पश्चिम बंगाल में करारी हार के बाद टीएमसी में अभिषेक बनर्जी के ख़िलाफ़ उठने लगी आवाज़ें

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- Author, मयूरी सोम
- पदनाम, बीबीसी बांग्ला संवादताता, कोलकाता से
- पढ़ने का समय: 8 मिनट
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच नाराज़गी और ग़ुस्सा साफ़ दिख रहा है.
उनमें से कई लोग खुलकर पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर अपना ग़ुस्सा ज़ाहिर कर रहे हैं.
कुछ लोग शिकायत कर रहे हैं कि अभिषेक बनर्जी ने पार्टी को 'ख़त्म' कर दिया जबकि कुछ लोग सोशल मीडिया पर उनके 'घमंडी व्यवहार' के बारे में लिख रहे हैं, उसी तरह कई लोग उस कंसल्टेंसी फ़र्म आई पैक से भी नाराज़ हैं, जिसे उनकी पहल पर नियुक्त किया गया था. ये फ़र्म टीएमसी का चुनावी प्रबंधन करती है.
एक नेता ने बीबीसी से बात करते हुए आई पैक कर्मचारियों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाया. हालांकि बीबीसी ने इस संबंध में आईपैक का पक्ष जानने की कोशिश की लेकिन अब तक हमें उनकी तरफ़ से कोई जवाब नहीं मिला है.
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कई हारे हुए उम्मीदवारों और उन कलाकारों ने भी राजनीति से दूरी बनाने का एलान किया है, जिन्हें टिकट नहीं मिला और जो फ़िल्म या खेल जगत से टीएमसी में आए थे.
कई नेताओं और मंत्रियों ने स्थानीय मीडिया में ये आरोप भी लगाए कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के क़रीबी लोग ज़िला और स्थानीय स्तर के नेताओं से नियमित रूप से पैसे की मांग करते थे.
चुनाव नतीजे आने के बाद जिस तरह पार्टी के नेता और कार्यकर्ता खुलकर सामने आए हैं, उसके बाद तृणमूल कांग्रेस ने कहा है कि पार्टी उन बयानों से सहमत नहीं है. साथ ही चार नेताओं और प्रवक्ताओं को कारण बताओ नोटिस भी भेजा गया है.

अभिषेक ने पार्टी को 'धीरे-धीरे ख़त्म कर दिया'

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बड़ी संख्या में सीटें हारने के बाद टीएमसी 15 साल बाद सत्ता से बाहर हो गई.
पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य, महिला और बाल कल्याण मंत्री शशि पांजा और खेल मंत्री अरूप बिस्वास समेत पार्टी के कई दिग्गज नेता अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में बड़े अंतर से हार गए.
मालदा ज़िले के वरिष्ठ नेता और पूर्व पर्यटन मंत्री कृष्णेंदु नारायण चौधरी ने इसके लिए सीधे टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को ज़िम्मेदार ठहराया है.
चुनाव नतीजों के बाद उन्होंने मीडिया में पार्टी के 'ख़राब प्रदर्शन' के लिए अभिषेक बनर्जी को ज़िम्मेदार ठहराते हुए कहा, "सिर्फ़ एक व्यक्ति है जिसने पार्टी को धीरे-धीरे ख़त्म कर दिया. वह अभिषेक बनर्जी हैं. जिस तरह उन्होंने पार्टी को चलाया, वह किसी कॉरपोरेट हाउस की तरह था, जबकि बंगाल की राजनीति कॉरपोरेट हाउस की तरह नहीं चलती."
टीएमसी उम्मीदवार और वरिष्ठ नेता अतिन घोष ने एक मीडिया इंटरव्यू में कहा, "अभिषेक बनर्जी एक आधुनिक नेता हैं. उन्होंने पार्टी को संगठित रूप देने के लिए आधुनिक तकनीक की मदद ली. लेकिन आधुनिक तकनीक टीएमसी के साथ लोगों की नब्ज़ को नहीं समझ सकती."
उनका मानना है कि ज़मीनी स्तर पर ऐसे नेतृत्व की ज़रूरत है जो सीधे "लोगों से बातचीत करे और उनके रवैये को समझने की कोशिश करे."
पार्टी सूत्रों ने बताया कि 'पार्टी विरोधी बयानों' के कारण टीएमसी ने चौधरी के अलावा रिजू दत्ता, पापिया घोष, कोहिनूर मजूमदार और कार्तिक घोष जैसे नेताओं और प्रवक्ताओं को कारण बताओ नोटिस भेजा है.
'किसी टीम को कॉरपोरेट शैली में नहीं चला सकते'

