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लाइव, नाकाबंदी के बाद एक और अमेरिकी प्रतिबंधित टैंकर होर्मुज़ स्ट्रेट से गुज़रा

बीबीसी वेरिफ़ाई ने पुष्टि की है कि अमेरिका की ओर नौसैनिक नाकाबंदी शुरू होने के बाद एक प्रतिबंधित टैंकर होर्मुज़ स्ट्रेट से गुज़रा है. इस टैंकर पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगाया हुआ है.

सारांश

लाइव कवरेज

रौनक भैड़ा, सुमंत सिंह

  1. नाकाबंदी के बाद एक और अमेरिकी प्रतिबंधित टैंकर होर्मुज़ स्ट्रेट से गुज़रा, जोशुआ चीथम

    बीबीसी वेरिफ़ाई ने पुष्टि की है कि अमेरिका की ओर नौसैनिक नाकाबंदी शुरू होने के बाद एक प्रतिबंधित टैंकर होर्मुज़ स्ट्रेट से गुज़रा है. इस टैंकर पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगाया हुआ है.

    मरीनट्रैफ़िक के डेटा के मुताबिक़ कोमोरोस के झंडे वाला 'एलपिस' जहाज़ आंशिक रूप से एक कार्गो है, जिसे संभवतः ईरान के बंदरगाह बुशेहर से लोड किया गया हो.

    यह जहाज़ मलेशिया की कंपनी 'चार्टकेमिकल' के नाम पर पंजीकृत है. शिपिंग डेटाबेस इक्वासिस के मुताबिक़ यह जहाज़ ग़लत झंडा इस्तेमाल कर रहा है, यानी यह कोमोरोस की अनुमति के बिना ही उसके झंडे का इस्तेमाल कर रहा है.

    इसने आख़िरी बार स्थानीय समयानुसार सुबह 10:00 बजे अपनी लोकेशन दिखाई थी और इसने अपने डेस्टिनेशन की कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की है.

    ट्रैकिंग डेटा से यह भी संकेत मिलता है कि एक और अमेरिकी प्रतिबंधित टैंकर 'रिच स्टैर्री' होर्मुज़ स्ट्रेट से गुज़र चुका है. ऐसा कहा जा रहा है कि यह टैंकर चीन की ओर जा रहा है. यह आख़िरी बार संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में रुका था.

    ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी की घोषणा करते समय अमेरिकी सेना ने कहा था कि वह "होर्मुज़ स्ट्रेट से ग़ैर-ईरानी बंदरगाहों के बीच आने-जाने वाले जहाज़ों की आवाजाही की स्वतंत्रता में बाधा नहीं डालेगी."

  2. डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान के बाद कच्चे तेल की क़ीमतों में गिरावट आई, ओसमंड चिया, बिज़नेस रिपोर्टर

    ईरान और अमेरिका के बीच दूसरे दौर की वार्ता की उम्मीद जताई जा रही है. इस बीच मंगलवार को कच्चे तेल की क़ीमतों में गिरावट आई है.

    ब्रेंट क्रूड की क़ीमत क़रीब 1% गिरकर 98.40 डॉलर प्रति बैरल पर आई, जबकि अमेरिका में ट्रेड होने वाला तेल 1.7% गिरकर 97.40 डॉलर पर पहुंचा.

    दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि ईरान ने अमेरिका से संभावित समझौते के बारे में संपर्क किया है. इसके बाद ही तेल की क़ीमतें नीचे आई हैं.

    सोमवार को व्हाइट हाउस के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, "हमें दूसरी तरफ़ (ईरान) से फ़ोन आया है. वे समझौता करना चाहते हैं."

    वहीं न्यूयॉर्क टाइम्स ने रिपोर्ट किया कि ईरान ने पांच साल तक यूरेनियम संवर्धन रोकने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन अमेरिका ने इसे ठुकरा दिया और 20 साल की मांग की.

