'जादुई ताक़त होने की बात कर एक इमाम ने मेरा यौन शोषण किया'

- Author, कैथरीन वॉएट
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 7 मिनट
इस रिपोर्ट में यौन उत्पीड़न और बलात्कार का वर्णन आपको विचलित कर सकता है.
जब "आरिया" (असली नाम नहीं) 13 साल की थीं, तब एक इमाम ने उनका यौन उत्पीड़न किया. इमाम ने उससे कहा था कि वो उसे 'ठीक' कर रहे हैं.
पूर्वी लंदन की एक मस्जिद में एक सम्मानित धार्मिक नेता, अब्दुल हलीम ख़ान, युवा लड़कियों और उनके माता-पिता से कहते थे कि उन्हें 'बुरी आत्माओं' से 'इलाज' कराने की जरूरत है.
उन्होंने लड़कियों को चेतावनी दी कि अगर उन्होंने किसी को भी इसके बारे में बताया, तो तथाकथित इलाज बेकार चला जाएगा.
उनके साथ बुरा हो सकता है या काले जादू से उन्हें और उनके परिवारों को नुक़सान पहुंचेगा.
आरिया कहती हैं, "मुझे सचमुच विश्वास था कि उनके पास अलौकिक शक्तियां हैं.'
आरिया कहती हैं कि ख़ान ने उनसे कहा था कि अगर उन्होंने कभी भी इस दुर्व्यवहार के बारे में बात की तो "मेरे और मेरे परिवार के साथ कुछ बहुत बुरा होगा". और वह अकेली नहीं थीं.
ख़ान ने 11 वर्षों में सात महिलाओं और लड़कियों का इसी तरह से यौन शोषण किया.
ख़ान ने जिन महिलाओं और लड़कियों के साथ इस तरह का दुर्व्यवहार किया, उनमें सबसे कम उम्र की सिर्फ़ 12 साल की बच्ची थी.
ख़ान उन्हें किसी सुनसान जगह पर मिलने के लिए मना लेते थे, जैसे कि कोई फ्लैट या कार.
वहाँ वह जिन्न होने का नाटक करते हुए उनका बलात्कार या यौन शोषण करते थे.
ख़ान ने रंगीन खिड़कियों वाली गाड़ियां चुनीं. एक सर्वाइवर को फोन दिया ताकि वह उनसे संपर्क कर सके.
और दूसरी सर्वाइवर को अपने बेडरूम की खिड़की से बाहर निकलकर मिलने के लिए तैयार किया.
आरिया के स्कूल में परेशानी शुरू होने के बाद, उनकी मां ने ही उसे ख़ान से मिलवाया था.
उन्होंने आरिया को बताया था कि इमाम उन्हें सलाह देंगे.
जब उनकी मुलाकात हुई, तो ख़ान ने उन्हें अपनी कार में बैठने के लिए कहा.
आरिया कहती हैं, "तभी उन्होंने मुझे गलत तरीके से छुआ."
"मेरी आंखें बंद थीं और उन्होंने कहा कि कार की खिड़की पर कुछ खटखटाने की आवाजें आएंगी.
और मैंने सचमुच वो आवाजें सुनीं. लेकिन जाहिर है मैं 13 साल की थी, मैं बहुत डर गई थी."

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54 वर्षीय ख़ान को अब इन भयावह हमलों के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है, जिसमें न्यूनतम 20 साल की कैद है.
उन पर बलात्कार के नौ मामलों के साथ-साथ स्थानीय मुस्लिम समुदाय की सात सर्वाइवर के साथ यौन उत्पीड़न और बाल शोषण के अन्य मामले भी दर्ज हैं.
ख़ान ने 2004 और 2015 के बीच इन लड़कियों और महिलाओं पर ये यौन हमले किए, जिसमें उसने अपनी ताक़त और प्रभाव का इस्तेमाल करके सर्वाइवर को चुप रहने के लिए मजबूर किया.
पुलिस को 2018 में उनके अपराधों के बारे में तब पता चला जब सबसे कम उम्र की सर्वाइवर ने अपने स्कूल के थेरेपिस्ट को दुर्व्यवहार के बारे में बताया.
उन पर आरोप लगने में पांच साल और लग गए.
बीबीसी ने ख़ान के दो सर्वाइवर से उनके अनुभवों के बारे में बात की है.
'मेरे परिवार ने मेरी बात पर भरोसा नहीं किया'

