प्रतीक यादव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर क्यों उठ रहे हैं सवाल, क्या कह रहे हैं विशेषज्ञ

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- Author, सैयद मोज़िज़ इमाम
- पदनाम, लखनऊ से बीबीसी हिन्दी के लिए
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 7 मिनट
मुलायम सिंह यादव के दूसरे पुत्र प्रतीक यादव का निधन बुधवार को हो गया था. उनका अंतिम संस्कार लखनऊ में गुरुवार को कर दिया गया.
उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक़ प्रतीक यादव की मौत खून के थक्के जमने के कारण हुई.
प्रतीक यादव का पोस्टमार्टम तीन डॉक्टरों के पैनल ने प्रोफ़ेसर डॉ. मौसमी सिंह की अगुआई में किया था.
रिपोर्ट में लिखा गया है, "कार्डियोरेस्पिरेटरी कोलैप्स ड्यू टू मैसिव पल्मोनरी थ्रोम्बोम्बोलिज़्म".
इसके मायने हैं कि फेफड़ों की मुख्य नस में खून का बड़ा थक्का जमने के कारण सांस और दिल की धड़कन अचानक रुक गई.
हालांकि, रिपोर्ट में बताया गया है कि मरने से पहले उनके शरीर पर छह चोटें भी थीं.
रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रतीक यादव के सीने, दाहिने हाथ के ऊपरी और निचले हिस्से में तीन जगह चोट लगी थी. वहीं, कोहनी और बाईं कलाई में भी चोट के निशान थे.
प्रतीक यादव के दिल और खून के थक्के को आगे जांच के लिए संरक्षित कर लिया गया है. शरीर के विसरा को भी आगे जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है.
जांच पर उठ रहे सवाल
प्रतीक यादव को बुधवार को लखनऊ के सिविल अस्पताल लाया गया था. सिविल अस्पताल ने कहा था कि प्रतीक यादव को 'मृत अवस्था' में लाया गया था.
सिविल अस्पताल के चीफ़ मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. देवेश चंद्र पांडेय ने बीबीसी हिंदी को बताया था, "प्रतीक यादव को बुधवार सुबह 5 बजकर 55 मिनट पर मृत अवस्था में लाया गया था. पुलिस को सूचना दे दी गई. उसके बाद पुलिस ने बॉडी का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. इसके बाद ही मौत के कारण का पता चल सकेगा."
प्रतीक यादव की मौत को कुछ लोग संदिग्ध मान रहे हैं. सोशल मीडिया पर प्रतीक की मौत को लेकर चर्चा जारी है.
प्रतीक यादव के पोस्टमार्टम के दौरान केजीएमयू के बाहर मौजूद समाजवादी पार्टी के लखनऊ मध्य से विधायक रविदास मेहरोत्रा के बयान से इस पहलू पर चर्चा और तेज हो गई.
रविदास मेहरोत्रा ने मीडिया से कहा, "मुझे नहीं मालूम कि वह परेशान थे, लेकिन उनकी मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है."
उन्होंने कहा, "सामान्य परिस्थितियों में पोस्टमार्टम नहीं होता है, इसलिए इसकी जांच होनी चाहिए."

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पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उनके सीने, दाहिनी बांह के नीचे, दाहिनी कलाई, दाहिनी कोहनी के जोड़, कोहनी के ऊपर और बाईं कलाई पर चोटों का ज़िक्र किया गया है.
रिपोर्ट के मुताबिक, "तीन चोटें लगभग पांच से सात दिन पुरानी हैं. जबकि अन्य तीन चोटें एक दिन पुरानी है."
रविदास मेहरोत्रा ने बीबीसी हिंदी से गुरुवार को कहा, "बहुत सारी वजहों से संदेह पैदा हो रहा है, इसलिए इसकी जांच होनी चाहिए कि प्रतीक यादव को चोट कैसे लगी."
उन्होंने कहा " मैं यह नहीं कह रहा हूँ कि हत्या हुई है लेकिन पोस्टमार्टम के बाद मोर्चरी में शव को चार घंटे क्यों रखा गया था. इस बात की भी जांच होनी चाहिए कि प्रतीक को अस्पताल लाने में देरी हुई है या नहीं क्योंकि वो मृत अवस्था में सिविल अस्पताल लाए गए थे."
हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद पुलिस की तरफ़ से कोई अधिकारिक बयान नहीं आया है.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर कैसी चर्चा
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लखनऊ के वरिष्ठ डॉक्टर दायम रज़ा ख़ान ने बीबीसी हिंदी से कहा कि आगे की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी.
रिपोर्ट पर राय देते हुए डॉ. रज़ा ने कहा, "पोस्टमार्टम के चिकित्सीय मूल्यांकन से पता चला है कि प्रतीक के शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर कई गंभीर चोटें और खरोंचें थीं."
उन्होंने कहा, "सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष मस्तिष्क के दोनों टेम्पोरो-पैरिएटल क्षेत्रों में सब-अराक्नोइड हैमरेज की उपस्थिति है, जो सिर में गंभीर चोट की ओर इशारा करती है. वहीं, चोटों की प्रकृति, संख्या और ड्रिस्टीब्यूशन हिंसक शारीरिक हमले के अनुरूप हैं."
उनका कहना है, "इस मामले को ये तथ्य बेहद महत्वपूर्ण बनाते हैं. इसलिए निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच ज़रूरी है."
इस मसले पर फोरेंसिक साइंस में शोध कर रहीं मीनाक्षी शुक्ला का कहना है, "मीनाक्षी शुक्ला के मुताबिक़, ''पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर प्रारंभिक तौर पर फोरेंसिक संदेह बनता है.''
शुक्ला ने बीबीसी हिंदी से कहा, "उपलब्ध पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक़ मौत के कारण को लेकर पूरी तरह वैज्ञानिक निष्कर्ष तत्काल निकालना सही नहीं लगता. क्योंकि रिपोर्ट में अंतिम कारण की पुष्टि के लिए आगे की रासायनिक और वैज्ञानिक जांच जरूरी मानी गई है."
उनका दावा है कि 'फोरेंसिक साइंस के मुताबिक़ केवल शुरुआती पोस्टमार्टम निष्कर्ष किसी मौत की वास्तविक प्रकृति तय करने के लिए पर्याप्त नहीं होते.'

