अचानक शराब छोड़ने के बाद क्या होता है, हर रोज़ कितनी मात्रा में शराब पीना सुरक्षित है?

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इमेज कैप्शन, अल्कोहल सीधे पेट से छोटी आंत में जाता है. वहाँ अल्कोहल एल्डिहाइड नामक रसायन में टूट जाता है
    • Author, सुभाष चंद्र बोस
    • पदनाम, बीबीसी तमिल
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 11 मिनट

हर किस्म के नशे से मुक्त रहना अच्छे स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. सभी नशों का सेहत पर बुरा असर पड़ता है लेकिन शराब के शारीरिक दुष्प्रभाव कहीं अधिक चौंकाने वाले हैं.

शराब पर नए शोध सामने आए हैं और इन्हें नज़रअंदाज़ करना महंगा पड़ सकता है.

डॉक्टरों के मुताबिक़, शराब का सेवन चाहे कभी-कभार किया जाए या रोज़ाना, यह शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है.

इस लेख में शराब के शारीरिक और मानसिक दुष्प्रभावों और अचानक शराब पीना बंद करने के परिणामों पर चर्चा की गई है.

(यह लेख पहली बार बीबीसी तमिल में साल 2024 में प्रकाशित किया गया )

हम जो शराब पीते हैं, वो कहाँ जाती है?

शराब पीता एक व्यक्ति

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इमेज कैप्शन, विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाएँ पुरुषों की तुलना में शराब के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं

कई लोगों का मानना है कि वे जो शराब पीते हैं, वह सीधे उनके पेट में जाती है और फिर मूत्र के माध्यम से शरीर से बाहर निकल जाती है. हालांकि, अधिकांश लोग शरीर के विभिन्न अंगों पर शराब के प्रभावों से अनजान होते हैं.

हमने एमजीएम हेल्थकेयर के किडनी प्रत्यारोपण विशेषज्ञ डॉ. त्यागराजन से इस बारे में बात की.

उन्होंने कहा, "इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि आप कितनी मात्रा में, कितनी बार या कितने समय तक शराब पीते हैं, लेकिन यह सच है कि शराब शरीर के लिए हानिकारक है. इसके अलावा, महिलाएँ पुरुषों की तुलना में शराब के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं. वे इससे अधिक प्रतिकूल रूप से प्रभावित होती हैं."

शरीर में अल्कोहल की यात्रा के बारे में डॉ. त्यागराजन कहते हैं, "अल्कोहल सीधे पेट से छोटी आंत में जाता है. वहाँ अल्कोहल एल्डिहाइड नामक रसायन में टूट जाता है."

"पेट और आंतों से सारा रक्त लिवर से होकर शरीर के बाकी हिस्सों तक जाता है. लिवर का काम भोजन से पोषक तत्वों को अलग करना और उन्हें ख़ून के माध्यम से शरीर के अन्य भागों तक पहुँचाना है, और मूत्र व मल के माध्यम से शरीर से अपशिष्ट और अशुद्धियों को बाहर निकालना है."

डॉ. त्यागराजन कहते हैं, "एल्डिहाइड एक ख़तरनाक पदार्थ है. यह रक्त के माध्यम से लिवर तक पहुँचता है और लिवर को नुकसान पहुँचाता है. इसलिए, जब आप कम समय में बहुत अधिक शराब पीते हैं, तो शरीर में एल्डिहाइड की मात्रा बढ़ जाती है और इससे लिवर काम करना बंद कर देता है."

महिलाओं को सबसे अधिक ख़तरा है?

महिला एक गिलास के सामने सिर पर हाथ लगाए हुए

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इमेज कैप्शन, डॉक्टरों का कहना है कि शराब पीने से महिलाओं में लिवर की बीमारी होने की संभावना अधिक होती है

शराब का असर पुरुषों और महिलाओं दोनों पर पड़ सकता है. हालांकि, महिलाओं के मामले में डॉ. त्यागराजन का कहना है कि आनुवंशिक संरचना के कारण महिलाएँ शराब के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं.

वो कहते हैं, "लगातार शराब पीने से लिवर में ख़तरनाक तत्वों की मात्रा बढ़ जाती है और लिवर में निशान पड़ जाते हैं, जिससे उसे नुकसान पहुँचता है. इससे फाइब्रोसिस हो सकता है. इसका मतलब है कि लिवर में निशान पड़ जाते हैं, वहाँ की कोशिकाएँ मोटी हो जाती हैं और उनकी लोच कम हो जाती है."

"इसके साथ ही अन्य कारक लिवर सिरोसिस का कारण बनते हैं. इसका मतलब है कि लिवर की अच्छी कोशिकाएँ निशान वाली, मोटी कोशिकाओं से बदल जाती हैं."

