लाइव, हूती के हमलों में यमन की सेना के कम से कम 30 जवानों की मौत

यह हाल के वर्षों में दोनों पक्षों के बीच लड़ाई के सबसे घातक हमलों में से एक है.

सारांश

लाइव कवरेज

चंदन कुमार जजवाड़े

  1. हूती के हमलों में यमन की सेना के कम से कम 30 जवानों की मौत, डेविड ग्रीटन

    यमन लड़ाके

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    इमेज कैप्शन, यमन के रक्षा मंत्रालय ने इन हमलों को "विश्वासघाती" बताया और कहा कि इस "आक्रामक कार्रवाई" का जवाब उचित समय और स्थान पर दिया जाएगा (सांकेतिक तस्वीर)

    सेंट्रल यमन में हूती विद्रोहियों की ओर से सैन्य शिविरों पर किए गए हमलों में यमन की सरकारी सेना के कम से कम 30 जवानों के मारे जाने की ख़बर है.

    यह हाल के वर्षों में दोनों पक्षों के बीच हुई लड़ाई के सबसे घातक हमलों में से एक है.

    यमन के रक्षा मंत्रालय ने बताया, “मारिब और हदरामौत प्रांतों में कई सैन्य शिविरों पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया गया. इन हमलों में कई सैनिकों की मौत हुई और कई घायल हुए.”

    हालांकि, मंत्रालय ने मृतकों की सटीक संख्या नहीं बताई.

    रक्षा मंत्रालय ने इन हमलों को "विश्वासघाती" बताया और कहा कि इस "आक्रामक कार्रवाई" का जवाब उचित समय और स्थान पर दिया जाएगा.

    उत्तर-पश्चिमी यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण रखने वाले और ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने दावा किया कि उन्होंने उन "बड़े सऊदी सैन्य जमावड़ों" को निशाना बनाया, जो कथित तौर पर सैन्य अभियान की तैयारी कर रहे थे.

    यमन के गृहयुद्ध के दौरान सऊदी अरब के नेतृत्व वाला गठबंधन सरकारी सेना का समर्थन करता रहा है.

    एक अलग हमले में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता ने कहा कि सऊदी अरब के नजरान सीमा क्षेत्र में 11 नागरिक घायल हुए हैं. उनके मुताबिक़, यह हमला हूती विद्रोहियों ने किया.

    गठबंधन की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा गया कि घायलों में सात सऊदी नागरिक शामिल हैं. इनमें एक महिला और चार साल का एक बच्चा भी है. अन्य चार घायल नागरिक यमन, पाकिस्तान और मिस्र के रहने वाले हैं.

    यमन के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक़, मध्य यमन में हूती विद्रोहियों के हमले गुरुवार को स्थानीय समयानुसार सुबह 10:40 बजे हुए.

  2. कांग्रेस के समर्थन से चल रही झारखंड सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे स्टूडेंट्स से राहुल ने की बात

    राहुल गांधी

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    इमेज कैप्शन, राहुल गांधी दिल्ली में स्टूडेंट्स के प्रदर्शन और उनकी मांगों पर काफ़ी मुखर रहे (फ़ाइल फ़ोटो)

    झारखंड की राजधानी रांची में जेएसएससी और जेपीएससी के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे छात्रों से कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने फ़ोन पर बात की.

    प्रदर्शन कर रहे स्डूडेंट लीडर पीयूष कुमार ने कहा, "परीक्षा रद्द करने, जांच और सुधार को लेकर जो हमारी मांगें हैं, हमने वह बताई हैं. राहुल गांधी ने कहा कि हम आपकी मांगों के साथ खड़े हैं. हम सरकार से इस संबंध में बात करेंगे कि आपकी मांगे मान ली जाएं."

    81 सदस्यों की झारखंड विधानसभा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पार्टी के पास 34 विधायक हैं और वह कांग्रेस के 16 विधायकों के समर्थन के साथ चल रही है.

    इसके साथ ही राज्य में आरजेडी के चार विधायकों का समर्थन भी जेएमएम के साथ है. ऐसे में राहुल गांधी का प्रदर्शकारियों से बात करना और उन्हें आश्वासन देना राजनीतिक तौर पर भी काफ़ी अहम है.

    इस बीच रांची में जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थियों के आंदोलन के बीच छात्रों ने राज्य सरकार के साथ बातचीत के लिए अपने प्रतिनिधिमंडल का गठन कर लिया है.

