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सम्राट चौधरी ने ली बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ, उनके साथ शपथ लेने वाले विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव कौन हैं?
- Author, सीटू तिवारी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- पढ़ने का समय: 4 मिनट
सम्राट चौधरी ने बिहार के नए मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ले ली है. वो राज्य में भारतीय जनता पार्टी के पहले मुख्यमंत्री हैं.
उनके साथ जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव ने भी मंत्री पद के तौर पर शपथ ली.
माना जा रहा है कि विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव दोनों उप मुख्यमंत्री के रूप में पद संभालेंगे. बीजेपी के कई नेताओं ने उन्हें डिप्टी सीएम पद की बधाई भी दी है.
शपथ ग्रहण समारोह में नीतीश कुमार भी मौजूद रहे.
शपथ ग्रहण समारोह के बाद विजय कुमार चौधरी ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "नीतीश जी ने मुझ पर विश्वास जताया ये उसी का नतीजा है. उन्होंने बिहार को जिस रास्ते पर बढ़ाया है उसी रास्ते पर हमारी नई सरकार भी चलेगी." वहीं बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा, "हम नीतीश कुमार जी के काम ही आगे बढ़ाएंगे."
समारोह में मौजूद केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने कहा, "मैं नए सीएम के बनने से ख़ुश भी हूं और बेहद भावुक भी. मैं आज जो भी हूं वो नीतीश जी की वजह से हूं. उन्होंने ही 2014 में मुझे सीएम बनाया था. उनकी वजह से एक महादलित समाज से आने वाला व्यक्ति मुख्यमंत्री बना."
सम्राट चौधरी के सीएम बनने का रास्ता नीतीश कुमार के इस्तीफ़े से साफ़ हुआ.
नीतीश ने हाल ही में राज्यसभा की शपथ ली.
इस तरह से बिहार के सीएम के तौर पर नीतीश कुमार का 21 साल का सफ़र ख़त्म हुआ.
साल 2000 में नीतीश कुमार सात दिन के लिए सीएम बने. लेकिन उनकी बतौर सीएम स्थायी पारी नवंबर 2005 में शुरू हुई.
विजय कुमार चौधरी
वो साल 2005 में जेडीयू में शामिल हुए. 2010 से वो समस्तीपुर की सरायरंजन सीट से लगातार जीतते रहे हैं.
वो नीतीश मंत्रिमंडल में भी मंत्री रह चुके हैं. उन्हें नीतीश कुमार का विश्वासपात्र सहयोगी माना जाता है.
पिछली सरकार में उनके पास चार विभागों की ज़िम्मेदारी थी- जल संसाधन, संसदीय कार्य, आईपीआरडी और भवन निर्माण
उन्होंने 1982 में पिता की मृत्यु के बाद राजनीति में एंट्री ली. उनके पिता कांग्रेस विधायक थे.
उन्होंने शुरुआत में कांग्रेस के टिकट पर दलसिंहसराय सीट जीती थी.
बिजेंद्र प्रसाद यादव
बिजेंद्र प्रसाद यादव 2005 से लगातार बिहार सरकार में मंत्री रहे हैं.
वो सुपौल सीट से जीतते रहे हैं. वो नीतीश सरकार के सबसे उम्रदराज़ मंत्री रहे हैं. वो जयप्रकाश नारायण के सहयोगी रह चुके हैं.
नीतीश सरकार में वो ऊर्जा और वित्त मंत्री रहे. उनको बिहार में बिजली की स्थिति बेहतर करने का योगदान दिया जाता है.
जाति का अहम रोल?
सम्राट कुशवाहा जाति से आते हैं जिनकी आबादी पिछड़ों में यादवों के बाद सबसे ज़्यादा है. जातिगत गणना के मुताबिक बिहार में कुशवाहा जाति की आबादी 4.2 फ़ीसदी है.
वरिष्ठ पत्रकार अरविंद शर्मा कहते हैं, "सम्राट बीजेपी के लिए ज़रूरी और मजबूरी दोनों बन गए थे. बीजेपी चाहती है कि लव कुश समीकरण के साथ अति पिछड़ा उनके साथ आए. यानी मोटे तौर पर जेडीयू का कोर वोटर. ऐसे में किसी ऐसा नेता को आगे बढ़ाना ज़रूरी था जो इन वोटों को बीजेपी के पाले में लाने में मदद करें. चूंकि सम्राट चौधरी को बीजेपी ने नेता प्रतिपक्ष, अध्यक्ष, डिप्टी सीएम आदि बनाकर बहुत इनवेस्ट किया था इसलिए सम्राट बीजेपी के लिए ज़रूरी थे."
दरअसल, बीते कई सालों से बीजेपी राजद के कोर वोटर 'एमवाई' में से 'वाई' को अपने साथ लाने की कोशिश कर रही है. वाई यानी यादव जो कुल आबादी का 14 फ़ीसदी हैं.
अरविंद शर्मा कहते हैं, "बीजेपी समझ चुकी है कि यादव उसे वोट नहीं करेंगे. पार्टी ने इसके लिए भूपेंद्र यादव, नित्यानंद राय, रामकृपाल यादव जैसे नेताओं को आगे लाकर ये करने की कोशिश की है, लेकिन अभी तक वो सफल नहीं हुई है. ऐसे में पार्टी दूसरी जातियों पर इनवेस्ट कर रही है. चूंकि अति पिछड़ों में बीजेपी के कोई नेता सम्राट चौधरी के कद का तैयार नहीं हो पाया है, इसलिए पार्टी के पास सम्राट चौधरी ही ऑप्शन के तौर पर बचते थे."
1990 से 2005 तक लालू राबड़ी शासन जिसका सम्राट चौधरी कभी ख़ुद भी हिस्सा रहे, उसने भी बीजेपी को ये फ़ैसला लेने के लिए प्रेरित किया.
फैजान अहमद कहते हैं कि लालू सरकार में यादव डॉमिनेंटिंग थे. लेकिन नीतीश ने गैर यादव के साथ अति पिछड़ों को जोड़ा. बीजेपी इसी कास्ट कॉम्बिनेशन को अपने साथ लाना चाहती है. इसलिए सम्राट को सीएम बनाया गया.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.