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टीएमसी का एक वर्ग कंसल्टेंसी फ़र्म आई पैक (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) की 'विश्वसनीयता' पर सीधे सवाल उठा रहा है.
पूर्व विधायक और वरिष्ठ नेता खगेश्वर रॉय ने बीबीसी से कहा, "मैं इस नतीजे के लिए 98 फ़ीसदी आई पैक को ज़िम्मेदार ठहराऊंगा. मैं 1998 से पार्टी के लिए काम कर रहा हूं. मैंने पंचायत से विधानसभा तक कई चुनाव देखे हैं. लेकिन 2021 से आई पैक हम पर हावी होने लगा."
उन्होंने आरोप लगाया कि आईपैक के कर्मचारी ज़मीनी लोगों की नब्ज़ समझने में नाकाम रहे.
उनके शब्दों में, "वे शाही अंदाज़ में आते थे और एसी गाड़ियों में घूमते थे. आप इस तरह कोई टीम नहीं चला सकते, न ही लोगों के साथ घुल-मिल सकते हैं."
उन्होंने दावा किया, "आईपैक यह तय करता था कि उम्मीदवार कौन होंगे या पार्टी का कार्यक्रम क्या होगा. हम पुराने कार्यकर्ता होने के बावजूद अहम नहीं थे. हमें कई पार्टी कार्यक्रमों में बुलाया नहीं जाता था. क्या उन्होंने यह पार्टी बनाई थी, या हमने? वे असली तृणमूल कांग्रेस की विचारधारा और जुनून को नहीं समझ पाए."
आरजी कर मेडिकल कॉलेज में एक कार्यरत डॉक्टर के साथ रेप और हत्या की घटना के बाद तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य पद से इस्तीफ़ा देने वाले पूर्व नौकरशाह जवाहर सरकार ने इस साल के चुनाव से पहले 19 अप्रैल को सोशल मीडिया पर दावा किया था कि आईपैक के प्रभाव की वजह से पार्टी में 'कॉरपोरेट शैली' की राजनीति की संस्कृति शुरू हो गई है.
उन्होंने लिखा, "यह बहुत दुखद है. लोकतंत्र में राजनीतिक दलों के अपने सदस्य होने चाहिए. फिर भी राज्य सरकार और पार्टी से बाहर आईपैक नाम की एक तीसरी ताक़त हर स्तर पर प्रभावी थी."
पैसों के बदले टिकट बेचने के आरोप

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इससे पहले तृणमूल कांग्रेस के कई नेताओं ने आरोप लगाया था कि कंसल्टेंसी फ़र्म आईपैक ने 'पैसों के बदले' चुनावी टिकट दिए थे.
पूर्व विधायक खगेश्वर रॉय ने पहले मीडिया से कहा था कि उम्मीदवार बनने की दौड़ में वह 'पैसे से हार गए'.
जब बीबीसी ने उनसे इस बारे में पूछा तो उन्होंने कहा, "मैं आईपैक की गतिविधियों के बारे में बहुत कुछ कह चुका हूं. जो पैसे को समझते हैं, वे समझ जाएंगे."
चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस के लगभग 74 विधायकों को उम्मीदवारों की सूची से बाहर कर दिया गया था. पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का तर्क था कि उम्मीदवारों की सूची प्रदर्शन के आधार पर तैयार की गई थी.
लेकिन टिकट नहीं मिलने के बाद कुछ नेताओं ने कड़ी नाराज़गी ज़ाहिर की.
पूर्वस्थली उत्तरी सीट के पूर्व विधायक ने उस समय मीडिया में आरोप लगाया था कि वह आईपैक को पैसे नहीं दे सके, इसलिए उन्हें चुनाव लड़ने का मौक़ा नहीं दिया गया.
ये आरोप चुनाव से पहले से ही लगाए जा रहे थे. इस बारे में आईपैक की तरफ़ से कभी कोई बयान नहीं आया.
हालिया आरोपों को लेकर बीबीसी बांग्ला ने आईपैक से संपर्क करने की कोशिश की.
इस रिपोर्ट को लिखने से पहले उनकी प्रतिक्रिया जानने के लिए भेजे गए संदेश का अब तक कोई जवाब नहीं मिला है.
'अच्छा काम करने की जगह नहीं दी गई'

