अमेरिकी हमले में मारे गए सुरेश पटनाला की आख़िरी बातचीत में अपनी पत्नी से किया वादा अधूरा रह गया

- Author, लोकुजु श्रीनिवास
- पदनाम, बीबीसी तमिल के लिए
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 6 मिनट
"मैं सुरक्षित घर लौट आऊंगा. हम अपनी शादी की सालगिरह अच्छे से मनाएंगे." मरीन इंजीनियर पटनाला सुरेश ने अपनी पत्नी से आख़िरी बार यही शब्द कहे थे.
बुधवार को ओमान के पास एक कारोबारी जहाज़ पर अमेरिकी हमले में सुरेश की मौत हो गई.
पटनाला सुरेश की पत्नी भार्गवी ने बीबीसी तमिल से कहा, "वह हर दिन गुड मॉर्निंग संदेश भेजते थे. भले ही वीडियो कॉल करने का मौक़ा नहीं मिलता था, फिर भी उनके संदेश आते रहते थे. लेकिन दो दिनों से उनकी कोई ख़बर नहीं थी. अब मुझे यह ख़बर मिली कि वो नहीं रहे."
आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम के रहने वाले 44 साल के सुरेश पटनाला ओमान के पास कारोबारी जहाज़ एमटी सेटेबेलो पर हुए हमले में मारे गए तीन भारतीय चालक दल के सदस्यों में से एक थे.
ख़बर मिलने के बाद उनके विशाखापट्टनम के श्रीहरिपुरम स्थित घर पर रिश्तेदार, दोस्त, नेता और मीडिया के लोग पहुँचने लगे.
घर पर मातम का माहौल है. घर की दीवारों पर सुरेश और भार्गवी के परिवार की तस्वीरें लगी हैं. घर में खिलौनों से भरी अलमारियां इस बात की गवाह हैं कि दंपती अपने बच्चों से कितना प्यार करते थे.
भविष्य की चिंता

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पटनाला सुरेश की पत्नी भार्गवी ने कहा, "हमारी आख़िरी बार 9 जून को बात हुई थी. उन्होंने कहा था कि वह जल्द घर आएंगे. लेकिन मैंने कभी नहीं सोचा था कि अब वो इस तरह लौटेंगे."
यह कहते हुए वह अपने दो बच्चों को पकड़कर रोने लगीं.
भार्गवी ने कहा, "बुधवार रात जहाज़ पर मौजूद एक नाविक ने ग्रुप में संदेश भेजकर बताया कि हमला हुआ है और उसमें आग लग गई है. साथ ही यह भी बताया कि मेरे पति और दो अन्य लोग लापता हैं."
सुरेश के दो बेटे हैं. भार्गवी की बड़ी बहन और उनके पति की मौत के बाद सुरेश के परिवार ने ही उनकी दो बेटियों की ज़िम्मेदारी संभाली थी. अब परिवार के सदस्य चारों बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता जता रहे हैं.
भार्गवी ने दुख जताते हुए कहा, "पूरा परिवार उनकी कमाई पर निर्भर था. अब मुझे समझ नहीं आ रहा कि मैं अपने बच्चों को कैसे पढ़ाऊंगी और उनका पालन-पोषण कैसे करूंगी. अब मेरे लिए नौकरी ढूंढ़ना मुश्किल है."
39 वर्षीय भार्गवी इस समय परिवार के भविष्य को लेकर चिंतित हैं.
उन्होंने कहा, "शादी से पहले मैंने छह साल तक एक निजी कंपनी में काम किया था. लेकिन अब मेरे ऊपर चार बच्चों की ज़िम्मेदारी है. इस उम्र में नौकरी ढूंढ़ना आसान नहीं है."
उन्होंने कहा, "बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने में बहुत ख़र्च आता है. मुझे समझ नहीं आ रहा कि मैं यह बोझ कैसे उठाऊंगी."
हमले से पहले क्या हुआ था?

