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क्या चिकन के पंजे खाए जा सकते हैं?
- Author, सिराज
- पदनाम, बीबीसी तमिल
- पढ़ने का समय: 5 मिनट
क्या हमें चिकन के पंजों को अपने भोजन में शामिल करना चाहिए? बहुत से लोग सोचते हैं कि चिकन के पंजे भी उसकी पंखों की तरह खाने लायक नहीं है.
लेकिन हर जगह ऐसा नहीं है. सिंगापुर में चिकन के पंजे करीब 276 रुपए प्रति किलोग्राम के हिसाब से बिकते हैं. ये दक्षिण अफ्रीका और मैक्सिको के कुछ हिस्सों में मिलने वाले चिकन से कहीं ज़्यादा महंगे हैं.
दुनिया भर में 'चिकन के पंजों' की भारी मांग है. वियतनाम, चीन और उज़्बेकिस्तान जैसे देश अपनी खाद्य ज़रूरतों के लिए बड़ी मात्रा में मुर्ग के पंजे आयात करते हैं.
साल 2022 में अमेरिका ने चीन को लगभग 1,33,700 मीट्रिक टन मुर्गे के पंजे निर्यात किए.
दुनिया के अन्य हिस्सों में इतने मूल्यवान क्यों हैं? उनमें कौन से पोषक तत्व पाए जाते हैं?
महत्वपूर्ण पोषक तत्व
कई देशों में चिकन के पंजों को खाने लायक़ नहीं माना जाता है, लेकिन अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के एक शोध अनुसार, उनमें महत्वपूर्ण पोषक तत्व होते हैं.
अमेरिका में दुनिया की सबसे बड़ा ब्रॉयलर चिकन इंडस्ट्री है. इसके उत्पादन का लगभग 15% दूसरे देशों को निर्यात किया जाता है. इसमें चिकन के पंजों की अहम भूमिका होती है.
इंग्लैंड के मशहूर फ़ुटबॉलर एंड्रोस टाउनसेंड ने एक बार बीबीसी को बताया था, "चिकन के पंजे बिल्कुल चिकन विंग्स जैसे ही लगते हैं. इनमें मांस कम होता है और ये ज़्यादा स्वादिष्ट होते हैं. चीन, दक्षिण अफ्रीका और पुर्तगाल जैसे देशों में इन्हें बहुत खाया जाता है. ये 20 मिनट में पक जाते हैं."
चिकन के पंजे त्वचा, हड्डियों, मांसपेशियों और कनेक्टिव टिश्यूज़ से बने होते हैं. एक अध्ययन से पता चलता है कि इनकी संरचना में लगभग 30-35% कोलेजन होता है.
चिकन के पंजों में कैलोरी, प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट और कैल्शियम, फास्फोरस, विटामिन ए और फोलेट (विटामिन बी9) जैसे पोषक तत्व भी पाए जाते हैं.
चेन्नई की क्लिनिकल न्यूट्रिशनिस्ट, डॉक्टर श्रीविद्या कहती हैं, "चिकन के पंजों में मौजूद कुल प्रोटीन का लगभग 70% हिस्सा कोलेजन होता है."
डॉ. श्रीविद्या कहती हैं, "मानव शरीर चिकन के पंजों में मौजूद कोलेजन को आसानी से अवशोषित कर सकता है. कोलेजन त्वचा और हड्डियों के स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है."
उन्होंने बताया, "उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कोलेजन का उत्पादन कम हो जाता है, जिससे त्वचा रुखी हो जाती है और झुर्रियां पड़ जाती हैं. इसका असर जोड़ों और हड्डियों के स्वास्थ्य पर भी पड़ता है."
वह बताती हैं कि चिकन के पंजों में पाया जाने वाला कोलेजन और जिलेटिन त्वचा, जोड़ों, हड्डियों और आंतों के स्वास्थ्य में मदद करता है.
ऑस्टियोआर्थराइटिस से पीड़ित लोगों पर किए गए अध्ययनों की पड़ताल में पाया गया कि कोलेजन लेने से जोड़ों की अकड़न कम होती है.
श्रीविद्या कहती हैं, "चिकन के पंजों में मौजूद प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स मांसपेशियों और बालों के विकास में भी मदद करते हैं."
