अल-सैयद की उम्मीदवारी से अमेरिका में हलचल, ट्रंप इतना डर क्यों दिखा रहे हैं?

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अमेरिका में मिशिगन की डेमोक्रेटिक प्राइमरी में डॉ. अब्दुल अल सैयद ने जीत हासिल कर देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है.
सैयद अमेरिकी सीनेट के लिए किसी राजनीतिक पार्टी के पहले मुस्लिम उम्मीदवार हैं.
मिशिगन अमेरिका का अहम स्विंग स्टेट है, इसलिए इस चुनाव पर पूरे देश की नज़र रहेगी. स्विंग स्टेट का मतलब है कि जीत किसी भी पार्टी को मिल सकती है.
लेकिन सैयद की उम्मीदवारी से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नाराज़ हैं.
हालांकि ऐसी ही नाराज़गी ट्रंप ज़ोहरान ममदानी को लेकर दिखाते थे. लेकिन ममदानी को न्यूयॉर्क के मेयर बने और अपनी नीतियों के अनुसार ही काम कर रहे हैं.
ज़ोहरान ममदानी ने भी अल-सैयद का समर्थन किया है.
ट्रंप ने सैयद को 'कम्युनिस्ट' बताया और कहा कि वह 'यहूदियों और इसराइल' से नफ़रत करते हैं.
ट्रंप ने बुधवार को एक कार्यक्रम में अल-सैयद के इसराइल के बारे में रुख़ की भी तीखी आलोचना की.
उन्होंने दावा किया कि नवंबर के चुनाव में अल-सैयद रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स से हार जाएंगे.
सीएनएन के मुताबिक़ अब्दुल अल-सैयद ने कभी सार्वजनिक रूप से यह नहीं कहा कि वह यहूदियों से नफ़रत करते हैं.
हालांकि, उन्होंने ग़ज़ा युद्ध के दौरान इसराइली सरकार पर 'जनसंहार' का आरोप लगाया था.
वो इसराइल को दी जाने वाली अमेरिकी सहायता बंद करने के पक्ष में हैं और उन्होंने यह भी सवाल उठाया है कि क्या इसराइल को एक यहूदी राष्ट्र के रूप में बने रहने का अधिकार है.
बुधवार को अल-सैयद ने यहूदी मतदाताओं को भरोसा दिलाने की कोशिश की.
उन्होंने कहा कि वे उनकी सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं और यहूदी-विरोध (एंटीसेमिटिज़्म) की निंदा करते हैं.
उन्होंने यह भी कहा कि वो पूंजीवादी हैं.
अल सैयद से क्यों ख़फ़ा हैं ट्रंप

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वहीं लास वेगास में एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने कहा, "वह (सैयद) यहूदियों और इसराइल से नफ़रत करते हैं. वह नफ़रत से भरे हुए शख़्स हैं, अब वो कह रहे हैं कि 'मैं सबसे प्यार करता हूँ.' लेकिन ऐसा नहीं है. उन्हें सत्ता में आने दीजिए, फिर आपको पता चल जाएगा कि वह किससे प्यार करते हैं."
ट्रंप ने कहा कि अल-सैयद की राजनीति से 'गंदगी, अपराध, मौत, तबाही और शर्मिंदगी' आएगी.
उन्होंने कहा, "आप अपना घर खो देंगे, अपना अपार्टमेंट खो देंगे. कम्युनिस्ट हमें 100 फ़ीसदी उसी दिशा में ले जाएंगे. जब मैं अब्दुल को देखता हूँ, तो लगता है कि वो पूरी तरह बकवास से भरे हुए हैं.''
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर भी सैयद की आलोचना की. उन्होंने लिखा. ''प्लीज़ ध्यान दें. मिशिगन से कम्युनिस्ट डुमोक्रैट ( डेमोक्रेट के लिए ट्रंप का तंज) सीनेट उम्मीदवार अब्दुल रहमान मोहम्मद अल-सैयद अपने चुनाव प्रचार में सबसे ज़्यादा जिस मुद्दे पर ज़ोर दे रहे हैं, वह है फिलिबस्टर को ख़त्म करना.''
''मैंने कल उन्हें देखा और वह फिलिबस्टर ख़त्म करने को लेकर पूरी तरह जुनूनी हो गए हैं''
''अगर वह इसमें सफल हो गए, तो डुमोक्रैट्स को चार अतिरिक्त सीनेटर, 8 अतिरिक्त सांसद, इलेक्टोरल कॉलेज और लोकप्रिय वोटों में बड़ा फ़ायदा मिलेगा. सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाकर 23 कर दी जाएगी. और फिर, दुख की बात है कि हम चाहे कितना भी अच्छा काम कर रहे हों, मैं अमेरिका का आख़िरी रिपब्लिकन राष्ट्रपति साबित होऊंगा.''

