'बलात्कारियों का बचाव करने वाले शिक्षा मंत्री हैं': राहुल गांधी ने प्रल्हाद जोशी पर क्यों लगाए आरोप

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देश के नए शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के दिए गए बयान पर ख़ासा विवाद शुरू हो गया है.
शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े के बाद केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्री का प्रभार दिया गया था.
बीते एक महीने से कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) नीट पेपर लीक मामले को लेकर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग कर रही थी.
प्रल्हाद जोशी को लेकर संसद के बाहर राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि उन्होंने गर्भवती महिला के बलात्कारियों की रिहाई का समर्थन किया था. राहुल गांधी से पहले यही बयान प्रियंका गांधी ने लोकसभा में दिया था.
प्रल्हाद जोशी ने सदन में ही इस बयान का खंडन किया था. उन्होंने प्रियंका गांधी से माफ़ी की मांग की है.
संसद में मंगलवार को क्या हुआ?

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संसद के मॉनसून सत्र में मंगलवार का दिन काफ़ी ख़ास है क्योंकि इस दिन लोकसभा में पेपर लीक से जुड़े 'पब्लिक एग्ज़ामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पर चर्चा शुरू हुई है.
अब तक जंतर मंतर पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) धरने पर बैठे थी और विपक्ष भी उनका समर्थन कर रहा था.
अब तक संसद की कार्यवाही नहीं चल पा रही थी लेकिन शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े के बाद यह संभावना थी कि संसद के दोनों सदन चलेंगे.
मंगलवार को दोपहर 2 बजे से पेपर लीक से जुड़े 'पब्लिक एग्ज़ामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पर चर्चा शुरू हो गई है. इस विधेयक में 2024 में बने क़ानून में बदलाव का प्रस्ताव है.
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सभी दल इस बात पर सहमत हुए हैं कि 6 घंटे की चर्चा को 2 घंटे और बढ़ाकर 8 घंटे कर दिया जाए.
चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह संशोधन विधेयक भारतीय संसद के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होने वाला क़ानून है.
हालांकि, सबसे ज़्यादा चर्चा लोकसभा में कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के दिए गए बयान और संसद के बाहर राहुल गांधी के बयान की है.
राहुल गांधी ने दोहराया प्रियंका गांधी का बयान

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राहुल गांधी ने संसद के बाहर कहा कि "शिक्षा मंत्री के इस्तीफ़े को लेकर स्टूडेंट्स ने आंदोलन किया, लाठियां खाईं और इसके बाद बीजेपी ने एक ऐसे आदमी को कैबिनेट में रखा है जो बलात्कारियों का बचाव करता है."
"यह सबसे ख़राब किस्म के आदमी हैं. इससे ज़्यादा ख़राब आदमी कोई नहीं हो सकता जो कहता है कि बलात्कारियों को सुरक्षा की ज़रूरत है. आज भारत के शिक्षा मंत्री ऐसे ही हैं."
"प्रधानमंत्री का यह अजीब रिएक्शन है कि उनकी कैबिनेट में इतने सारे लोग हैं, वह उनमें से किसी को भी चुन सकते थे. लेकिन उन्होंने एक ऐसे आदमी को चुना जो बलात्कारियों को बचाता है."
इसके बाद राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट कर भी अपनी बात रखी. वहीं कांग्रेस पार्टी ने प्रल्हाद जोशी वाले कथित बयान को एक्स पर पोस्ट किया है.
राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा, "बलात्कारियों का बचाव करने वाले व्यक्ति से ज़्यादा ख़राब कोई नहीं हो सकता. प्रल्हाद जोशी हमारी शिक्षा व्यवस्था का अपमान हैं और इस व्यवस्था में पढ़ने वाले हर स्टूडेंट का भी अपमान हैं. जिन संस्थानों की ज़िम्मेदारी अब उनके पास है, उनमें करोड़ों युवा महिलाएं पढ़ाई करती हैं. भारत की महिलाएं प्रधानमंत्री मोदी के नए शिक्षा मंत्री को कभी स्वीकार नहीं करेंगी."
प्रल्हाद जोशी ने की माफ़ी की मांग

