पीएम मोदी की एग्ज़ाम सुधार पर अहम घोषणा, नंदन नीलेकणी को दी ज़िम्मेदारी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टेक्नोलॉजी क्षेत्र की मशहूर शख्सियत नंदन नीलेकणी के नेतृत्व में एक हाई पावर टास्क फ़ोर्स बनाने की घोषणा की है.
उन्होंने सोशल मीडिया पर बताया है कि उनकी रिपोर्ट के आधार पर ही परीक्षाओं की विश्वसनीयता को सुनिश्चित करने के लिए जल्द से जल्द कदम उठाए जाएंगे.
पीएम मोदी ने कहा है, "जिन लोगों ने विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है वे जेलों में सड़ रहे हैं. हम फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट बना चुके हैं. हम कल भी पार्लियामेंट में कठोर कानूनी प्रावधानों के साथ नया क़ानून बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं."
"लेकिन हमें भविष्य के लिए सोचना है. हमारी परीक्षा पद्धति भरोसेमंद हो, पारदर्शी हो, हमारी परीक्षा पद्धति में सबसे ज़्यादा तकनीक का इस्तेमाल हो इन सारी बातों को ध्यान में रखते हुए विश्व प्रसिद्ध टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट नंदन नीलेकणी जी के नेतृत्व में एक हाई पावर टास्क फ़ोर्स बनाने का फ़ैसला किया है."
उन्होंने कहा, "यह परीक्षा सुधार की तरफ फ़ोकस करेगा और जल्द से जल्द आने वाली परीक्षाओं की विश्वसनीयता को सुनिश्चित करने का काम, इसकी रिपोर्ट के आधार पर कर दिया जाएगा."
युवाओं का प्रदर्शन

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इससे पहले बुधवार रात 11 बजकर 52 मिनट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर में युवाओं के विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मुद्दे पर अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक वीडियो पोस्ट किया था.
बुधवार को उनका संदेश आधी रात के क़रीब इंस्टाग्राम वीडियो के रूप में आया, जिसे फ़ोन के फ्रंट कैमरे से वर्टिकल फ़ॉर्मेट में रिकॉर्ड किया गया था.
उन्होंने अपने संदेश की शुरुआत भी आमतौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले शब्द 'मित्रों' की बजाय 'फ़्रेंड्स' कहकर की.
उन्होंने इस वीडियो में कहा था, "फ्रेंड्स, मैं जानता हूं कि पेपर लीक कोई मामूली विषय नहीं है. लाखों विद्यार्थी और उनके अभिभावकों के लिए ये बहुत ही पीड़ादायक है. और इसलिए पेपर लीक घटना से अब तक, पिछले ढाई महीनों में अनेक क़दम उठाए गए. गुनहगारों को पकड़ा गया है वे जेल में पड़े हैं..."
उन्होंने आगे कहा - "लेकिन हम इसी से संतोष कर लेने वाले लोगों में से नहीं हैं. और इसलिए मैंने आज फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट के लिए विभागों को निर्देश दिए थे. आज विभागों ने लगातार मेहनत करके, मुझे मसौदा दे दिया. फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट और कठोर सज़ा के साथ वाले इस मसौदे पर कल कैबिनेट में चर्चा होगी."
"कैबिनेट के साथियों के सुझाव के साथ उसे अंतिम रूप दिया जाएगा और सोमवार से संसद का दूसरा सप्ताह शुरू हो रहा है, तो उस बिल को सदन में जल्द से जल्द पारित कराने का प्रयास किया जाएगा."
उन्होंने इसके अगले दिन भी एक वीडियो जारी कर युवाओं को संबोधित किया और उनके सुझावों के लिए धन्यवाद दिया.
सरकार पर दबाव

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नीट पेपर लीक के मुद्दे पर शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफ़ा दे दिया था. बीते एक महीने से ज़्यादा समय से दिल्ली के जंतर-मंतर पर उनके इस्तीफ़े की मांग में सीजेपी का प्रदर्शन चल रहा था.
युवाओं का यह प्रदर्शन देश के अन्य कई इलाक़ों में भी देखने को मिला. मुंबई, कोलकाता, पटना, लखनउ में भी युवाओं ने सड़कों पर उतरकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े और शिक्षा सुधार की मांग की.
इस दौरान दिल्ली समेत देश के कई इलाक़ों में हिंसा भी देखने को मिली. इन प्रदर्शनों का सरकार पर काफ़ी दबाव भी देखा गया और केंद्र सरकार ने भी सीजेपी के प्रतिनिधियों से भी बातचीत की.
सरकार पर शिक्षा मंत्री के इस्तीफ़े और पेपर लीक के मुद्दे पर दबाव केवल सड़कों से ही नहीं था. संसद में भी विपक्षी दल लगातार इस मुद्दे पर सक्रिय दिख रहे हैं.
सोमवार को संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ ही सियासी गलियारों में यह मुद्दा काफ़ी अहम बनकर उभरा.
इसी दिन सीजेपी ने जंतर-मंतर से संसद मार्च की अपील की थी. लेकिन जब सीजेपी के समर्थक संसद की ओर बढ़े तो पुलिस और सुरक्षाबलों ने उन्हें रोकने के लिए लाठी चार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े.
इस घटना में कई स्डूटेंट्स घायल हुए और पुलिसकर्मियों को भी हिंसा का शिकार होना पड़ा.
शिक्षा मंत्री के इस्तीफ़े की मांग में राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना भी दिया.
युवाओं के प्रति लोगों का समर्थन

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जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे युवाओं को देश के कई हिस्सों से समर्थन मिला और इसमें फ़िल्म, कला, साहित्य और खेल से जुड़े लोग भी शामिल थे.
यही नहीं सुप्रीम कोर्ट में भी कई वकीलों ने युवाओं की मांगों को अपना समर्थन दिया. इस तरह से सरकार पर लगातार दबाव बढ़ता हुआ दिखा.
दरअसल शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े और अन्य शिक्षा सुधारों की मांग में दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी ने 20 जून को धरना शुरू किया था.
उनकी इस मांग में लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक भी शामिल हे गए और उन्होंने जंतर-मंतर पर अनशन शुरू कर दिया.
इन्हीं मांगों के समर्थन में जंतर-मंतर पर आइसा (एआईएसए) के तीन सदस्य नेहा, मनीष और अमीन भी अनशन पर बैठे थे.
लेकिन दिल्ली पुलिस ने हाई कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए 18 जुलाई को सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से उठाकर सफ़दरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया.
हालांकि सोनम वांगचुक को हटाने के बाद भी उनका अनशन जारी रहा और इसके बाद सीजेपी के आंदोलन के प्रति समर्थन लगातार बढ़ता हुआ दिखा, जो अन्य शहरों तक फ़ैल गया.
सोनम वांगचुक ने 20 जुलाई को संसद मार्च की अपील कर रखी थी, लेकिन उन्हें पहले ही वहां से हटा दिया गया. इस घटना पर सोशल मीडिया में कई लोगों ने प्रतिक्रिया दी और दिल्ली पुलिस के साथ ही सरकार को निशाने पर लिया.
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