'यहीं मकान दो या दूसरी जगह रहने का इंतज़ाम करो'; गुजरात हाईकोर्ट का सख़्त निर्देश, जानिए क्या है पूरा मामला

कच्चे मकान तोड़े जाने के बाद बेघर हुए नासिरनगर के लोगों को हाईकोर्ट के आदेश से उम्मीद बंधी है

इमेज स्रोत, Rupesh Sonwane

इमेज कैप्शन, कच्चे मकान तोड़े जाने के बाद बेघर हुए नासिरनगर के लोगों को हाईकोर्ट के आदेश से उम्मीद बंधी है
    • Author, अजित गढ़वी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 6 मिनट

गुजरात में सूरत ज़िले के नासिरनगर इलाके में मई के आख़िर में अचानक 100 से ज़्यादा कच्चे मकान तोड़ दिए गए थे.

इसके बाद इस मामले को लेकर गुजरात हाईकोर्ट में क़ानूनी लड़ाई शुरू हुई. दो जुलाई को हाईकोर्ट ने सूरत म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (एसएमसी) को कड़ी फटकार लगाई.

अदालत ने कहा कि "ग़ैरक़ानूनी तरीके से मकान तोड़े जाने के कारण बेघर हुए परिवारों के रहने की व्यवस्था सुनिश्चित करना सूरत म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन की ज़िम्मेदारी है."

कोर्ट ने यह भी कहा कि जिन लोगों के घर तोड़े गए हैं, उनके रहने की व्यवस्था या तो उसी जगह की जाए या फिर किसी दूसरी जगह.

बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

हाईकोर्ट के इस निर्देश के बाद नासिरनगर के विस्थापित लोगों में दोबारा घर मिलने की उम्मीद जगी है. 30 मई को जब उनके घर तोड़े गए थे, तब भीषण गर्मी पड़ रही थी.

अब सूरत में पिछले पांच दिनों से लगातार बारिश हो रही है, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं. नासिरनगर में एक-दो परिवारों ने तंबू लगाकर अपना सामान उसमें रखा हुआ है और वहीं रह रहे हैं.

वहीं, ज़्यादातर परिवारों ने अलग-अलग इलाकों में किराए के मकान ले लिए हैं या फिर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के सामुदायिक हॉल में शरण ली है.

'गैरकानूनी तरीके से घर तोड़े जाने के बाद हम बेघर हो गए'

मोहसिन पठान

इमेज स्रोत, Rupesh Sonwane

इमेज कैप्शन, घर टूटने से प्रभावित मोहसिन पठान का कहना है कि डिमोलिशन के बाद उनकी रोज़ी-रोटी पर असर पड़ा है
छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
दिनभर: पूरा दिन,पूरी ख़बर (Dinbhar)

वो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख़बरें जो दिनभर सुर्खियां बनीं.

एपिसोड

समाप्त

नासिरनगर के निवासी मोहम्मद इरफ़ान ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "मैं पिछले 45 वर्षों से नासिरनगर में रह रहा हूं. ग़ैर क़ानूनी तरीक़े से घर तोड़े जाने के बाद हम बेघर हो गए. कभी हमें खाना मिल जाता है और कभी नहीं मिलता. हमारे बच्चों की पढ़ाई भी रुक गई है. मेरी दुकान भी चली गई और मैं बेरोजगार हो गया हूं."

उन्होंने कहा, "अब कोर्ट का यह निर्देश आया है, जिससे हमें कुछ राहत मिली है. लेकिन अभी स्थायी समाधान नहीं मिला है. हमारी उम्मीद है कि जहां हमारा घर था, उसी जगह हमें फिर से घर मिले."

सहीम अहमद शेख़ का घर भी नासिरनगर में हुई तोड़-फोड़ की कार्रवाई में टूट गया था. उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के ताज़ा निर्देश से फ़िलहाल उन्हें संतोष है, लेकिन अब उन्हें बच्चों की पढ़ाई की चिंता सता रही है.

उन्होंने कहा, "हमारे परिवार में कुल नौ लोग थे. अब सभी अलग-अलग जगहों पर रह रहे हैं. इस समय हमने अपना घर और बहुत कुछ खो दिया है. जहां हमें रखा गया है, वहां बच्चों की पढ़ाई की भी ठीक व्यवस्था नहीं है. काम-धंधा भी नहीं हो पा रहा है. हमें भारी नुक़सान उठाना पड़ा है."

वहीं, शबनम बानू ने कहा, "हमने 27 दिन खुले आसमान के नीचे गुज़ारे. हमारे सिर पर कोई छत नहीं थी. अदालत का आदेश आने के बाद हमें इस हॉल में रहने की जगह दी गई. लेकिन यहां भी कोई ख़ास सुविधा नहीं है."

उन्होंने बताया, "कुछ सामाजिक संस्थाओं के लोग आते हैं और हमें खाना देकर जाते हैं. जब ऐसा नहीं होता, तो हम अपने पैसों से थोड़ा-बहुत खाना ख़रीदकर लाते हैं."

