सम्राट चौधरी होंगे बिहार के नए मुख्यमंत्री, एनडीए और बीजेपी ने विधायक दल का नेता चुना

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बिहार में बीजेपी के विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद एनडीए गठबंधन ने सम्राट चौधरी को अपना नेता चुना है. इसके बाद अब यह तय हो चुका है कि वो राज्य के नए मुख्यमंत्री होंगे.

इससे पहले बीजेपी के वरिष्ठ नेता और बिहार के ऑब्ज़र्वर शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की थी कि सम्राट चौधरी को बीजेपी विधानमंडल दल का नेता चुना गया है.

मंगलवार को नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा देने के बाद पटना में बीजेपी विधायक दल की बैठक हुई थी, जिसमें उनको बीजेपी विधायक दल का नेता चुना गया.

विधानमंडल दल का नेता चुने जाने के बाद सम्राट चौधरी ने कहा, "भारतीय जनता पार्टी की जो विचारधारा है, भारत को श्रेष्ठ मानने की और पार्टी को सबसे आगे रखने की, उस काम को हम करते रहेंगे."

"नीतीश कुमार ने सिखाया है कि सरकार कैसे चलाई जाती है और बिहार के लोकतंत्र के लिए क्या ठीक है. मैं तमाम लोगों को जरूर आश्वस्त करना चाहता हूं जिस तरह से पीएम मोदी ने विकसित भारत का सपना देखा है और नीतीश कुमार ने समृद्ध बिहार का सपना देखा है, हम सब लोग मिलकर इन सपनों को पूरा करेंगे."

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बीते तीन दशक से ज़्यादा समय तक बिहार की सियासत लालू यादव और नीतीश कुमार के इर्द-गिर्द घूम रही थी. लेकिन अब राज्य को नया मुख्यमंत्री मिलने जा रहा है.

बीजेपी राज्य की सत्ता में रही है तो नेतृत्व की जगह उसकी भूमिका सहयोगी की रही है.

इस तरह से बिहार इकलौता हिन्दी भाषी राज्य है, जहाँ बीजेपी को कभी मुख्यमंत्री की कुर्सी नहीं मिल पाई है.

लेकिन अब बिहार में बीजेपी का पहला मुख्यमंत्री बनने जा रहा है. बीजेपी नेता लखेंद्र पासवान ने बताया है सम्राट चौधरी कल यानी बुधवार सुबह 10.30 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे.

उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा, "शपथ ग्रहण समारोह के लिए 10.30 बजे का समय तय हुआ है. नीतीश कुमार ने बिहार के विकास का जो संकल्प लिया था, उसे एनडीए की सरकार पूरा करेगी."

किसने क्या कहा

शिवराज सिंह ने कहा, "आज बीजेपी के विधानमंडल के नेता के लिए विजय कुमार सिन्हा ने सम्राट चौधरी का नाम प्रस्तावित किया. पूरे हमारे विधानमंडल ने सर्वसम्मति से सम्राट चौधरी के नाम का समर्थन किया. विधानमंडल दल के नेता के रूप में सम्राट चौधरी सर्वसम्मति से चुने गए हैं."

बीजेपी के सहयोगी और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के नेता उपेंद्र कुशवाहा ने सम्राट चौधरी को बीजेपी विधानमंडल दल का नेता चुने जाने पर बधाई दी.

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, "नई जवाबदेही के लिए सम्राट चौधरी जी को बहुत-बहुत बधाई और ढ़ेरों शुभकामनाएं."

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने सम्राट चौधरी को बधाई देते हुए कहा, "मैं नीतीश कुमार जी को भी बधाई देना चाहूंगा, जिन्होंने दिल्ली जाने का मन बनाया. उसी वजह से ये परिस्थिति बनी. उन्होंने सम्राट चौधरी को आर्शीवाद दिया और बीजेपी विधायक दल ने भी सम्राट चौधरी को नेता चुना है."

