आर्टेमिस-2: चांद का चक्कर लगाकर धरती पर सुरक्षित लौटे अंतरिक्ष यात्री

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आर्टेमिस-2 के अंतरिक्ष यात्री नौ दिनों से ज़्यादा के अपने मिशन को पूरा कर धरती पर सुरक्षित लौट आए हैं.
अंतरिक्ष यात्रियों को ला रहे कैप्सूल ने भारतीय समयानुसार सुबह क़रीब साढ़े पांच बचे प्रशांत महासागर में 'स्प्लैस्ड डाउन' किया.
मिशन पर गए अंतरिक्ष यात्री कमांडर रीड वाइज़मैन कमांडर ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि टीम के सदस्य पूरी तरह स्वस्थ हैं.
आर्टेमिस-2 के अंतरिक्ष यात्रियों ने इस मिशन पर इतिहास रचा और धरती से इतनी दूर पहुंचे जहां इंसान पहले कभी नहीं पहुंचा था. अंतरिक्ष यात्री अपने स्पेसक्राफ़्ट से पूर्ण सूर्यग्रहण देखने के बाद पृथ्वी की ओर लौटे हैं.
इससे पहले कमांडर रीड वाइज़मैन ने कहा था कि इस मिशन में शामिल ओरायन स्पेसक्राफ़्ट के चालक दल ने 'ऐसे नज़ारे देखे, जिन्हें आज तक किसी इंसान ने कभी नहीं देखा.'
वहीं एक और अंतरिक्ष यात्री पायलट विक्टर ग्लोवर ने कहा कि उन्होंने जो देखा, उसे बयान करने के लिए 'शब्द ही नहीं हैं.'
इस मिशन के पूरा होने पर नासा चीफ़ जेरेड आइज़ैकमैन ने कहा, ''हम फिर से इंसानों को चांद पर भेजने के काम में लौट आए हैं. यह तो बस शुरुआत है."

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अपनी इस यात्रा के दौरान ये स्पेसक्रॉफ़्ट पृथ्वी से 2,52,756 मील (4,06,771 किलोमीटर) तक पहुंचा था ये अंतरिक्ष में इंसानों की तय की गई अब तक की सबसे ज़्यादा दूरी है.
चांद के पीछे पहुंचने के बाद अंतरिक्ष यात्रियों का नासा से संपर्क टूट गया था.
संपर्क क़रीब 40 मिनट तक टूटा रहा. हालाँकि इसकी संभावना पहले ही जता दी गई थी.
जब संपर्क दोबारा स्थापित हुआ तो मिशन विशेषज्ञ क्रिस्टीना कोच ने अंतरिक्षयान से सन्नाटा तोड़ते हुए कहा, "पृथ्वी से फिर से आवाज़ सुनना बहुत शानदार है."
ट्रंप ने दी बधाई, कहा- अगला मिशन होगा मंगल ग्रह

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर आर्टेमिस -2 के क्रू सदस्यों का पृथ्वी पर स्वागत किया और उन्हें व्हाइट हाउस आने का निमंत्रण दिया.
ट्रंप ने कहा, "मैं जल्द ही आप सभी से व्हाइट हाउस में मिलने के लिए उत्सुक हूं. हम इसे फिर से करेंगे और फिर अगला कदम होगा मंगल ग्रह !"
इससे पहले उन्होंने अंतरिक्ष यात्रियों से बात करते हुए कहा था, "आप लोगों ने इतिहास रच दिया है और पूरे अमेरिका को गर्व महसूस कराया है."
'क्या शानदार यात्रा रही''

