मध्य प्रदेश: ऑनलाइन गेम में हज़ारों रुपए गँवाने के बाद बच्चे ने की आत्महत्या

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मध्य प्रदेश में ऑनलाइन गेम में हज़ारों रुपए गँवाने के बाद एक बच्चे ने आत्महत्या कर ली है.

ये घटना छतरपुर की है. जहाँ ऑनलाइन गेम में 40 हजार रुपए गँवाने के बाद 13 वर्षीय एक लड़के ने शुक्रवार को आत्महत्या कर ली.

बच्चे को फ़्री फ़ायर गेम खेलने की आदत थी. शुक्रवार को जब बच्चे की माँ ऑफिस में थी, तो उनके खाते से अचानक पैसे कट गए. उन्होंने फ़ोन लगाकर बच्चे को डाँट लगाई, जिसके बाद उसने आत्महत्या कर ली.

बच्चे ने आत्महत्या से पहले एक सुसाइड नोट भी छोड़ा है जिसमें उसने अपनी माँ से माफ़ी मांगी है. उसमें लिखा है कि उसने गेम के चक्कर में उसने 40 हज़ार रुपए बर्बाद कर दिए. अंग्रेजी और हिंदी में लिखे सुसाइड नोट में उसने यह भी लिखा है कि अवसाद के कारण वह आत्महत्या कर रहा है.

पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा के मुताबिक़, "इस छात्र ने शुक्रवार दोपहर को आत्महत्या कर ली और हमें घटनास्थल से एक सुसाइड नोट मिला है. घटना के समय उसके माता-पिता घर पर नही थे."

माँ को शुक्रवार को मैसेज मिला कि उनके खाते से 1500 रुपए कटे है, जिसके बाद उन्होंने फ़ोन कर बच्चे को डाँटा था.

बच्चे की बहन जब वहाँ आई और कमरे को बंद देखा, तो उसने माँ-बाप को ख़बर की. उन्होंने घर पहुँच कर दरवाज़ा तोड़ा, लेकिन अस्पताल पहुँचने से पहले ही बच्चे की मौत हो चुकी थी.

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इससे पहले जनवरी माह में मध्य प्रदेश के ही सागर ज़िले में एक 12 साल के बच्चे ने उस वक़्त आत्महत्या कर ली थी, जब उसके पिता ने अधिक गेम खेलने के कारण बेटे से मोबाइल फ़ोन छीन लिया था.

दिल्ली हाईकोर्ट ने नीति बनाने के लिए कहा

इसी सप्ताह दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को बच्चों को ऑनलाइन गेम की लत से बचाने के लिए एक राष्ट्रीय नीति बनाने के लिए कहा है.

दिल्ली हाई कोर्ट में एक एनजीओ, डिस्ट्रेस मैनेजमेंट कलेक्टिव ने याचिका दायर की थी, जिसमें कहा गया था कि उन्हें माता-पिता से कई शिकायतें मिल रही हैं, जो बच्चों के ऑनलाइन गेम खेलने की आदत से चिंतित हैं. इन गेम्स के ज़रिए बच्चों में मनोवैज्ञानिक समस्याएँ पैदा हो रही है.

याचिका में यह भी कहा गया था कि बच्चों के आत्महत्या करने या अवसाद में जाने और ऑनलाइन गेम की लत के कारण चोरी जैसे अपराध करने की कुछ हालिया ख़बरों ने एनजीओ को याचिका दायर करने के लिए मजबूर किया.

मोबाइल फ़ोन

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यह याचिका डिस्ट्रेस मैनेजमेंट कलेक्टिव के सचिव जयराज नायर ने अपने वकील दीपा जोसफ और रोबिन राजू के ज़रिए दाखिल की थी.

वकील दीपा जोसफ़ ने बताया, "इस तरह के मामलें लगातार आ रहे है इसलिए यह ज़रूरी हो गया था कि हम इस मामले को लेकर कोर्ट जाएँ. हम 10 जुलाई को केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी से मिले थे लेकिन हमें कोई जवाब नही मिला जिसके बाद हम कोर्ट गए."

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कोरोना के दौरान मोबाइल का इस्तेमाल बढ़ा

दीपा जोसफ मानती हैं कि कोरोना महामारी के दौरान बच्चे पढ़ाई के लिए मोबाइल का बहुत इस्तेमाल कर रहे हैं और इसी कारण से गेम्स खेलने की आदत लग रही है.

उनके मुताबिक़ समस्या उन बच्चों में ज़्यादा देखी जा रही है, जिनके माँ-बाप दोनों काम पर जाते हैं.

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गूगल के मुताबिक़ फ़्री फ़ायर 2019 में सबसे ज़्यादा डाउनलोड किया जाने वाला गेम रहा है. भारत में भी बच्चों के बीच इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है.

इस गेम को वैसे तो फ़्री में खेला जा सकता है. लेकिन अगर आप कोई कैरेक्टर लेना चाहते हैं, तो उसके लिए पैसे देने होते है. कैरेक्टर ख़रीद लेने से गेम में आपकी स्किल में बढ़ जाती है. आप कैरेक्टर के अलावा भी बहुत सी चीज़ ख़रीद सकते हैं.

कई ऐसी चीज़ें भी होती हैं, जो गेम में आपके स्किल को तो नही बढ़ाती लेकिन दूसरे प्रतियोगियों के बीच आपको लोकप्रिय बना देती है, क्योंकि आप ज़्यादा पैसा ख़र्च करने में सक्षम दिखते है. यही वजह है कि 10 साल से लेकर 18 साल के बच्चे इसमें फँसते है और पैसे ख़र्च करते है.

दीपा जोसफ कहती हैं कि यह समस्या किसी एक क्षेत्र की नही है, बल्कि पूरे देश की है.

वो कहती हैं, "इस तरह के मामलें केरल से भी मिले हैं और दिल्ली में भी और दूसरे राज्यों में भी. इसलिए सभी के लिए एक नीति बनाने की ज़रूरत है, ताकि बच्चों के बचपन को बचाया जा सके."

आत्महत्या एक गंभीर मनोवैज्ञानिक और सामाजिक समस्या है. अगर आप भी तनाव से गुजर रहे हैं तो भारत सरकार के जीवनसाथी हेल्पलाइन 18002333330 से मदद ले सकते हैं. आपको अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से भी बात करनी चाहिए.

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