पाकिस्तान के फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर कूटनीति के अहम किरदार कैसे बनते जा रहे हैं?

Asim Munir

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    • Author, रुहान अहमद
    • पदनाम, बीबीसी उर्दू
    • ........से, इस्लामाबाद
  • पढ़ने का समय: 11 मिनट

नवंबर 2022 में जब आसिम मुनीर को थ्री-स्टार जनरल के ओहदे से प्रमोट कर पाकिस्तानी सेना का प्रमुख बनाया गया था तो उस समय देश राजनीतिक अस्थिरता का शिकार था.

उसी वक़्त एक सफल अविश्वास प्रस्ताव के ज़रिए सत्ता से बेदख़ल किए गए इमरान ख़ान देश में 'हक़ीक़ी (असली) आज़ादी' का आंदोलन चला रहे थे.

यह वह समय था जब पूर्व प्रधानमंत्री के समर्थक सड़कों पर अपने नेता की सत्ता से बेदख़ली के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे थे,जबकि इमरान ख़ान सीधे तौर पर सेना पर पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ (पीटीआई) की सरकार को ख़त्म करने के आरोप लगा रहे थे.

इन हालात में सेना के नए प्रमुख बनने वाले जनरल आसिम मुनीर को पीटीआई समर्थकों की तरफ़ से सोशल मीडिया पर भी कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा था. पाकिस्तान की फ़ौज और उस वक़्त की सरकार की तरफ़ से इमरान ख़ान और पीटीआई के आरोपों का बार-बार खंडन किया गया.

राजधानी में स्थित इस्लामाबाद हाईकोर्ट के कैंपस से पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की गिरफ़्तारी के नतीजे में 9 मई 2023 को देश में बड़े पैमाने पर हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए. इन प्रदर्शनों के दौरान रावलपिंडी स्थित पाकिस्तानी सेना के मुख्यालय (जीएचक्यू) सहित दूसरे सैन्य प्रतिष्ठानों को प्रदर्शनकारियों ने निशाना बनाया था.

इन हिंसक प्रदर्शनों के मामले में इमरान ख़ान सहित पार्टी के सैकड़ों नेताओं और कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ मुक़दमे दर्ज किए गए. इमरान ख़ान और पीटीआई का दावा रहा है कि सेना के नेतृत्व ने उन्हें 'इंतिक़ाम का निशाना' बनाया.

ज़ाहिर तौर पर 2023 में 9 मई के दिन ने पाकिस्तान की राजनीतिक स्थिति को बदलकर रख दिया.

'हर मुश्किल से निकलने में कामयाब रहे'

जब आसिम मुनीर को सेना प्रमुख बनाया गया तब इमरान ख़ान देश में 'हक़ीक़ी आज़ादी' का आंदोलन चला रहे थे

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फ़रवरी 2024 में पाकिस्तान में हुए आम चुनावों के नतीजों के बाद केंद्र में पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज़ (पीएमएल-एन) और सहयोगियों की सरकार बनी.

इसके लगभग सवा साल बाद भारत-पाकिस्तान संघर्ष ने जनरल आसिम मुनीर को न केवल फ़ील्ड मार्शल बनाया बल्कि पिछले हफ़्तों के दौरान वह अमेरिका और ईरान के बीच विवाद में प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ और विदेश मंत्री इसहाक़ डार के साथ मिलकर एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ बनकर भी उभरे.

वॉशिंगटन में दूसरी हस्तियों के साथ एक मुलाक़ात के दौरान आसिम मुनीर से 'संक्षिप्त' बातचीत करने वाले न्यूलाइंस इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉक्टर कामरान बुख़ारी कहते हैं कि जब आसिम मुनीर सेना के प्रमुख बने तो देश मुश्किलों का शिकार था.

"इमरान ख़ान 'क्रांति' लाने के लिए निकले हुए थे और यह भी कहा जाता था कि सेना भी उनके ख़िलाफ़ है लेकिन वह हर मुश्किल से निकलने में कामयाब रहे."

इस सफ़र के दौरान कुछ और महत्वपूर्ण घटनाएं भी हुईं.

भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य संघर्ष

कुछ विश्लेषकों का कहना है कि मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य संघर्ष ने पाकिस्तान के आर्मी चीफ़ जनरल आसिम मुनीर को न केवल देश के इतिहास का दूसरा फ़ील्ड मार्शल बना दिया बल्कि उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सहित दुनिया की दूसरी प्रभावशाली शख़्सियतों की निगाह में भी ला दिया.

भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 में लगभग चार दिन तक सैन्य संघर्ष चला.

एशिया ग्रुप में पार्टनर और चीफ़ प्रोडक्ट ऑफिसर उज़ैर यूनुस ने बीबीसी उर्दू से कहा कि भारत के साथ मई में हुआ विवाद आसिम मुनीर और पाकिस्तान दोनों के लिए अहम मोड़ साबित हुआ.

ज़मीन पर पड़ा मलबा

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इमेज कैप्शन, विश्लेषकों का कहना है कि भारत के साथ हुए सैन्य संघर्ष के बाद आसिम मुनीर एक अहम किरदार के रूप में उभरे हैं

उन्होंने कहा कि इस (सैन्य संघर्ष) से देश के अंदर लोगों को संदेश गया कि पाकिस्तानी सेना में भरपूर जवाब देने की ताक़त है और देश के बाहर क्षेत्रीय और वैश्विक शक्तियों को यह संदेश मिला कि बड़ी राजनीतिक और आर्थिक समस्याओं के बावजूद पाकिस्तान के पास ऐसी सैन्य शक्ति मौजूद है जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता.

भारत के ख़िलाफ़ इसी संक्षिप्त सैन्य संघर्ष के बाद पाकिस्तान सरकार ने आसिम मुनीर को तरक़्क़ी दी और वह 5-स्टार जनरल बन गए.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दावा करते हैं कि पाकिस्तान और भारत में युद्धविराम उन्हीं की कोशिशों की बदौलत हुआ और इस्लामाबाद खुलकर उनके इस दावे का समर्थन करता आया है.

डॉक्टर कामरान बुख़ारी कहते हैं कि इसी संघर्ष और फिर उसके बाद हुए संघर्ष विराम ने आसिम मुनीर को राष्ट्रपति ट्रंप का 'पसंदीदा फ़ील्ड मार्शल' बनाया.

"मेरे ख़्याल में जिस तरह से फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने भारत के साथ युद्ध को हैंडल किया उससे अमेरिकी राष्ट्रपति को यह संदेश मिला होगा कि वह एक गंभीर और विश्वसनीय व्यक्ति हैं."

आर्मी चीफ़ से प्रभावशाली हस्ती तक

भारत के ख़िलाफ़ संघर्ष के बाद वॉशिंगटन में मौजूद कुछ विश्लेषकों ने फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर के व्यक्तित्व में आए बदलाव को महसूस किया.

अमेरिका में स्थित 'इंस्टीट्यूट फ़ॉर ग्लोबल अफ़ेयर्स' की नॉन-रेसीडेंट फ़ेलो और विदेश मामलों की विशेषज्ञ डॉक्टर सहर ख़ान ने वॉशिंगटन में आसिम मुनीर को दो दौरों के दौरान क़रीब से देखा है.

इस्लामाबाद में अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस का स्वागत करने वालों में आसिम मुनीर भी थे

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आसिम मुनीर ने बतौर पाकिस्तानी आर्मी चीफ़ अमेरिका का पहला दौरा दिसंबर 2023 में किया था और डॉक्टर सहर ख़ान कहती हैं, "उस वक़्त वह बहुत ख़ामोश थे, ज़्यादा नहीं बोले. वह बहुत आत्मविश्वास में भी नहीं लग रहे थे."

"वॉशिंगटन में लोग जनरल अशफ़ाक़ परवेज़ कयानी, जनरल क़मर जावेद बाजवा और जनरल राहिल शरीफ़ जैसे खुलकर बात करने वाले लोगों को देखने के आदी थे."