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दूसरी तरफ़, खेल विभाग के पूर्व राज्य मंत्री मनोज तिवारी ने चुनाव नतीजे घोषित होने के कुछ दिनों के भीतर ही पार्टी के ख़िलाफ़ विस्फोटक आरोप लगाए.
उनका दावा है कि पार्टी ने उन्हें एक 'लॉलीपॉप' की तरह राज्य मंत्री की ज़िम्मेदारी दे दी थी और दफ़्तर में 'चाय-बिस्कुट' खाने के अलावा उनके पास कोई काम नहीं था.
सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा, "जब मुझे जीतने के बाद राज्य मंत्री बनाया गया, तब मैंने सोचा था कि इस विभाग में आकर मैं बहुत विकास और सुधार कर पाऊंगा. लेकिन मैंने देखा कि यहां अच्छा काम करने की जगह अरूप विश्वास नहीं देते थे."
अरूप विश्वास पिछली सरकार में राज्य के खेल मंत्री थे.
उन पर आरोप लगाते हुए तिवारी ने कहा कि लियोनेल मेसी के कार्यक्रम में अव्यवस्था और अफ़रा-तफ़री के लिए वही ज़िम्मेदार थे.
इसके अलावा, तिवारी ने ये भी दावा किया कि खेल ढांचे को और मज़बूत करने का उनका सपना भी 'बर्बाद' कर दिया गया.
विधानसभा चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार कौस्तव बागची से हारने के बाद फ़िल्म निर्देशक और बैरकपुर से टीएमसी उम्मीदवार राज चक्रवर्ती ने राजनीति से संन्यास लेने का एलान किया.
उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, "2021 में मेरे राजनीतिक जीवन की शुरुआत हुई. लोगों ने मुझे काम करने का मौक़ा दिया. अगले पांच साल तक मैंने उसी तरह विधायक की ज़िम्मेदारी निभाने की कोशिश की. वह अध्याय 2026 में समाप्त हो गया. इसके साथ ही मेरा राजनीतिक सफ़र भी समाप्त हो गया."
"बंगाल के लोगों की राय से बंगाल में नई सरकार आई है. उम्मीद करूंगा कि आप सबके साथ पश्चिम बंगाल विकास के रास्ते पर आगे बढ़ेगा."
चक्रवर्ती ने 2021 का विधानसभा चुनाव जीता था.
विधायक रहते हुए वह पश्चिम बंगाल सरकार से जुड़े कोलकाता अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सव से भी क़रीबी रूप से जुड़े हुए थे.
दूसरी तरफ़, सिलीगुड़ी सीट से हारे टीएमसी उम्मीदवार गौतम देव ने बीबीसी से कहा, "चुनाव नतीजों के पीछे पार्टी की रणनीति में क्या कमी थी, इस पर मैं पार्टी के साथ चर्चा करूंगा."
"मुझे लगता है कि चुनाव में कई अनियमितताएं हुई हैं. मेरी आंखों के सामने पोस्टल बैलेट में गड़बड़ी हुई. मैं पार्टी का बहुत पुराना कार्यकर्ता हूं, सबके सामने पार्टी की निंदा नहीं करना चाहता."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित































