युवा आंदोलन को सनातन से जोड़ने पर आलोचना झेल रहीं वांगचुक की पत्नी ने अब यह कहा

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सोनम वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि जे अंगमो की युवा आंदोलन सफल होने के बाद धर्म को लेकर की गई टिप्पणी की आलोचना हो रही है, जिस पर उन्होंने पलटवार किया है.
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में कहा, "ट्रोल करने वालों से मेरी अपील है कि धर्म और अध्यात्म को एक न समझें. धर्म से प्रभावित राजनीति लोगों को बांट सकती है मगर अध्यात्म से प्रेरित राजनीति लोगों को जोड़ती है."
उन्होंने दोहराया कि "सनातन धर्म भारतीय सभ्यता की बुनियाद है. इसे कभी संकीर्ण या संस्थागत अर्थों में धर्म के रूप में नहीं देखा गया. न ही कोई राजनीतिक दल इस पर अपना एकाधिकार जता सकता है."
दरअसल डॉ. गीतांजलि ने 25 जुलाई को युवा आंदोलन की जीत को लेकर एक पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने इस आंदोलन को सनातन धर्म से जोड़ा, इसके ख़िलाफ़ लोगों ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आंदोलन देशभर के युवाओं का था, न कि किसी धर्म विशेष से जुड़ा.
डॉ. गीतांजलि ने अपने पोस्ट में कहा था, "अगर किसी ने दुनिया को यह दिखाया है कि भारत का विश्वगुरु होना वास्तव में क्या मायने रखता है, तो वह हमारी जेन ज़ी है. उन्होंने सनातन पर उपदेश नहीं दिए बल्कि इसे जिया है. उन्होंने नफ़रत, हिंसा और अंध आज्ञाकारिता न दिखाते हुए साहस, ताक़त और देशभक्ति दिखाई."
अपने ताज़ा पोस्ट में उन्होंने कहा, "धर्म का उद्देश्य अनुयायी बनाना होता है, जबकि अध्यात्म किसी व्यक्ति के भीतर बदलाव लाता है."
उन्होंने पोस्ट में अरबिंदो घोष के कथन का हवाला देते हुए लिखा, "श्री अरबिंदो ने कहा था कि भारत उठेगा, तो इसका अर्थ है कि सनातन धर्म उठेगा. भारत सनातन धर्म के लिए उठ रहा है."
वह कहती हैं कि "सनातन धर्म जीवन जीने का एक तरीका है. यह आत्मिक विकास का मार्ग है और सत्य की निरंतर खोज का अभ्यास है."

































