राहुल गांधी पर उत्तराखंड में क्यों हुई एफ़आईआर?
उत्तराखंड के हल्द्वानी में वाल्मीकि समुदाय के एक सदस्य की शिकायत के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की गई है.
शिकायतकर्ता का आरोप है कि कांग्रेस नेता ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यक्रम स्थल पर हुए एक धार्मिक अनुष्ठान को जातिगत रंग दिया.
शिकायतकर्ता अमित कुमार का ये भी कहना है कि 29 अगस्त को दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी की टिप्पणियों से समुदाय की भावनाएं आहत हुईं.
न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ पुलिस ने बताया कि एफ़आईआर भारतीय न्याय संहिता की उन धाराओं के तहत दर्ज की गई है, जो समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने और जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने से संबंधित हैं.
पुलिस के मुताबिक़, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 यानी SCST एक्ट की धाराएं भी लगाई गई हैं.
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि मल्लिकार्जुन खड़गे की सभा के बाद रामलीला मैदान का शुद्धीकरण किया गया, 'क्योंकि खड़गे दलित हैं.'
राहुल गांधी ने इस मामले में फ़ौरन एफ़आईआर दर्ज करने की मांग की थी.
राहुल गांधी ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा था, "आठ अगस्त को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की हल्द्वानी में रैली होती है और 10 अगस्त को बीजेपी-आरएसएस के लोग उनके मंच का शुद्धीकरण करते हैं."
इस प्रेस कॉन्फ़्रेंस के बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पर सफ़ाई भी दी थी. उन्होंने कहा था, "जिन्होंने भी वहां पर शुद्धीकरण किया था, उनमें बीजेपी का कोई कार्यकर्ता शामिल नहीं था."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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