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पोस्ट मार्टम रिपोर्ट पर मीनाक्षी शुक्ला कहती हैं, "इसका अर्थ है कि डॉक्टरों ने अंतिम निष्कर्ष रोक रखा है और आगे की वैज्ञानिक रिपोर्ट की प्रतीक्षा की जा रही है. यह स्थिति खुद दिखाती है कि मृत्यु का कारण तत्काल स्पष्ट नहीं था."
मीनाक्षी शुक्ला ने कहा कि टॉक्सिकोलॉजी, अर्थात शरीर में विष, दवा, शराब या जहरीले रसायनों की जांच की रिपोर्ट लंबित है. इसलिए यह संभावना बनी रहती है कि मृत्यु किसी विषैले पदार्थ, ड्रग, दवा के रिएक्शन या रासायनिक कारण से हुई हो सकती है.
फोरेंसिक विशेषज्ञों की राय है कि रिपोर्ट के आधार पर मृत्यु को तुरंत प्राकृतिक, आकस्मिक, आत्मघाती या हत्या की श्रेणी में रखना वैज्ञानिक दृष्टि से जल्दबाज़ी होगी.
विसरा, अर्थात फोरेंसिक विज्ञान में सुरक्षित रखे गए शरीर के नमूने, सामान्यतः तब अहम माने जाते हैं जब मृत्यु संदिग्ध परिस्थितियों में हुई हो या विष संबंधी जांच आवश्यक हो.
मीनाक्षी शुक्ला ने कहा कि रिपोर्ट में रासायनिक, जैविक और विष संबंधी परीक्षण किए जाते हैं.
उन्होंने कहा, ''जब तक एफएसएल रिपोर्ट पोस्टमार्टम निष्कर्षों की पुष्टि नहीं करती, तब तक मृत्यु के वास्तविक कारण को अंतिम रूप से प्रमाणित नहीं माना जा सकता."
पहले से चल रहा था इलाज

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प्रतीक यादव का इलाज मेदांता अस्पताल में चल रहा था.
'टाइम्स ऑफ इंडिया' की रिपोर्ट के मुताबिक, मेदांता अस्पताल की डॉ. रूचिता शर्मा प्रतीक यादव का इलाज कर रही थीं.
डॉ. शर्मा के मुताबिक़, फेफड़ों में रुकावट के कारण उनके दिल की कार्यक्षमता प्रभावित हुई थी.
उन्होंने कहा, "कुछ सप्ताह पहले वह सांस लेने में तकलीफ़ की शिकायत लेकर हमारे पास आए थे. वह खून पतला करने वाली दवाइयां ले रहे थे."
प्रतीक यादव की मृत्यु के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा, "कुछ दिन पहले मेरी मुलाकात हुई थी. तब भी मैंने यही कहा था कि अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखो और अपने कारोबार को आगे बढ़ाओ. कभी-कभी वित्तीय कारोबार में होने वाला नुकसान इंसान को बहुत तोड़ देता है. वह अब हमारे बीच नहीं हैं. परिवार जो कहेगा, हम वही करेंगे."
प्रतीक यादव भारतीय जनता पार्टी की नेता अपर्णा यादव के पति थे. वह उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के बेटे थे. साधना गुप्ता का निधन वर्ष 2022 में हुआ.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित


































