भारतीय टीम ने श्रीजेश को दी ऐसी विदाई जिस पर झूम उठा सारा देश

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- Author, मनोज चतुर्वेदी
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार बीबीसी हिंदी के लिए
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 7 मिनट
भारतीय हॉकी में खुशी के ऐसे पल कम ही आते हैं, जब पूरी टीम मैदान में जश्न मनाती नज़र आई हो. यह मौका था कांस्य पदक के मुकाबले में स्पेन पर जीत.
भारत की जीत के हीरो कप्तान हरमनप्रीत के साथ चौथा ओलंपिक खेल रहे श्रीजेश ने शानदार बचाव से भारत को लगातार दूसरे ओलंपिक में कांस्य पदक दिलाया है.
भारत ने कांस्य पदक के मुकाबले में स्पेन को 2-1 से हराया. यह भारत का ओलंपिक हॉकी में 13वां पदक है.
भारतीय गोलकीपर पीआर श्रीजेश ने ओलंपिक के दौरान ही यह घोषणा कर दी थी कि यह उनका आख़िरी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट है.
उन्होंने स्पेन के ख़िलाफ़ शानदार बचाव से भारत की जीत की राह बना दी.


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श्रीजेश भारत को जीत मिलते ही सबसे पहले मैदान में लेटकर शुक्रिया अदा किया.
वो गोल के ऊपर चढ़ गए और सारी भारतीय टीम ने उनके सामने खड़े होकर तालियां बजाकर उनके प्रति सम्मान प्रकट किया.
श्रीजेश भारत की तमाम सफलताओं में भागीदार रहे हैं.
उनके खेलने के समय में भारत ने दो एशियाई गेम्स के दो स्वर्ण पदक और ओलंपिक में दो कांस्य पदक जीते हैं.
इन सारी सफलताओं में उनका योगदान अहम रहा.
श्रीजेश के साथ पिछले 13 सालों से खेल रहे मनप्रीत सिंह का भी यह चौथा ओलंपिक है, उन्होंने कहा कि यह कांस्य पदक श्रीजेश के लिए है, क्योंकि यह उनका आख़िरी अंतरराष्ट्रीय मैच था.
हरमनप्रीत रहे भारत की जीत के हीरो

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भारत के दूसरे क्वार्टर की शुरुआत में ही पिछड़ जाने पर लग रहा था कि कहीं भारतीय टीम मैच पर ढिलाई तो नहीं बरतने जा रही है.
लेकिन हरमनप्रीत ने एक बार फिर दिखाया कि उनके रहते हारना मंज़ूर नहीं.
दूसरे क्वार्टर में स्पेन जिस तरह से खेल रही थी, उससे भारतीय टीम लगातार बचाव में व्यस्त थी. सही मायने में भारतीय टीम ने इस क्वार्टर के आख़िरी दो मिनटों में खेल में वापसी की.
भारत इस मौके पर अपना दूसरा पेनल्टी कॉर्नर हासिल करने में सफल रहा. हरमनप्रीत ने तेज ड्रैग फ्लिक से गेंद को गोल में डाल दिया.
फ्लिक इतना तेज था कि गोलकीपर को गेंद तक पहुंचने का मौका ही नहीं मिला.
भारत ने तीसरे क्वार्टर की शुरुआत में ही एक और पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलकर 2-1 की बढ़त ले ली और यह गोल जमाने वाले भी हरमनप्रीत सिंह रहे.
यह गोल ही भारत को जीत दिलाने वाला साबित हुआ.
देश के लिए यह बहुत बड़ी सफलता

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मैच समाप्ति के बाद भारतीय कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने कहा कि 'यह हमारे लिए और देश के लिए बहुत बड़ी सफलता है.'
उन्होंने कहा, "हमारी हॉकी का बहुत अच्छा इतिहास रहा है, हम उसे उस तरफ़ ही ले जाने का प्रयास कर रहे हैं."
हरमनप्रीत ने कहा, "हम देश के लिए स्वर्ण पदक नहीं जीत सके, इसके लिए हम माफ़ी मांगते हैं. हम इस दिशा में बढ़ भी रहे थे. पर मामूली अंतर से पिछड़ गए."
"हमारी टीम में कई ऐसे खिलाड़ी हैं, जो इस सफलता के साथ अपने करियर के अंतिम पड़ाव पर हैं, उनके लिए यह यादगार बन गया है."
भारत शुरुआत में दबाव दिखा