आर्टेमिस-2 के कमांडर रीड वाइज़मैन ने समुद्र में उतरते हुए कहा, "क्या शानदार यात्रा रही.''
उन्होंने कैप्सूल की स्थिति और अपनी टीम की सेहत का ज़िक्र करते हुए बताया "हम स्थिर स्थिति में हैं, और क्रू के चारों सदस्य पूरी तरह स्वस्थ हैं,"
इसके बाद कुछ समय के लिए क्रू से संपर्क में दिक्कत आई, लेकिन नासा ने उनकी वापसी को " टेक्स्टबुक जैसी बिल्कुल सही लैंडिंग" बताया.
लाइव फीड में एक अनाउंसर को यह कहते सुना गया कि चारों अंतरिक्ष यात्री "बेहतरीन स्थिति में हैं".
"वे सभी पूरी तरह फिट और स्वस्थ हैं"
ओरायन कैप्सूल के अंदर मौजूद एक मेडिकल अधिकारी ने पुष्टि की कि क्रू के चारों सदस्य पूरी तरह 'ग्रीन' हैं.
यूएसएस जॉन पी मर्था से नासा की ओर से बोलते हुए मेगन क्रूज़ ने मज़ाक में कहा, "ग्रीन का मतलब है कि वे बहुत अच्छा महसूस कर रहे हैं, न कि उनकी त्वचा का रंग हरा हो गया है."
अंतरिक्ष यात्रियों को थोड़ी देर में यूएसएस जॉन मर्था ले जाया जाएगा.
बीबीसी की साइंस एडिटर रेबेका मोरेल ने इस मिशन के बारे में नासा की विज्ञान प्रमुख डॉ. निकोला फॉक्स से बात की.
उन्होंने कहा कि मिशन कंट्रोल में साइंस टीम के लिए यह दिन शानदार तो था लेकिन बेहद व्यस्त भी रहा.
अंतरिक्ष यात्रियों ने मिशन के इस हिस्से की तैयारी में कई साल लगाए हैं.
उन्होंने नासा की टीम के साथ मिलकर लूनर साइंस का गहराई से अध्ययन किया.
फॉक्स ने कहा कि क्रू ने इस दौरान बेहतरीन काम किया और चंद्रमा से जुड़े कई बेहद अहम इनपुट दिए.
एक सौर वैज्ञानिक होने के नाते वह ख़ास तौर पर ग्रहण को लेकर बेहद उत्साहित थीं.
उन्होंने कहा कि उन्होंने ऐसे कई खगोलीय घटनाक्रम देखे हैं, लेकिन इस बार दिखा यह नज़ारा पृथ्वी से देखे गए किसी भी ग्रहण से बिल्कुल अलग था."
मिशन के बारे में ख़ास बातें

आर्टेमिस-2 मिशन के रॉकेट ने फ़्लोरिडा के केप कैनावेरल स्थित केनेडी स्पेस सेंटर से 1 अप्रैल 2026 को उड़ान भरी थी.
इस मिशन में तीन अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री रीड वाइज़मैन, क्रिस्टीना कोच, विक्टर ग्लोवर और कनाडाई अंतरिक्ष यात्री जेरेमी हेनसेन शामिल हैं.
नासा के आर्टेमिस कार्यक्रम में कई सालों की मेहनत लगी है, हज़ारों लोग इससे जुड़े रहे हैं और अब तक इस पर क़रीब 93 अरब डॉलर ख़र्च हो चुके हैं.
50 साल से भी पहले, अमेरिका के अपोलो मिशनों ने इतिहास रचा था, जब पहली बार इंसान ने चंद्रमा की सतह पर क़दम रखा था.
चांद की ज़मीन देखने में भले ही सूखी, धूल भरी और बंजर लगती हो, लेकिन हक़ीक़त इससे बिल्कुल अलग है.
नेचुरल हिस्ट्री म्यूज़ियम की ग्रह वैज्ञानिक प्रोफ़ेसर सारा रसेल कहती हैं, "चांद में वही तत्व मौजूद हैं जो हमें धरती पर मिलते हैं."
"मिसाल के तौर पर रेयर अर्थ एलिमेंट्स (दुर्लभ धातुएं), जो धरती पर बहुत कम पाए जाते हैं, चांद के कुछ हिस्सों में शायद इतनी मात्रा में मौजूद हों कि उन्हें निकाला जा सके."
इनमें लोहे और टाइटेनियम जैसी धातुएं भी हैं, और हीलियम भी- जिसका इस्तेमाल सुपरकंडक्टर से लेकर मेडिकल उपकरणों तक, कई चीज़ों में होता है.
लेकिन जिस संसाधन ने सबसे ज़्यादा ध्यान खींचा है, वह सबसे हैरान करने वाला भी है- पानी.
रसेल कहती हैं, "चांद के कुछ खनिजों में पानी फंसा हुआ है, और ध्रुवों पर भी पानी की अच्छी ख़ासी मात्रा मौजूद है."
वह कहती हैं कि वहां ऐसे गड्ढे हैं जो हमेशा छाया में रहते हैं, जहां बर्फ़ जमा हो सकती है.
अगर आप चांद पर रहना चाहते हैं, तो पानी तक पहुंचना बेहद ज़रूरी है. यह न सिर्फ़ पीने के काम आता है, बल्कि इसे हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में तोड़कर अंतरिक्ष यात्रियों के लिए सांस लेने की हवा तैयार की जा सकती है, और यहां तक कि अंतरिक्ष यानों के लिए ईंधन भी बनाया जा सकता है.
नासा की नज़र अब मंगल ग्रह पर टिकी है और वह 2030 के दशक तक इंसानों को वहां भेजना चाहता है. लेकिन उसे जिन तकनीकी चुनौतियों से पार पाना है, उन्हें देखते हुए यह समयसीमा काफ़ी महत्वाकांक्षी कही जा सकती है.
लेकिन कहीं न कहीं से शुरुआत तो करनी ही होती है, और अमेरिका ने तय किया है कि वह शुरुआत चांद से करेगा. इसी कड़ी में आर्टेमिस-2 मिशन बेहद अहम है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित




