हालांकि, इस बीमारी की गंभीरता अचानक होती है या धीरे-धीरे, यह प्रत्येक व्यक्ति की आनुवंशिक बनावट और उसके द्वारा पी जाने वाली शराब की मात्रा पर निर्भर करता है.

वहीं दूसरी ओर, डॉक्टरों का कहना है कि शराब पीने से महिलाओं में लिवर की बीमारी होने की संभावना अधिक होती है.

शराब से होने वाली लिवर की बीमारियां

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इमेज कैप्शन, कई वर्षों में लिवर को होने वाली क्षति सूजन की ओर ले जाती है

शराब के सेवन से लिवर संबंधी कई बीमारियां हो सकती हैं. सामने आई जानकारी के अनुसार, पिछले एक दशक में भारत में लिवर संबंधी बीमारियों की संख्या में वृद्धि हुई है.

रिपोर्ट के मुताबिक, हर पाँच भारतीयों में से एक व्यक्ति लिवर की बीमारी से पीड़ित है. लिवर की बीमारी से होने वाली मौतों की संख्या में भी वृद्धि हुई है.

डॉ. त्यागराजन के अनुसार, लिवर पर शराब का मुख्य प्रभाव गंभीर लिवर सिरोसिस है.

कई वर्षों में लिवर को होने वाली क्षति सूजन (जिसमें रक्त कोशिकाएं अंदर से सूज जाती हैं, जिससे जोड़ों में दर्द और अन्य समस्याएं होती हैं) की ओर ले जाती है और धीरे-धीरे लिवर के कामकाज को कम कर देती है.

इसके लक्षणों में ऊर्जा की कमी, मांसपेशियों में कमज़ोरी, शरीर में पानी का स्तर कम होना, गंभीर पीलिया और खून की उल्टी होना शामिल हैं.

गंभीर हेपेटाइटिस या लिवर फेलियर

आरोग्य

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इमेज कैप्शन, शराब का सेवन लंबे समय में लिवर पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है

इस प्रकार की समस्या दिन-रात लगातार शराब पीने, खराब आहार और अन्य कारणों से होती है.

इससे गंभीर पीलिया, रक्त के थक्के जमने (क्लॉटिंग) जैसी समस्याएं हो सकती हैं और मस्तिष्क की तंत्रिका कोशिकाएं भी प्रभावित हो सकती हैं, जिससे कोमा की स्थिति उत्पन्न हो सकती है.

शराब का सेवन लंबे समय में लिवर पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है. डॉ. त्यागराजन कहते हैं कि इस बीमारी में, चाहे आप कितनी भी कम शराब पिएं, लिवर अचानक खराब हो जाता है.

उनका कहना है कि तीन स्थितियों में चिकित्सा उपचार आवश्यक है, रोगियों की स्थिति के अनुसार चिकित्सा उपचार दिया जाता है.

फ़ैटी लिवर और शराब के बीच संबंध

एम्स द्वारा पिछले वर्ष प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, 38 प्रतिशत भारतीयों को गैर-अल्कोहलिक फ़ैटी लिवर रोग है. लिवर की कोशिकाओं में वसा का जमाव आम है, लेकिन इसकी व्यापकता आमतौर पर पाँच प्रतिशत से कम होती है.

हालांकि, जब लिवर की कोशिकाओं में वसा की मात्रा 20-25 प्रतिशत से अधिक हो जाती है, तो इसका लिवर के कामकाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. इसी को हम फ़ैटी लिवर या लिवर में वसा का जमाव कहते हैं.

डॉ. त्यागराजन कहते हैं कि फ़ैटी लिवर दो प्रकार का होता है. वो कहते हैं, "ये दो प्रकार हैं - अल्कोहलिक फ़ैटी लिवर और नॉन-अल्कोहलिक फ़ैटी लिवर."

वो बताते हैं कि जीवनशैली में बदलाव और ख़राब खान-पान की आदतें फ़ैटी लिवर रोग के मुख्य कारण हैं. ग़ैर-अल्कोहलिक फ़ैटी लिवर रोग बहुत आम है.

रोज़ कितनी शराब पीना सुरक्षित है?

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इमेज कैप्शन, डॉक्टर का कहना है, "प्रतिदिन 30 मिलीलीटर अल्कोहल पीना सुरक्षित है."

कुछ लोग शराब के सेवन के बावजूद आत्म-नियंत्रण बनाए रखते हैं. लेकिन वास्तविकता में शराब उतनी ही सुरक्षित है, जितनी खांसी की दवा की एक घूंट.

