आशा भोसले ने जब लता मंगेशकर से कॉम्पटीशन और अपने पसंदीदा सिंगर के बारे में बताया था

इमेज स्रोत, Getty Images
मशहूर सिंगर आशा भोसले का रविवार को निधन हो गया. उनकी उम्र 92 साल थी.
भारतीय संगीत जगत की एक बड़ी हस्ती के रूप में उनका नाम शुमार था और प्लेबैक सिंगर के रूप में उन्होंने कई यादगार गाने दिए.
साल 2008 में बीबीसी हिंदी सेवा के विशेष कार्यक्रम 'एक मुलाक़ात' में उन्होंने अपनी ज़िंदगी के अनछुए पहलुओं से अवगत कराया था.
उनसे उस वक़्त के बीबीसी हिन्दी सेवा में भारत में संपादक संजीव श्रीवास्तव ने बातचीत की थी.
आपने क़रीब 65 साल पहले 1943 में गाने का सफ़र शुरू किया था, लेकिन आज भी युवा बनी हुई हैं. इसका राज क्या है?
पता नहीं, सब मुझसे यही पूछते हैं, लेकिन मुझे खुद नहीं पता कि इसका क्या राज है. आम औरतें जैसी जीती हैं, मैंने भी वैसी ही जिया है. बल्कि कहना चाहिए हमें बड़े लोगों का प्यार नहीं मिला. हम छोटे थे, तभी पिता का निधन हो गया था. कह सकते हैं कि इच्छाशक्ति है जिसका असर चेहरे और शरीर पर दिखता होगा.
आपके चेहरे पर हमेशा मुस्कान रहती है. तो आप जीवन का हरदम आनंद उठाती हैं?
ये कहना तो सही नहीं होगा कि पूरे जीवन में आनंद ही आनंद मिला है. जीवन में बहुत से उतार-चढ़ाव आते हैं. लेकिन मैं उतार-चढ़ाव में भी हंसती रहती हूँ. क्योंकि मुझे पता है कि बुरे दिन भी बीत जाएँगे और अच्छे दिन जल्द आएँगे.
आप जब नौ साल की थीं तब आपके पिता का निधन हो गया था. उस उम्र में आप मुंबई आईं और रोज़ी-रोटी में जुट गईं. तब इतना सब दबाव कैसे झेल पाती थीं?
उस वक़्त एक ही बात थी कि काम करना है और पैसा चाहिए. बाद में बच्चे हुए. उनकी परवरिश के लिए पैसा चाहिए था. फिर काम जीवन का हिस्सा बन गया.

इमेज स्रोत, Getty Images
आपने किसी फ़िल्म में अभिनय भी किया?
मैने दो फ़िल्मों में काम किया. एक हिंदी फ़िल्म 'बड़ी मामी' और एक मराठी फ़िल्म. लेकिन अभिनय मेरी समझ में ज़्यादा नहीं आया. मुझे लगा कि अभिनय से अच्छा गाना है.
और पहला गाना कैसे मिला?
दीदी एक मराठी फ़िल्म 'माझा बाड़' में काम कर रही थीं. उसमें गाने का मौका मिला. उसके बाद 'अंधों की दुनिया' में वसंत देसाई ने मौके दिया. हंसराज बहल ने मुझे हिंदी फ़िल्म में पहली बार किसी अभिनेत्री के लिए गाने का मौका दिया.
आप उस दौर की बात कर रही हैं, जब पार्श्वगायकी की दुनिया में लता मंगेशकर और गीता दत्त जैसे बड़े नाम थे. आप संघर्ष कर रही थीं. कैसा रहा अनुभव?
तगड़ी प्रतिस्पर्धा थी. बहुत मेहनत करनी पड़ी. लेकिन इसका फल क्या होगा ये पता नहीं था.
कभी सोचा था कि आप इतनी क़ामयाब होंगी और लोग इस क़दर आपके दीवाने होंगे?
शुरुआत बहुत संघर्षपूर्ण रही. सज़्ज़ाद हुसैन साहब उस वक़्त के बहुत कड़क संगीत निर्देशक थे. उनके सामने गायक थर-थर काँपते थे. लेकिन मैंने शुरू में ही उनसे कह दिया कि सज़्जाद साहब मुझे गाना नहीं आता. बच्चों के लिए गा रही हूँ. वो खुश हो गए और मुझे कभी नहीं डांटा.
क्या ये कहना सही होगा कि आपको लोकप्रियता ओपी नैयर के साथ मिलने के बाद मिली?
ये बात कुछ हद तक सही है. उस ज़माने में सी रामचंद्र के गाने भी बहुत हिट हुए. 'ईना-मीना-डीका' बहुत हिट रहा. मैं सिर्फ़ आरडी बर्मन का नाम भी नहीं लूँगी. हर संगीत निर्देशक का मेरे करियर में योगदान रहा है. मसलन मदन जी का 'झुमका गिरा रे', रवि साहब का 'आगे भी जाने न तू', शंकर जयकिशन का 'पर्दे में रहने दो'.

