खाते से पैसे निकालने के लिए बहन का कंकाल लेकर बैंक पहुंचा भाई, ज़िला प्रशासन क्या बोला?

    • Author, राखी घोष
    • पदनाम, बीबीसी हिन्दी के लिए, क्योंझर से
  • पढ़ने का समय: 5 मिनट

सोमवार दोपहर ओडिशा के क्योंझर ज़िले के एक बैंक के कर्मचारी और वहां मौजूद ग्राहक स्तब्ध थे. दरअसल 52 वर्षीय जीतू मुंडा कंधे पर कंकाल लेकर बैंक में दाख़िल हुए थे.

ये ओडिशा ग्रामीण बैंक की पाटना ब्लॉक के मल्लीपोशी गांव की ब्रांच थी.

जीतू मुंडा पाटना ब्लॉक के दियानाली गांव के रहने वाले हैं. वह अपनी बहन के ग्रामीण बैंक खाते से 19,300 रुपये निकालना चाहते थे.

उनकी 56 वर्षीय बहन कलरा मुंडा की शादी पड़ोसी जाजपुर ज़िले के सुकरु मुंडा से हुई थी.

कलरा मुंडा और सुकरु मुंडा का एक बेटा था. लेकिन पति और बेटे की मौत के बाद वह अपने मायके दियानाली लौट आई थीं और दिहाड़ी मज़दूर के रूप में काम करके जीवनयापन कर रही थीं.

कुछ महीने पहले कलरा ने अपना एक बछड़ा बेचा था और इससे मिले 19,300 रुपये अपने खाते में जमा किए थे.

कंकाल लेकर क्यों पहुंचे बैंक?

दो महीने पहले कलरा मुंडा की मृत्यु हो गई और उनके भाई जीतू रक़म निकालने के लिए बैंक पहुंचे.

जीतू ने कहा, "मैं कई बार बैंक मैनेजर को समझाने आया था कि मेरी बहन की दो महीने पहले मृत्यु हो चुकी है. जब बैंक मैनेजर ने मेरी बात सुनने से इनकार कर दिया और खाताधारक को लाने या क़ानूनी वारिस के दस्तावेज़ देकर मृत्यु का प्रमाण पेश करने पर ज़ोर दिया, तो निराश होकर मैं उन्हें सबूत दिखाने के लिए कंकाल ले आया."

वह तीन किलोमीटर पैदल चलकर गांव के श्मशान घाट पहुंचे, अपनी बहन के अवशेष बाहर निकाले, उन्हें जूट की बोरी में रखा और तेज़ गर्मी में कंधे पर उठाकर बैंक तक ले आए.

बैंक परिसर में यह देखकर कर्मचारी और ग्राहक स्तब्ध रह गए. बैंक ने तुरंत पुलिस और बीडीओ को बुलाया.

पुलिस और बीडीओ ने जीतू को समझाया कि उनकी बात सुनी जाएगी और उनसे कहा कि कंकाल को फिर उसी श्मशान घाट में रख आएं. इसके बाद जीतू फिर कंधे पर कंकाल उठाकर तीन किलोमीटर पैदल श्मशान घाट गए.

ज़िला प्रशासन ने जारी किया बयान

ओडिशा ग्रामीण बैंक के मैनेजर सुषांत कुमार सेठी ने कहा, "जब जीतू पैसे निकालने आए तो मैंने उनसे कहा कि संबंधित व्यक्ति को यहां उपस्थित होना होगा. शुरुआत में उन्होंने कहा कि उनकी बहन लकवाग्रस्त हैं और आ नहीं आ सकतीं. जब मैंने कहा कि बैंक कर्मचारी आपके घर जाएंगे, तब उन्होंने कहा कि वह मर चुकी हैं."

बैंक मैनेजर ने यह भी कहा कि बीते दो महीनों में जीतू कभी पैसे निकालने बैंक नहीं आए. उनका कहना है कि कलरा के दो अन्य क़ानूनी वारिस भी हैं और वे भी पैसे निकालने बैंक आए थे, इसलिए बैंक ने जीतू से क़ानूनी दस्तावेज़ पेश करने को कहा.

28 अप्रैल को जांच के बाद जीतू और कलरा के दो अन्य क़ानूनी वारिसों (उनके भाई और बहन) को खाते में जमा 19,410 रुपये सौंप दिए गए.

पुलिस ने कहा, "हमने उनसे कहा कि वे यह रक़म आपस में बराबर बांट लें."

ओडिशा के राजस्व मंत्री सुरेश पुजारी ने इस घटना की जानकारी मिलने पर कहा कि दाना मांझी के बाद ओडिशा में यह दूसरी ऐसी घटना है.

उन्होंने बताया कि ज़िला कलेक्टर इस मामले की जांच कर रहे हैं और बैंक मैनेजर के रवैये के लिए उनके ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

वहीं अब क्योंझर ज़िला प्रशासन ने बयान जारी कर इस घटना को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है.

एक बयान में ज़िला प्रशासन ने कहा है, "जनता के अधिकारों और गरिमा की रक्षा करना ज़िला प्रशासन का मूल उद्देश्य है."

ज़िला प्रशासन ने बताया है कि इस घटना की जानकारी मिलते ही कलरा मुंडा के भाई जीतू मुंडा को डिस्ट्रिक्ट रेड क्रॉस फ़ंड से 30,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है.

प्रशासन ने बताया है कि 'इसके अलावा उन्हें मृत्यु प्रमाण पत्र और क़ानूनी वारिस का प्रमाण पत्र जारी किया गया है.'

साथ ही ज़िला प्रशासन ने कहा है कि वो पूरी तरह प्रतिबद्ध है कि भविष्य में किसी भी निर्दोष व्यक्ति को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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