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भार्गवी ने बताया कि क़रीब 15 सालों से मरीन इंजीनियर के रूप में काम कर रहे सुरेश अपनी ड्यूटी के सिलसिले में कई देशों की यात्रा करते थे.
उन्होंने कहा, "हम हर दो या तीन दिन में एक बार वीडियो कॉल करते थे. जहाज़ पर मौजूद दूसरे चालक दल के सदस्यों से भी बात होती थी. लेकिन पाँच जून से वीडियो कॉल ठीक से काम नहीं कर रही थी. नौ जून तक वह पूरी तरह बंद हो गई. हमें लगा कि समुद्र में होने की वजह से नेटवर्क की समस्या होगी."
उन्होंने बताया कि 10 जून के बाद उन्हें सुरेश की कोई जानकारी नहीं मिली.
भार्गवी ने बताया कि जहाज़ के प्रबंधन ने उन्हें सूचित किया कि जब सुरेश जहाज़ के जनरेटर में आई तकनीकी समस्या की जांच करने गए थे, उसी दौरान हमला हुआ और बच निकलने का कोई मौक़ा नहीं था.
उन्होंने कहा, "वह मूल रूप से एक अन्य चीफ़ इंजीनियर की सहायता के लिए अस्थायी ड्यूटी पर गए थे. लेकिन वहां की परिस्थितियों के कारण उनकी ड्यूटी बढ़ा दी गई थी."
'चारों तरफ़ हमले हो रहे हैं'

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भार्गवी ने कहा कि आख़िरी बातचीत के दौरान सुरेश ने बताया था कि उस इलाक़े में तनावपूर्ण हालात हैं.
भार्गवी ने कहा, "उन्होंने मुझसे कहा था, 'जहाँ मैं हूँ, उसके आसपास हमले हो रहे हैं. कुछ लोगों की मौत भी हो चुकी है. मैं सुरक्षित लौट आऊंगा. हम अपनी शादी की सालगिरह अच्छे से मनाएंगे."
उन्होंने बताया कि 24 जून को उनकी शादी को 15 साल पूरे हो जाते.
उन्होंने कहा, "वह साल का ज़्यादातर समय समुद्र में बिताते थे. उन्होंने मुझसे यहां नौकरी ढूंढ़ने बात कही थी लेकिन उनका मानना था कि बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए यही ठीक है."
'...हमें लगा वो ज़िंदा हैं'

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भार्गवी के चाचा रामकृष्ण ने कहा कि अधिकारियों ने उन्हें सुरेश की मौत की जानकारी दे दी थी, लेकिन शव नहीं मिलने के कारण उन्हें उम्मीद थी कि वह अब भी ज़िंदा होंगे.
उन्होंने कहा, "बाद में जब पता चला कि तीन भारतीयों के शव मिल गए हैं, तो भार्गवी को जो पीड़ा हुई, उसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता."
सुरेश के पिता रामकृष्ण ने बीबीसी से कहा, "सुरेश जहाज़ के प्रभारी यानी मरीन चीफ़ इंजीनियर के तौर पर काम करते थे. उन्हें छह महीने की छुट्टी मिलती थी. लेकिन उन्हें अपना काम बहुत पसंद था और वह ज़्यादातर समय समुद्र में बिताना पसंद करते थे. वह सिर्फ़ दो या तीन महीने की ही छुट्टी लेते थे."
अब परिजनों का कहना है कि सुरेश का शव जल्द से जल्द भारत लाया जाए.
सुरेश के पिता रामकृष्ण ने कहा, "उनकी कमाई ही हमारे परिवार का आधार थी. सरकार को उनका शव वापस लाना चाहिए और परिवार को आर्थिक सहायता भी देनी चाहिए."
परिवार के सदस्यों का कहना है कि अभी तक उन्हें यह स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है कि शव को कब भारत लाया जाएगा.
केंद्र सरकार ने क्या कहा?

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केंद्र सरकार ने सुरेश पटनाला समेत तीन भारतीयों की मौत पर शोक व्यक्त किया है.
केंद्रीय बंदरगाह, जहाज़रानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए एमटी सेटेबेलो पर हुई घटना को 'बेहद दुखद' बताया.
उन्होंने कहा कि जिन तीन भारतीयों को पहले लापता माना जा रहा था, उनके शव बाद में बरामद कर लिए गए और उनके परिवारों को इसकी जानकारी दे दी गई है.
उन्होंने कहा कि उन्होंने शवों को भारत लाने और बचाए गए लोगों को सुरक्षित भारत वापस लाने के लिए अधिकारियों को ज़रूरी क़दम उठाए के निर्देश दिए हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

