आपकी आवाज़ वाकई बहुत कमाल की है
देखिए हर गाने के साथ आवाज़ और अंदाज़ बदलना पड़ता है. वो पार्श्वगायक ही क्या जो अपना अंदाज़ और आवाज़ न बदल सके. दरअसल, मैं उस फ़िल्मी पात्र के साथ ख़ुद को ढाल लेती हूँ. कभी ज़ीनत अमान, कभी मधुबाला, कभी हेलेन.
हेलेन के लिए आपका पसंदीदा गाना कौन सा है?
बहुत सारे गाने हैं जो मैंने उनके लिए गाए हैं. 'आज की रात कोई आने को है रे बाबा' मुझे बहुत पसंद है.
आपके अब तक के सफ़र में कोई स्पेशल गाना?
नहीं, ऐसा कोई स्पेशल गाना नहीं है. हर दिन जब सुबह उठते हैं तो नई धुन दिमाग में चलती है. ऐसा नहीं है कि हमें सिर्फ़ अपने ही गाने पसंद हों, दूसरे गायकों के गाने भी मुझे पसंद हैं.
आपके दूसरे पसंदीदा पार्श्वगायक?
लता मंगेशकर. हम 45 साल से एक घर में रहते हैं. मां, हम पाँच भाई-बहन सब साथ रहते थे. जहाँ तक लोगों की बात है तो 'कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना.'

इमेज स्रोत, AFP via Getty Images
एक ही परिवार में इतनी प्रतिभा?
मेरा भाई बहुत अच्छी धुनें बनाता है. फिर दीदी हैं, मेरी छोटी बहन है. हमारी म्यूज़िकल फ़ैमिली है. ऐसा परिवार जहाँ हर कोई गाता है और संगीत से जुड़ा है. फ़िल्म इंडस्ट्री में शायद कपूर खानदान के अलावा इस तरह का परिवार हमारा ही है. कपूर खानदान से हमारे क़रीबी संबंध हैं.
आपको देखकर हर किसी के मन में सवाल आता है कि आप खुद को इतना फ़िट कैसे रखती हैं. क्या खाती हैं, क्या पीती हैं?
नहीं. खाना-पीना तो कुछ ख़ास नहीं है. लेकिन हाँ सुबह-सुबह रियाज़ करती हूँ. चाय पीती हूँ. फिर रियाज़ करने लग जाती हूँ. दिन भर में दो-तीन घंटे रियाज़ हो जाता है. कभी-कभी ऐसा भी होता है कि रियाज़ का मौका नहीं मिलता.
रियाज़ में क्या पुराने गाने गाती हैं?
नहीं, रियाज़ में गाने नहीं गाती हूँ. तानपुरे के साथ सुर लगाती हूँ. राग गाती हूँ.
आज के दौर में नए गायकों में अपने सबसे ज़्यादा क़रीब किसे पाती हैं?
सच कहूँ तो मैं किसी को नहीं सुनती हूँ. टीवी, रेडियो सुनने का ज़्यादा शौक नहीं है. गाना गाने और पोते-पोतियों में व्यस्त रहती हूँ. बहुत हो गया तो किशोर कुमार, लगा मंगेशकर को सुन लेती हूँ. कहीं आते-जाते हुए किसी को सुन लिया तो सुन लिया.