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फराह (असली नाम नहीं) की मुलाक़ात खान से बचपन में हुई थी. इमाम ने फराह की मां को यह विश्वास दिलाया कि उनकी बेटी को इलाज की जरूरत है.
उनका कहना है कि ख़ान ने उनके परिवार का फ़ायदा उठाया.
वह मनगढ़ंत कहानियां सुनाते थे. कहते थे ''मैं देख सकता हूं कि कुछ चीजें तुम्हारी ओर आ रही हैं, तुम्हें सुरक्षा की जरूरत है, मुझे तुम्हारी बेटी की रक्षा करनी है.''
ख़ान ने फराह का यौन उत्पीड़न किया और बताया कि यह "इलाज" का हिस्सा था.
वह कहती हैं कि ख़ान का दुर्व्यवहार उन्हें समझ में नहीं आया.
वह कहती हैं, "मैंने खुद से कहा, 'यह गलत है. आपको पता है कि इस तरह से छूना नहीं चाहिए. मैं बहुत उलझन में थी, लेकिन मैं अपने परिवार के पास वापस नहीं जा सकी क्योंकि वे मेरी बात पर विश्वास नहीं करते."
आखिरकार जब फराह किशोरी हुई तो उन्होंने अपने माता-पिता को सब कुछ बता दिया. लेकिन वह कहती हैं कि उन्होंने उस पर विश्वास नहीं किया और फिर वह घर छोड़कर चली गई.
वो कहती हैं, "मेरे परिवार ने मुझ पर विश्वास नहीं किया. जिन लोगों से मुझे सुरक्षा और समर्थन की उम्मीद थी, उन्होंने मुझसे मुंह मोड़ लिया, मुझे ही दोषी ठहराया और आज तक ऐसा करना जारी रखे हुए हैं.''
उन्होंने कहा, ''मुझे ऐसा लगता है जैसे मैं खो गई हूं. मैं अपनी पहचान पर सवाल उठाती हूं कि मैं कौन हूँ? मैं कहां की हूं?
धमकी और ब्रेनवॉश
क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस के लिए इस मामले पर काम करने वाली विशेषज्ञ अभियोजक मेलिसा गार्नर का कहना है कि उन्होंने ख़ान की ओर से युवा लड़कियों और महिलाओं के साथ किए गए दुर्व्यवहार जैसा कुछ पहले कभी नहीं देखा.
वह कहती हैं कि उन्होंने सर्वाइवर्स को धमकाया और उनका इस कदर ब्रेनवॉश किया कि वे यह मानने लगें कि उन पर भूत-प्रेत का साया है.
उन्होंने कहा "यह बेहद चौंकाने वाला था, और जब आप सर्वाइवर के बयान देखते हैं, तो यह बेहद परेशान करने वाला होता है."
ब्रिस्टल विश्वविद्यालय में अपराध विज्ञान की प्रोफ़ेसर और मामले की धार्मिक पृष्ठभूमि पर साक्ष्य देने वाली विशेषज्ञ और अभियोजन की गवाह आयशा के गिल का कहना है कि हालांकि रूढ़िवादी इस्लामी शिक्षा काले जादू का समर्थन नहीं करती है, फिर भी इसका " अहम सांस्कृतिक असर" बना हुआ है.
प्रोफेसर गिल आगे कहती हैं, " सर्वाइवर को यह विश्वास दिलाया गया था कि केवल ख़ान ही उन्हें और उनके परिवारों को भयावह अलौकिक नुक़सान से बचा सकता है. उनके नियंत्रण से बाहर निकलने से वे विनाशकारी नतीजों के शिकार हो जाएंगे."
उनका कहना है कि यौन हिंसा के बारे में बताना मुस्लिम महिलाओं के लिए गंभीर जोखिम भरा हो सकता है.
वो कहती हैं, "कई महिलाओं को इस तरह से सामाजिक रूप से तैयार किया जाता है कि वे निजी मामलों पर परिवार के बाहर चर्चा न करें और वे उस शर्म को अपने भीतर समाहित कर लेती हैं जो वास्तव में अपराधी की होती है."
गहरा असर
फराह का कहना है कि उन्होंने सामान्य बचपन नहीं बिताया . उनका कहना है कि इसके बजाय उन्होंने बर्दाश्त करना सीखा.
वो कहती हैं "जीवित रहना कमजोरी नहीं है यह आपकी ताकत को दिखाता है.''
हालांकि जब आरिया पर हमला हुआ था तब वह सिर्फ एक किशोरी थी. लेकिन जब वह 20 साल की हुई तब जाकर वह टूट गई और उसने अपनी मां को इसके बारे में बताया.
उनका कहना है कि इस हमले का उन पर गहरा असर पड़ा है.
वो कहती हैं, "कभी-कभी मन में यह सवाल उठता है कि अगर मेरे साथ यह घटना न घटी होती तो मैं कैसी इंसान होती?"
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित


