    हालांकि, इसमें यह भी कहा गया कि चर्चाओं से संकेत मिलता है कि शांति समझौते की राह अब भी खुली हो सकती है. दोनों पक्षों के बीच दूसरे दौर की बातचीत संभव है.

  3. नमस्कार!

    अब तक बीबीसी संवाददाता रौनक भैड़ा आप तक ख़बरें पहुंचा रहे थे. अब से रात 10 बजे तक बीबीसी संवाददाता सुमंत सिंह आप तक अहम ख़बरें पहुंचाएंगे.

    बीबीसी न्यूज़ हिन्दी के पन्ने पर लगी कुछ अहम ख़बरें पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक करें.

  4. संयुक्त राष्ट्र ने कहा, 'होर्मुज़ स्ट्रेट को ब्लॉक करने का अधिकार किसी के पास नहीं'

    संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय जहाज़ों की आवाजाही वाले समुद्री रास्तों को रोकने का क़ानूनी अधिकार किसी भी देश के पास नहीं है.

    संयुक्त राष्ट्र की इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गेनाइज़ेशन (आईएमओ) के प्रमुख आर्सेनियो डोमिंगेज़ ने बीबीसी से कहा, "अगर कोई देश समुद्री रास्ता रोकने की कोशिश करता है, तो यह आगे के लिए ग़लत उदाहरण बन जाएगा."

    उन्होंने कहा, "मैं समझता हूं कि वहां संघर्ष चल रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क़ानून में कोई आधार नहीं है कि किसी भी समुद्री रास्ते को रोका जाए."

    डोमिंगेज़ ने आगे कहा, "जितनी ज़्यादा जवाबी कार्रवाई होगी, फ़ारस की खाड़ी में फंसे हुए 20,000 नाविकों के लिए उतनी ही चिंता बढ़ जाएगी. बाकी दुनिया के लिए भी परेशानी बढ़ेगी, जो पहले ही आर्थिक रूप से प्रभावित है."

  5. ईरान ने बताया अमेरिका और इसराइल के हमलों से कितने डॉलर का नुक़सान हुआ

    ईरान ने कहा है कि उसे अमेरिका और इसराइल के हमलों में क़रीब 270 अरब डॉलर का नुक़सान हुआ है.

    यह आंकड़ा ईरानी शासन की प्रवक्ता फ़ातिमा मोहजेरानी ने दिया है. उनका कहना है कि यह आंकड़ा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष, दोनों तरह के नुक़सान को जोड़कर बनाया गया है.

    बीबीसी फ़ारसी के मुताबिक़, रूस की समाचार एजेंसी आरआईए नोवोस्ती को दिए इंटरव्यू में मोहजेरानी ने कहा, "हमारी बातचीत करने वाली टीम जिन मुद्दों पर काम कर रही है, उनमें एक मुद्दा युद्ध से हुए नुक़सान के मुआवज़े की मांग का भी है."

    अमेरिका के साथ इस्लामाबाद में हुई बातचीत में ईरान की दस शर्तों में से एक युद्ध मुआवज़े की मांग भी थी.

    इसके अलावा, ईरान ने अपने पड़ोसी देशों सऊदी अरब, यूएई, क़तर, बहरीन और कुवैत से जंग में हुए नुक़सान की भरपाई की मांग की है.

    ईरान के संयुक्त राष्ट्र में राजदूत अमीर सईद इरवानी ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को भेजे गए एक पत्र में यह मांग की.

  6. नोएडा में हुए श्रमिकों के प्रदर्शन पर राहुल गांधी ने क्या कहा?

    उत्तर प्रदेश में नोएडा के इंडस्ट्रियल एरिया में हुए प्रदर्शन पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की प्रतिक्रिया आई है.

    राहुल गांधी ने कहा कि नोएडा का मज़दूर 20,000 रुपये मांग रहा है, यह कोई लालच नहीं बल्कि उसका अधिकार है.

    राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, "कल नोएडा की सड़कों पर जो हुआ, वो इस देश के श्रमिकों की आख़िरी चीख़ थी, जिसकी हर आवाज़ को अनसुना किया गया, जो मांगते-मांगते थक गया."