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भारत के शुरुआती खेल में सेमीफ़ाइनल में जर्मनी के हाथों मिली हार की हताशा देखने को मिली.
पहले क्वार्टर में तो टीम के हमले में ज़रा भी पैनापन देखने को नहीं मिला.
कुछ हमले बने भी, लेकिन ख़राब फिनिश के कारण उन्हें गोल में नहीं बदला जा सका.
सुखजीत सिंह को बाएं से सर्किल में आए क्रास पर गोल से मुश्किल से पांच मीटर की दूरी पर गेंद मिली.
वह गोल जमाने के लिए बहुत अच्छी स्थिति में थे. पर शॉट बाहर मार गए.
इसी तरह भारत को दूसरे क्वार्टर में फाउल होने पर एडवांटेज दिया गया और इसका फायदा उठाकर गोल भेदा जा सकता था.
लेकिन टीम ने पेनल्टी कॉर्नर के लिए रेफ़रल ले लिया.
पेनल्टी कॉर्नर मिल भी गया पर इसे अमित रोहिदास ने लिया. लेकिनअच्छे बचाव के कारण गोल में नहीं बदला जा सका.
जब स्पेन की टीम रंगत में दिखी

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स्पेन की टीम ने पहले क्वार्टर में हमलों पर बहुत ज़ोर नहीं दिया था पर वो दूसरे क्वार्टर की शुरुआत में एकाएक रंगत में दिखने लगी.
वह अपने पहले हमले में ही पेनल्टी स्ट्रोक पा गई, जिसे मिरालिस मार्क ने गोल में बदल दिया.
बढ़त बनाते ही स्पेन ने खुलकर खेलना शुरू कर दिया. इस दौरान कम से कम एक मौके पर तो भारतीय डिफेंस एकदम गच्चा खा गया था.
पर स्पेन इस मौके का फायदा नहीं उठा सका.
स्पेन की टीम खेल में बराबरी पाने के लिए आखिरी क्वार्टर में पूरी तरह से हमलावर होकर खेली और वह भारत पर दबाव बनाने में किसी हद तक सफल रही.
उन्हें तमाम मौके भी मिले.
पर भारत ने पूरे जज्बे के साथ बचाव किया, जिस कारण उन्हें सफलता से दूर रहना पड़ा.
जब कभी वह डिफेंस से पार पाने में सफल रहे तो श्रीजेश जैसी चट्टान से पार पाने में सफल नहीं हो सके.
भारत का पीछे हटकर बचाव करना था जोख़िम भरा

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आखिरी क्वार्टर में जब स्पेन की टीम पूरी तरह से हमलावर थी, उस समय भारत का 25 गज से पीछे रहकर बचाव करना थोड़ा जोखिम भरा था.
भारत ने तमाम मौकों पर गोल को क्लियर तो किया. पर गेंद पर ज़्यादा देर तक कब्ज़ा नहीं रखने से उन पर ख़तरे के बादल मंडराते रहे.
भारत ने जब एक मिनट और 24 सेकेंड का खेल बाकी रह जाने पर पेनल्टी कॉर्नर दे दिया तो स्टेडियम में एकदम से सन्नाटा छा गया.
श्रीजेश ने इसे तो बचा लिया पर 44 सेकेंड बाकी रह जाने पर मनप्रीत के स्पेन के फ़ारवर्ड को ग़लत ढंग से टैकिल करने पर उन्होंने रेफ़रल लेकर पेनल्टी स्ट्रोक मांगा.

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रेफ़रल में भारत को फ्री हिट मिल गया तो सारा स्टेडियम नारों से गूंजने लगा.
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