लाइव, डोनाल्ड ट्रंप ने अब इस देश के नेता के लिए कहा, 'वह बहुत ख़राब काम कर रहे हैं'

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जर्मनी के चांसलर फ़्रिड्रिख़ मर्त्ज़ की आलोचना करते हुए कहा है कि वह 'बहुत ख़राब काम कर रहे हैं.'

सारांश

लाइव कवरेज

सुमंत सिंह

  1. डोनाल्ड ट्रंप ने अब इस देश के नेता के लिए कहा, 'वह बहुत ख़राब काम कर रहे हैं'

    डोनाल्ड ट्रंप

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    इमेज कैप्शन, ट्रंप ने ईरान को लेकर मर्त्ज़ से हुई बातचीत का भी ज़िक्र किया

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जर्मनी के चांसलर फ़्रिड्रिख़ मर्त्ज़ की आलोचना करते हुए कहा है कि वह 'बहुत ख़राब काम कर रहे हैं.'

    पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, "जर्मनी में इमिग्रेशन और एनर्जी की समस्याएं हैं. वो कई तरह की समस्याएं झेल रहे हैं. वहां यूक्रेन को लेकर भी बड़ी समस्या है."

    ट्रंप ने ईरान के मामले में मर्त्ज़ से हुई बातचीत का भी ज़िक्र किया.

    उन्होंने कहा, "मैंने ईरान में जो कुछ भी किया, इसके लिए उन्होंने मेरी आलोचना की. लेकिन जब मैंने उनसे पूछा 'क्या आप चाहते हैं कि ईरान के पास परमाणु हथियार हो?' तो उन्होंने कहा 'नहीं'. मैंने कहा 'तो फिर मुझे लगता है कि मैं सही हूं'."

    बीते दिनों ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका जर्मनी में अपने सैनिकों की संख्या कम करने पर विचार कर रहा है.

  2. ईरान में 21 साल के युवक को फांसी पर लटकाया गया

    सासन आज़ादवर जोंग़ानी

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    बीबीसी न्यूज़ पर्शियन के मुताबिक़, ईरान के इस्फ़हान में रहने वाले 21 साल के युवक सासन आज़ादवर जोंग़ानी को फांसी पर लटका दिया गया.

    उन्हें इसी साल जनवरी में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान गिरफ़्तार किया गया था. आज़ादवर को इस्फ़हान की दस्तगर्द जेल में फांसी दे दी गई.

    उनके परिवार के क़रीबी एक सूत्र ने मानवाधिकार वेबसाइट एचआरएएनए को बताया कि उनका अंतिम संस्कार गुरुवार दोपहर एक ‘सुरक्षित क्षेत्र’ में किया गया, जिसमें “उनके सिर्फ़ 10 रिश्तेदारों” को ही शामिल होने की अनुमति दी गई.

    ईरान की इस्लामिक गणराज्य की न्यायपालिका का कहना है कि जनवरी में सरकार को “उखाड़ फेंकने” के उद्देश्य से हुए प्रदर्शनों के दौरान सासन आज़ादवर जोंग़ानी ने “अधिकारियों को ले जा रही एक मिनीबस पर पत्थरों और डंडों से हमला किया, वाहनों के शीशे तोड़े और अधिकारियों पर पत्थर और ईंटें फेंकीं.”

    ईरानी न्यायपालिका के अनुसार, उन्होंने यह स्वीकार किया था कि रैलियों में शामिल होने से पहले उन्होंने अपने आसपास के लोगों से कहा था कि वह शासन को उखाड़ फेंकने के मक़सद से सड़कों पर उतरेंगे, और उन्होंने अपने दोस्तों को भी प्रदर्शनों में शामिल होने के लिए “आमंत्रित” किया था.

    मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्हें आज़ादवर की हिरासत की स्थिति, वकील तक उनकी पहुंच, और किन परिस्थितियों में उनका इक़बालिया बयान लिया गया, इसकी जानकारी नहीं है.

