कलकत्ता हाई कोर्ट ने पशुओं की क़ुर्बानी पर लगाई गई पाबंदियों को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज की
कलकत्ता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार की ईद से पहले पशुओं की कुर्बानी पर लगाई गई पाबंदियों को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज कर दी हैं.
कोर्ट ने 1950 के पशु वध कानून के तहत धार्मिक आधार पर छूट देने और भैंस, बैल जैसे पशुओं के वध की अनुमति देने की मांग ठुकरा दी.
हालांकि, कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह 27 या 28 मई को ईद के मद्देनजर किसी छूट की ज़रूरत है या नहीं, इस पर 24 घंटे के भीतर फैसला करे.
बार एंड बेंच के मुताबिक, अदालत ने यह फै़सला उन याचिकाओं पर सुनाया है, जिनमें बकरीद से पहले पश्चिम बंगाल सरकार के पश्चिम बंगाल एनिमल स्लॉटर कंट्रोल एक्ट के तहत जारी दिशा-निर्देशों को चुनौती दी गई थी.
13 मई को जारी सार्वजनिक सूचना में सरकार ने कहा था कि बैल, सांड, गाय, बछड़े और भैंसों का वध फिटनेस सर्टिफ़िकेट के बिना नहीं किया जा सकता.
याचिका में क्या था?
याचिका में टीएमसी विधायक अखरुज्ज़मा ने दलील दी कि 13 मई की अधिसूचना में राज्य सरकार ने कानून की धारा 12 के तहत छूट नहीं दी है, जिससे बकरीद के दौरान कुर्बानी की धार्मिक ज़िम्मेदारी कानूनी रूप से पूरी नहीं हो सकेगी.
अखरुज्ज़मा ने तर्क दिया कि ज़्यादातर मुसलमानों के लिए भैंस, बैल या सांड जैसे बड़े जानवरों की कुर्बानी ही धार्मिक ज़िम्मेदारी निभाने का आर्थिक रूप से व्यवहारिक तरीका है.
याचिका में कहा गया, “बकरीद से ठीक पहले बकरों और भेड़ों की क़ीमतें काफी बढ़ जाती हैं, जिससे वे केवल मालदार मुसलमानों के लिए ही एक विकल्प रह जाते हैं.”
अदालत ने क्या कहा?
गुरुवार के फैसले में अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही साफ़ कर चुका है कि ईद-उल-अज़हा (बकरीद) के त्योहार में गाय की कुर्बानी कोई ज़रूरी धार्मिक प्रथा नहीं है और यह इस्लाम के तहत धार्मिक आवश्यकता का हिस्सा नहीं है.
हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि राज्य सरकार याचिकाकर्ताओं के मांगी गई छूट पर कानून की धारा 12 के तहत फैसला ले सकती है.
पीठ ने आदेश दिया, “त्योहार 27 या 28 तारीख को होने की संभावना को देखते हुए, राज्य सरकार इस आदेश की सूचना मिलने के 24 घंटे के भीतर इस मामले में फ़ैसला ले.”