'मोदी काका' पर फटकार नहीं मिली: पहलाज

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- Author, सुशांत एस मोहन
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, मुंबई
- प्रकाशित
जनवरी 2015 से सेंसर बोर्ड अध्यक्ष के बतौर अपना कार्यकाल संभालने के बाद से ही फ़िल्म निर्माता पहलाज निहलानी विवादों में रहे हैं.
सेंसर बोर्ड के निर्णयों को लेकर उनकी फ़िल्म जगत में काफ़ी आलोचना हुई है और अब ख़बरें हैं कि सूचना और प्रसारण मंत्रालय उनको हटाने की फ़िराक में है.
हालांकि बीबीसी से बातचीत में पहलाज ने इस आशंका से इनकार किया है.
बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा,"मुझे ऐसी कोई नोटिस नहीं मिली है न ही कोई गैर आधिकारिक सूचना. आप इन अफ़वाहों पर ध्यान न दें. अगर ऐसा कुछ हो रहा होगा तो मुझे पता तो चलेगा और मैं बता दूंगा. सरकार के अधिकारियों ने एक अंग्रेज़ी अख़बार को अपनी बात कही है कि वो पहलाज को नहीं हटाएंगे, अब आप देखिए कौन सही कह रहा है? मोदी काका को लेकर सरकार से न तो मुझे कोई फ़टकार मिली न कोई तारीफ़."
पहलाज निहलानी को लेकर जो विवाद रहे हैं उन पर एक नज़र.

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पहलाज निहलानी से जुड़ा सबसे ताज़ा विवाद हॉलीवुड के मशहूर क़िरदार जेम्स बांड की नई नवेली फ़िल्म 'स्पेक्टर' से जुड़ा है.
इस फ़िल्म में दिखाए गए चुंबन दृश्यों को 50 प्रतिशत काट दिया गया था और बाद में पहलाज ने माना था कि उन्होंने बिना फ़िल्म देखे यह निर्णय लिया.

दूसरा विवाद था अभिनेता सलमान ख़ान की फ़िल्म 'प्रेम रतन धन पायो' से जुड़ा.
पहलाज निहलानी ने पारिवारिक और बॉलीवुड में साफ़-सुथरी फ़िल्में बनाने के लिए मशहूर निर्माता निर्देशक सूरज बड़जात्या को भी इस फ़िल्म से 'रखैल' शब्द हटाने को कहा था और साथ ही फ़ांसी लगाए जाने के एक दृश्य को हटाया गया था.

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तीसरा और सबसे बड़ा विवाद है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बनाई गई पहलाज की फ़िल्म 'मेरा देश है महान, मेरा देश है जवान'
इस फ़िल्म को 'प्रेम रतन धन पायो' के साथ इंटरवल में अनिवार्य रुप से प्रदर्शित करने का आदेश पहलाज ने दिया था लेकिन फ़िल्म दिखाए जाने की सूचना प्रसारण मंत्रालय को नहीं थी.

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इस फ़िल्म को लेकर सोशल मीडिया पर सरकार की काफ़ी खिंचाई हुई क्योंकि न सिर्फ़ फ़िल्म की प्रोडक्शन क्वालिटी ख़राब थी अपितु फ़िल्म में विदेशों के दृश्य भारत की प्रगति के सूचक के तौर पर दिखाए गए थे.
कुछ मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय इस फ़िल्म से हुई फ़जीहत के चलते पहलाज से ख़ासा नाराज़ है और कई विवादों के साथ इस फ़िल्म की चोट पहलाज निहलानी के सेंसर बोर्ड़ अध्यक्ष के रोल को नुक़सान पहुंचा सकती है.
इस मामले में सेंसर बोर्ड सदस्य अशोक पंडित का भी कहना था, ''इस तरह की कोई ख़बर मैंने अभी तक नहीं सुनी है और न ही ऐसी कोई बात ही किसी सूत्र से मुझ तक पहुंची है. पहलाज का निलंबन जैसा कोई मामला नहीं है.''
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