डॉक्टर त्यागराजन का कहना है, "प्रतिदिन 30 मिलीलीटर अल्कोहल पीना सुरक्षित है. इतनी मात्रा में अल्कोहल प्रतिदिन पीने से कोई नुकसान नहीं होता है. हालांकि, ऐसा करने के लिए आपका लिवर आनुवंशिक रूप से स्वस्थ होना चाहिए और लिवर से संबंधित कोई अन्य समस्या नहीं होनी चाहिए."

साथ ही, शराब की लत लगने की प्रकृति के कारण हर दिन इतनी सुरक्षित मात्रा में शराब का सेवन करना और खुद पर नियंत्रण रखना संभव नहीं है. प्रतिदिन सेवन की जाने वाली शराब की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ती जाती है, घटती नहीं है. इसलिए डॉक्टर कहते हैं कि शराब का सेवन पूरी तरह से बंद कर देना ही सबसे अच्छा है.

हालांकि, हाल के कुछ शोधों से यह भी पता चला है कि सीमित मात्रा में शराब का सेवन भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2023 में द लैंसेट में इस बारे में रिपोर्ट प्रकाशित की थी. आप इसे विस्तार से यहां पढ़ सकते हैं.

क्या शराब पीना बंद करने से लिवर ठीक हो जाता है?

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इमेज कैप्शन, भले ही आप शराब पीना पूरी तरह से बंद कर दें, लिवर ठीक नहीं हो सकता

कभी-कभी लंबे समय से शराब पीने वाले लोग भी शराब पीना छोड़ने का फैसला करते हैं. उन्हें लगता है कि ऐसा करने से उनके शरीर को हुए नुकसान की भरपाई हो जाएगी.

हालांकि, डॉक्टरों का कहना है कि जो लोग कई वर्षों से शराब का सेवन कर रहे हैं, उन्हें शराब पीना बंद करने के बाद भी लिवर की बीमारी हो सकती है.

वो कहते हैं, "यदि आप अल्कोहलिक फैटी लिवर या फाइब्रोसिस के शुरुआती चरण में ही शराब पीना बंद कर देते हैं, तो आप लिवर को और अधिक नुकसान होने से बचा सकते हैं. चिकित्सकीय उपचार से आप कुछ ही दिनों में ठीक हो सकते हैं."

"हालांकि, यदि आपका लिवर सिरोसिस की अवस्था में पहुंच गया है, तो भले ही आप शराब पीना पूरी तरह से बंद कर दें, लिवर ठीक नहीं हो सकता. इसके लिए आगे चिकित्सा उपचार की आवश्यकता होती है."

डॉ. त्यागराजन कहते हैं, "लेकिन एक बात ध्यान में रखनी चाहिए कि लिवर की क्षति किसी भी स्तर पर हो, अगर आप शराब पीना बंद कर देते हैं, तो इससे लिवर को और अधिक नुकसान नहीं होगा,"

शराब से होने वाली मानसिक बीमारी

एक शख़्स

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इमेज कैप्शन, शराब पीने वाले लोगों में मानसिक बीमारी होने की संभावना अधिक होती है

शराब के सेवन से मस्तिष्क को भी नुकसान पहुंचता है. यही कारण है कि शराब पीने वाले लोगों में मानसिक बीमारी होने की संभावना अधिक होती है. हमने इस बारे में किलपक्कम सरकारी मनोरोग अस्पताल की निदेशक डॉ. पूर्णा चंद्रिका से बात की.

कुछ लोग बहुत कम मात्रा में शराब पीते हैं और फिर भी हिंसक हो जाते हैं या शराब के आदी हो जाते हैं. वे चीजें तोड़ते हैं और झगड़ा करते हैं. डॉक्टरों का कहना है कि यह पहला कदम है.

डॉक्टर कहते हैं, "अगली अवस्था है प्रलाप (डेलीरियम ट्रेमेन्स). इसमें शराब पीने वाले अक्सर कहते हैं कि पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने आ रही है. इन लोगों को मतिभ्रम होता है. इस मानसिक बीमारी के लक्षणों में अनिद्रा, भ्रम, भूलने की बीमारी, थकान और कानों में आवाज़ें सुनाई देना शामिल हैं."

शराब छोड़ने के बाद क्या होता है?

जिस प्रकार शराब के सेवन से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं, उसी प्रकार शराब छोड़ने के बाद कुछ लोगों को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. इसे विड्रॉल सिंड्रोम कहा जाता है. कुछ लोगों को भ्रम, तनाव, कंपकंपी और थकान जैसी समस्याएं होती हैं.

लेकिन साथ ही, जब आप कई वर्षों तक शराब पीने के बाद अचानक इसे पीना बंद कर देते हैं, तो इन लक्षणों के अलावा कुछ मनोवैज्ञानिक समस्याएं भी उत्पन्न हो जाती हैं. डॉ. पूर्णा चंद्रिका इस बारे में बात करती हैं.