क्या है इसे खाने का सही तरीक़ा?
श्रीविद्या कहती हैं कि मुर्गे के पंजों को ठीक से साफ़ करना बहुत ज़रूरी है.
उन्होंने चेतावनी दी, "चिकन के पंजों में गंदगी हो सकती है. उचित सफ़ाई के बिना उन्हें छूने से जीवाणु संक्रमण का ख़तरा बढ़ जाता है. अच्छी तरह धोना ही काफ़ी नहीं है, बल्कि बाहरी त्वचा को हटाकर इसे सही तापमान पर पकाना भी ज़रूरी है. ठीक से न पके हुए चिकन के पैरों में साल्मोनेला और कैम्पिलोबैक्टर जैसे बैक्टीरिया हो सकते हैं."
इंडोनेशियाई सरकार के आईपीबी विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर ओनो सुपर्नो अपने लेख में कहते हैं कि भेड़ के पंजों की तरह ही चिकन के पंजे भी सूप के साथ खाने में सबसे अच्छे लगते हैं.
श्रीविद्या कहती हैं, "चिकन के पंजों में मौजूद कोलेजन और जिलेटिन को इस तरह पकाना चाहिए कि शरीर उन्हें आसानी से अवशोषित कर ले, इसलिए इसे सूप के रूप में बनाना सबसे अच्छा है. इसे शोरबे या ग्रेवी में डालकर खाना भी अच्छा है. लेकिन इसे तलने से बचें."
उनका कहना है, "तले हुए चिकन के पैर सेहत के लिए हानिकारक हो सकते हैं. इनमें सेचुरेटेड फैट, ट्रांस फ़ैट और सोडियम की मात्रा अधिक होती है, जो शरीर के लिए अच्छे नहीं होते."
डॉक्टर अरुणकुमार ने बेंगलुरु मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट से एम.डी. पीडियाट्रिक्स और चेन्नई के स्टैनली मेडिकल कॉलेज से एम.बी.बी.एस. की डिग्री हासिल की है. कई अस्पतालों में काम करने के बाद अब वे इरोड के बेबी अस्पताल में कंसल्टेंट हैं.
डॉ अरुण कुमार कहते हैं, "चिकन के मांस की तुलना में चिकन के पंजों में प्रोटीन की मात्रा आमतौर पर कम होती है. लेकिन इनमें कैलोरी और फ़ैट अधिक होती है. इस बात का ध्यान रखना चाहिए."
वो कहते हैं, "उदाहरण के लिए, 100 ग्राम चिकन ब्रेस्ट में 160 कैलोरी, 25 से 27 ग्राम प्रोटीन और 3 से 5 ग्राम फ़ैट होता है. लेकिन 100 ग्राम चिकन लेग्स में 200 से 220 कैलोरी, 15-17 ग्राम प्रोटीन और 14 से 15 ग्राम वसा होती है."
साथ ही, वो कहते हैं, "चिकन के पंजों में न केवल कोलेजन और जिलेटिन होता है, बल्कि ग्लाइसिन और प्रोलाइन जैसे अमीनो एसिड भी होते हैं."
चिकन के पंजों के अलावा, कोलेजन दरअसल चिकन या मछली के सूप, मछली की त्वचा और सिर, अंडे की सफेदी, चिकन की गर्दन में भी पाया जाता है.
कौन कितना खा सकता है?
डॉ. श्रीविद्या कहती हैं, "चिकन के पंजों में पाया जाने वाला फोलेट (विटामिन बी9) गर्भवती महिलाओं में भ्रूण के विकास में मदद कर सकता है. लेकिन इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना महत्वपूर्ण है."
उनका कहना है, "एक व्यक्ति 100 से 150 ग्राम सूप या ग्रेवी ले सकता है, जो 4-5 चिकन लेग के बराबर होता है."
श्रीविद्या ने बताया, "बच्चों को देते समय उन्हें इसे अच्छी तरह चबाकर खाने के लिए कहें. जिन बच्चों के दांत नहीं निकले हैं, या जिन वयस्कों के दांत नहीं हैं और जिन्हें निगलने में कठिनाई होती है, उन्हें यह न देना ही बेहतर है. यह भी याद रखना अहम है कि इस भोजन में फ़ैट की मात्रा थोड़ी अधिक होती है."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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