय करने में सक्षम है, जिससे उड़ान का समय कम हो जाता है

इन रिपोर्टों के मुताबिक़, इससे लक्ष्य को अपना बचाव करने का समय नहीं मिलता है, इसका हमला तेज़ होता है और दुनिया की किसी भी एंटी मिसाइल डिफ़ेंस सिस्टम से इसे रोकना मुश्किल होता है.

ब्रह्मोस एयरोस्पेस के अनुसार, इसमें दुश्मन के रडार (विमान और उड़ने वाली वस्तुओं का पता लगाने वाली प्रणाली) से बचने की क्षमता है.

इसका उपयोग 'फायर एंड फॉरगेट' सिद्धांत पर किया जाता है और लक्ष्य तक पहुंचने के इसके मार्ग की लगातार निगरानी नहीं की जाती है.

दूसरी ओर, फ़तह-3 मिसाइल की मारक क्षमता की जानकारी सार्वजनिक तो नहीं की गई है, लेकिन बिलाल हुसैन ख़ान का अनुमान है कि अगर इसे चीनी एचडी-1 मिसाइल का 'निर्यात ग्रेड' माना जाए, तो इसकी मारक क्षमता 280 किलोमीटर होगी.

उनका मानन है, "हालांकि, क्योंकि पाकिस्तान ने इससे कहीं अधिक मारक क्षमता वाली मिसाइलें विकसित कर ली हैं, इसलिए उनके अनुसार इसकी मारक क्षमता को बढ़ाकर शायद 400 से 500 किलोमीटर तक किया जा सकता है."

उन्होंने आगे कहा कि जहां तक मार्गदर्शन और खोजी तकनीक का संबंध है, इन मिसाइलों की क्षमता ब्रह्मोस के समान हो सकती है क्योंकि आधुनिक चीनी हथियार ऐसा करने में सक्षम हैं.

उनके मुताबिक़, चूंकि पाकिस्तान के पास मिसाइलों के लिए रैमजेट और स्क्रैमजेट इंजन डिज़ाइन करने और परीक्षण करने की आधुनिक सुविधाएं नहीं हैं, इसलिए इस बात की बहुत संभावना है कि इसके लिए चीन की मदद मांगी गई होगी.

उनका कहना है कि साल 2018 में इस बारे में काफ़ी अटकलें लगाई जा रही थीं जब एक चीनी माइनिंग कंपनी ने पाकिस्तान को एचडी-1 की पेशकश की थी और यह कहा जा रहा था कि इस मामले में टेक्नोलॉजी ट्रांसफ़र हो सकता है.

उनके मुताबिक़, एक और सुराग यह है कि फ़तह-3 के हालिया प्रक्षेपण फुटेज में कोई भी प्रक्षेपण यान नहीं दिखाई दे रहा है जिसके बारे में हमें जानकारी हो.

उन्होंने आगे कहा कि हालांकि भारत स्वदेशी रूप से ब्रह्मोस मिसाइलों का निर्माण कर रहा है, फिर भी संभव है कि रैमजेट इंजन रूस से आयात किए जाते होंगे.

वहीं फ़तह-3 के मामले में, उन्होंने कहा कि संभवतः पाकिस्तान इन्हें चीन से आयात करेगा और मार्गदर्शन प्रणाली चीन के सहयोग से विकसित करेगा.

भविष्य के सैन्य युद्धों में क्रूज़ मिसाइलों की क्या भूमिका होगी?

कई मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि बीते साल मई महीने में सैन्य संघर्ष के दौरान भारत ने जहां ब्रह्मोस मिसाइल का इस्तेमाल किया था वहीं पाकिस्तान ने फ़तह-1 मिसाइल का इस्तेमाल किया था.

रक्षा विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि भारत और पाकिस्तान दोनों के पास सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइलें हैं जो भविष्य के सैन्य युद्धों को अतीत के युद्धों से बहुत अलग बना सकती हैं.

पाकिस्तानी सेना के पूर्व ब्रिगेडियर डॉक्टर तुग़रल यामीन ने बीबीसी को बताया कि लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के विपरीत, क्रूज़ मिसाइलें रडार से बच सकती हैं और सुपरसोनिक गति से चल सकती हैं, लेकिन इनकी रेंज थोड़ी कम होती है.

वह यूक्रेन में युद्ध और मध्य पूर्व में चल रही लड़ाइयों का उदाहरण देते हुए कहते हैं कि युद्धों में मिसाइलों और ड्रोन का उपयोग बहुत बढ़ गया है.

पिछले साल अगस्त में रॉकेट फोर्स की स्थापना के बाद से पाकिस्तान के सशस्त्र बलों ने कई मिसाइलों का परीक्षण किया है.

पाकिस्तानी सेना के पूर्व ब्रिगेडियर और रक्षा विशेषज्ञ डॉक्टर तुग़रल यामीन का कहना है कि रॉकेट फोर्स की स्थापना का मक़सद यह था कि पाकिस्तान अपनी रणनीतिक परमाणु मिसाइलों को पारंपरिक मिसाइलों से अलग करना चाहता था.

उन्होंने कहा कि "युद्ध में इस्तेमाल होने वाली पारंपरिक मिसाइलों को अलग-अलग रखा गया था ताकि फ़ैसला लेना आसान और तेज़ हो सके."

फ़तह-3 मिसाइलों के इस्तेमाल के सवाल पर उन्होंने कहा कि फ़तह-3 जैसी सटीक मारक क्षमता वाली मिसाइलें दुश्मन के रक्षा ढांचे के लक्ष्यों को निशाना बनाने में सक्षम होंगी और अगर आपका पहला हमला या पूर्वव्यापी हमला सफल होता है तो युद्ध को और भी कम समय में ख़त्म किया जा सकता है.

उनका कहना है कि पाकिस्तान का सैन्य सिद्धांत विस्तारवादी नहीं है, बल्कि अपनी अखंडता की रक्षा पर आधारित है, इसलिए ड्रोन, मिसाइलों और साइबर हमले की क्षमताओं के माध्यम से प्रतिरोध स्थापित किया जा रहा है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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