खड़े होकर पानी पीना सेहत के लिए सही है या ग़लत? डॉक्टर से जानिए

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- Author, शारदा वी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 5 मिनट
आपने इंटरनेट पर कई ऐसे वीडियो देखे होंगे जिनमें कहा जाता है कि खड़े होकर पानी नहीं पीना चाहिए, बल्कि बैठकर पीना चाहिए.
कहा जाता है कि खड़े होकर पानी पीने से शरीर का फ्लूइड बैलेंस बिगड़ सकता है, अपच हो सकती है और जोड़ों में दर्द भी हो सकता है.
वहीं, खड़े होने की तुलना में बैठकर पानी पीना ज़्यादा शांतिपूर्ण और स्थिर होता है. इसीलिए परिवार के बड़े-बुज़ुर्ग हमेशा कहते हैं कि पानी बैठकर पीना चाहिए.
लेकिन, सच क्या है, ग़लतफ़हमी क्या है और विज्ञान क्या कहता है? आइए जानते हैं कि डॉक्टर इस बारे में क्या कहते हैं.
'पानी न पीना ज़्यादा ख़तरनाक है'

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एलोपैथिक, आयुर्वेदिक डॉक्टर भी खड़े होकर पानी पीने के बजाय बैठकर पानी पीने की सलाह देते हैं.
हालांकि, डॉक्टर यह भी कहते हैं कि खड़े होकर पानी पीने से सेहत को कोई ख़तरा होता है, जोड़ों का दर्द होता है या कोई और समस्या होती है, इस बात को साबित करने के लिए कोई ठोस वैज्ञानिक सबूत या रिसर्च मौजूद नहीं है.
गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर सर्जन डॉ. सेंथिल कुमार गणपति का कहना है कि पानी न पीना ज़्यादा ख़तरनाक है. पानी न पीने के बजाय खड़े होकर पानी पीना हमेशा बेहतर होता है.
हालांकि, जब उनसे हमने यह सवाल पूछा कि "क्या मुझे खड़े होकर पानी पीना चाहिए या बैठकर?", तो वे कहते हैं, "बैठकर पानी पीना बेहतर है."
डॉ. गणपति कहते हैं, "खड़े होने के मुकाबले बैठने पर व्यक्ति ज्यादा शांत और स्थिर रहता है. इसलिए अगर आप बैठकर धीरे-धीरे पानी पीते हैं, तो यह भोजन नली से होते हुए ठीक तरह से पेट पेट यानी आंतों तक पहुंचता है."
उनके मुताबिक, खाना खाते समय बैठकर पानी पीना फ़ायदेमंद होता है. इससे खाना पचाने में मदद मिलती है. खाने के बीच-बीच में थोड़ा पानी पीने से खाना आसानी से भोजन नली से नीचे चला जाता है.
'धीरे-धीरे पानी पीना चाहिए'
डॉक्टरों के अनुसार, लेटकर पानी पीना खड़े होकर या बैठकर पानी पीने की तुलना में ज़्यादा ख़तरनाक हो सकता है.
सरकारी मेडिकल ऑफ़िसर डॉ. चंद्रशेखरन कहते हैं, "अगर आप लेटकर पानी पीते हैं, तो पानी भोजन नली के बजाय सांस की नली में जा सकता है. इससे खतरा हो सकता है."
"पानी पीते समय लगभग 45-डिग्री के कोण पर सीधा बैठना सबसे अच्छा होता है. इससे पानी ठीक से पेट तक पहुँच पाता है. हालाँकि, इस बात का कोई ठोस सबूत नहीं है कि खड़े होकर पानी पीने से कोई खतरा या स्वास्थ्य संबंधी समस्या होती है."

