इसराइल चुनाव: जब किसी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता, तो सरकार कैसे बनती है?

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1948 में देश की स्थापना के बाद से इसराइल में हमेशा गठबंधन सरकारें रही हैं, लेकिन क्या अगली सरकार में मौजूदा प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू शामिल होंगे?
27 अक्तूबर को इसराइल में 7 अक्तूबर, 2023 को हमास के नेतृत्व में इसराइल पर हुए हमलों के बाद पहली बार आम चुनाव के लिए मतदान हुआ.
मतदान का दिन नज़दीक आने के साथ ही सर्वेक्षणों से संकेत मिल रहे थे कि हाल के वर्षों में यह सबसे कड़े मुक़ाबलों में से एक होगा. चुनाव पर नज़र रखने वाले ज़्यादातर विश्लेषकों का अनुमान था कि तत्काल किसी भी पक्ष को स्पष्ट जीत नहीं मिलेगी.
एग्ज़िट पोल से भी इसकी पुष्टि होती दिखी. इनके मुताबिक़, मौजूदा प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू का विरोध करने वाले गादी आइज़ेनकोट के गठबंधन को सबसे ज़्यादा सीटें मिलती दिख रही हैं, लेकिन इसराइली संसद में सबसे बड़ी अकेली पार्टी नेतन्याहू की लिकुड पार्टी बनने जा रही है.
लेकिन अब आगे क्या होगा?
इसराइल की चुनाव प्रणाली कैसे काम करती है?
इसराइल की संसद में 120 सीटें हैं, यानी सरकार बनाने और बहुमत हासिल करने के लिए किसी गठबंधन को 61 सीटों की ज़रूरत होती है.
इसराइल में 'आनुपातिक प्रतिनिधित्व' वाली चुनाव प्रणाली है. इसलिए वहां हमेशा कई पार्टियों के गठबंधन से सरकारें बनती रही हैं.
क्या बिन्यामिन नेतन्याहू सरकार बना पाएंगे?
23 अक्तूबर को जारी ताज़ा जनमत सर्वेक्षणों से संकेत मिले थे कि न तो नेतन्याहू के नेतृत्व वाले दलों का गठबंधन और न ही उनके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी, सेना के पूर्व प्रमुख जनरल गादी आइज़ेनकोट के नेतृत्व वाला गठबंधन, 61 सीटों का आंकड़ा पार कर पाएगा.
जब किसी भी पक्ष को बहुमत नहीं मिलता, तो राष्ट्रपति, जो फिलहाल इसाक हर्ज़ोग हैं, राजनीतिक दलों के नेताओं से विचार-विमर्श करते हैं. इसके बाद वह उस नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करते हैं, जिसके बारे में उन्हें लगता है कि उसके पास सरकार बनाने की सबसे अच्छी संभावना है.
आमतौर पर राष्ट्रपति उस पार्टी के नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करते हैं, जिसे नेसेट में सबसे ज़्यादा सीटें मिली हों. हालांकि, ऐसा करना अनिवार्य नहीं है. उदाहरण के लिए, 2009 के चुनाव के बाद तत्कालीन राष्ट्रपति शिमोन पेरेज़ ने सबसे पहले नेतन्याहू को आमंत्रित किया था, जबकि उनकी पार्टी लिकुड, प्रतिद्वंद्वी पार्टी कदीमा से पीछे रही थी.
राष्ट्रपति की पहली पसंद के नेता को सरकार बनाने के लिए अधिकतम 42 दिन मिलते हैं. अगर वह ऐसा करने में नाकाम रहते हैं, तो किसी दूसरे दल के नेता को यह मौक़ा दिया जाता है.
अगर कोई भी पार्टी बहुमत हासिल नहीं कर पाती, तो अल्पमत सरकार के सत्ता में आने की संभावना भी होती है. अगर ऐसा भी नहीं हो पाता, तो नए चुनाव कराए जा सकते हैं. तब तक नेतन्याहू अंतरिम प्रधानमंत्री बने रहेंगे.

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किन राजनीतिक दलों के बीच मुक़ाबला है?
नेतन्याहू की लिकुड पार्टी और आइज़ेनकोट की याशार पार्टी के इसराइली संसद में सबसे बड़ी पार्टियां बनने का अनुमान है. लेकिन गठबंधन सरकार बनाने के लिए उन्हें दूसरी पार्टियों के समर्थन की ज़रूरत होगी. नेतन्याहू दक्षिणपंथी और धार्मिक दलों के गठबंधन का नेतृत्व कर रहे हैं.
वह पहली बार 1996 में सत्ता में आए थे. यित्ज़ाक राबिन की हत्या के बाद हुए समय से पहले चुनाव के बाद वह इसराइल के पहले सीधे निर्वाचित प्रधानमंत्री बने थे. पिछले तीन दशकों के ज़्यादातर समय में वह सत्ता में रहे हैं.
आइज़ेनकोट विपक्षी दलों के एक ऐसे गठबंधन का नेतृत्व कर रहे हैं, जिसमें मध्य-दक्षिणपंथी और वामपंथी झुकाव वाली पार्टियां शामिल हैं. इन पार्टियों का मुख्य साझा उद्देश्य नेतन्याहू को सत्ता से हटाना है.
इस गठबंधन में पूर्व प्रधानमंत्री नफ़्ताली बेनेट के नेतृत्व वाली पार्टी बी'याखाद भी शामिल है.
चुनाव में दो अरब पार्टी गठबंधन भी मैदान में हैं, क्योंकि इसराइल की आबादी का लगभग पांचवां हिस्सा अरब है. सैद्धांतिक रूप से ये दल सरकार बनाने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं. लेकिन प्रमुख यहूदी पार्टियों में से एक को छोड़कर बाकी सभी ने सरकार में उनके साथ काम करने की संभावना से इनकार किया है.

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चुनाव के नतीजे कब तक पता चलेंगे?
शुरुआती नतीजे 28 अक्तूबर से आना शुरू हो जाएंगे, जबकि आधिकारिक नतीजे 4 नवंबर को आएंगे.
गठबंधन बनाने के लिए बातचीत की प्रक्रिया में कई हफ़्ते, यहां तक कि कई महीने भी लग सकते हैं. मार्च 2021 के चुनावों के बाद जून में जाकर सरकार बन पाई थी. तब नफ़्ताली बेनेट और याइर लापिड के बीच सत्ता साझा करने का समझौता हुआ था.
उस समय नेतन्याहू को सरकार बनाने का पहला मौक़ा दिया गया था, लेकिन वह एक ऐसा गठबंधन बनाने में नाकाम रहे जो सरकार चला सके.
इसराइल में कई बार चुनाव के बाद भी कई बार कोई भी गठबंधन सरकार नहीं बना पाता है.
2019 से 2022 के बीच वहां पांच बार अलग-अलग चुनाव हुए, क्योंकि राजनीतिक दल आपस में सहयोग करने पर सहमत नहीं हो पाए थे.
हमने इस लेख का अनुवाद करने में एआई की मदद ली है, जिसे मूल रूप से अंग्रेज़ी में लिखा गया था. बीबीसी के एक पत्रकार ने प्रकाशन से पहले इस अनुवाद की जांच की. हम एआई का उपयोग कैसे कर रहे हैं, इसके बारे में और जानें.
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