विकलांग को मारी गोलियां, बंदी को चट्टान से फेंका: युद्ध अपराध के आरोप का सामना करता सैनिक

सारांश
  • बेन रॉबर्ट्स-स्मिथ को ऑस्ट्रेलिया का सबसे सम्मानित सैनिक माना जाता है.
  • उन पर अफ़ग़ानिस्तान में तैनाती के दौरान पांच स्थानीय लोगों की कथित हत्या के मामले में मुक़दमा शुरू हुआ है.
  • बेन रॉबर्ट्स-स्मिथ को बहादुरी के लिए विक्टोरिया क्रॉस से सम्मानित किया जा चुका है.
  • रॉबर्ट्स-स्मिथ इन सभी आरोपों को ख़ारिज करते हैं. उनके वकील इसे ऑस्ट्रेलिया में अपने किस्म का अनोखा मामला बताते हैं.
  • इससे पहले ऑस्ट्रेलिया में अपने ही किसी सैनिक पर युद्ध अपराध का मुक़दमा कभी नहीं चला है.
    • Author, टिफ़नी टर्नबुल और लेना लेम
    • पदनाम, सिडनी से
  • पढ़ने का समय: 7 मिनट
रॉबर्ट्स-स्मिथ के पदक, जो अब भी ऑस्ट्रेलियन वॉर मेमोरियल (एडब्ल्यूएम) में प्रदर्शित हैं

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इमेज कैप्शन, रॉबर्ट्स-स्मिथ के पदक, जो अब भी ऑस्ट्रेलियन वॉर मेमोरियल (एडब्ल्यूएम) में प्रदर्शित हैं

चेतावनी: इस ख़बर में विचलित करने वाली सामग्री है.

शुक्रवार को वीडियो लिंक के ज़रिये सिडनी की एक अदालत में पेश हुए बेन रॉबर्ट्स-स्मिथ युद्ध अपराध के आरोपों पर पहली बार पेशी के दौरान चुपचाप बैठे रहे.

उन्हें ऑस्ट्रेलिया का सबसे सम्मानित सैनिक माना जाता है लेकिन इसी महीने की शुरुआत में उन पर हत्या के पाँच आरोप लगाए गए थे. ये सभी केस उनकी अफ़ग़ानिस्तान में तैनाती के समय के हैं. वह उस समय ऑस्ट्रेलिया की स्पेशल एयर सर्विस (एसएएस) में थे.

बीबीसी के देखे गए नए अदालती दस्तावेज़ों में विस्तार से आरोप लगाए गए हैं कि 47 वर्षीय रॉबर्ट्स-स्मिथ ने एक विकलांग अफ़ग़ान बंदी की हत्या की, हथकड़ी लगे एक कैदी को चट्टान से लात मारकर गिरा दिया, नए सैनिकों को "ब्लडिंग" नाम की एक प्रक्रिया के बहाने दूसरों को मारने का आदेश दिया, और कथित तौर पर अपनी ग़लत हरकतों को छिपाने के लिए बंदियों के पास ऐसा सामान रख दिया जिससे उन्हें ग़लत साबित किया जा सके.

रॉबर्ट्स-स्मिथ इन सभी आरोपों को ख़ारिज करते हैं. उनके वकील का कहना है कि यह ऑस्ट्रेलिया में अपने किस्म का अनोखा मामला है क्योंकि इससे पहले देश में अपने ही किसी सैनिक पर युद्ध अपराध का मुक़दमा कभी नहीं चला है.

12 अप्रैल 2009

रॉबर्ट्स-स्मिथ ने 18 साल की उम्र में ऑस्ट्रेलियन डिफ़ेंस फ़ोर्सेस (एडीएफ़) में शामिल होकर अपने करियर की शुरुआत की थी. 2003 में स्पेशल एयर सर्विस (एसएएस) से जुड़ने से पहले वो ईस्ट तिमोर में दो बार तैनात रहे.

12 अप्रैल 2009 को जब उन्हें 'व्हिस्की 108' नाम के एक परिसर में भेजा गया, तब तक उनके पास एक दशक से ज़्यादा का अनुभव था और उन्हें 'मेडल ऑफ़ गैलेंट्री' भी मिल चुका था.

अदालती दस्तावेज़ों के अनुसार, मध्य अफ़ग़ानिस्तान के तारिन कोट के पास स्थित इस जगह पर ऑस्ट्रेलियाई सैनिक तालिबान विद्रोहियों से लड़ रहे थे. एक हवाई हमले के बाद उस इलाके पर नियंत्रण करने के लिए रॉबर्ट्स-स्मिथ की स्पेशल एयर सर्विस (एसएएस) टीम को बुलाया गया.

