राजस्थान: तानों से स्टारडम तक, कौन हैं चूरू के 12 साल के 'एलियन स्टार'

इमेज स्रोत, Mohar Singh Meena/BBC
- Author, मोहर सिंह मीणा
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़ हिंदी के लिए, चूरू से लौटकर
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 8 मिनट
चूरू ज़िले के सुजानगढ़ से आगे बढ़ते हुए जब आप चारिया गांव की तरफ़ जाते हैं तो सड़क धीरे-धीरे छोटी होती जाती है.
सामने रेतीली पगडंडी और उसके आसपास राजस्थान के गांवों का वही जाना-पहचाना सन्नाटा. लेकिन इसी सन्नाटे के बीच तीन कमरों वाला एक घर ऐसा है, जहां इन दिनों दूर-दराज़ से लोग आ रहे हैं.
जब हम वहां पहुंचे तो घर के बाहर काफ़ी लोग मौजूद थे. कोई सेल्फ़ी लेने के लिए इंतज़ार कर रहा है और कोई दूर से सिर्फ़ इसलिए पहुंचा है ताकि वह उस बच्चे को सामने से देख सके जिनका वीडियो उन्होंने सोशल मीडिया पर देखा है.
दरअसल ये सारी भीड़ मोती मेघवाल के लिए है, जिन्हें सोशल मीडिया की दुनिया 'एलियन स्टार' के नाम से जानती है.
मोती के बारे में सुनकर शायद सबसे पहले आपके मन में यह सवाल आए कि आख़िर इस बच्चे में ऐसा क्या है कि लोग उससे मिलने पहुंच रहे हैं.
जवाब उनके चेहरे से शुरू होता है और उनकी कहानी पर जाकर ख़त्म होता है. मोती को गांव के लोग और स्कूल के बच्चे उनकी भौंहे (आइब्रो) की वजह से 'एलियन' कहकर चिढ़ाते थे.
मोती मेघवाल बीबीसी से बातचीत में कहते हैं कि, पहले उन्हें इसका बुरा तो लगता था, लेकिन आज कहानी बदल चुकी है. अब लोग उसी 'एलियन स्टार' के साथ तस्वीर लेने के लिए इंतज़ार करते हैं.
मोती कहते हैं, "पहले जब एलियन कहते थे तो बुरा लगता था, अब प्यार से एलियन स्टार कहते हैं तो बहुत अच्छा लगता है."
सोशल मीडिया पर उनके एक वीडियो को क़रीब 18.6 करोड़ बार देखा गया है. उनके एक अन्य वीडियो को क़रीब 10 करोड़ व्यूज़ मिले हैं, जबकि उनके लगभग हर वीडियो पर कई मिलियन व्यूज़ हैं.
इंस्टाग्राम पर उनके क़रीब 19 लाख और फेसबुक पर क़रीब 11 लाख फॉलोअर्स हैं.

इमेज स्रोत, Mohar Singh Meena/BBC
मोती ने मज़ाक़ को बनाया अपनी पहचान
लेकिन मोती की कहानी सिर्फ़ करोड़ों व्यूज़ और लाखों फॉलोअर्स की कहानी नहीं है. बल्कि, यह उस बच्चे की कहानी है जिसने अपने ऊपर किए गए मज़ाक़ को अपनी पहचान बना लिया.
पहले क्लास में दोस्त नहीं थे, अब सब सेल्फी लेते हैं
बारह साल के मोती मेघवाल सातवीं कक्षा में पढ़ते हैं. उनके माता-पिता खेती करते हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद सामान्य है.
मोती क़रीब एक साल से वीडियो बना रहे हैं.
शुरुआत में उनके वीडियो पर लोगों का ज़्यादा ध्यान नहीं गया. फिर एक वीडियो में बोले गए एक डायलॉग ने लोगों का ध्यान खींचना शुरू किया.
मोती अपना पहला चर्चित डायलॉग बोलते हैं, "लोग बोलते थे तू कुछ नहीं कर पाएगा, अब वही लोग कहते हैं तू बहुत आगे जाएगा."