शबनम बानू ने कहा, "बच्चों को स्कूल भेजने में भी दिक्क़त होती है. हमारे बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं. हमारी बस यही इच्छा है कि जितनी जल्दी हो सके, हमें उसी जगह दोबारा घर बनाकर दिए जाएं."

'कोर्ट ने निर्देश तो दिया, लेकिन घर कब मिलेगा, यह नहीं पता'

 सहीम अहमद शेख

इमेज स्रोत, Rupesh Sonwane

इमेज कैप्शन, नासिरनगर में हुई तोड़फोड़ की कार्रवाई में सहीम अहमद शेख़ का घर भी टूट गया था

नासिर नगर के निवासी मोहसिन पठान ने कहा, "फ़िलहाल हमारे रहने की व्यवस्था एक सामुदायिक हॉल में की गई है, लेकिन यहां खाने-पीने या दूसरी ज़रूरी सुविधाओं का इंतज़ाम नहीं है. हमारे बच्चे स्कूल भी नहीं जा पा रहे हैं. कोर्ट ने यह निर्देश तो दिया है, लेकिन हमें घर कब मिलेगा, यह नहीं पता. हम पहले से ही ग़रीब थे और अब हमारी हालत और ख़राब हो गई है."

2 जुलाई को सूरत के तत्कालीन पुलिस आयुक्त अनुपम सिंह गहलोत की ओर से पेश हुए एडवोकेट जनरल कमल त्रिवेदी ने अदालत में हलफ़नामा दाख़िल किया.

इसके अलावा, टोरेंट पावर के एक अधिकारी की ओर से भी एक हलफ़नामा पेश किया गया. यह गुजरात में स्थित भारत की सबसे बड़ी निजी क्षेत्र की एकीकृत बिजली कंपनियों में से एक है.

कथित रूप से सूरत नगर आयुक्त की जानकारी के बिना ही इन मकानों को तोड़ दिया गया, जिसको लेकर विवाद खड़ा हो गया था. इसके विरोध में प्रभावित निवासियों ने तोड़फोड़ वाली जगह पर धरना भी दिया.

इसके बाद एक उप नगर आयुक्त के नेतृत्व में जांच समिति बनाई गई. 30 जून को समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंपी. रिपोर्ट आने के तुरंत बाद सूरत नगर निगम के पांच अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया.

नगर निगम आयुक्त के हलफनामे को रिकॉर्ड पर लेते हुए जस्टिस निखिल करियल ने मौखिक आदेश में कहा, "प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट है कि यह तोड़फोड़ अवैध थी. इसलिए नगर निगम की ज़िम्मेदारी है कि इस अवैध कार्रवाई से विस्थापित हुए लोगों के लिए या तो उसी स्थान पर आवास उपलब्ध कराया जाए या फिर उन्हें किसी अन्य जगह बसाया जाए."

अदालत ने यह भी कहा कि अगली सुनवाई से पहले नगर आयुक्त को इस संबंध में एक प्रस्ताव अदालत के समक्ष प्रस्तुत करना होगा.

9 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

 नासिरनगर

इमेज स्रोत, Rupesh Sonwane

इमेज कैप्शन, सूरत के नासिरनगर क्षेत्र में कथित तौर पर अवैध निर्माण बताए गए मकानों पर बुलडोज़र चलाया गया था

30 मई को सूरत पुलिस और नगर निगम के अधिकारियों की मौजूदगी में नासिरनगर में 100 से अधिक कच्चे मकान तोड़ दिए गए थे. इस घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया था.

हैरानी की बात यह थी कि नगर निगम ने दावा किया कि उसने इस तोड़फोड़ के लिए कोई आदेश नहीं दिया था. निगम का कहना था कि उसके अधिकारी वहां केवल एक सड़क के लिए सीमांकन करने गए थे.

सूरत पुलिस ने भी इस कार्रवाई से ख़ुद को अलग बताने की कोशिश की थी. हालांकि, जिन लोगों के मकान टूटे थे, उनमें से 26 लोगों ने गुजरात हाईकोर्ट में याचिका दायर की. इसी याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई.

कोर्ट ने यह टिप्पणी भी की कि अगर यह तोड़फोड़ बिना किसी आधिकारिक आदेश के हुई थी तो प्रभावित लोगों की शिकायतों पर कार्रवाई करना पुलिस की ज़िम्मेदारी थी.

गुजरात हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 9 जुलाई को तय की है. अदालत ने इससे पहले सूरत के नगर आयुक्त एम. नागराजन को इस मामले में हलफ़नामा दाख़िल करने का निर्देश दिया है.

इसके अलावा, हाईकोर्ट ने गुजरात सरकार से भी इस मामले में अपना रुख़ स्पष्ट करने के लिए कहा है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और व्हॉट्सऐप पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)