दस्तावेज़ों में कहा गया है कि वहां एक सुरंग मिली. इस सुरंग से दो लोगों को बाहर निकाला गया और उन्हें हथकड़ी लगाई गई. ये दो लोग मोहम्मद इस्सा और उनके बेटे अहमदुल्लाह थे. अहमदुल्लाह विकलांग थे और वो कृत्रिम पैर का इस्तेमाल करते थे.

अभियोजन पक्ष का कहना है कि रॉबर्ट्स-स्मिथ ने अहमदुल्लाह को ज़मीन पर गिराया और मशीन गन से कई गोलियां मारी.

दस्तावेज़ों में आगे कहा गया है, "इस कार्रवाई को कई अन्य ऑस्ट्रेलियाई सैनिकों ने देखा."

तारिन कोट के पास ऑस्ट्रेलियाई सैनिकों का काफ़िला (फ़ाइल फ़ोटो)

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इमेज कैप्शन, तारिन कोट के पास ऑस्ट्रेलियाई सैनिकों का काफ़िला (फ़ाइल फ़ोटो)

अभियोजन पक्ष के अनुसार, इसके बाद रॉबर्ट्स-स्मिथ मोहम्मद इस्सा की ओर मुड़े. उन्होंने एक अन्य सैनिक को अपने साथ लिया. इस सैनिक को अदालती दस्तावेज़ों में 'पर्सन फ़ोर' कहा गया है. इसके बाद एक अन्य सैनिक से हथियार का साइलेंसर लिया.

फिर उन्होंने मोहम्मद इस्सा को घुटनों के बल बैठा दिया. दस्तावेज़ों के मुताबिक रॉबर्ट्स-स्मिथ ने पर्सन फ़ोर से कहा, "इसे गोली मारो." इसे आदेश समझते हुए उस जवान ने गोली मार दी.

दस्तावेज़ों में आगे कहा गया है कि मिशन के अंत में रॉबर्ट्स-स्मिथ और उनके पेट्रोल लीडर ने दावा किया कि उन्होंने "पर्सन फ़ोर को ब्लडिंग करवाई."

11 सितंबर 2012

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लेकिन अगस्त 2012 के अंत में, ऑस्ट्रेलियाई सैनिकों के साथ काम कर रहा अफ़ग़ान नेशनल आर्मी का एक सैनिक उनके ही ख़िलाफ़ हो गया. उसने तीन सैनिकों की हत्या कर दी और दो अन्य को घायल कर दिया, जिसके बाद बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू हुआ.

इस अफ़ग़ान सैनिक का नाम था सार्जेंट हिकमतुल्लाह. हिकमतुल्लाह की तलाश एडीएफ़ की सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गई.

रॉबर्ट्स-स्मिथ को एक साल पहले कॉमनवेल्थ का सर्वोच्च सैन्य सम्मान 'विक्टोरिया क्रॉस' मिला था. वो दो हफ़्ते बाद दरवान नाम के एक गांव में हिकमतुल्लाह की तलाश में गए.

अदालती दस्तावेज़ों के अनुसार, 11 सितंबर को हेलिकॉप्टर से पहुंचने के बाद उनकी टीम ने एक सूखी नदी के किनारे बने कई परिसरों की तलाशी ली और तीन लोगों को हिरासत में लिया. इनमें से एक व्यक्ति का नाम अली जान था.

अभियोजन पक्ष का आरोप है कि रॉबर्ट्स-स्मिथ ने बंदियों से "टैक्टिकल पूछताछ" की, जिसमें उन्होंने हथकड़ी लगे लोगों को मुक्के मारे और उनके साथ मारपीट की.

इसके बाद, आरोप है कि रॉबर्ट्स-स्मिथ अली जान को खींचकर एक चट्टान के किनारे ले गए, जहां उनके एक सहयोगी (जिन्हें पर्सन 11 कहा गया है) भी मौजूद थे.

अदालती दस्तावेज़ों में दावा किया गया है, "अली जान को हथकड़ी लगाई गई थी और उन्हें दूसरे सैनिक पकड़े हुए थे. इसके बावजूद रॉबर्ट्स-स्मिथ ने उन्हें लात मारी, जिससे वह लगभग 10 मीटर दूर गिर गए और उनके दांत टूट गए. उन्हें कई चोटें आईं."

दस्तावेज़ों में यह भी कहा गया है कि पर्सन फ़ोर और स्थानीय ग्रामीणों ने इस घटना को देखा. इसके बाद रॉबर्ट्स-स्मिथ और पर्सन 11 नीचे उतरे, जहां अली जान घायल हालत में पड़े थे और अब भी उन्हें हथकड़ी लगी थी.

