सीजेपी के विरोध प्रदर्शन में शामिल रुचिका सिंह के ख़िलाफ़ एफ़आईआर, पीएम पर टिप्पणी का मामला

कॉकरोच जनता पार्टी ने दावा किया था कि मोदी सरकार ने उनसे बातचीत में आश्वासन दिया था कि प्रदर्शन में शामिल किसी भी विद्यार्थी के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी और सभी एफ़आईआर वापस ली जाएंगी.

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, कॉकरोच जनता पार्टी ने दावा किया था कि मोदी सरकार ने उनसे बातचीत में आश्वासन दिया था कि प्रदर्शन में शामिल किसी भी विद्यार्थी के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी और सभी एफ़आईआर वापस ली जाएंगी.
प्रकाशित
पढ़ने का समय: 4 मिनट

दिल्ली के जंतर-मंतर पर 23 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में नोएडा पुलिस ने एक महिला के ख़िलाफ़ ज़ीरो एफ़आईआर दर्ज की है.

अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस को एक अधिकारी ने बताया कि ग़ाज़ियाबाद निवासी स्मृति सिंह ने बुधवार को एक्सप्रेसवे थाने में नोएडा निवासी रुचिका सिंह के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराई.

शिकायत में स्मृति सिंह ने आरोप लगाया कि रुचिका ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ अपमानजनक और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया.

शिकायत में यह भी कहा गया है कि इन टिप्पणियों ने न केवल संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंचाई बल्कि जानबूझकर नफ़रत फैलाने और सार्वजनिक शांति भंग करने का भी प्रयास किया."

पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 352 (शांति भंग करने के इरादे से जान-बूझकर अपमान), धारा 353(1) (सार्वजनिक उपद्रव को बढ़ावा देने वाले बयान) और धारा 356 (1) (मानहानि) के तहत मामला दर्ज किया है.

ज़ीरो एफ़आईआर का मतलब है कि कथित अपराध या घटना कहीं भी हुई हो, शिकायत किसी भी पुलिस थाने में दर्ज कराई जा सकती है. इसके बाद मामले को संबंधित क्षेत्राधिकार वाले थाने में भेज दिया जाता है.

सीजेपी प्रोटेस्ट

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, 23 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के समर्थक

सीजेपी ने क्या कहा?

अधिकारियों के मुताबिक़, एफ़आईआर को संसद मार्ग थाने स्थानांतरित कर दिया गया है. एक अधिकारी ने कहा, "जिन पर आरोप है वो फ़िलहाल फ़रीदाबाद की निवासी हैं और पहले नोएडा में रहती थीं. हमने एफ़आईआर संबंधित क्षेत्राधिकार वाले थाने को भेज दी है, जहाँ आगे की जांच की जाएगी."

यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब दिल्ली पुलिस ने भी जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ कथित आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट के मामले में एफ़आईआर दर्ज की है और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से ऐसी सामग्री हटाने को कहा है.

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
Dinbhar: आवाज़ वही, अंदाज़ नया

देश - दुनिया की बड़ी ख़बरें जिन्होंने बटोरी सुर्खियां.

एपिसोड

समाप्त

सीजेपी के नेतृत्व में हुए छात्र प्रदर्शन के एक वायरल वीडियो को एफ़आईआर का कारण बताया जा रहा है. वायरल वीडियो में इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी को भी कथित रूप से अपमानजनक तरीक़े से घसीटा गया है. यह वीडियो बाद के दिनों में सोशल मीडिया पर काफ़ी शेयर हुआ था.

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि रुचिका सिंह की टिप्पणियां ग़लत हो सकती है, लेकिन इस तरह की कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए.

सौरव दास ने एक्स पर लिखा है, ''रुचिका सिंह के ख़िलाफ़ आपराधिक क़ानून का इस्तेमाल करना स्वीकार्य नहीं है. अपशब्दों का इस्तेमाल अपने आप में आपराधिक मामला नहीं बनता. लोकसभा के लगभग 50% सांसदों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें क़रीब 100 सांसद बीजेपी के हैं. पुलिस को अपनी ऊर्जा उनके मामलों पर लगानी चाहिए, किसी 25 वर्षीय युवती को निशाना बनाने पर नहीं. युवाओं का उत्पीड़न तुरंत बंद होना चाहिए.''

सौरव ने कहा, "अगर किसी ने ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया है जो अपमानजनक है, तो संबंधित व्यक्ति उसके ख़िलाफ़ दीवानी या आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज करा सकता है. लेकिन प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ आपराधिक क़ानून का इस्तेमाल करना निंदनीय है.''

''केवल आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल के आधार पर किसी को सज़ा नहीं दी जानी चाहिए. मैं यह नहीं कह रहा कि वह भाषा सही थी. वह ग़लत हो सकती है, किसी को आपत्तिजनक लग सकती है, लेकिन यह आपराधिक कार्रवाई करने का आधार नहीं होना चाहिए. इससे लोगों में डर का माहौल बनता है. मुझे नहीं लगता कि यह किसी के लिए, ख़ासकर युवाओं के लिए, स्वीकार्य है."

दास ने आगे कहा, "साथ ही मैं युवा पीढ़ी से अनुरोध करूंगा कि वे अपने शब्दों और दूसरों के लिए इस्तेमाल की जाने वाली भाषा को लेकर सावधान रहें. लेकिन इसके बावजूद आपराधिक क़ानून का इस्तेमाल करना बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है. ऐसा नहीं होना चाहिए. हम पुलिस से भी अपील करते हैं कि वह संयम बनाए रखे और अपनी शक्तियों का किसी राजनीतिक उद्देश्य के लिए दुरुपयोग न करे."

सीजेपी

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, 23 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के समर्थकों की बड़ी संख्या जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन में शामिल होने के लिए जुटी थी
वीडियो कैप्शन, जुनैद सीजेपी और पुलिस ,जंतर-मंतर पर खाना खिलाने को लेकर क्या बोले?

इससे पहले, मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दिल्ली के जंतर-मंतर और देश के विभिन्न राज्यों में हाल में कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों में शामिल लोगों के ख़िलाफ़ कोई दंडात्मक कार्रवाई (कोअर्सिव ऐक्शन) न की जाए, वहीं अदालत ने स्पष्ट किया कि यह राहत उन लोगों को नहीं मिलेगी जिनका आपराधिक रिकॉर्ड है.

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिस की कथित ज़्यादतियों के आरोप प्रथम दृष्टया निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग करते हैं. अदालत ने संकेत दिया कि वह इन घटनाओं की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने पर विचार कर रही है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

BBC World Service के नए ऐप को डाउनलोड करें

BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट... सब एक जगह

कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.