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फिलिबस्टर अमेरिकी सीनेट की एक संसदीय प्रक्रिया है, जिसके तहत किसी बिल को पारित होने से रोकने या उसमें देरी करने के लिए लंबी बहस की जा सकती है. ज़्यादातर मामलों में इसे ख़त्म कर वोटिंग कराने के लिए 60 सीनेटरों के समर्थन की ज़रूरत होती है.''
ट्रंप की इस टिप्पणी पर सैयद ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर तंज़ करते हुए लिखा, ''अपने बारे में इससे अच्छा तो मैं भी नहीं बता सकता था.''
जब सीएनएन ने ट्रंप की टिप्पणियों पर अल-सैयद से प्रतिक्रिया मांगी, तो उन्होंने कहा, "वे मुझ पर और मेरे बारे में ज़्यादा ध्यान दे रहे हैं, जबकि देश एक ऐतिहासिक महंगाई से जूझ रहा है. लोग लगभग पांच डॉलर प्रति गैलन पेट्रोल इसलिए ख़रीद रहे हैं, क्योंकि उन्होंने एक युद्ध शुरू किया है.''
ट्रंप के ये हमले दिखाते हैं कि मिशिगन की यह सीनेट सीट कितनी अहम है.
यह मुक़ाबला यह तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है कि अमेरिकी सीनेट में किस पार्टी का नियंत्रण होगा.
बीबीसी के उत्तर अमेरिका संवाददाता एंथनी ज़र्चर ने अल-सैयद के व्यक्तित्व और उनकी चुनौतियों का विश्लेषण किया है.
वामपंथ की नई आवाज़

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मिशिगन के पूर्व स्वास्थ्य अधिकारी अल-सैयद की जीत ने डेमोक्रेटिक पार्टी में हलचल मचा दी है.
मिस्र से आए प्रवासी माता-पिता के बेटे अब्दुल अल-सैयद ने वामपंथी नीतियों के समर्थन के साथ चुनाव लड़ा.
उन्हें डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रगतिशील नेताओं, जैसे सीनेटर बर्नी सैंडर्स, एलिज़ाबेथ वॉरेन और सांसद अलेक्ज़ेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेज़ का समर्थन मिला.
उन्होंने हेले स्टीवंस को हराया. जबकि हेले स्टीवंस को वॉशिंगटन में डेमोक्रेटिक पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का समर्थन हासिल था. लेकिन वो जीत नहीं सके.
टीवी बहसों और चुनावी सभाओं में अब्दुल अल-सैयद अधिक प्रभावशाली उम्मीदवार साबित हुए.
डेमोक्रेटिक वोटरों ने भी उनकी नीतियों के प्रति खुलापन दिखाया.
इनमें सरकार की ओर से हेल्थ इंश्योरेंस मुहैया कराना, दवाओं की क़ीमतें कम करने की कोशिश, अमीरों पर अधिक टैक्स लगाना और चुनावी फंडिंग व्यवस्था में सुधार जैसे मुद्दे शामिल हैं.
अब्दुल अल-सैयद के चुनाव अभियान का प्रमुख नारा था, "राजनीति से पैसे का असर ख़त्म करो और लोगों की जेब में पैसा पहुंचाओ."
इस चुनावी दौर में वामपंथी उम्मीदवारों के बीच यह संदेश काफी लोकप्रिय रहा है.
अब नवंबर के आम चुनाव में उनका मुक़ाबला पूर्व रिपब्लिकन सांसद माइक रोजर्स से होगा, जो अपनी पार्टी की ओर से बिना किसी चुनौती के उम्मीदवार बने हैं.
यह चुनाव इस बात की सबसे बड़ी परीक्षा माना जा रहा है कि क्या कोई वामपंथी उम्मीदवार अमेरिका के किसी वास्तविक स्विंग स्टेट में आम चुनाव जीत सकता है.
अल-सैयद की चुनौतियां

