मोहम्मद रिज़वान का फ़ोन क्यों किया गया ज़ब्त, लाहौर हाई कोर्ट से क्या लगाई थी गुहार

26 अगस्त को लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर दूसरे टेस्ट मैच से पहले नेट सेशन के दौरान मोहम्मद रिज़वान फुटबॉल पकड़े हुए हैं

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इमेज कैप्शन, 26 अगस्त को लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर दूसरे टेस्ट मैच से पहले नेट सेशन के दौरान मोहम्मद रिज़वान फुटबॉल पकड़े हुए हैं
    • Author, शहज़ाद मलिक
    • पदनाम, बीबीसी उर्दू
    • ........से, इस्लामाबाद
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 6 मिनट

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के लाहौर हाई कोर्ट ने पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के कप्तान मोहम्मद रिज़वान की उस याचिका को ख़ारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने नेशनल साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनसीसीआईए) को उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई करने से रोकने की माँग की थी.

अदालत ने याचिकाकर्ता को एनसीसीआईए की ओर से जारी किए गए नोटिस का जवाब देने का आदेश दिया है.

गौरतलब है कि इंग्लैंड के लॉर्ड्स में खेले गए टेस्ट मैच में हार के बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने टीम से सात खिलाड़ियों को वापस बुलाने का फ़ैसला किया था.

इनमें मोहम्मद रिज़वान, इमाम-उल-हक़, सलमान आग़ा, अली उस्मान, आमिर जमाल, ओवैस ज़फ़र और ख़ुर्रम शहज़ाद शामिल थे.

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) ने अनुशासन और आचरण से संबंधित मीडिया रिपोर्टों के मद्देनज़र आंतरिक अनुशासनात्मक जाँच शुरू की है.

सितंबर की शुरुआत में पाकिस्तानी मीडिया आउटलेट्स ने बताया कि पीसीबी ने इंग्लैंड के ख़िलाफ़ सिरीज़ के दौरान कुछ खिलाड़ियों के मोबाइल फ़ोन ज़ब्त कर एनसीसीआईए को सौंप दिए थे.

हालाँकि, पीसीबी ने अभी तक इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है.

29 अगस्त को लंदन के लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर इंग्लैंड और पाकिस्तान के बीच दूसरे टेस्ट मैच के तीसरे दिन मोहम्मद रिज़वान मेडिकल मदद लेते हुए.

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सुनवाई के बाद अर्ज़ी ख़ारिज

अपनी याचिका में मोहम्मद रिज़वान ने अदालत से गुहार लगाई थी कि एनसीसीआईए ने जो उनके मोबाइल फ़ोन और बाक़ी सामान ज़ब्त किया उन्हें वापस दिलाया जाए.

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संक्षिप्त सुनवाई के बाद आवेदन ख़ारिज कर दिया गया. लाहौर हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश आलिया नीलम ने मोहम्मद रिज़वान की याचिका पर सुनवाई की.

इस दौरान रिज़वान के वकील क़ाज़ी उमैर अली ने अदालत को बताया कि क्रिकेट में सट्टेबाज़ी और जुए में कथित संलिप्तता के आरोप में एनसीसीआईए द्वारा उनके मुवक्किल को नोटिस जारी किया गया है.

इस पर मुख्य न्यायाधीश आलिया नीलम ने याचिकाकर्ता के वकील को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें जाकर नोटिस का जवाब देना चाहिए.

उमैर अली ने दलील दी कि उनके मुवक्किल को 10 सितंबर को नोटिस जारी किया गया था, जिसका उन्होंने पालन भी कर लिया है. इस पर अदालत ने पूछा कि फिर वे अदालत में किसलिए आए थे.

सुनवाई के दौरान अदालत ने मोहम्मद रिज़वान के वकील से पूछा कि लाहौर हाई कोर्ट में मिले नोटिस और दायर आवेदन की फ़ाइल कहाँ है.

क़ाज़ी उमैर अली ने कहा कि संबंधित फ़ाइल उनके जूनियर वकील के पास है. अदालत ने नाराज़गी जताते हुए कहा कि जब वह अदालत में पेश हुए थे, तो कम से कम उनके पास केस फ़ाइल तो होनी चाहिए थी.

मोहम्मद रिज़वान के वकील आगे और दलीलें पेश करना चाहते थे. हालाँकि, अदालत ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद आवेदन ख़ारिज कर दिया और उन्हें एनसीसीआईए के नोटिस का जवाब देने का निर्देश दिया.

रिज़वान ने अदालत से क्या अनुरोध किया

अपने आवेदन में मोहम्मद रिज़वान ने कहा कि 27 से 30 अगस्त तक इंग्लैंड और पाकिस्तान के बीच लॉर्ड्स में खेले गए टेस्ट मैच के तुरंत बाद, उन्हें रात एक बजे उस होटल की लॉबी में बुलाया गया, जहाँ पूरी टीम ठहरी हुई थी.

आवेदन के अनुसार, "वहाँ एक अधिकारी मौजूद था जो किसी सरकारी एजेंसी का लग रहा था."

याचिका में मोहम्मद रिज़वान का कहना है कि इस संबंध में कोई पूर्व सूचना दिए बिना उस अधिकारी ने उनसे पूछताछ की और बिना कोई कारण या औचित्य बताए उनका मोबाइल फ़ोन अपने क़ब्ज़े में ले लिया.

