सड़क को लेकर अदालत हुई कड़क

mumbai roads
    • Author, अश्विन अघोर
    • पदनाम, मुंबई से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
  • प्रकाशित

मुंबई उच्च न्यायालय के जस्टिस अभय ओक ने सड़कों की ख़राब हालत के लिए प्रशासन और ज़िम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ़ सख्त़ कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं.

न्यायालय ने कहा कि अच्छी सड़कें और फटुपाथ लोगों का मूलभूत अधिकार है और इसे लोगों को मुहैया कराना प्रशासन की ज़िम्मेदारी है.

अदालत ने यह भी कहा है कि ख़राब सड़कों की वजह से होनेवाली दुर्घटनाओं के लिए पीड़ित लोग मुआवज़ा भी माँग सकते हैं.

'देश भर के लिए उदाहरण'

mumbai high court

मुंबई उच्च न्यायालय के अधिवक्ता गणेश सोवनी ने कहा कि अब पूरे देश में लोग इस फ़ैसले का अदाहरण दे कर नगर निगमों पर मुक़दमा कर सकते हैं.

उन्होंने यह भी कहा, “यह एक अहम फ़ैसला है. संबंधित विभाग के अधिकारियों के पास ज़िम्मेदारी से भागने का कोई रास्ता नहीं बचा है.”

जस्टिस अभय ओक ने मुंबई की सारी सड़कें 30 मई तक ठीक करने के आदेश दिए हैं.

पूरे राज्य में लागू होगा फैसला

mumbai roads

मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने राज्य के बाक़ी नगर निगमों को भी इस याचिका के दायरे में लिया था.

यह फैसला पूरे राज्य में लागू होगा.

ढाई साल पहले जस्टिस गौतम पटेल ने मुंबई की बदहाल सड़कों के बारे में मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा था.

जिसे, जनहित याचिका में तब्दील कर सरकार और मुंबई नगर निगम को नोटिस भेजा गया था.

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