लेकिन वह कहती हैं कि जब फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर दूसरी बार वॉशिंगटन आए, तो लोग उनसे 'प्रभावित हुए बिना नहीं रह सके.'

"जब वह जून 2025 में आए तो बहुत आत्मविश्वास में थे और यह भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध के ठीक बाद का समय था. लोग उनसे इसलिए भी प्रभावित हुए क्योंकि ट्रंप प्रशासन ने उस समय के संकट को संभालने की जो कोशिश की, आसिम मुनीर ने उसे अमेरिका और राष्ट्रपति ट्रंप के साथ संबंध बेहतर बनाने के लिए इस्तेमाल किया."

जब आसिम मुनीर ने सेना प्रमुख के रूप में चार्ज लिया तो उस समय लेफ़्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) मोहम्मद सईद उनके चीफ़ ऑफ जनरल स्टाफ़ थे.

उन्होंने बीबीसी उर्दू को बताया कि वह फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर को उस समय से जानते हैं जब वह एक युवा अधिकारी थे.

"वह ज़्यादा मेलजोल पसंद नहीं करते. आप उन्हें गपशप करते हुए नहीं देखेंगे. वह अपने काम से काम रखते हैं."

तेहरान में ईरानी संसद के स्पीकर बग़र ग़ालिबाफ़ से मुलाक़ात करते आसिम मुनीर

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आसिम मुनीर सिर्फ़ ट्रंप के 'पसंदीदा फ़ील्ड मार्शल' ही नहीं हैं बल्कि वह प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ के साथ दूसरे देशों के दौरों पर भी नज़र आते हैं.

कभी वह चीन में दिखते हैं, कभी सऊदी अरब में और कभी ईरान में. जब पाकिस्तान और सऊदी अरब ने पिछले साल संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए तो प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ के साथ आसिम मुनीर भी वहां मौजूद थे.

पाकिस्तान में राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर को विदेश मामलों से जुड़े फ़ैसले लेने में अभी की सरकार का भरपूर समर्थन मिल रहा है.

ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थ की भूमिका

इस वर्ष 28 फ़रवरी को ईरान पर अमेरिका और इसराइल के हमलों और जंग की शुरुआत के बाद पाकिस्तान ने सक्रिय रूप से मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश की. हालांकि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत का प्रस्ताव फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने पिछले साल ही दे दिया था.

जून 2025 में फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर पहली बार राष्ट्रपति ट्रंप से मिलने के लिए व्हाइट हाउस पहुंचे थे और बीबीसी ने उस समय रिपोर्ट किया था कि दोनों की मुलाक़ात में ईरान का ज़िक्र आया था.

इस मुलाक़ात के बाद आसिम मुनीर ने अमेरिका में पाकिस्तानी दूतावास में एक भोज के दौरान कुछ लोगों से मुलाक़ात भी की थी. इस मुलाक़ात में पाकिस्तान-अमेरिका की विदेश नीति के कई विशेषज्ञ भी शामिल हुए थे.

डॉक्टर कामरान बुख़ारी के अनुसार वह भी उनसे मिलने वाले लोगों में शामिल थे.

उन्होंने बीबीसी को बताया कि फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने वहां मौजूद लोगों से कहा था, "हमने उन्हें (राष्ट्रपति ट्रंप को) बताया कि कूटनीति ही तनाव कम करने का तरीक़ा है और हम (पाकिस्तान) आपकी (अमेरिका) मदद कर सकते हैं."

ईरान के साथ जारी विवाद के दौरान एक तरफ़ प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ और विदेश मंत्री इसहाक़ डार ने मध्य पूर्व सहित दुनिया भर के देशों से संपर्क बढ़ाकर इस विवाद को ख़त्म करने की कोशिश की. दूसरी तरफ़ फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर भी राष्ट्रपति ट्रंप सहित अमेरिका और ईरान के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व के संपर्क में रहे.

सऊदी दौरे में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के साथ आसिम मुनीर भी थे

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व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कुछ दिन पहले बीबीसी उर्दू को राष्ट्रपति ट्रंप और आसिम मुनीर के बीच संपर्कों की पुष्टि की थी.