याचिका में बताया गया कि मोहम्मद रिज़वान ने इस आश्वासन पर अपना फ़ोन सौंप दिया था कि डिवाइस की पूरी तरह से जाँच की जाएगी और अगले तीन घंटों के भीतर उसे वापस कर दिया जाएगा.

मोहम्मद रिज़वान की याचिका में गृह मंत्रालय और एनसीसीआईए को पक्षकार बनाया गया है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि एनसीसीआईए के नोटिस में उन पर जुआ खेलने का आरोप लगाया गया है.

याचिकाकर्ता ने यह तर्क दिया कि नोटिस में लगाए गए सभी आरोप न केवल झूठे हैं, बल्कि तथ्यों पर आधारित भी नहीं हैं. याचिका में यह भी कहा गया है कि नोटिस का मकसद क्रिकेटर मोहम्मद रिज़वान की प्रतिष्ठा को नुक़सान पहुँचाना है.

आगे यह भी कहा गया कि एनसीसीआईए के आरोपों के संबंध में अब तक की गई जाँच में कोई सबूत नहीं मिला है. याचिका में यह मुद्दा भी उठाया गया कि जाँच के दौरान एनसीसीआईए के अधिकारी उस तारीख़ की पहचान भी नहीं कर सके, जिस दिन कथित सट्टेबाज़ी हुई थी.

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आवेदन के अनुसार, मोहम्मद रिज़वान 10 सितंबर को एनसीसीआईए के सामने पेश हुए, जबकि 14 सितंबर को उन्होंने संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर पूछा कि उन्हें किस आधार पर तलब किया गया था.

याचिका में कहा गया है कि कथित सट्टेबाज़ी के आरोपों पर जारी किया गया नोटिस और उसके बाद शुरू की गई जाँच क़ानून के अनुसार नहीं थी.

इसके अलावा, यह भी कहा गया कि अगर क्रिकेट में मैच फ़िक्सिंग या सट्टेबाज़ी का कोई मामला सामने आता है, तो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) को इसकी जाँच करने का अधिकार है.

याचिका में यह भी कहा गया है कि याचिकाकर्ता, मोहम्मद रिज़वान, उस मामले से अनजान है, जिसमें उनके ख़िलाफ़ जाँच की जा रही है.

इसके अलावा, याचिका में यह चिंता व्यक्त की गई है कि एनसीसीआईए अधिकारी नोटिस या जाँच के बहाने याचिकाकर्ता को हिरासत में ले सकते हैं या गिरफ़्तार कर सकते हैं.

याचिका में लाहौर हाई कोर्ट से न केवल इस नोटिस को, बल्कि उसके बाद शुरू की गई जाँच को भी ग़ैर-क़ानूनी घोषित करने का अनुरोध किया गया था. इसके अलावा, एनसीसीआईए के पास मौजूद मोहम्मद रिज़वान के मोबाइल फ़ोन और अन्य सामान को वापस करने का भी अनुरोध किया गया.

लाहौर में एनसीसीआईए के अधिकारियों ने 10 सितंबर को क्रिकेटर मोहम्मद रिज़वान और इमाम-उल-हक़ को तलब किया था. लगभग दो घंटे की पूछताछ के बाद, दोनों क्रिकेटरों को जाने की अनुमति दी गई थी.

हालाँकि, एनसीसीआईए अधिकारियों ने उनके मोबाइल फ़ोन ज़ब्त कर लिए थे.

लाहौर उच्च न्यायालय

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एनसीसीआईए ने मोहम्मद रिज़वान से क्या पूछा?

एनसीसीआईए ने मोहम्मद रिज़वान से जो सवाल पूछे थे, उन्हें एजेंसी के वकील, असिस्टेंट अटॉर्नी जनरल रफ़ाक़त डोगर ने हाई कोर्ट के सामने पेश किया था.

एनसीसीआईए ने मोहम्मद रिज़वान से उनकी व्यक्तिगत, वित्तीय और यात्रा संबंधी जानकारी माँगी है.

सवालों के अनुसार, मोहम्मद रिज़वान से उनके माता-पिता, जन्म तिथि, जन्म स्थान, पत्नी और बच्चों के बारे में जानकारी माँगी गई थी. इसके अलावा पिछले 10 वर्षों में इस्तेमाल किए गए फ़ेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया खातों का विवरण भी माँगा गया था.

एजेंसी ने पिछले पाँच वर्षों के दौरान वेतन, किराये से होने वाली आय, व्यवसाय और कृषि स्रोतों से होने वाली आय, बैंकों में जमा धन पर अर्जित लाभ, घरेलू ख़र्च और बच्चों की शिक्षा संबंधी ख़र्चों का विवरण भी माँगा है.

मोहम्मद रिज़वान से विरासत में मिली संपत्ति के बारे में पूरी जानकारी, संपत्ति हस्तांतरित करने वाले व्यक्ति का विवरण और संबंधित साक्ष्य उपलब्ध कराने के लिए भी कहा गया है. साथ ही पिछले पाँच वर्षों में संपत्ति की ख़रीद और बिक्री के रिकॉर्ड भी माँगे गए हैं.

इसके अतिरिक्त, पिछले पाँच वर्षों में की गई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू यात्राओं का विवरण, किए गए ख़र्च, ठहरने की अवधि, सभी बैंक खाते, क्रेडिट कार्ड और किसी भी व्यक्ति या संस्था से लिए गए कर्ज़ भी सवालों का हिस्सा हैं.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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