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वहीं, डॉक्टर सलाह देते हैं कि पानी एक साथ ज्यादा मात्रा में पीने के बजाय धीरे-धीरे घूंट लेकर पीना चाहिए. उनका कहना है कि पानी पीते समय सिर पीछे करके एक ही बार में पानी पीने से बचना चाहिए.
वह कहते हैं, "सामान्य तापमान का पानी धीरे-धीरे घूंट लेकर पिएं, एक ही बार में ज्यादा पानी न पिएं. एक साथ बहुत ज्यादा पानी पीने से पानी गले में अटक सकता है और दम घुटने का खतरा हो सकता है."
डॉ. गणपति कहते हैं कि अगर आप खाना खाते समय नहीं, बल्कि प्यास लगने पर पानी पी रहे हैं, तो खड़े होकर भी पानी पी सकते हैं.
उनके अनुसार, शरीर में पानी की कमी को पूरा करने के लिए आप खड़े होकर पानी पी सकते हैं. उदाहरण के लिए, अगर मैराथन दौड़ने के बाद आपको बहुत प्यास लगी है, तो खड़े होकर पानी पीने से शरीर को तेज़ी से पानी की पूर्ति में मदद मिल सकती है.
कोई फर्क पड़ता भी है?

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डॉ. गणपति कहते हैं, "चूंकि आंतें सीधी नली जैसी नहीं होतीं, इसलिए इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ता कि आप खड़े होकर पानी पीते हैं या बैठ कर. छोटी आंत लगभग 6 मीटर लंबी होती है और बड़ी आंत लगभग 2 मीटर लंबी. शरीर में ये आंतें सीधी नहीं, बल्कि मुड़ी हुई होती हैं. इसलिए, व्यक्ति के खड़े होने या बैठने से पानी के आंतों तक पहुंचने पर कोई खास असर नहीं पड़ता."
लेकिन डॉ. गणपति धीरे-धीरे और छोटे-छोटे घूंट लेकर पानी पीने की सलाह देते हैं.
वह कहते हैं, "अगर आप जल्दी-जल्दी पानी पीते हैं, तो गले की मांसपेशियों पर दबाव पड़ सकता है और आपको असहज महसूस हो सकता है. जल्दबाज़ी में पानी पीने पर गले की मांसपेशियां उसे जल्दी निगलने की कोशिश करती हैं. ऐसे में पानी की कुछ बूंदें गलती से सांस की नली में जा सकती हैं और वहां अटक सकती हैं."
क्या कहता है आयुर्वेद?

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सरकारी आयुर्वेदिक डॉक्टर बालमुरुगन का कहना है कि आयुर्वेद में पानी बैठकर पीना चाहिए या खड़े होकर, इस बारे में कोई ख़ास नियम नहीं है. हालांकि, पानी धीरे-धीरे और घूंट-घूंट करके पीने पर खास ज़ोर दिया जाता है.
डॉ. बालमुरुगन कहते हैं, "आयुर्वेद के अनुसार, पानी हमेशा मुंह बंद करके पीना चाहिए; खासकर पानी को होंठों से लगाकर और छोटे-छोटे घूंट लेकर पीना बेहतर होता है. आयुर्वेद में प्यास को शरीर की 13 ज़रूरतों में से एक माना गया है. अगर प्यास न बुझाई जाए, तो शरीर पर इसका बुरा असर पड़ सकता है. इसलिए, चाहे आप खड़े होकर पानी पिएं या बैठकर, सबसे ज़रूरी बात यह है कि प्यास लगने पर उसे नज़रअंदाज़ न करें और पानी पिएं."
डॉ. बालमुरुगन आगे कहते हैं, "अगर आप मुंह खोलकर पानी पीते हैं, तो पानी के साथ हवा भी पेट में जा सकती है. यह शरीर के लिए अच्छा नहीं है. इसलिए, अपने होंठ बंद रखें और धीरे-धीरे पानी पिएं. शरीर में ज़्यादा हवा जाने से आपको तुरंत कोई परेशानी महसूस नहीं होगी. हालांकि, अगर यह आदत लंबे समय तक बनी रहती है, तो इससे गैस जैसी समस्याएं हो सकती हैं."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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