पाकिस्तानी राजधानी इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता का पहला दौर 11 अप्रैल को हुआ था और इस दौरान अलग-अलग पक्षों के साथ कमरे में प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ और फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर भी मौजूद थे.

यह वार्ता बेनतीजा ख़त्म हुई लेकिन इस बात पर सहमति बनी कि बातचीत जारी रहेगी.

राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार तेहरान और वॉशिंगटन में संघर्षविराम भी पाकिस्तान के अनुरोध पर ही किया गया था.

राष्ट्रपति ट्रंप अब कह चुके हैं कि वार्ता का दूसरा दौर पाकिस्तान में नहीं होगा, हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि इस्लामाबाद इन वार्ताओं में शामिल रहेगा.

मध्यस्थ के तौर पर क़बूल क्यों?

यहां यह सवाल पैदा होता है कि वॉशिंगटन और तेहरान दोनों तक पहुंच रखने वाले आसिम मुनीर आख़िर दोनों देशों के लिए मध्यस्थ के तौर पर क़बूल क्यों हैं?

टीकाकारों का कहना है कि ईरान, खाड़ी के दूसरे देश और अब अमेरिका के साथ अच्छे संबंध पाकिस्तान को एक सही मध्यस्थ बनाते हैं.

एशिया ग्रुप से जुड़े उज़ैर यूनुस कहते हैं, "आसिम मुनीर के नेतृत्व में पाकिस्तान सभी महत्वपूर्ण देशों के लिए एक अहम साझेदार बनकर उभरा है."

"पाकिस्तान ने ऐसा सऊदी अरब, चीन और अमेरिका जैसे अपने सहयोगियों और साझेदारों की राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकताओं को सकारात्मक तरीक़े से आगे बढ़ाकर किया है."

डॉक्टर सहर ख़ान कहती हैं कि फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर एक 'सफल मध्यस्थ' इसलिए भी हैं क्योंकि वह ईरान और अमेरिका की 'रेडलाइन्स' को समझते हैं. "वह अमेरिका को बता सकते हैं कि ईरान क्या चाहता है और ईरान को बता सकते हैं कि अमेरिका क्या चाहता है."

पूर्व 3-स्टार जनरल मोहम्मद सईद का मानना है कि ईरान और अमेरिका दोनों ही फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर पर भरोसा करते हैं और यही कारण है कि वह एक प्रभावी मध्यस्थ साबित हो रहे हैं.

डोनाल्ड ट्रंप

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उनके अनुसार फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर के ईरान के सैन्य और ख़ुफ़िया नेतृत्व के साथ पुराने संबंध हैं.

"उनके ईरान के इंटेलिजेंस चैनल और पासदारान-ए-इंक़लाब (आईआरजीसी) से उस समय से संपर्क हैं जब वह वर्ष 2016 में मिलिट्री इंटेलीजेंस के डायरेक्टर जनरल (डीजी एमआई) थे. फिर 2018 और 2019 में आईएसआई के महानिदेशक (डीजी आईएसआई) रहे. इसके बाद वह पिछले चार वर्षों से पाकिस्तानी सेना के प्रमुख हैं."

डॉक्टर कामरान बुख़ारी के अनुसार राष्ट्रपति ट्रंप से व्यक्तिगत संबंधों ने फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया.

"राष्ट्रपति ट्रंप प्रोटोकॉल को ज़्यादा फ़ॉलो नहीं करते, वह यह नहीं कहते कि चूंकि मैं राष्ट्रपति हूं, इसलिए इस देश के प्रधानमंत्री से संबंध रखूंगा. उनका दृष्टिकोण यह है कि इस देश में शक्ति किसके पास है? यह स्पष्ट है कि वह आसिम मुनीर के पास है."

हालांकि ईरान के बारे में वह कहते हैं कि तेहरान के पास और कोई विकल्प नहीं है और अगर फ़ील्ड मार्शल के अलावा कोई और जनरल होता तब भी ईरान को उसे स्वीकार करना था.