  3. म्यांमार: पूर्व नेता आंग सान सू ची को हाउस अरेस्ट में शिफ़्ट किया गया, बेटे ने किस बात की जताई आशंका, रॉबर्ट ग्रीनॉल और जोनाथन हेड

    आंग सान सू की

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    म्यांमार के सरकारी मीडिया के मुताबिक़, देश की पूर्व नेता आंग सान सू ची को हाउस अरेस्ट में शिफ्ट किया गया है. वह पहले हिरासत में थीं.

    80 साल की नोबेल पुरस्कार विजेता को 2021 में सैन्य तख्तापलट में सत्ता से हटाए जाने के बाद से हिरासत में रखा गया था. माना जा रहा है कि उन्हें राजधानी नेपीडॉ की एक सैन्य जेल में रखा गया था.

    सैन्य प्रमुख मिन आंग लाइंग के बयान में कहा गया है कि उन्होंने "उनकी बाक़ी सज़ा को तय आवास पर पूरी करने का आदेश दिया है".

    मिन आंग लाइंग ने म्यांमार में तख़्तापलट का नेतृत्व किया था.

    आंग सान सू ची 2015 में सत्ता में आई थीं, जब म्यांमार के तत्कालीन शासकों ने लोकतांत्रिक सुधार लागू किए थे.

    इससे पहले वह लंबे समय तक सैन्य शासन के दौरान लोकतंत्र समर्थक एक्टिविस्ट रहीं और उन्हें पहले 15 साल से ज़्यादा समय तक हाउस अरेस्ट में रखा गया था.

    सरकारी मीडिया ने उनकी एक तस्वीर प्रसारित की है, जिसमें वह दो वर्दीधारी कर्मियों के साथ बैठी दिखाई दे रही हैं.

    उनके बेटे किम एरिस ने इस घोषणा पर संदेह जताया है और कहा कि उनके पास यह साबित करने का कोई सबूत भी नहीं है कि उनकी मां ज़िंदा हैं. उन्होंने कहा कि इस तस्वीर का "कोई मतलब नहीं" है, क्योंकि यह 2022 में ली गई थी.

    उन्होंने बीबीसी से कहा, "मुझे उम्मीद है कि यह सच हो. लेकिन अब तक मुझे ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला है जिससे यह साबित हो कि उन्हें शिफ़्ट किया गया है."

  4. इसराइल ने ग़ज़ा के लिए मदद ले जा रहीं 22 नावों को रोका, 175 एक्टिविस्ट हिरासत में, डेविड ग्रिटेन

    इसराइल ने ग़ज़ा फ़्लोटिला रोका

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    इमेज कैप्शन, ग़ज़ा में इसराइल ने नौसैनिक नाकाबंदी कर रखी है

    फ़लस्तीन समर्थक एक्टिविस्टों का कहना है कि ग़ज़ा के लिए मदद लेकर जा रहे एक फ़्लोटिला (बेड़े) की 22 नावों को ग्रीस के क्रीट द्वीप के पास अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में इसराइली बलों ने रोक लिया है.

    ग्लोबल सुमूद फ़्लोटिला (जीएसएफ़) के आयोजकों ने इस कार्रवाई को "डकैती" बताया है. उनका कहना है कि ग़ज़ा से 965 किलोमीटर से ज़्यादा दूर मौजूद लोगों को ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से हिरासत में लिया गया.

    ग़ज़ा में इसराइल ने नौसैनिक नाकाबंदी कर रखी है.

    इसराइल के विदेश मंत्रालय ने कहा कि क़रीब 175 एक्टिविस्ट को हिरासत में लिया गया है और फ़्लोटिला को "पीआर स्टंट" बताया. विदेश मंत्री गिडियन सार ने कहा कि इन्हें गुरुवार को बाद में "ग्रीस के एक बीच पर उतारा जाएगा".

    जीएसएफ़ के आंकड़ों के मुताबिक़, फ़्लोटिला की बाक़ी 36 नावों में से ज़्यादातर इस समय क्रीट के दक्षिणी तट के पास हैं.

    यह फ़्लोटिला दो हफ़्ते पहले रवाना हुआ था. इसमें कुल 58 जहाज़ स्पेन, फ़्रांस और इटली से शामिल हुए थे. इसका मक़सद ग़ज़ा पर इसराइल की नाकाबंदी को तोड़ना था.

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