हैकरों ने करोड़ों अमरीकी कर्मचारियों का डाटा 'चुराया'

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अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि सरकारी डाटाबेस में सेंध लगाने वाले हैकरों ने 2.15 करोड़ लोगों का डाटा चुराया है.

कार्मिक मामलों के कार्यालय का कहना है कि प्रभावित लोगों में नौकरियों का आवेदन करने वाले, संघीय ठेकेदार और उनके सहभागी शामिल हैं.

ये संख्या पहले प्रभावित माने जा रहे लोगों से पाँच गुना ज़्यादा है.

इस साल अप्रैल में सामने आई इस हैकिंग का आरोप चीन पर लगाया गया था.

चीन ने सार्वजनिक तौर पर इसमें शामिल होने का खंडन किया है.

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आलोचना

इस हैकिंग के बाद अमरीकी साइबर सुरक्षा व्यवस्था की तीखी आलोचना हो रही है.

इस मुद्दे पर कांग्रेस में भी कई बार सुनवाई हो चुकी है.

इससे पहले अधिकारियों ने पिछले महीने कहा था क़रीब 42 लाख मौजूदा और पूर्व कर्मचारियों का डाटा चोरी हुआ है.

गुरुवार को कार्मिक कार्यालय की ओर से कहा गया कि हैकिंग की जाँच में सामने आया है कि अतिरिक्त जानकारियां भी चुराई गई हैं. इनमें 2.15 करोड़ लोगों के सोशल सिक्यूरिटी नंबर भी शामिल हैं.

चोरी किए गए डाटा में स्वास्थ्य संबंधी जानकारियां, आपराधिक रिकॉर्ड और सरकारी कर्मचारियों और उनके रिश्तेदारों के नाम और पते शामिल हैं.

प्रभावित लोगों में लगभग दो करोड़ वो लोग भी हैं जिनकी पृष्ठभूमियों की जाँच की गई थी.

कार्मिक प्रबंधन कार्यालय अमरीकी सरकार के मानव संसाधन विभाग के तौर पर काम करता है और सभी संघीय कर्मचारियों के रिकॉर्ड रखता है.

अमरीकी सेंट्रल कमांड ट्विटर

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इमेज कैप्शन, चरमपंथी संगठनों का समर्थन करने वाले हैकरों ने अमरीकी सेंट्रल कमांड का ट्विटर अकाउंट भी हैक कर लिया था.

चीन पर शक़

कार्यालय का कहना है कि अभी उसे चोरी की गई जानकारियों का ग़लत इस्तेमाल किए जाने की कोई जानकारी नहीं है.

कार्यालय का कहना है कि वो सभी लोग जिनकी पृष्ठभूमि की साल 2000 या उसके बाद जाँच की गई है वो सभी संभवत इस हैकिंग से प्रभावित हुए हैं.

पिछले महीने अमरीकी ख़ुफ़िया प्रमुख जेम्स क्लेपर ने कहा था कि शक़ चीन पर है.

उनकी टिप्पणी दोनों देशों के बीच साइबर सुरक्षा पर तीन दिन चली उच्च स्तरीय वार्ता के बाद आई थी.

चीन ने अमरीकी आरोपों को ग़ैरज़िम्मेदार और अवैज्ञानिक कहा है.

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