"बताएं कौन करवाएगा मध्यस्थता? तुर्की भी उनका प्रतिद्वंद्वी है, उस पर ईरान ने तीन मिसाइलें दागी हैं. सऊदी अरब नहीं कर सकता, चीन और रूस इस खेल का हिस्सा नहीं हैं और ओमानी राजनयिक चैनल भी ख़त्म हो गया था."

"ईरान को भी पता है कि इस व्यक्ति (आसिम मुनीर) की व्हाइट हाउस से नज़दीकी है. उसके सऊदी अरब और तुर्की के साथ भी संबंध हैं."

हालांकि लेफ़्टिनेंट जनरल मोहम्मद सईद कहते हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप आसिम मुनीर को इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि वह "दो-टूक अंदाज़ में फ़ैसले लेते हैं और स्पष्ट बात करने के आदी हैं."

मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन से संबंधित पृष्ठभूमि में आलोचना

असीम मुनीर अपने अमेरिका दौरे के दौरान डीसी फॉरेन पॉलिसी विशेषज्ञों से बातचीत करते हुए

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फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर का क़द विदेश में बढ़ रहा है और देश में कुछ समय पहले तक उन पर मानवाधिकारों के उल्लंघन के जो आरोप पीटीआई के चेयरमैन इमरान ख़ान और दूसरे आलोचक लगाते थे, वो ज़ाहिर तौर पर पृष्ठभूमि में जाते नज़र आए.

पीटीआई और उसके प्रमुख इमरान ख़ान ने अतीत में पाकिस्तान के मिलिट्री इस्टैब्लिशमेंट पर कथित चुनावी धांधली के ज़रिए वर्तमान सरकार को सत्ता में लाने के आरोप भी लगाए हैं, जिनका सेना की ओर से कई बार खंडन किया गया है.

इमरान ख़ान फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर की तुलना अतीत के तानाशाहों से भी करते रहे हैं और यह दावे भी कर चुके हैं कि उन्हें, उनकी पत्नी और पीटीआई नेतृत्व को "आसिम मुनीर के आदेश पर झूठे मुक़दमों में जेल में रखा गया है और गंभीर मानसिक प्रताड़ना दी जा रही है."

उन्होंने कई बार फ़ौज पर यह आरोप भी लगाए कि वह पीटीआई नेताओं के ख़िलाफ़ कार्रवाई करवा रही है.

एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसे संस्थान भी अतीत में इमरान ख़ान की हिरासत और उनकी पार्टी के नेताओं की गिरफ़्तारियों और कथित 'क्रूर और जानलेवा कार्रवाई' पर चिंता व्यक्त करते रहे हैं.

आरिफ़ा नूर इस बात से सहमत होते हुए कहती हैं कि यह पाकिस्तान का इतिहास है कि जब भी यह रणनीतिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अच्छी स्थिति में आता है तो देश में मानवाधिकारों के उल्लंघन और लोकतंत्र की बातें पीछे चली जाती हैं.

उन्होंने कहा कि "पाकिस्तान में हमेशा से ही यह समझ रही है कि मिलिट्री इस्टैब्लिशमेंट विदेश नीति पर कंट्रोल रखती है. वर्तमान (सैन्य) नेतृत्व के पास इसकी ज़्यादा गुंजाइश मौजूद है क्योंकि उसका संबंध सरकार से शुरू से ही ऐसा है."

हालांकि वर्तमान स्थिति में फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर की बड़ी आलोचक पीटीआई भी उनके मध्यस्थ के रूप में भूमिका पर आलोचना करने से बचती रही है.

पीटीआई के नेता ज़ुल्फ़ी बुख़ारी ने बीबीसी उर्दू से कहा, "हमारी चिंताएं अलग हैं और यह आंतरिक मामलों के बारे में हैं. जहां तक पाकिस्तान की किसी भूमिका का सवाल है वह छोटी भूमिका निभाए या बड़ी, अगर इससे क्षेत्र में स्थिरता आती है और करोड़ों लोगों की परेशानी ख़त्म हो सकती है तो इमरान ख़ान और उनकी पार्टी इसका स्वागत करती है."

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