जिंदगी की जंग हारी 'मनचलों से लड़ने वाली'

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जर्मनी की राजधानी बर्लिन में लोगों ने 23 साल की उस छात्रा को श्रद्धांजलि दी है, जिसने अपनी जान दो किशोर लड़कियों को छेड़खानी से बचाने के लिए दी.

लगभग 150 लोगों ने टुगसी अलबायर्क को याद किया. राष्ट्रपति योआखिम गाउक ने इस छात्रा को औरों के लिए आदर्श बताया है.

जर्मन माडिया के मुताबिक़ 15 नवंबर को इस छात्रा ने फ्रैंकफर्ट के पास ऑफनबाख में एक रेस्टोरेंट के शौचालय से लड़कियों के चिल्लाने की आवाज़ें सुनीं.

टुगसी ने देखा कि वहां कुछ लोग दो लड़कियों को परेशान कर रहे थे, उनसे छेड़छाड़ कर रहे थे.

टुगसी अलबायर्क ने इन किशोरियों का उत्पीड़न कर रहे पुरूषों का विरोध किया.

हमलावर हिरासत में

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बाद में इनमें से एक आदमी ने कार पार्किंग में टुगसी अलबायर्क के सिर पर पत्थर या फिर बल्ले से हमला कर दिया.

इस हमले के बाद वो अचेत हो गईं. डॉक्टरों ने उनके दिमाग को मृत घोषित कर दिया और कहा कि अब वो भी नहीं उठेंगी.

टुगसी अलबायर्क की 23वें जन्मदिन पर उनके माता पिता ने उन्हें जीवन रक्षक प्रणाली से हटाने का फैसला किया. शुक्रवार को जीवन रक्षक प्रणाली से हटाने के बाद इस छात्रा की मौत हो गई.

श्रद्धांजलि सभा का आयोजन करने वाली कैगला फरेट का कहना है, "इसकी जगह मैं या फिर मेरा परिवार कोई भी हो सकता था, क्योंकि इस तरह की घटना को अगर होते हुए कोई भी देखेगा तो उसमें हस्तक्षेप ज़रूर करेगा."

संदिग्ध हमलावर व्यक्ति पुलिस हिरासत में है.

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