इमेज स्रोत, Mohar Singh Meena/BBC
एक वीडियो, जिसने ज़िंदगी बदल दी
मोती बताते हैं कि उस वक़्त उनके क़रीब ढाई लाख फ़ॉलोअर थे. फिर 15 अगस्त के मौके पर बनाई गई एक वीडियो ने उनकी ज़िंदगी बदल दी.
वीडियो में स्कूल के शिक्षक कहते हैं कि जो बच्चा अच्छे कपड़े पहनकर आएगा, उसे दो लड्डू मिलेंगे. अगले दिन मोती शेरवानी पहनकर स्कूल पहुंच गए.
यह वीडियो देखते-देखते वायरल हो गई और मोती के मुताबिक़ इस पर अब तक 18.6 करोड़ व्यूज़ हो चुके हैं
इसके बाद बनाई गईं अधिकतर वीडियो पर कई मिलियन व्यूज़ हैं.
मोती कहते हैं कि आज इंस्टाग्राम पर 19 लाख और फेसबुक पर 11 लाख फॉलोअर्स हैं. यूट्यूब पर भी काम शुरू किया है.
लेकिन मोती के लिए सबसे बड़ा बदलाव फॉलोअर्स की संख्या नहीं है.

इमेज स्रोत, Mohar Singh Meena/BBC
वह बताते हैं, "पहले मेरे क्लास में दोस्त नहीं थे, कोई बात नहीं करता था. सब चिढ़ाते थे लेकिन अब दोस्त भी बन गए और सब साथ में सेल्फ़ी लेते हैं."
जब उनसे पूछा कि 'एलियन स्टार' नाम क्यों रखा? मोती मुस्कुराते हुए कहते हैं, "एलियन जैसा ही तो लगता हूं."
मोती कहते हैं कि रोज़ क़रीब सौ दो सौ लोग अलग-अलग जगहों से मिलने आते हैं.
बड़े होकर क्या करना चाहते हो, इस सवाल पर कहते हैं, "पढ़ाई भी करनी है, वीडियो भी बनानी है और हीरो बनना है."
वीडियो बनाने के लिए परिवार का पूरा सपोर्ट
मोती की लोकप्रियता के साथ उनके परिवार की सोच भी बदली है. मोती बताते हैं कि पहले घर वाले उनसे कहते थे कि पढ़ाई करो, लेकिन अब परिवार वाले कहते हैं वीडियो बनाओ.
पहले मोती के पास सामान्य फोन था लेकिन चर्चाओं में आने के बाद उनके पिता निंबाराम मेघवाल ने क़रीब छह महीने पहले नया फोन दिलाया है.
जब उनसे पूछा गया कि आम तौर पर माता-पिता बच्चों को मोबाइल से दूर रखने की कोशिश करते हैं, लेकिन आपने खुद फोन क्यों दिलाया?
निंबाराम कहते हैं, "वह अच्छा काम कर रहा है तो कोई दिक्कत नहीं है."
वह कहते हैं कि मोती पढ़ाई में अच्छा है, पढ़ाई भी करता है और वीडियो भी बनाता है.
निंबाराम के मुताबिक़, पंजाब, चंडीगढ़, हरियाणा, इंदौर समेत कई जगहों से लोग मोती से मिलने आते हैं. वह कहते हैं कि गांव वाले भी बहुत खुश हैं.
सोशल मीडिया से होने वाली कमाई के बारे में निंबाराम कहते हैं कि फिलहाल इससे ख़र्चा चल जाता है. पूरा परिवार और पूरा गांव मोती को सपोर्ट करता है.

इमेज स्रोत, Mohar Singh Meena/BBC
कन्याकुमारी से श्रीनगर तक लोग हमारे गांव आते हैं
मोती भी बताते हैं कि सोशल मीडिया से कुछ कमाई शुरू हुई है और प्रमोशन के लिए भी लोग आने लगे हैं. सोशल मीडिया पर लोकप्रिय होने के बाद जब वह दूसरे शहरों में जाते हैं तो लोग उन्हें पहचान लेते हैं.
मोती की लोकप्रियता अब चारिया गांव की सीमाओं से बहुत आगे निकल चुकी है. उनके घर के बाहर पवन कुमार बैठे हुए हैं. बीबीसी से बातचीत में वह कहते हैं, "मैं क़रीब ढाई सौ किलोमीटर दूर हरियाणा के भिवाड़ी से आया हूं."
वह कहते हैं कि जहां भी और जब भी देखिए तो 'एलियन स्टार' ही दिखता है, फ़ोन स्क्रीन पर. पवन बताते हैं कि उन्होंने मोती की पहली वीडियो देखी थी और तभी से उन्हें फॉलो कर रहे हैं.
पवन कहते हैं, "देखकर मुझे भी अच्छा लगा कि इतना छोटा बच्चा देशभर में इतना नाम कमा रहा है."