    उन्होंने लिखा, "नोएडा में काम करने वाले एक मज़दूर की 12,000 रुपये महीने की तनख़्वाह, 4,000-7,000 रुपये किराया. जब तक 300 रुपये की सालाना बढ़ोतरी मिलती है, मकान मालिक 500 रुपये सालाना किराया बढ़ा देता है."

    "तनख़्वाह बढ़ने तक ये बेलगाम महंगाई ज़िंदगी का गला घोंट देती है, क़र्ज़ की गहराई में डुबा देती है, यही है विकसित भारत का सच. जो मज़दूर हर रोज़ 12-12 घंटे खड़े होकर काम करता है फिर भी बच्चों की स्कूल फ़ीस क़र्ज़ लेकर भरता है, क्या उसकी मांग ग़ैरवाजिब है? जो हर रोज़ उसका हक़ मार रहा है, वो विकास कर रहा है?"

    राहुल गांधी ने लिखा, "मैं हर उस मज़दूर के साथ हूं, जो इस देश की रीढ़ है और जिसे इस सरकार ने बोझ समझ लिया है."

    गौरतलब है कि सोमवार को नोएडा में श्रमिकों ने कुछ जगहों पर तोड़फोड़ और पत्थरबाज़ी की और कुछ वाहनों में आग लगा दी.

    तोड़फोड़ और प्रदर्शन की घटनाएं नोएडा के फ़ेज़-2 और सेक्टर 60 के फ़ैक्ट्री इलाक़ों में हुई हैं.

    प्रदर्शन कर रहे कर्मचारी वेतन बढ़ोतरी की मांग कर रहे थे.

  7. अमेरिका से बातचीत बेनतीजा रहने के बाद रूस ने ईरान को दी ये सलाह

    रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराग़ची के बीच टेलीफ़ोन पर बातचीत हुई है.

    दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच सोमवार को बात हुई. अराग़ची ने लावरोव को 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में हुई ईरान-अमेरिका बातचीत के बारे में जानकारी दी.

    रूसी विदेश मंत्रालय के आधिकारिक बयान के मुताबिक़, "रूस ने ईरान से कहा कि बातचीत जारी रखना और ऐसे हल ढूंढना ज़रूरी है जिनसे संघर्ष की जड़ें ख़त्म हों, क्षेत्र में लंबे समय तक स्थिरता बनी रहे. इसमें ईरान और उसके पड़ोसियों के सही हितों का ध्यान रखा जाए."

    रूस के विदेश मंत्री लावरोव ने ज़ोर दिया कि फिर से टकराव न हो. उन्होंने दोहराया, "रूस संकट को ख़त्म करने में मदद करने के लिए हमेशा तैयार है. रूस ने फ़ारस की खाड़ी में सुरक्षा का एक विचार पेश किया था, जिसमें सभी तटीय देश शामिल हों और बाहर के वे देश भी जो बातचीत पर अच्छा प्रभाव डाल सकते हैं."

    इससे पहले रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान को अमेरिका के साथ शांति वार्ता में मध्यस्थता करने का प्रस्ताव दिया था.

    क्रेमलिन की वेबसाइट पर जारी रिपोर्ट के अनुसार, रविवार को दोनों नेताओं ने इस्लामाबाद में हुई बातचीत को लेकर फ़ोन पर चर्चा की थी.

  8. इटली की पीएम मेलोनी ने ट्रंप की पोप पर की गई टिप्पणी पर जताई नाराज़गी

    अमेरिकी राष्ट्रपतिडोनाल्ड ट्रंप की पोप लियो (चौदहवें) पर की गई टिप्पणी को इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने ‘अस्वीकार्य’ बताया है.

    ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक लंबी पोस्ट में पोप को अपराध के मुद्दे पर ‘कमज़ोर’ और विदेश नीति के लिए बेहद ‘ख़राब’ बताया था.