शराब से होने वाला मतिभ्रम

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इमेज कैप्शन, कई नशामुक्ति केंद्र राज्य सरकार के मानसिक स्वास्थ्य आयोग से अनुमति मिलने के बाद ही काम शुरू करते हैं
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डॉक्टर का कहना है, "अगर कुछ लोग शराब पीना बंद कर देते हैं, तो उन्हें अपने कानों में आवाज़ें सुनाई देती हैं, जैसे कि कोई उन्हें बुला रहा हो, और इसे शराब से प्रेरित मतिभ्रम कहा जाता है."

इस प्रकार के शराब छोड़ने के लक्षणों में, जो लोग वर्षों से शराब पी रहे होते हैं, वे अचानक किसी कारणवश शराब पीना बंद कर देते हैं.

डॉक्टरों का कहना है कि एक से तीन दिनों के भीतर उन्हें भ्रम, क्रोध और सामने खड़े व्यक्ति को पहचानने में असमर्थता जैसी समस्याएं होने लगती हैं.

जब मानसिक समस्याएं बहुत गंभीर हो जाती हैं, तो वे अगले चरण में तंत्रिका संबंधी समस्याओं का कारण बन सकती हैं. इसे वर्निके एन्सेफेलोपैथी-कोर्शॉफ कहा जाता है.

इससे चीज़ें भूलने की समस्या हो जाती है, लेकिन व्यक्ति को इसका एहसास नहीं होता. अगर अचानक उनसे कोई सवाल पूछा जाए और उन्हें उसका जवाब न भी पता हो, तो वे जवाब न जानने की बजाय लगभग सही जवाब देने की कोशिश करते हैं. डॉ. पूर्णा चंद्रिका कहती हैं कि ये तंत्रिका संबंधी मानसिक समस्याएं हैं.

इसके अलावा, तंत्रिका तंत्र से संबंधित अन्य समस्याएं भी हो सकती हैं. इनमें मांसपेशियों की कमज़ोरी (मायोपैथी) और तंत्रिका संबंधी कमज़ोरी (न्यूरोपैथी) जैसी समस्याएं शामिल हैं. इन समस्याओं के कारण खड़े होना और कोई भी काम करना असंभव हो जाता है. डॉक्टरों का कहना है कि इससे शरीर में सुई चुभने जैसी अनुभूति भी होती है.

क्या नशामुक्ति और पुनर्वास केंद्र उपयोगी हैं?

हाल के दिनों में शराब या अन्य नशों से राहत पाने के इच्छुक लोगों के लिए नशामुक्ति और पुनर्वास केंद्रों की संख्या में वृद्धि हुई है.

हालांकि, कई जगहों पर लगातार आरोप लगते रहे हैं कि लोगों को पीटा जाता है, कैद किया जाता है और यातना दी जाती है. ऐसे मामलों के संबंध में हमने डॉक्टरों से यह जानने की कोशिश की कि क्या ये नशामुक्ति और पुनर्वास केंद्र वास्तव में फायदेमंद हैं.

इस पर डॉ. त्यागराजन ने जवाब दिया, "हालांकि कुछ अच्छे नशामुक्ति केंद्र हैं, लेकिन उनमें से कई विनियमित नहीं हैं. मुझे ठीक से नहीं पता कि वहां क्या होता है. इसलिए, ऐसे में चिकित्सा उपचार ही एकमात्र उपाय है. इसके अलावा, व्यक्ति का दृढ़ संकल्प और दृढ़ता भी महत्वपूर्ण है. किसी की भी लत को बलपूर्वक दूर नहीं किया जा सकता."

डॉ. पूर्णा चंद्रिका का कहना है कि कई नशामुक्ति केंद्र राज्य सरकार के मानसिक स्वास्थ्य आयोग से अनुमति मिलने के बाद ही काम शुरू करते हैं और लोगों को बिना लाइसेंस के संचालित होने वाले केंद्रों पर भरोसा नहीं करना चाहिए.

इस बारे में बात करते हुए डॉक्टर आगे कहते हैं, "ऐसे नशामुक्ति केंद्रों पर भरोसा न करें, जहां यह कहा जाता है कि परिवार के सदस्यों को भर्ती व्यक्ति से मिलने या उसे देखने नहीं आना चाहिए. उसे अकेले रखा जाना चाहिए. वास्तव में, व्यक्ति को नियमित रूप से देखने या उससे मिलने से उसे प्रेरणा मिलती है. उसे लगता है कि उसका परिवार उसके साथ है. इसलिए, अगर आपको ज़रा सा भी संदेह है, तो आप राज्य मानसिक स्वास्थ्य आयोग में शिकायत कर सकते हैं."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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