इमेज स्रोत, Mohar Singh Meena/BBC
चारिया गांव के निवासी राजकुमार शर्मा के लिए मोती की लोकप्रियता अब पूरे गांव की पहचान बन चुकी है.
वो कहते हैं कि देश के अलग-अलग हिस्सों से लोगों का यहां पहुंचना उनके लिए गर्व की बात है.
राजकुमार बताते हैं कि चारिया गांव की आबादी क़रीब सात सौ घरों की है, यह खुद ग्राम पंचायत मुख्यालय है.
वीडियो शूट करने में मदद करते हैं ताऊ के बेटे

इमेज स्रोत, Mohar Singh Meena/BBC
मोती का वीडियो शूट करने और उन्हें स्क्रिप्ट बताने में उनके ताऊ के बेटे मुकेश मदद करते हैं.
मुकेश बताते हैं कि पहले उनके बड़े भाई वीडियो बनाते थे, लेकिन उनके वीडियो नहीं चले. इसके बाद उन्होंने मोती के साथ वीडियो बनाना शुरू किया.
मुकेश कहते हैं, "हमने कभी नहीं सोचा था कि इतने वायरल हो जाएंगे. अच्छा लगता है लोगों का इतना प्यार मिल रहा है. लोग बहुत दूर-दूर से आकर मिलते हैं."
'एलियन स्टार' नाम से अकाउंट

इमेज स्रोत, Mohar Singh Meena/BBC
मोती के वीडियो बनाने के लिए उनके पास कोई बड़ा स्टूडियो या बहुत महंगे संसाधन नहीं हैं.
मुकेश कहते हैं, "हमारे पास संसाधन बहुत नहीं हैं. हम घर पर ही आसपास में शूट करते हैं. उसके बाद भी हमारे हर एक वीडियो पर मिलियन में व्यूज़ हैं."
लेकिन मुकेश के मुताबिक़ मोती की सफलता की असली वजह कुछ और है.
मोती के वायरल होने के बाद उनकी ज़िंदगी में आए बदलाव के बारे में मुकेश कहते हैं, "बहुत बदलाव आया है चर्चाओं में आने के बाद. पहले मोती का कोई दोस्त नहीं था और अब दूर-दूर से लोग मिलने आते हैं, सेल्फी लेते हैं और अब उनकी पूरी ज़िंदगी बदल गई है."
चारिया गांव में मोती के घर के बाहर अब अक्सर लोगों का आना-जाना रहता है.
कभी कोई उनके वीडियो देख कर यहां पहुंचता है, कभी कोई अपने बच्चे को उनसे मिलाने लाता है और कभी कोई उनके साथ एक तस्वीर लेकर लौट जाना चाहता है.
मोती के लिए 'एलियन' शब्द अब मज़ाक़ नहीं
मोती के लिए 'एलियन' अब मज़ाक़ का शब्द नहीं है, यह उनका नाम है और यही उनकी पहचान है.
और शायद उनकी कहानी का सबसे भावुक हिस्सा भी यही है कि जिस चीज़ के लिए एक बच्चे को कभी ताने सुनने पड़े थे. उसी को उसने अपनी ताक़त बना लिया.
चारिया गांव की रेतीली गलियों में अब जब कोई पूछता है कि 'एलियन स्टार' का घर कहां है? तो लोग घर तक छोड़ने साथ जाते हैं.
मोती ने अब एक नई पहचान बना ली है, लेकिन बच्चों के चेहरों को लेकर की जाने वाली टिप्पणियों का उन पर नकारात्मक असर भी पड़ सकता है.
हमने इस बारे में दिल्ली एम्स के मनोचिकित्सक डॉ. गणेश कुमार मीणा से बात की. उनका कहना है कि बुलिंग की वजह से बच्चों में एंग्जायटी जैसी मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं.
वो बताते हैं कि इसके कारण कई बार बच्चे लोगों से बातचीत कम कर देते हैं, उनके दोस्त कम हो जाते हैं और उन्हें सामाजिक तौर पर सहयोग भी कम मिलता है. ऐसी स्थिति में कई बच्चों को काउंसलिंग की ज़रूरत पड़ सकती है. अगर बच्चों में ऐसे लक्षण दिखाई दें, तो अभिभावकों को डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से ज़रूर सलाह लेनी चाहिए.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
BBC World Service के नए ऐप को डाउनलोड करें
BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट... सब एक जगह
कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.

