    मेलोनी ने अपने बयान में कहा, “पोप कैथोलिक चर्च के प्रमुख है, उनका शांति की अपील करना और हर तरह के युद्ध की निंदा करना बिल्कुल सही और स्वाभाविक है.”

    मेलोनी ख़ुद कैथोलिक हैं और इटली की दक्षिणपंथी गठबंधन सरकार का नेतृत्व करती हैं. वह ट्रंप की क़रीबी सहयोगी मानी जाती हैं और अब तक पोप लियो पर ट्रंप की तीखी आलोचना की खुलकर निंदा करने से बचती रही थीं.

    इटली की विपक्षी पार्टियां अब तक इस मुद्दे पर मेलोनी की चुप्पी की आलोचना करती रहीं.

    इस बीच ट्रंप के बयान पर पोप ने उन पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और कहा कि वो शांति का समर्थन करते रहेंगे.

    पोप लियो ने कहा कि उन्हें ट्रंप प्रशासन का कोई डर नहीं है.

    पोप लगातार ईरान जंग का विरोध करते रहे हैं और उन्होंने ईरानी सभ्यता को ख़त्म करने के ट्रंप के बयान की आलोचना की थी.

  9. इसराइल के लोग जंग चाहते हैं या शांति? आम लोगों की राय में सामने आई ये बात

    यरूशलम की हिब्रू यूनिवर्सिटी ने एक पोल किया, जिसमें सामने आया कि ज़्यादातर इसराइली युद्ध से थक चुके हैं.

    हालांकि लोगों की राय में यह भी सामने आया कि दो-तिहाई लोग अमेरिका और ईरान के मौजूदा अस्थायी युद्धविराम का विरोध करते हैं.

    इस पोल के लिए 9 और 10 अप्रैल को 1312 इसराइली लोगों से बात की गई, इनमें 1084 यहूदी और 228 अरबी हैं.

    ज़्यादातर लोगों ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि हाल की अमेरिकी और इसराइली बमबारी से ईरान या लेबनान में हिज़्बुल्लाह बहुत कमज़ोर हुआ है.

    करीब 39.5% ने कहा कि ईरान पर हमले जारी रहने चाहिए और 41.4% ने कहा कि युद्धविराम का पालन होना चाहिए.

    गौरतलब है कि फ़िलहाल युद्धविराम का दौर जारी है, लेकिन अभी तक युद्ध ख़त्म करने पर सहमति नहीं बनी है.

  10. महिला आरक्षण बिल पर सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सांसदों को चिट्ठी में क्या लिखा

    भारत के महिला समूहों और सामाजिक संगठनों से जुड़े क़रीब पांच सौ लोगों ने 'महिला आरक्षण' और 'परिसीमन' से जुड़े प्रस्तावित विधेयकों पर सवाल उठाए हैं.

    इन्होंने सांसदों को लिखे एक पत्र में कहा कि संसद का विशेष सत्र (16-18 अप्रैल 2026) जल्दबाज़ी में बुलाया गया है.

    495 लोगों के हस्ताक्षर वाले इस पत्र में लिखा है, "हम इस सत्र पर आपत्ति जताते हैं, क्योंकि कई राज्यों में चुनाव चल रहे हैं और आचार संहिता लागू है. हम यह भी मानते हैं कि सरकार ने महिलाओं के समूहों को अपनी सिफ़ारिशें देने का पर्याप्त समय नहीं दिया."

    हस्ताक्षरकर्ताओं ने केंद्र सरकार से बिलों के ड्राफ़्ट को सार्वजनिक करने की मांग की, ताकि सलाह-मशविरा हो सके.

    पत्र में कहा गया है, "इस सत्र का ध्यान केवल नारी शक्ति वंदन अधिनियम में आवश्यक संशोधनों तक सीमित रखा जाए, तो इससे कुछ सकारात्मक परिणाम हासिल हो सकते हैं. महिला आरक्षण को जनगणना के परिणामों और परिसीमन से दूर रखा जाए."

