पीएम मोदी के वीडियो विवाद के बीच ज़करबर्ग ने यौन शोषण से जुड़े विज्ञापनों के लिए मांगी माफ़ी

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बीबीसी को सूत्रों ने पुष्टि की है कि मार्क ज़करबर्ग ने सीएसएएम कंटेंट, डीपफ़ेक कंटेंट और प्लेटफ़ॉर्म चलाने में हुई 'ग़लतियों' के लिए भारत सरकार से माफ़ी मांगी है.
मार्क ज़करबर्ग की माफ़ी ऐसे समय आई है जब सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने इंस्टाग्राम और फ़ेसबुक से पीएम मोदी का एक वीडियो कुछ समय के लिए हटाए जाने के लिए माफ़ी की मांग की थी.
बीते महीने बीबीसी-आई की एक पड़ताल में पाया गया था कि मेटा के स्वामित्व वाला सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म इंस्टाग्राम भारत में पैसे लेकर ऐसे विज्ञापन चला रहा है, जिनके ज़रिए बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री (सीएसएएम) का प्रसार हो रहा है.
इस रिपोर्ट के प्रकाशित होने के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अधिकारियों को मेटा से स्पष्टीकरण मांगने और उसे तलब करने का निर्देश दिया था.
बीबीसी को यह जानकारी सूत्रों के हवाले से मिली थी.
सूत्रों के मुताबिक़, मार्क ज़करबर्ग ने माना है कि कुछ ख़ास तरह के कंटेंट को बूस्ट करने के लिए बहुत सारा पैसा दिया गया था, उन्होंने माफ़ी मांगी और ग़लती पर अफ़सोस जताया.
मेटा ने यह ग़लती मानी कि बहुत सारा ग़ैर-क़ानूनी कंटेंट प्रमोट किया गया था और ख़ास ऑडियंस के लिए पेड प्रमोशन किया गया था.
मेटा अधिकारियों ने की थी वरिष्ठ अफ़सर से मुलाक़ात
वहीं दूसरी ओर बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो हटाए जाने के मामले में मेटा के मुख्य वैश्विक मामलों के अधिकारी जोएल कपलान के नेतृत्व में कंपनी के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन से मुलाक़ात की थी.
यह बैठक ऐसे समय हुई, जब संसद की संचार और सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति ने बुधवार को मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) मार्क ज़करबर्ग से प्रधानमंत्री मोदी का वीडियो फ़ेसबुक से हटाए जाने के मामले में बिना शर्त माफी मांगने की मांग की थी.
एएनआई के मुताबिक,करीब 45 मिनट तक चली इस बैठक में मेटा के अधिकारियों ने प्रधानमंत्री मोदी का वीडियो ग़लती से हटाए जाने के कारणों की जानकारी दी.
मेटा के अधिकारियों की केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव से भी मुलाक़ात करने की संभावना है.
समिति ने चेतावनी दी थी कि अगर इस तरह की घटनाएं दोहराई जाती हैं, तो भारत में मेटा को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है.

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मेटा पर क्या है आरोप
जंतर-मंतर और देश के कई हिस्सों में स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट के दौरान 23 जुलाई को स्टूडेंट्स को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी का वीडियो मेटा के स्वामित्व वाले फ़ेसबुक और इंस्टाग्राम से कुछ समय के लिए हटा दिया गया था, लेकिन बाद में उसे फिर से बहाल कर दिया गया.
एनडीटीवी के मुताबिक़, इस घटना के लिए तकनीकी गड़बड़ी को ज़िम्मेदार ठहराया गया था. हालांकि, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इस स्पष्टीकरण को "अपर्याप्त" बताया था.
कंपनी ने कहा था कि सामग्री "ग़लती से" हट गई थी और बाद में उसे प्लेटफॉर्म पर दोबारा उपलब्ध करा दिया गया.
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने उन मध्यस्थ (इंटरमीडियरी) प्लेटफॉर्म के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की, जिन पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री (सीएसएएम) और महिलाओं का अपमान करने वाली सामग्री मौजूद होती है.
हिंदुस्तान टाइम्स ने 4 अगस्त को अपनी रिपोर्ट में बताया कि संसद की संचार और सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने चेतावनी दी है कि अगर मेटा ने निर्देशों का पालन नहीं किया, तो भारत के सूचना प्रौद्योगिकी क़ानून की धारा 79 के तहत उसे मिलने वाला 'सेफ़ हार्बर' संरक्षण समाप्त किया जा सकता है.
'सेफ़ हार्बर' प्रावधान के तहत ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म और इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को उनके मंच पर मौजूद तीसरे पक्ष की सामग्री के लिए कानूनी ज़िम्मेदारी से सुरक्षा मिलती है, बशर्ते वे आवश्यक सावधानी बरतें.
गूगल, मेटा और यूट्यूब समेत प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में समिति की बैठक की अध्यक्षता करने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए दुबे ने प्रधानमंत्री मोदी का वीडियो हटाए जाने को "गंभीर मामला" बताया.
रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यह मेटा की सामग्री प्रबंधन नीति में एक व्यापक प्रवृत्ति को दर्शाता है.
इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इस घटना पर स्पष्टीकरण देने के लिए मेटा की वैश्विक नीति टीम के वरिष्ठ अधिकारियों को तलब किया था.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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