इमेज स्रोत, Getty Images
खाने-पीने में कुछ परहेज रखना पड़ता है क्या?
जी हाँ. बहुत परहेज़ रखना पड़ता है. मैं दही, आइसक्रीम नहीं खाती. इमली नहीं खाती. कितनी भी गर्मी हो ठंडा पानी नहीं पीती. फ्रिज की कोई चीज़ नहीं खाती. सिगरेट, वाइन कुछ नहीं. इसलिए शायद आवाज़ अब भी ठीक है.
आपके लिए संगीत का क्या मतलब है?
संगीत समंदर की तरह है. इसमें जितना ही घुसेंगे उतना कम है. मेरा आज भी मानना है कि मैं संगीत का कुछ नहीं जानती. संगीत मेरी सांसों में बसा हुआ है. लोग कहते हैं कि संगीत छोड़ दो तो मेरा जवाब होता है कि सांस लेना कैसे छोड़ दूं. जब तक आवाज़ है तब तक गाऊँगी. शायद आवाज़ और मैं साथ में दुनिया से जाएँगे.
आप जब स्टेज परफ़ॉरमेंस देती हैं तो हमेशा आप बहुत तरोताज़ा और ऊर्जा से भरपूर दिखती हैं, ऐसा कैसे?
पता नहीं. मैं ऐसा जानबूझकर नहीं करती. मैं ऐसी ही हूँ. बहुत थकी होने पर भी मैं लोगों से ऐसे ही बात करती हूँ. लोगों से प्यार से बात करती हूँ. हँसती रहती हूँ. आप बनावट बहुत देर तक कायम नहीं रख सकते.
आपका पसंदीदा पार्श्वगायक?
किशोर कुमार. वो दिलोदिमाग से गाते थे. उन्होंने कभी गाना सीखा नहीं, उनकी गायकी ईश्वर की देन थी. उन्हें बहुत संघर्ष नहीं करना पड़ा. 'जिद्दी' फ़िल्म का उनका पहला ही गाना हिट हुआ.

किशोर कुमार के साथ गाया आपका पसंदीदा गाना?
उनके साथ गाया हर गाना मेरा पसंदीदा है. 'जाने जाँ', 'भली-भली सी एक सूरत' मुझे बहुत पसंद हैं.
आपने तमाम अभिनेत्रियों को अपनी आवाज़ दी. कभी लगा कि किसी अभिनेत्री की आवाज़ आपकी जैसी है?
पता नहीं. कभी इतना ग़ौर नहीं किया. लेकिन इतना ज़रूर रहा कि मैं देखती थी कि वो कैसे बोल रही हैं, कैसे मुँह खोलती हैं, वैसे ही गाने की कोशिश करते थे.
और आपके पसंदीदा संगीत निर्देशक?
आरडी बर्मन. पहले भी, आज भी और कल भी. ये बात सिर्फ़ मेरे लिए नहीं बल्कि सबके लिए है. सभी संगीत निर्देशक, गायक आज महसूस करते हैं कि उनके जैसा संगीत कोई नहीं दे सकता. जब कोई पुराने गानों को तोड़-मरोड़कर गाता है. उससे दुख होता है.
'चुरा लिया है तुमने' को बाद में जिस तरह से गाया गया. उससे मुझे और बर्मन साहब को बहुत दुख हुआ था.

