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नीट पेपर लीक: गिरफ़्तार शिवराज मोटेगांवकर कौन हैं और कौन-सा कोचिंग इंस्टिट्यूट चलाते हैं?
लातूर के एक प्रसिद्ध कोचिंग संस्थान के निदेशक शिवराज मोटेगांवकर को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने नीट पेपर लीक मामले में सोमवार को पुणे से गिरफ़्तार कर लिया.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने मोटेगांवकर को नौ दिन की सीबीआई हिरासत में भेज दिया है.
रसायन विज्ञान के प्रोफे़सर के रूप में पहचाने जाने वाले मोटेगांवकर ने लातूर में नीट और जेईई परीक्षा की तैयारी के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है.
मोटेगांवकर लातूर स्थित कोचिंग संस्थान रेणुकाई करियर सेंटर (आरसीसी) के संस्थापक हैं.
इस संस्थान की स्थापना साल 2003 में हुई थी. शुरुआत में आरसीसी में 'महाराष्ट्र होटल मैनेजमेंट कॉमन एंट्रेंस टेस्ट' (एमएच-सीईटी) की तैयारी कराई जाती थी.
इससे पहले मोटेगांवकर से 17 मई को क़रीब 10 घंटे तक पूछताछ की गई थी. 18 मई को भी उनसे पूछताछ जारी रही. इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया.
सीबीआई ने रविवार तक इस मामले में नौ अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है. शिवराज मोटेगांवकर की गिरफ्तारी के बाद अभियुक्तों की कुल संख्या 10 हो गई है.
आरसीसी को महाराष्ट्र में नीट, जेईई और एमएचटी-सीईटी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले बड़े कोचिंग नेटवर्क में गिना जाता है.
शिवराज मोटेगांवकर कौन हैं?
आरसीसी की आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक़, शिवराज मोटेगांवकर ने फ़िज़िक्स में एमएससी करते हुए स्वर्ण पदक जीता. हालांकि, वेबसाइट पर किसी विश्वविद्यालय का नाम नहीं बताया गया है.
संस्थान का दावा है कि उसके छात्रों ने सेट/नेट-जेआरएफ़, गेट, बार्क, डीआरडीओ और टीआईएफ़आर जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं पास की हैं.
मोटेगांवकर ने घर से पढ़ाना शुरू किया और फिर 2003 में रेणुकाई केमिस्ट्री क्लासेस की शुरुआत की. बाद में इसका विस्तार आरसीसी पैटर्न के रूप में हुआ. आरसीसी ने मराठवाड़ा, पुणे, नासिक, नांदेड़, छत्रपति संभाजीनगर और दूसरे शहरों में भी शाखाएं खोली हैं.
आरसीसी की वेबसाइट के मुताबिक़, संस्थान का दावा है कि उसने मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं के लिए हज़ारों छात्रों का मार्गदर्शन किया है.
आरसीसी ने आर्थिक रूप से कमज़ोर छात्रों को स्कॉलरशिप देने का भी दावा किया है. मोटेगांवकर सोशल मीडिया पर भी काफ़ी सक्रिय हैं. वो इंस्टाग्राम और फ़ेसबुक के ज़रिए छात्रों से बातचीत करते हैं.
वो परीक्षाओं, पढ़ाई के तरीक़ों और करियर गाइडेंस से जुड़े वीडियो और पोस्ट नियमित रूप से साझा करते रहते हैं.
जब नीट को रद्द किया गया तो मोटेगांवकर ने क्या कहा?
लातूर में 11वीं और 12वीं के छात्रों के बीच नीट और जेईई की तैयारी के लिए आरसीसी काफ़ी लोकप्रिय है.
कोचिंग के लिए 11वीं के छात्रों से क़रीब 40 हज़ार रुपये और 12वीं के छात्रों से 50 हज़ार रुपये सालाना फ़ीस ली जाती है. परीक्षा से पहले दिए जाने वाले गेस पेपर और अभ्यास परीक्षाओं की वजह से आरसीसी का तेज़ी से विस्तार हुआ है.
तीन मई को नीट (यूजी) 2026 परीक्षा के बाद मोटेगांवकर ने अपने फेसबुक पर एक वीडियो पोस्ट किया था. उस वीडियो में एक छात्र ने कहा कि 42 सवाल शिक्षक के दिए गए गेस पेपर से आए थे.
पेपर लीक होने के बाद नीट परीक्षा रद्द कर दी गई थी. इसके बाद शिवराज मोटेगांवकर ने अपने यूट्यूब चैनल पर अपनी कक्षाओं से जुड़ा एक वीडियो जारी किया.
इसमें उन्होंने बच्चों से अपील की कि परीक्षा रद्द होने से घबराएं नहीं. उन्होंने यह भी कहा कि आरसीसी इन परीक्षाओं की तैयारी के लिए मुफ्त ऑनलाइन कक्षाएं फिर से शुरू करेगा.
उन्होंने कहा कि दोबारा परीक्षा होने से योग्यता और बेहतर होगी. उन्होंने इस वीडियो में यह भी दावा किया, "प्रैक्टिस टेस्ट के अलावा कोई अन्य प्रश्न नहीं होंगे."
इससे पहले सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए वीडियो में उन्हें और उनकी कक्षा के छात्रों को यह दावा करते हुए दिखाया गया था कि वे तीन मई को आयोजित नीट परीक्षा में शामिल हुए थे, जिसकी तैयारी आरसीसी कोचिंग क्लासेस में कराई गई थी.
मोटेगांवकर की गिरफ़्तारी के बारे में सीबीआई ने क्या कहा?
बीबीसी मराठी के मुताबिक़, सीबीआई ने अरेस्ट मेमो में मोटगांवकर की गिरफ्तारी के कारणों का उल्लेख किया है.
इसमें कहा गया है, "जांच से पता चला है कि शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर एक संगठित गिरोह का सक्रिय सदस्य है, जो नीट-यूजी परीक्षा 2026 के प्रश्न पत्र को लीक करने और बांटने के अपराध में शामिल है."
"इसके अलावा, अन्य अभियुक्तों के साथ मिलकर उन्होंने नीट (यूजी) 2026 परीक्षा का प्रश्न पत्र और उसके उत्तर, परीक्षा से पहले यानी 23 अप्रैल, 2026 को हासिल कर लिए थे."
"14 मई, 2026 को लातूर के शिवाजीनगर स्थित शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर के घर पर तलाशी के दौरान उनके मोबाइल फोन से नीट (यूजी) 2026 के लीक हुए प्रश्न पत्र बरामद किए गए."
अरेस्ट मेमो के मुताबिक शिवराज मोटेगांवकर ने अन्य अभियुक्तों के साथ मिलकर लीक हुए प्रश्न पत्रों और उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतियां विवेक पाटिल सहित कई लोगों को उपलब्ध कराई थीं.
"मोटेगांवकर ने उन सभी लोगों के नाम उजागर नहीं किए हैं, जिन्हें उन्होंने लीक हुए नीट (यूजी) 2026 परीक्षा के प्रश्न पत्रों की हस्तलिखित प्रतियां दी थीं."
सीबीआई के मेमो में कहा गया है कि जांच के दौरान अभियुक्तों ने परीक्षा के बाद लीक हुए प्रश्न पत्रों को नष्ट कर सबूत मिटाने की भी कोशिश की.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.