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ट्रंप के बार-बार हमलों पर भारत की नपी-तुली, संतुलित प्रतिक्रिया की वजह क्या है?
- Author, दिलनवाज़ पाशा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- पढ़ने का समय: 9 मिनट
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक ऐसी टिप्पणी को साझा किया जिसमें भारत को 'नरक जैसी जगह' कहा गया था.
अमेरिका में अवैध प्रवासियों के मुद्दे के संदर्भ में साझा की गई इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए भारत ने कहा है कि यह अनुचित हैं और दो देशों के मज़बूत संबंधों के अनुरूप नहीं है.
दरअसल, अमेरिका में दक्षिणपंथी रेडियो होस्ट माइकल सैवेज ने टॉक रेडियो शो के एक एपिसोड में ये टिप्पणी की थी. ट्रंप ने गुरुवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर इसे बिना कोई टिप्पणी किए शेयर कर दिया था.
सैवेज ने इस टिप्पणी में कहा था, "यहां एक बच्चा जन्म लेते ही तुरंत नागरिक बन जाता है और फिर वे चीन या भारत या ग्रह के किसी अन्य नरक से पूरे परिवार को ले आते हैं."
जो पोस्ट ट्रंप ने शेयर किया उसमें आगे कहा गया, "आज आने वाले अप्रवासी वर्ग में इस देश के प्रति लगभग कोई वफ़ादारी नहीं है, जो हमेशा से ऐसा नहीं था. नहीं, वे आज के यूरोपीय अमेरिकियों और उनके पूर्वजों की तरह नहीं हैं."
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप संविधान में परिवर्तन कर जन्म के आधार पर तुरंत मिलने वाली नागरिकता को ख़त्म करना चाहते हैं.
ट्रंप के इस निर्देश को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. इसी संदर्भ में उन्होंने सैवेज की टिप्पणियों को साझा किया था.
अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत और चीन को 'नरक' कहने वाली टिप्पणी शेयर की और भारत में सियासी बवाल खड़ा हो गया. विपक्ष ने मौका हाथ से नहीं जाने दिया और सरकार पर निशाना साधा.
इसी बीच, जब भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से इस बारे में पत्रकारों ने सवाल किया तो उन्होंने सिर्फ़ इतना कहा था, "हमने ऐसी रिपोर्टें देखी हैं."
हालांकि भारत सरकार ने भी इस पर कड़ा रुख अपनाया.
गुरुवार को ही विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने दो टूक कहा, "ये टिप्पणियां अज्ञानता से भरी, अनुचित और निम्नस्तर की हैं. ये भारत-अमेरिका संबंधों की असली तस्वीर बिल्कुल नहीं दिखातीं. दोनों देशों के संबंध हमेशा से आपसी सम्मान और साझा हितों की बुनियाद पर टिके हैं."
वहीं समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़, नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास ने कहा है, "राष्ट्रपति ने कहा है 'भारत एक महान देश है जिसमें मेरे एक बहुत अच्छे दोस्त शीर्ष पर हैं."
भारत की कमज़ोर प्रतिक्रिया की वजह क्या है?
भारत ने ट्रंप की टिप्पणी पर आक्रामक पलटवार नहीं किया है बल्कि औपचारिक नाराज़गी ज़ाहिर की है.
विश्लेषक मान रहे हैं कि भारत ने अमेरिकी राष्ट्रपति की आक्रामक टिप्पणी पर नपी-तुली, सधी हुई और संतुलित प्रतिक्रिया दी है.
विश्लेषकों का मानना है कि इसकी मुख्य वजह यह है कि भारत इस समय अमेरिका के साथ किसी सीधे विवाद में नहीं फंसना चाहता है.
विश्लेषक भारत की इस प्रतिक्रिया को अमेरिका के साथ मुक्त व्यापार समझौते के लिए जारी बातचीत से भी जोड़कर भी देख रहे हैं.
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार डॉ. हर्ष पंत कहते हैं, "भारत की ज़रूरत इस समय अमेरिका के साथ मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देना है. यह एक बहुत बड़ा मुद्दा है और अभी तक अटका हुआ है. ट्रंप कभी भी कुछ भी बयान दे देते हैं. उन पर प्रतिक्रिया देते हुए भारत अपनी प्राथमिकताओं से भटकना नहीं चाहता."
राष्ट्रपति ट्रंप के बयानों में उतार-चढ़ाव नज़र आता है. विश्लेषक उनकी ताज़ा टिप्पणी को अमेरिका की घरेलू राजनीति से जोड़कर भी देख रहे हैं.
जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के अमेरिकी अध्ययन विभाग में एसोसिएट प्रोफ़ेसर उमा पुरुषोत्तमन कहती हैं, "अमेरिका में मिड टर्म चुनाव होने वाले हैं. प्रवासी ट्रंप के समर्थकों के लिए बड़ा मुद्दा हैं. हमें ऐसा लगता है कि उनकी इस टिप्पणी का लक्ष्य भारत कम और घरेलू मतदाता ज़्यादा थे. उनकी रेटिंग गिर रही है, इस तरह की बयानबाज़ी और सुर्ख़ियों से वो फिर से अपने समर्थकों का ध्यान खींचना चाहते हैं."
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जो टिप्पणी साझा की है उसमें चीन का भी नाम है और उसके लिए भी 'नरक जैसा स्थान' शब्द का इस्तेमाल किया गया है. चीन ने इस विवाद पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.
डॉ. हर्ष पंत कहते हैं, "चीन भी इसे लेकर ख़ामोश है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब ट्रंप के बयानों पर बहुत प्रतिक्रिया नहीं देता है क्योंकि उनके बयान बदलते रहते हैं."
ट्रंप ने सिर्फ़ भारत ही नहीं पश्चिमी सहयोगी देशों को लेकर भी हाल के महीनों में कई टिप्पणियां की हैं.
उमा पुरुषोत्तमन कहती हैं, "मुझे लगता है कि अब भारत और दुनिया के बाक़ी देश ये समझ गए हैं कि कई बार चुप रहना ही फ़ायदेमंद होता है. बार-बार आग में घी डालने का कोई फ़ायदा नहीं है."
डॉ. उमा इस बात पर भी ज़ोर देती हैं कि भारत के लिए अमेरिका के साथ बेहतर रिश्ते बनाए रखना बेहद ज़रूरी है क्योंकि इससे भारत के सामरिक हित सधते हैं.
वे कहती हैं, "भारत को अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखनी होगी क्योंकि ट्रंप के राज में अमेरिका एक बेहद अस्थिर और अप्रत्याशित ताकत बन चुका है और खुद ट्रंप तो उससे भी ज्यादा अनिश्चित हैं. ऐसे में भारत को हर कदम फूंक-फूंककर रखना होगा और हर संभावित स्थिति के लिए पहले से तैयार रहना होगा."
कांग्रेस का नरेंद्र मोदी सरकार पर हमला
भारत की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने "नरक जैसा स्थान" टिप्पणी को "अत्यंत अपमानजनक और भारत-विरोधी" बताया है.
कांग्रेस ने एक्स पर कहा है, "यह टिप्पणी हर भारतीय को चोट पहुंचाती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस मामले को अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ उठाना चाहिए और कड़ा विरोध दर्ज कराना चाहिए."
वहीं एक बयान में कांग्रेस पार्टी की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, "नरेंद्र मोदी के मित्र और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को नरक-जहन्नुम कहा है."
'' इतना ही नहीं उन्होंने वहां काम कर रहे भारतीयों को गैंगस्टर्स विद लैपटॉप कहा है, लेकिन नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार की इतनी हिम्मत नहीं हो पा रही है कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति से दो टूक कहें कि आपकी हिम्मत कैसे हो रही है हमारे देश का अपमान करने की."
भारतीय जनता पार्टी के नेता और रणनीतिकार राम माधव ने गुरुवार को अमेरिका में आयोजित हडसन इंस्टीट्यूट के सम्मेलन 'द न्यू इंडिया कांफ्रेंस' में ट्रंप की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इससे भारतीय समुदाय चिंतित है.
भारतीय समुदाय की चिंताओं को ज़ाहिर करते हुए उन्होंने कहा, "आज प्रवासी भारतीयों (डायस्पोरा) के बीच भी बहुत चिंता और घबराहट है जिसे गंभीरता से लेने की ज़रूरत है. मेरा मतलब है कि जब 'हेल होल' (नरक) जैसी बातें या 'लैपटॉप बनाने वाले ढोंगी' जैसी चीज़ें समुदाय के बारे में कही जाती हैं, तो समुदाय चिंतित हो जाता है."
राम माधव ने दोनों देशों के बीच रिश्तों के महत्व पर भी ज़ोर दिया और कहा कि भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय रिश्ते सबसे अहम साझेदारी हैं.
इसी सम्मेलन में हिस्सा रही शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी 'हेलहोल' टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "जब मैं यहां हडसन इंस्टीट्यूट आ रही थी, तब राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से कुछ बेहद तीखी टिप्पणियां सामने आ रही थीं."