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लोकसभा में पेपर लीक से जुड़े 'पब्लिक एग्ज़ामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पर जब प्रियंका गांधी ने बोलना शुरू किया तो उन्होंने पूछा कि "क्या ज़रूरत थी छात्रों पर आँसू गैस के गोले छोड़ने की, उन पर लाठियां बरसाने की? क्या ज़रूरत थी नौजवान लड़कियों को ज़लील करते हुए उनके कपड़े फाड़ने की, उनको बेरहमी से पिटवाने की? क्या ज़रूरत थी देश के युवाओं पर पैलेट गन, एके-47 चलवाने की, क्या वे आतंकवादी हैं?"
प्रियंका गांधी ने कहा, "पैलेट गन चलाने का ऑर्डर किसने दिया, प्रधानमंत्री ने दिया या गृह मंत्री ने? आज ये सवाल सिर्फ़ कांग्रेस पार्टी नहीं, बल्कि पूरा देश पूछ रहा है और इसका जवाब देने की ज़िम्मेदारी सरकार की है."
इसके बाद उन्होंने नए शिक्षा मंत्री को लेकर उन्हीं आरोपों के बारे में कहा जो राहुल गांधी ने संसद के बाहर कहा था.
प्रियंका गांधी ने सवाल किया कि देश की करोड़ों लड़कियों को प्रधानमंत्री ने क्या संदेश दिया है.
कांग्रेस नेता के इस बयान पर सदन में ही संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू, केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी और बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने विरोध जताया.
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने लोकसभा स्पीकर से इस बयान को तुरंत संसद की कार्यवाही से हटाने को कहा. उन्होंने कहा कि नए शिक्षा मंत्री पर इस तरह की टिप्पणी चरित्र हनन है.
नए कार्यकारी शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने लोकसभा में ही कहा कि प्रियंका गांधी को ग़लत ख़बर नहीं देनी चाहिए और इसके लिए उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जानी चाहिए.
शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने लोकसभा में कहा, "सर प्रियंका जी को ऑथेंटिकेट करना चाहिए वरना मिसइन्फ़ॉर्मेशन के लिए उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाने चाहिए. क्या कुछ भी बोल कर चल सकते हैं? मैं सदन में मौजूद हूं, मुझे इस बारे में रूल 353 के तहत कोई नोटिस नहीं दिया गया है. इसलिए मैं इसका खंडन करता हूँ. इसे एक्सपंज (हटाना) किया जाना चाहिए और उनको माफ़ी मांगनी चाहिए."
लोकसभा के नियम 353 के तहत किसी मंत्री के विरुद्ध कोई आरोप लगाने से पहले लोकसभा अध्यक्ष और संबंधित मंत्री को पर्याप्त एडवांस सूचना देना ज़रूरी होता है, ताकि मामले की जांच या जवाब की तैयारी की जा सके.
प्रल्हाद जोशी ने क्या कहा था?

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गुजरात में 2002 में हुए दंगों के दौरान बिलकिस बानो से गैंगरेप और उनके परिवार के सात सदस्यों की हत्या में सज़ा काट रहे सभी 11 अभियुक्तों को राज्य सरकार ने अगस्त 2022 में रिहा कर दिया था.
मुंबई में सीबीआई की एक विशेष अदालत ने बिलकिस बानो के साथ गैंगरेप और उनके परिवार के सात सदस्यों की हत्या के आरोप में 11 अभियुक्तों को साल 2008 में उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई थी. बाद में बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस सज़ा पर अपनी सहमति की मुहर लगाई थी.
सभी दोषी 15 साल से अधिक वक़्त तक सज़ा काट चुके थे. इस आधार पर इनमें से एक अभियुक्त राधेश्याम शाह ने सज़ा में रियायत की गुहार लगाई थी, जिसके बाद गुजरात सरकार ने उन्हें रिहा कर दिया था.
इस फ़ैसले पर समाचार चैनल एनडीटीवी ने जब तत्कालीन केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री प्रल्हाद जोशी से सवाल किया तो उन्होंने कहा था, "जब सरकार और संबंधित लोगों ने फ़ैसला ले लिया है, तो मुझे इसमें कुछ भी ग़लत नहीं लगता क्योंकि यह क़ानून की प्रक्रिया है."
केंद्रीय मंत्री ने समाचार चैनल से कहा था कि जिन दोषियों ने जेल में "काफ़ी समय" बिताया है, उनके लिए रिहाई का "प्रावधान" है.
जनवरी 2024 में भारत की सर्वोच्च अदालत ने सज़ा पाए 11 दोषियों की सज़ा में छूट देकर रिहा करने के फ़ैसले को रद्द कर दिया था.
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