नेताओं और अफसरों में झारखंड में 'तनाव'

दिनेश उरांव, स्पीकर, झारखंड विधानसभा
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    • Author, नीरज सिन्हा
    • पदनाम, रांची से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
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झारखंड में अफ़सरशाही के कामकाज और रवैये पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं, लेकिन हाल में एक के बाद एक कई मामले सुर्खियों में आए हैं.

नौकरशाही के साथ रस्साक़शी में सरकार की साख पर कोई आंच नहीं आए, इसके लिए कार्रवाई और कोशिशें अचानक तेज़ कर दी गई हैं.

नौकरशाहों के इसी रवैये से आहत विधानसभा अध्यक्ष दिनेश उरांव ने पिछले हफ्ते सचेतकों के सम्मेलन में पद छोड़ने की पेशकश कर दी थी. विधानसभा अध्यक्ष, विधायक फंड का आवंटन काफ़ी समय से नहीं होने से नाराज थे.

विपक्ष ने इस मुद्दे को हाथो-हाथ लपका और कहा कि नौकरशाही पर सरकार का नियंत्रण नहीं है.

विपक्ष ने इस मुद्दे पर विधानसभा के शीतकालीन सत्र में भी सरकार पर हमले तेज़ कर दिए हैं.

विधानसभा अध्यक्ष ने सार्वजनिक तौर पर कहा था, "विधायिका की गरिमा नहीं बचेगी तो पद पर मेरे बने रहने का कोई औचित्य नहीं है."

रघुवर दास, मुख्यमंत्री, झारखंड
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दरअसल कई विधायकों ने अध्यक्ष से कहा था कि विधायक फंड के जारी नहीं होने से जनता के सवालों का सामना करना कठिन हो रहा है.

विधानसभा अध्यक्ष के तेवर में अब नरमी आई है. कई नियमों में ढ़ील देते हुए विधायक फंड जारी किया जाने लगा है.

फाइलें खुलीं तो यह भी पता चला कि बड़ी रकम अब तक बैंकों में ही पड़ी है.

इस पर दिनेश उरांव दो टूक कहते हैं, "सरकार को अफसरों पर नियंत्रण करना होगा. विधायिका का सम्मान गिरता जाए, तो राज्य की छवि क्या बनेगी?".

उन्होंने कामकाज के तौर तरीके पर अधिकारियों से बात भी की है और आगाह किया कि सिस्टम में सुधार ज़रूरी है.

रांची हाई कोर्ट

इस मामले में सत्तारूढ़ दल के मुख्य सचेतक राधाकृष्ण किशोर कहते हैं, "स्पीकर आहत ज़रूर हैं, लेकिन मुख्यमंत्री ख़ुद नैकरशाही पर स़ख्त नज़र रखे हुए हैं."

इसी साल छह दिसंबर को मुख्यमंत्री रघुवर दास ने धनबाद में आयोजित बजट पूर्व संवाद में वहां के उपायुक्त को बैठक से बाहर कर दिया था.

उपायुक्त बैठक के दौरान फोन पर किसी से बात कर रहे थे. उसी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने एक एडीएम को निलंबित कर दिया था. वह अधिकारी मुख्यमंत्री के भाषण के दौरान मंच पर चढ़ गए थे.

इसके बाद मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक तौर पर कहा कि अफसर शासक नहीं सेवक बनकर काम करें. हाल ही में खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने विभागीय सचिव को पत्र लिखकर बताया था कि जो अफ़सर कामकाज को लेकर ग़लत जानकारी देते हैं, उन पर कार्रवाई करें.

दरअसल राज्य में खाद्य सुरक्षा कानून को लेकर राशन कार्ड के निर्माण में कथित गड़बड़ी का विरोध हो रहा है. इस बारे में मंत्री ने सचिव को पत्र लिखकर पूरी जानकारी मांगी है.

पिछले नौ दिसंबर को झारखंड हाइकोर्ट ने मौखिक टिप्पणी की थी कि जनहित के मुद्दों पर राज्य की अफ़सरशाही संवेदनहीन है. अफ़सरों को मानसिकता बदलनी होगी. उन्हें काम करना होगा. समझना होगा कि वे लोकसेवक हैं.

इन मामलों पर राज्य के मुख्य सचिव राजीव गौबा कहते हैं, "कामकाज को लेकर अफसरों की लापरवाही या मनमानी के जो भी मामले सामने आते हैं, उन पर तुरंत कार्रवाई की जाती है."

राजीव गौबा, मुख्य सचिव, झारखंड
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झारखंड राज्य प्रशासनिक सेवा संघ के अध्यक्ष दानियल कडुंलना का कहना है कि अधिकारियों को कर्तव्य और दायित्व के प्रति जवाबदेह रहना ही चाहिए.

धनबाद के मामले में उनका कहना है कि एडीएम मंच पर इसलिए चढ़ गए कि उन्हें किसी फाइल पर आला अधिकारी से दस्तख़त कराना था.

कांग्रेस के विधायक इरफ़ान अंसारी इन बातों से इत्तेफ़ाक नहीं रखते. वे कहते हैं, "स्पीकर ने जो भावना जाह़िर की है, सचमुच हालात वैसे ही हैं."

झारखंड मुक्ति मोर्चा के वरिष्ठ विधायक रवींद्र राय का आरोप है कि अफ़सर जब सरकार की नहीं सुनते, तो जनता और जनप्रतिनिधियों को भला क्या तरजीह देंगे.

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