"मैंने उसे ट्रुथ सोशल पर पढ़ा, लेकिन मैं उम्मीद करती हूं कि हम उसे फिलहाल एक तरफ़ रख सकते हैं. ख़ासतौर पर भारत को 'नरक जैसा स्थान' कहने वाली टिप्पणी को लेकर."
भारत सरकार के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में लगभग 55 लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं. भारतीय अमेरिकी और चीनी अमेरिकी, अमेरिका में एशियाई मूल के दो सबसे बड़े समूह हैं.
जो टिप्पणी राष्ट्रपति ट्रंप ने साझा की उसमें इसी संदर्भ में चीन का भी ज़िक्र था.
भारत पर निशाना साधते रहे हैं ट्रंप
हालांकि ये पहली बार नहीं है जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत पर निशाना साधा हो.
अपने पहले कार्यकाल के दौरान जुलाई 2019 में ट्रंप ने कहा था कि वह कश्मीर के मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता करने के लिए तैयार हैं. भारत कश्मीर के मुद्दे पर किसी भी तीसरे देश के हस्तक्षेप को ख़ारिज करता रहा है.
वहीं, पिछले साल अप्रैल में जब पहलगाम में भारतीय पर्यटकों पर हमला हुआ था. इस हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष छिड़ा था तब ट्रंप ने दावा किया था कि उन्होंने ही भारत और पाकिस्तान पर दबाव बनाकर इस संघर्ष को रुकवाया. ट्रंप ने इस दावे को अलग-अलग टिप्पणियों में कई बार दोहराया.
भारत ने ट्रंप के दावों पर सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की लेकिन बार-बार यह दोहराया कि संघर्ष विराम भारत और पाकिस्तान की सेनाओं के बीच सीधे संपर्क के बाद हुआ था.
जुलाई 2025 में ट्रंप ने भारतीय उत्पादों पर 25 फ़ीसदी टैरिफ़ और भारत के रूस से तेल ख़रीदने पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त दंडात्मक टैरिफ़ लगाया था.
इसके अगले ही महीने ट्रंप ने एक बयान में कहा कि भारत दुनिया में सबसे अधिक टैरिफ़ लगाने वाले देशों में शामिल है. वहीं फ़रवरी 2025 में उन्होंने फिर से भारत को टैरिफ़ किंग कहा था.
हालांकि, ट्रंप ने कई बार भारत को एक ख़ूबसूरत देश और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना अच्छा दोस्त भी कहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी बार-बार राष्ट्रपति ट्रंप को अपना अच्छा दोस्त बताते रहे हैं.
सितंबर 2019 में नरेंद्र मोदी अमेरिका के ह्यूस्टन में 'हाउडी मोदी' सम्मेलन में राष्ट्रपति ट्रंप के साथ शामिल हुए थे.
अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान हुए इस सम्मेलन में शामिल क़रीब 50 हज़ार भारतीय मूल के लोगों को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा था, "अबकी बार ट्रंप सरकार."
एक्सपर्ट्स का मानना है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान गर्मजोशी भरे संबंध थे.
लेकिन पिछले साल भारत पर अमेरिका द्वारा लगाए गए सबसे ऊंचे टैरिफ़ के बाद संबंध ठंडे पड़ गए. ट्रंप ने पिछले साल लगाए गए भारी टैरिफ़ में से कई इस साल वापस ले लिए हैं.
भारत और अमेरिका अब एक मुक्त व्यापार समझौते पर काम कर रहे हैं. इसका मक़सद टैरिफ में किसी नई वृद्धि को रोकना और दोनों देशों के बीच कारोबार को 500 अरब डॉलर तक ले जाना है.
इस ट्रेड डील के बारे में संकेत देते हुए राम माधव ने हडसन इंस्टीट्यूट के सम्मेलन में कहा, "हम ट्रेड डील की तरफ़ देख रहे हैं और हमें उम्मीद है कि ये अगले महीने में पूरी हो जाएगी. ये समझौता हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है."
हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति के बीच-बीच में आने वाले बयान और प्रतिक्रियाएं भारत के मन में भी कई सवाल खड़े कर रही हैं.
जैसा कि राम माधव ने कहा, "हमें समझ नहीं आ रहा है कि अमेरिकी सरकार की फिलहाल प्राथमिकताएं क्या हैं. सिर्फ़ हम ही नहीं, नेटो भी नहीं समझ पा रहा है, ईयू भी नहीं समझ पा रहा है और क्वाड भी नहीं समझ पा रहा है."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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