    इन्होंने निर्वाचन आयोग की भूमिका पर भी चिंता जताई है, विशेष रूप से आरक्षित सीटों की पहचान को लेकर.

    इस याचिका के प्रमुख हस्ताक्षरकर्ताओं में रोमिला थापर, अंजना प्रकाश, अमु जोसेफ़, कल्पना कनबीरन और नंदिनी सुंदर शामिल हैं.

  11. ईरान ने इन देशों से की युद्ध में हुए नुक़सान की भरपाई की मांग

    ईरान ने अपने पड़ोसी देशों सऊदी अरब, यूएई, क़तर, बहरीन और कुवैत से जंग में हुए नुक़सान की भरपाई की मांग की गई है.

    ईरान के संयुक्त राष्ट्र में राजदूत अमीर सईद इरवानी ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को एक पत्र भेजा है.

    इस पत्र में कहा गया है कि इन पांच देशों ने अंतरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन किया और अब इन्हें ईरान को हुए नुक़सान की पूरी भरपाई करनी चाहिए.

    बीबीसी फ़ारसी के मुताबिक़, ईरानी राजदूत अमीर सईद इरवानी के लिखे गए पत्र को न्यूज़ एजेंसी आईआरएनए ने प्रकाशित किया है.

    पत्र में लिखा है, "इन पांच देशों ने अंतरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन किया है और ईरान के प्रति अपनी ज़िम्मेदारियों को पूरा नहीं किया है. इसलिए अब उनकी अंतरराष्ट्रीय ज़िम्मेदारी तय हो चुकी है."

    "इन्हें ईरान को हुए सभी नुक़सान की पूरी भरपाई करनी चाहिए, जिसमें भौतिक और मानसिक दोनों तरह के नुक़सान शामिल हैं."

    यह पहली दफ़ा नहीं है जब ईरान ने इस तरह की मांग की है. इससे पहले ईरान ने अमेरिका से भी युद्ध में हुए नुक़सान का मुआवज़ा मांगा था.

  12. ईरान और अमेरिका के बीच फिर होगी बातचीत? पाकिस्तान ने ये बताया

    पाकिस्तान का कहना है कि ईरान और अमेरिका के बीच जल्द ही बातचीत का अगला दौर शुरू हो सकता है.

    पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख़्वाजा आसिफ़ ने कहा है कि युद्धविराम जारी रहने और सकारात्मक हालात को देखते हुए ईरान और अमेरिका के बीच अगली बातचीत जल्द होने की उम्मीद है.

    बीबीसी फ़ारसी के मुताबिक़, सोमवार को इस्लामाबाद में संसद भवन के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए आसिफ़ ने कहा, "हाल की बातचीत के बाद संतोषजनक माहौल है और अब तक कोई नकारात्मक स्थिति सामने नहीं आई है."

    उन्होंने आगे कहा, "सामान्य हालात ही देखे गए हैं और इसे इस बात का संकेत माना जाए कि कूटनीतिक कोशिशें सही दिशा में आगे बढ़ रही हैं."

    इससे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने कहा था कि दोनों पक्षों के बीच हुए युद्धविराम ने आगे बढ़ने की उम्मीदें जगाई है.

    गौरतलब है कि बातचीत का पहला दौर पाकिस्तान के इस्लामाबाद में रखा गया था, इसमें ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधि शामिल हुए, लेकिन यह बेनतीजा रही थी.

  13. अमेरिका ने अब ईरान के किस ऑफ़र को ठुकराया, रिपोर्ट में सामने आई ये बात

    ईरान और अमेरिका के बीच दूसरे दौर की बातचीत को लेकर कयास जारी हैं. इसी बीच ईरान ने पांच साल तक यूरेनियम संवर्धन (एनरिचमेंट) रोकने का प्रस्ताव दिया है, लेकिन अमेरिका ने इसे ठुकरा दिया और 20 साल तक रोकने की मांग की है.

    यह जानकारी न्यूयॉर्क टाइम्स ने ईरानी और अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से दी है.

    रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान में हुई बातचीत के दौरान अमेरिका और ईरान ने परमाणु गतिविधियों को रोकने के अलग-अलग प्रस्ताव दिए, लेकिन दोनों के बीच समझौते पर सहमति नहीं बन सकी.

    हालांकि, चर्चा से यह संकेत मिलता है कि शांति समझौते की संभावना अब भी बनी हुई है और दूसरे दौर की बातचीत हो सकती है.

    बीबीसी ने इस पर टिप्पणी के लिए व्हाइट हाउस से संपर्क किया है.

    अमेरिका मानता रहा है कि ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाएं इस विवाद का बड़ा कारण रही हैं.

    रविवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी दोहराया कि अमेरिका यह सुनिश्चित करेगा कि ईरान परमाणु हथियार हासिल न कर सके.

  14. अमेरिकी उप राष्ट्रपति जेडी वेंस बोले- ईरान 'आर्थिक आतंकवाद' कर रहा

    अमेरिका के उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि ईरानी शासन 'आर्थिक आतंकवाद' कर रहा है, क्योंकि उसने होर्मुज़ स्ट्रेट से गुज़रने वाले जहाज़ों को रोक दिया है.

    जेडी वेंस ने फ़ॉक्स न्यूज़ से कहा, "राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दिखा दिया है कि ये खेल दोनों तरफ़ से खेला जा सकता है."

    उन्होंने कहा, "अगर ईरान आर्थिक आतंकवाद करेगा तो अमेरिका इस सिद्धांत पर चलेगा कि कोई भी ईरानी जहाज़ बाहर नहीं जा पाएगा."

    जेडी वेंस ने इस्लामाबाद में ईरान से हुई बातचीत के बाद कहा है, "काफ़ी प्रगति हुई है, अब गेंद ईरान के पाले में है."

    वेंस ने कहा, "ईरान को फ़्लेक्सिबल होना होगा और अमेरिका की ज़रूरी मांगों को मानना होगा. ईरान के संवर्धित यूरेनियम पर अमेरिका का नियंत्रण होना चाहिए. साथ ही एक जांच व्यवस्था हो जो यह सुनिश्चित करे कि ईरान परमाणु हथियार विकसित न कर सके."

    गौरतलब है कि जेडी वेंस उस बातचीत का भी हिस्सा रहे थे जो पाकिस्तान के इस्लामाबाद में ईरान से हुई थी. हालांकि, यह बेनतीजा रही और दोनों देशों ने बाद में एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए.

  15. लेबनान और इसराइल करेंगे बातचीत, अमेरिकी विदेश मंत्री भी होंगे शामिल

    अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन में मंगलवार को लेबनान और इसराइल के राजदूतों की बैठक होनी है. इस बैठक में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो शामिल होंगे.

    इसराइल के अमेरिका में राजदूत येचिएल लीटर और लेबनान की अमेरिका में राजदूत नदा हमादेह मोवाद, रुबियो के साथ विदेश मंत्रालय में बातचीत करेंगे.

    इस बातचीत का मक़सद दक्षिणी लेबनान में चल रहे संघर्ष को ख़त्म करना है.

    लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इन हमलों से लाखों लोग घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं. 2,000 से ज़्यादा लोग मारे गए और 6,500 से ज़्यादा घायल हुए हैं.

    दूसरी ओर, सोमवार को हिज़्बुल्लाह नेता नाइम क़ासिम ने लेबनान से इसराइल के साथ होने वाली इस बैठक को रद्द करने की अपील की.

    हिज़्बुल्लाह इसराइल के साथ सीधे बातचीत के विचार को ख़ारिज करता है.

  16. नमस्कार!

    बीबीसी न्यूज़ हिन्दी के लाइव पेज पर आपका स्वागत है. मैं बीबीसी संवाददाता रौनक भैड़ा अब से दोपहर दो बजे तक आप तक अहम ख़बरें पहुंचाऊंगा.

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