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प्राइमरी में बेहद क़रीबी जीत मिलने के कारण नवंबर से पहले अल-सैयद के सामने अपनी पार्टी को पूरी तरह एकजुट करने की बड़ी चुनौती होगी.
प्राइमरी में उन्हें उच्च शिक्षित उदारवादी मतदाताओं का अच्छा समर्थन मिला, लेकिन आम चुनाव जीतने के लिए उन्हें डेट्रॉयट और ग्रामीण इलाक़ों के उन कम आय वाले मतदाताओं का भरोसा भी जीतना होगा, जिन्होंने प्राइमरी में हेले स्टीवंस का साथ दिया था. चुनाव-पूर्व सर्वेक्षण इन मतदाताओं की पसंद का सही अनुमान नहीं लगा पाए थे.
अगर अल-सैयद माइक रोजर्स से हार जाते हैं, तो अमेरिकी सीनेट पर फिर से नियंत्रण हासिल करने की डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदों को बड़ा झटका लगेगा.
लेकिन अगर अल-सैयद जीत जाते हैं, तो यह डेमोक्रेटिक पार्टी के वामपंथी धड़े के लिए इस बात का मज़बूत प्रमाण होगा कि 2028 के राष्ट्रपति चुनाव में कोई वामपंथी उम्मीदवार, हाल के चुनावों में पार्टी द्वारा उतारे गए मध्यमार्गी (सेंट्रिस्ट) नेताओं की तुलना में अधिक सफल हो सकता है.
इसके अलावा, मिशिगन डेमोक्रेटिक पार्टी की राष्ट्रपति पद की प्राइमरी प्रक्रिया में शुरुआती और बेहद महत्वपूर्ण राज्यों में से एक है.
इसलिए यहां के चुनावी रुझान और नतीजे यह तय करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं कि 2028 में पार्टी राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार किसे बनाती है.
कौन हैं अल-सैयद

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अब्दुल अल-सैयद पेशे से डॉक्टर और पब्लिक हेल्थ अफ़सर हैं.
31 अक्टूबर 1984 को मिशिगन के डेट्रॉइट शहर के उपनगर रोचेस्टर हिल्स में जन्मे अब्दुलरहमान अल-सैयद के पिता मोहम्मद अल-सैयद इंजीनियरिंग में उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए मिस्र से अमेरिका आए थे. उन्होंने मिशिगन की वेन स्टेट यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की.
अब्दुलरहमान का पालन-पोषण उनके पिता और सौतेली मां जैकलीन ने किया.
एक डॉक्टर और महामारी विज्ञानी के तौर पर अब्दुल एल-सैयद ने सभी नागरिकों के लिए यूनिवर्सल हेल्थकेयर को अपनी राजनीतिक पहचान का सबसे अहम मुद्दा बनाया है.
वे अमेरिका की मौजूदा स्वास्थ्य व्यवस्था को 'मेडिकेयर फॉर ऑल' मॉडल में बदलने की वकालत करते हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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