इसराइली मीडिया में नेतन्याहू और ट्रंप के बीच हुई बातचीत को लेकर ऐसी टिप्पणियां

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इमेज कैप्शन, 28 जुलाई 2026 को अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी स्थित व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू से मुलाक़ात की
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इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने 28 जुलाई को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ अपनी मुलाक़ात को अब तक की "सबसे बेहतरीन बातचीत" बताया.

हालांकि, इसराइली मीडिया की कुछ रिपोर्टों में कहा गया कि बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा ही नहीं हुई, जिससे नेतन्याहू के इस दावे पर सवाल उठे.

मध्य मार्गी न्यूज़ वेबसाइट यनेट ने इसराइल के कुछ अज्ञात अधिकारियों के हवाले से कहा कि कथित गुप्त ईरानी परमाणु ठिकाने, ईरान पर संभावित इसराइली हमले और तुर्की को एफ़-35 लड़ाकू विमान बेचने की संभावना जैसे अहम मुद्दों पर बैठक में चर्चा नहीं हुई. रिपोर्ट के अनुसार, यह नेतन्याहू के बैठक के आकलन से मेल नहीं खाता.

यनेट ने यह भी बताया कि बैठक पत्रकारों की मौजूदगी के बिना हुई, इसके बाद कोई प्रेस बयान भी जारी नहीं किया गया. रिपोर्ट के अनुसार, यह बैठक ऐसे समय हुई जब वॉशिंगटन में नेतन्याहू को लेकर "स्पष्ट अविश्वास" का माहौल था.

इसराइल के अन्य मीडिया संस्थानों ने भी कहा कि ट्रंप और नेतन्याहू की मुलाक़ात अकेले में नहीं हुई थी. बैठक में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो समेत अन्य अधिकारी भी मौजूद थे.

इससे पहले इसराइली मीडिया में ऐसी ख़बरें आई थीं कि ट्रंप सार्वजनिक रूप से ख़ुद को नेतन्याहू से दूर रखने की कोशिश कर रहे हैं.

दक्षिणपंथी अख़बार इस्राएल हयोम ने इसराइल समर्थक रुख़ के लिए जानी जाने वाली स्वतंत्र पत्रकार एरिन मोलन की एक रिपोर्ट का हवाला दिया. मोलन ने बैठक में मौजूद बताए गए एक अज्ञात सूत्र के आधार पर मुलाक़ात के कुछ विवरण साझा किए थे.

इसराइल

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इमेज कैप्शन, 11 मार्च 2026 को ईरान की राजधानी तेहरान के एंगेलाब स्क्वायर में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) और अन्य सैन्य अधिकारियों के अंतिम संस्कार के दौरान प्रदर्शनकारी बिन्यामिन नेतन्याहू और डोनाल्ड ट्रंप के पोस्टर दिखाते हुए

इसराइली मीडिया में और कैसी चर्चा

इसराइल हयोम के अनुसार, ट्रंप और नेतन्याहू इस बात पर सहमत थे कि ईरान से पैदा होने वाले ख़तरे का समाधान ज़रूरी है, लेकिन वे सैन्य कार्रवाई की बजाय कूटनीतिक रास्ते को प्राथमिकता देना चाहते हैं.

यनेट ने इसराइल के राष्ट्रीय जनसंपर्क निदेशालय की प्रमुख और प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू की क़रीबी सहयोगी त्ज़िपी होतोवेली के हवाले से कहा कि यह बैठक बेहतरीन रही.

होतोवेली ने कहा, "चर्चा का मुख्य केंद्र ईरान था और साथ ही अब्राहम एकॉर्ड के विस्तार का मुद्दा भी उठाया गया." अब्राहम एकॉर्ड उन समझौतों की कड़ी है, जिनके तहत कई अरब देशों ने इसराइल के साथ अपने संबंध सामान्य किए थे.

यनेट के अनुसार, होतोवेली ने यह भी कहा, "अमेरिका की ओर से कहीं से भी पीछे हटने की कोई मांग नहीं की गई. न लेबनान से, न सीरिया से और न ही ग़ज़ा से. हमारी सैन्य उपलब्धियों को बरकरार रखा जा रहा है."

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उधर, उदारवादी अख़बार हारेत्ज़ ने लिखा कि नेतन्याहू को यह बैठक तय कराने में काफ़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा.

अख़बार के अनुसार, अमेरिका ने उनसे कहा था कि बैठक से पहले उन्हें किसी एक मोर्चे पर प्रगति दिखानी होगी. इसी के बाद इसराइल ने इस सप्ताह की शुरुआत में इंटरनेशनल स्टेबलाइजेशन फोर्स (आईएसएफ) के सीमित एंट्री को मंज़ूरी दी, जिसका मक़सद ग़ज़ा में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना है.

हारेत्ज़ के अनुसार, अज्ञात सूत्रों ने कहा कि ट्रंप जानते थे कि इसराइल के आगामी चुनावों से पहले नेतन्याहू को अमेरिकी समर्थन की ज़रूरत है और उन्होंने "नेतन्याहू की अपनी निर्भरता का फ़ायदा उठाना अच्छी तरह जान लिया था." सूत्रों ने यह भी कहा कि दोनों नेताओं के बीच मतभेद की ख़बरों का कई सप्ताह तक खंडन करने की कोशिशों के बाद नेतन्याहू ने इस बैठक को सफल माना.

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इमेज कैप्शन, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू (फाइल फोटो)

चुनावी फ़ोटो

पत्रकार नदाव हेत्ज़नी ने इस्राएल हयोम में लिखे अपने लेख में नेतन्याहू की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने केवल "चुनावी फोटो अवसर" हासिल करने के लिए ग़ज़ा के मुद्दे पर रियायतें दीं.

हेत्ज़नी ने लिखा, "डोनाल्ड ट्रंप जैसे अनुभवी राजनीतिक खिलाड़ी के लिए यह साफ़ था कि इस बैठक का असली मक़सद क्या था. इसका मक़सद सिर्फ़ नेतन्याहू के कमज़ोर पड़ते चुनाव अभियान को सहारा देना और कूटनीतिक सफलता की एक झूठी तस्वीर पेश करना था."

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वहीं, हारेत्ज़ के रक्षा मामलों के विश्लेषक आमोस हरेल ने कहा कि "वॉशिंगटन में नेतन्याहू के प्रभाव को ख़त्म मान लेना अभी जल्दबाजी होगी", लेकिन इस बैठक से जुड़े हालात यह संकेत देते हैं कि इसराइल और अमेरिका के रुख़ में दूरी बढ़ रही है.

हरेल ने यह भी कहा कि ट्रंप शायद यह दिखाना चाहते थे कि वे नेतन्याहू के प्रभाव में ज़रूरत से ज़्यादा नहीं हैं.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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