    हालाँकि पीयूष कुमार ने कहा कि उन्हें इस बारे में आधिकारिक तौर पर कोई जानकारी नहीं दी गई है.

    इससे पहले दो जुलाई को झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन (जेपीएससी) 14वीं की प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम आए.

    कुल 2,204 अभ्यर्थियों ने मेंस यानी मुख्य परीक्षा के लिए क्वालीफाई किया. मुख्य परीक्षा की तारीख़ 18 से 20 जुलाई तय की गई.

    रिज़ल्ट आते ही सवालों का सिलसिला शुरू हो गया. कैटेगरी-वाइज़ कट ऑफ़ जारी नहीं हुई. इसी बीच एक अभ्यर्थी की कथित ऑप्टिकल मार्क रिकग्निशन (ओएमआर) शीट सोशल मीडिया पर वायरल हुई.

    कथित तौर पर इसमें उसने सिर्फ़ 48 सवाल भरे थे, फिर भी उसका चयन मुख्य परीक्षा के लिए हो गया था.

    साथ ही जो परिणाम जारी किए गए, उस पर जेपीएससी के अध्यक्ष, सचिव या सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं थे. जो कि नियमानुसार होने चाहिए थे.

    स्टूडेंट्स का आरोप है कि जेपीएससी के पेपर लीक किए गए, सीटें बेची गई हैं और उन्हें सीआईडी जांच पर भरोसा नहीं है, मामले की जांच ईडी या सीबीआई को सौंपी जाए.

    इन्हीं मांगों को लेकर 25 जुलाई से रांची में छात्रों का प्रदर्शन चल रहा है.

  3. परिसीमन विधेयक पर डीएमके क्या मोदी सरकार का साथ देगी?

    तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन

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    इमेज कैप्शन, तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन डिलीमिटेशन के मुखर विरोधी रहे हैं (फ़ाइल फ़ोटो)

    परिसीमन विधेयक को समर्थन देने के लिए डीएमके ने केंद्र सरकार के सामने अपनी शर्त रखी है. ये शर्तें ऐसे समय में सामने आई हैं, जब केंद्र सरकार विधेयक के लिए जरूरी समर्थन जुटाने के मकसद से विपक्षी दलों से संपर्क बढ़ा रही है.

    हालाँकि अंग्रेज़ी अख़बार 'द हिन्दू' के मुताबिक़ डीएमके के एक वरिष्ठ नेता ने कहा है कि केंद्र सरकार ने अब तक उनसे संपर्क नहीं किया है.

    दरअसल केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार नए परिसीमन की प्रक्रिया लागू करने के लिए संविधान संशोधन विधेयक लाने की संभावना पर विचार कर रही है.

    ऐसे में डीएमके ने संकेत दिए हैं कि अगर सरकार अप्रैल में लोकसभा में पेश किए गए विधेयक में तीन अहम बदलाव करती है, तो पार्टी इस विधेयक का समर्थन करने पर विचार कर सकती है.

    अप्रैल में लाया गया यह विधेयक पारित नहीं हो सका था. दरअसल दक्षिण भारतीय राज्यों को आशंका है कि मौजूदा स्वरूप में परिसीमन लागू हो जाता है तो केंद्र सरकार के गठन में उसकी अहमियत कम हो जाएगी.

    फ़िलहाल साल 1971 की जनगणना के आधार पर लोकसभा में सीटों की संख्या निर्धारित है और यह सीमा साल 2027 की जनगणना के बाद समाप्त हो जाएगी.

    डीएमके की मांग है कि लोकसभा में सीटों की यह संख्या अगले 25 साल तक न बदली जाए.

    द हिन्दू के मुताबिक़ साथ ही डीएमके चाहती है कि संविधान में संशोधन करके सभी राज्यों के लिए लोकसभा सीटों में 50% की एकसमान बढ़ोतरी की जाए.

    इससे पहले गृह मंत्री अमित शाह ने अप्रैल में संसद में परिसीमन से जुड़ा बिल पेश करते समय मौखिक रूप से ऐसा करने का वादा किया था.

    द हिन्दू ने लिखा है कि ‘डीएमके सूत्रों के मुताबिक, पार्टी चाहती है कि इस बिल में हर राज्य के लिए सीटों की संख्या की एक सूची भी शामिल हो’.

    डीएमके का कहना है कि वह बिल का स्वरूप और उसमें शामिल बातों की जानकारी मिलने के बाद ही कोई अंतिम फैसला लेगी.

  4. नमस्कार!

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