वहीं बीजेपी नेता विजय कुमार सिन्हा ने कहा, "हम बीजेपी के सिपाही हैं. हमारी पार्टी की ये तीसरी और चौथी जनरेशन है. सालों साल तक जमीन पर मेहनत की है और बलिदान दिया है. अब कमल खिलाने का अवसर आया है. मैं भारतीय जनता पार्टी के कमांडर के अनुसार गठबंधन की राजनीति को आगे बढ़ाने के लिए हमने सम्राट चौधरी के नाम का प्रस्ताव दिया."

कैसा रहा है राजनीतिक सफ़र

सम्राट चौधरी बीजेपी के ऐसे नेताओं में से हैं जो आरएसएस की पृष्ठभूमि से नहीं आते हैं.

उनके पिता शकुनी चौधरी ख़ुद समता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक थे.

शकुनी चौधरी कभी नीतीश के क़रीबी थे तो कभी लालू प्रसाद यादव की पार्टी आरजेडी में भी रहे.

शकुनी चौधरी का नाम कुशवाहा समाज के बड़े नेताओं में शुमार है और वो ख़ुद भी विधायक और सांसद रहे हैं.

यानी सम्राट चौधरी के पास एक राजनीतिक विरासत भी है, जो उनके सियासी प्रभाव को बढ़ाता है.

शकुनी चौधरी के बेटे सम्राट चौधरी का प्रवेश सक्रिय राजनीति में 1990 में हुआ.

बिहार विधान परिषद की वेबसाइट के मुताबिक़ 1995 में उन्हें एक राजनीतिक मामले में 89 दिन के लिए जेल जाना पड़ा था.

शकुनी चौधरी ने साल 1999 में बिहार में राबड़ी देवी की सरकार का साथ दिया था, हालाँकि वो ख़ुद उस वक़्त सांसद थे.

बाद में बिहार में साल 2000 में हुए विधानसभा चुनाव में सम्राट चौधरी परबत्ता विधानसभा सीट से आरजेडी के टिकट पर चुनाव जीते थे.

जबकि साल 2005 में हुए विधानसभा चुनाव में वो जेडीयू के रामानंद सिंह से हार गए थे.

साल 2010 में भी सम्राट चौधरी इस सीट से चुनाव जीतने में सफल रहे थे.

चुनाव आयोग की वेबसाइट के मुताबिक़, सम्राट चौधरी उर्फ़ राकेश कुमार ने जेडीयू के रामानंद प्रसाद सिंह को कड़े मुक़ाबले में पराजित किया था.

साल 2014 के लोकसभा चुनावों में जेडीयू के ख़राब प्रदर्शन की ज़िम्मेवारी लेते हुए नीतीश ने जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाया था.

उस वक़्त सम्राट चौधरी आरजेडी के कुछ विधायकों के साथ मांझी का समर्थन किया था. साल 2014 में वो नगर विकास विभाग के मंत्री भी बनाए गए थे.

मई 2014 में सम्राट चौधरी ने आरजेडी से इस्तीफा दिया और जेडीयू जॉइन की.

साल 2015 में बिहार में पहली बार महागठबंधन ने मिलकर चुनाव लड़ा था और यह सीट जेडीयू को मिली थी.

लेकिन उस वक़्त जेडीयू के रामानंद प्रसाद सिंह को परबत्ता सीट से टिकट दिया था और वो जीत गए थे.

साल 2017 में सम्राट चौधरी ने जेडीयू से भी इस्तीफा दे दिया और बीजेपी जॉइन की. मार्च 2023 में सम्राट चौधरी को बिहार बीजेपी का अध्यक्ष बनाया गया.

इसके बाद 2024 की शुरुआत में नीतीश कुमार ने आरजेडी से अलग होकर फिर से बीजेपी के साथ सरकार बनाई तो सम्राट चौधरी उपमुख्यमंत्री चुने गए. साल 2025 में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी-जेडीयू गठबंधन की जीत के बाद फिर से सम्राट चौधरी ने राज्य के उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.