कर्नाटक अब उत्तर प्रदेश और हरियाणा के बाद देश का तीसरा राज्य बन गया है जिसने करीब 1 करोड़ मजदूरों के लिए न्यूनतम वेतन बढ़ाया है. ये मजदूर 83 अलग-अलग तरह के कामों से जुड़े हुए हैं.
कर्नाटक सरकार की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि अकुशल से लेकर अत्यधिक कुशल मज़दूरों के लिए ज़ोन 3 से जोन वन में न्यूनतम वेतन की दर 19,300 रुपये से लेकर 31,000 रुपये तक है.
कर्नाटक के श्रम मंत्री संतोष लाड ने बीबीसी हिन्दी से कहा, "हमने 16,500 रुपये की बेसिक सैलरी में हर साल 500 रुपये महंगाई भत्ता जोड़कर, अकुशल मजदूरों की न्यूनतम सैलरी को बढ़ाकर करीब 23,000 रुपये कर दिया है.’
उन्होंने कहा कि न्यूनतम मज़दूरी की पूरी गणना साल 1991 के रेप्टोकोस ब्रेट मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आधारित थी. इस फ़ैसले में इस बारे में खास दिशा-निर्देश तय किए गए थे कि मज़दूरी कैसे तय की जानी चाहिए.
संतोष लाड ने कहा ‘‘इसमें माता-पिता और दो छोटे बच्चों वाले परिवार के लिए ज़रूरी भोजन को ध्यान में रखा गया था, जिसमें औसत कैलोरी की खपत 2700 तय की गई थी, साथ ही 62-72 गज़ कपड़ा, प्रोटीन, सब्ज़ियाँ और फल भी शामिल थे. क़ीमतों की गणना तीन बाज़ारों में जाँच करने के बाद की जानी थी. इसके अलावा शिक्षा, सेहत और मकान किराये के लिए 20 प्रतिशत और जोड़ा गया था.’’
1991 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का कार्यान्वयन तब हुआ, जब ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस ने अधिसूचना जारी होने पर संशोधित वेतन के मुद्दे को कर्नाटक हाई कोर्ट में उठाया था.
हाई कोर्ट ने न्यूनतम वेतन की गणना के आधार के रूप में विशेष रूप से 'रेप्टाकोस ब्रेट केस' के फ़ॉर्मूले को अपनाने को कहा था.
पिछले महीने उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़े पैमाने पर हुए विरोध-प्रदर्शनों के बाद कुशल मज़दूरों के लिए न्यूनतम वेतन 16,868 रुपये, अर्द्धकुशल के लिए 15,059 रुपये और अकुशल के लिए 13,690 रुपये कर दी थी.
दूसरी ओर हरियाणा ने अत्यधिक कुशल मज़दूरों के लिए मज़दूरी 19,425 रुपये, कुशल के लिए 18,500 रुपये, अर्द्धकुशल के लिए 16,780 रुपये और अकुशल के लिए 15,290 रुपये कर दी थी.