मरने के बाद भी शक्तिमान सियासत की वजह?

शक्तिमान की प्रतिमा
    • Author, राजेश डोबरियाल
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए देहरादून से
  • प्रकाशित

चार महीने पहले उत्तराखंड की सियासत में राजनीतिक भूचाल लाने वाला पुलिस का घोड़ा शक्तिमान मरने के बाद भी सियासत की वजह बना हुआ है.

राजधानी देहरादून में विधानसभा के नज़दीक रिस्पना पुल के पास तीन दिन पहले लगाई गई शक्तिमान की प्रतिमा को अनावरण से ठीक पहले मंगलवार को उजाला होने से पहले हटा लिया गया.

इसकी वजह सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा बताया जा रहा है. हालांकि कोई भी अधिकारी इस बारे में बात करने को तैयार नहीं है.

देहरादून

कलैक्टर रविनाथ रमन ने इस मामले के बारे में किसी भी तरह की जानकारी होने से साफ़ इनकार कर दिया. उन्होंने कहा ये पुलिस का मामला है और वो इस बारे में एसएसपी से बात करके ही कुछ बता सकते हैं. लेकिन पुलिस के प्रवक्ता ने भी कहा कि इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है.

इसी साल 14 मार्च को विधानसभा के सामने भारतीय जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान उत्तराखंड पुलिस के घोड़े शक्तिमान का पैर टूट गया था.

भाजपा विधायक गणेश जोशी पर घोड़े की टांग तोड़ने का आरोप लगा. 18 मार्च को इस आरोप में जोशी को गिरफ्तार कर लिया गया और उन्हें दो दिन जेल में बिताने पड़े.

शक्तिमान

शक्तिमान के पैर का ऑपरेशन कर उसे कृत्रिम टांग लगाई गई. अमरीका से भी शक्तिमान के लिए कृत्रिम पैर मंगाया गया लेकिन 20 अप्रैल को उसकी मौत हो गई थी.

इस मामले पर तब जमकर सियासत भी हुई थी और भाजपा, कॉंग्रेस दोनों ने ही एक-दूसरे पर शक्तिमान की हत्या करने का आरोप लगाया था.

मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस मामले पर जनभावनाओं को भुनाते हुए रिस्पना पुल के पास तिराहे का नाम शक्तिमान चौक करने का ऐलान कर दिया था.

इसी निर्णय के तहत उत्तरांचल कॉम्प्लेक्स की ज़मीन में रिस्पना पुल पर एक चबूतरे का निर्माण कर बीते शनिवार को उस पर शक्तिमान की प्रतिमा रख दी गई थी.

मुख्यमंत्री हरीश रावत को पुलिस लाइंस में लगाई गई शक्तिमान की प्रतिमा के साथ ही सोमवार रिस्पना पुल वाली प्रतिमा का भी अनावरण करना था.

लेकिन इस बात के आम होते ही सोशल मीडिया पर लोग शक्तिमान की प्रतिमा लगाए जाने का विरोध करने लगे.

ज़्यादातर लोगों की नाराज़गी इस बात पर थी कि केदारनाथ आपदा में मारे गए लोगों के लिए तो सरकार ने कोई स्मारक नहीं बनाया, लेकिन घोड़े को लेकर उनकी भावनाएं उमड़ रही हैं.

इसके बाद पुलिस लाइंस में मुख्यमंत्री ने शक्तिमान की प्रतिमा का अनावरण नहीं किया.

उन्होंने कहा, ''इस बारे में निर्णय हम अगली सरकार पर छोड़ेंगे क्योंकि मैं नहीं चाहता कि आगे इस मामले पर कोई पॉलिटिक्स दिखाई दे.''

हरीश रावत

उत्तरांचल कॉंप्लेक्स में रिस्पना पुल पर जहां शक्तिमान की प्रतिमा लगाई जा रही थी, उसके ठीक पीछे रावत इंपोरियम है.

वहां काम करने वाले शूरवीर सिंह मेहरा बताते हैं कि सोमवार की रात जब वह इंपोरियम बंद कर घर लौटे रहे थे तो शक्तिमान की प्रतिमा मौजूद थी, लेकिन सुबह आए तो हट चुकी थी.

देहरादून के एसएसपी सदानंद दाते का कहना है कि शक्तिमान की प्रतिमा के बारे में आगे विचार किया जाएगा.

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