इमेज स्रोत, Getty Images
बर्मन साहब के साथ आपकी केमिस्ट्री इतनी ज़बर्दस्त कैसे थी?
मुझे वेस्टर्न गाने पसंद थे. मुझे उनके गाने गाने में बहुत मज़ा आता था. वैसे भी मुझे नई चीज़ें करना अच्छा लगता था. बहुत मेहनत से गाते थे. बर्मन साहब को भी अच्छा लगता था कि मैं कितनी मेहनत करती हूँ. तो कुल मिलाकर अच्छी आपसी समझदारी थी.
तो मैं कहूँगी कि हमारे बीच संगीत से प्रेम बढ़ा, न कि प्रेम से हम संगीत में नजदीक आए.
आपके पास हीरे, मोती, साड़ी का ज़बर्दस्त कलेक्शन हैं. इसका राज?
नहीं ऐसा कुछ नहीं है. ये बहुत पहले की बनी हैं. पहले मैं काँच, प्लास्टिक की माला डालती थी, लेकिन मैचिंग बहुत अच्छा करती थी. सूती साड़ी के साथ चप्पल, चूड़ियाँ और गले की माला, बहुत अच्छा लगता था. मेरा कलेक्शन शायद औरतों की पसंद का है. साड़ियाँ भी मैं ऐसी ढूँढ के लाती हूँ जो जरा हटकर हों.
तो शॉपिंग का खूब शौक है आपको. आपका पसंदीदा रंग?
मुझे शॉपिंग का खूब शौक है और रंग फिरोजा पसंद है.
हीरों का भी आपको शौक है क्या?
मुझे लगता है कि हर औरत को हीरों का शौक होता है. लेकिन मुझे अब हीरों का ज़्यादा शौक नहीं रहा.
क्या ये सही है कि आपके पोते ने आपको नायाब एलबम दिया?
हाँ, सही है. उसमें उसके पैदा होने के बाद के फ़ोटो हैं. उस दिन उन्होंने मुझे हार भी दिया था, लेकिन मैंने उनसे कहा कि मेरे लिए ये एलबम ही कोहिनूर है.

इमेज स्रोत, Getty Images
आप किसी की नक़ल बहुत अच्छे से करती हैं?
हाँ. मिमिक्री भी करती हूँ. सबसे अच्छी नक़ल दीदी लता मंगेशकर की करती हूँ.
आप बहुत अच्छा खाना बनाती हैं. इसमें कितनी सचाई है?
नहीं कुछ ख़ास नहीं. हाँ ये ज़रूर है कि खाना बहुत प्यार से बनाती हूँ. बच्चों को अच्छा लगा तो उन्होंने होटल बना दिए. कुवैत, आबूधाबी, बर्मिंघम में होटल हैं. मेरा खाना कपूर परिवार को बहुत पसंद है.
आपकी फेवरिट डिश?
शामी कबाब. जो लखनऊ के मशहूर टुंडा कबाब हैं. मुझे लगता है कि मैं अच्छे कबाब बनाती हूँ.
आपका सबसे अच्छा दिन?
जिस दिन मैं माँ बनी, वो मेरी ज़िंदगी का सबसे खुशी का दिन था. फिर मेरे जुड़वाँ पोता-पोती हुए तो मुझे बहुत खुशी हुई.
कोई ऐसी बात जो आपको अच्छी नहीं लगी हो?
बहुत कुछ लिखा गया. अब उनके बारे में सोचेंगे तो अपनी ऊर्जा ही गँवाएंगे.
और अच्छी बात?
गुलज़ार भाई ने कहा था कि लोग कहते हैं कि आशा नंबर वन है, लता नंबर वन है. उनका कहना था कि अंतरिक्ष में दो यात्री एक साथ गए थे, लेकिन जिसका क़दम पहले पड़ा नाम उसका ही हुआ. मुझे खुशी है कि पहला क़दम दीदी का पड़ा और मुझे इस पर गर्व है. वैसे भी किसी को अच्छा कहने के लिए किसी और को ख़राब कहना ज़रूरी नहीं है.
खुद के बारे में आपकी राय?
मैं किसी की परवाह नहीं करती और सच बोलती हूँ. किसी ने ग़लत कहा तो मैं उसका जवाब देना ज़रूरी समझती हूँ. हम अगर बनावटी बात करते हैं तो हर कोई समझ जाता है. मेरी ख़्वाहिश है कि लोग मुझे अच्छे गायक से ज़्यादा अच्छे इंसान के रूप में याद करें.
मुझे किसी ने पूछा था कि आप अगले जन्म में क्या बनना चाहेंगी तो मेरा जवाब था फिर से आशा भोसले.
(ये लेख पहली बार 09 नवंबर, 2008 को बीबीसी पर प्रकाशित हुआ था और ये इंटरव्यू उस वक्त बीबीसी हिन्दी सेवा के भारत के तत्कालीन संपादक संजीव श्रीवास्तव ने किया था )
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.



