पर्सन फ़ोर ने अभियोजकों को बताया कि उसने रॉबर्ट्स-स्मिथ और पर्सन 11 को थोड़ी देर बात करते हुए देखा. दोनों के पास राइफल थी.

जब पर्सन फ़ोर की पीठ दूसरी ओर थी, तो कई गोलियों की आवाज़ आई. जब उसने मुड़कर देखा, तो पर्सन 11 ने अपनी राइफ़ल कंधे पर उठा रखी थी. अभियोजन पक्ष का आरोप है कि पर्सन 11 ने अली जान को गोली मारी.

मुकदमे के दौरान रॉबर्ट्स-स्मिथ ने इन आरोपों से इनकार किया और कहा कि न तो किसी को हिरासत में लिया गया था और न ही वहां कोई चट्टान थी.

भूरे बालों वाला और गहरे रंग का सूट व टाई पहने एक आदमी

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इमेज कैप्शन, मानहानि मुकदमे के दौरान 2021 में फ़ेडरल कोर्ट के बाहर रॉबर्ट्स-स्मिथ की तस्वीर

20 अक्तूबर 2012

20 अक्तूबर 2012 को रॉबर्ट स्मिथ पेट्रोल कमांडर बन चुके थे. उन्हें स्याचोव गांव में "ऑब्जेक्टिव पाइन" नाम के एक कथित विद्रोही की तलाश में भेजा गया.

उस मिशन की रिपोर्टों में कहा गया कि एक परिसर में हुई मुठभेड़ के दौरान दो लोग मारे गए. इसके तुरंत बाद दो और लोगों की मौत हुई. ये लोग सरेंडर करने से इनकार कर रहे थे. खेत में उन पर गोलीबारी की गई और ग्रेनेड फेंका गया.

अभियोजन पक्ष का आरोप है कि यह झूठ था. एक जूनियर सैनिक, जिसे पर्सन 66 कहा गया है, का कहना है कि खेत में मौजूद वे दो लोग बंदी थे जिन्हें रॉबर्ट्स-स्मिथ के आदेश पर मार दिया गया.

पर्सन 66 के मुताबिक, इन दोनों को पहले परिसर में हिरासत में लिया गया था और फिर रॉबर्ट्स-स्मिथ ने उनसे पूछताछ की. इसमें उन्होंने एक व्यक्ति के पेट में मुक्का मारा.

अदालती दस्तावेज़ों के अनुसार, बाद में दोनों लोगों को खेत के किनारे खड़ा किया गया. एक वरिष्ठ सैनिक ने पहले एक व्यक्ति को गोली मारी. इसके बाद आरोप है कि रॉबर्ट्स-स्मिथ ने दूसरे व्यक्ति की हथकड़ी और आंखों पर बंधी पट्टी हटाई और पर्सन 66 को भी ऐसा करने का आदेश दिया.

अभियोजन पक्ष का दावा है कि उस व्यक्ति को ज़मीन पर धक्का दिया गया था. पर्सन 66, जो अपने पहले मिशन पर था, कुछ पल रुका, फिर उसने उस व्यक्ति के सीने में दो से तीन गोलियां मार दीं.

दस्तावेज़ों में कहा गया है कि इसके बाद उसने देखा कि रॉबर्ट्स-स्मिथ ने मृत बंदियों की ओर एक ग्रेनेड फेंका. फोरेंसिक जांच में कम से कम एक व्यक्ति की तस्वीरों में ऐसे निशान पहचाने गए जो बांधकर रखे व्यक्ति के शरीर पर होते हैं. दूसरे व्यक्ति पर भी ऐसे हल्के निशान पाए गए.

मुकदमा शुरू होने में 'कई साल लग सकते हैं'

एक छोटे कमरे में छोटे भूरे बालों और हरे जम्पर पहने एक व्यक्ति का अदालत में बनाया गया स्केच

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इमेज कैप्शन, शुक्रवार को ज़मानत सुनवाई के दौरान रॉबर्ट्स-स्मिथ का अदालत में बनाया गया स्केच

रॉबर्ट्स-स्मिथ ने 2012 के अंत में सक्रिय ड्यूटी से कदम पीछे खींच लिए और 2015 में, 'डिस्टिंग्विश्ड सर्विस' के लिए सराहना मिलने के कुछ ही समय बाद, औपचारिक रूप से सेना छोड़ दी.

करीब एक साल बाद, अफ़ग़ानिस्तान में कथित युद्ध अपराधों की अफ़वाहों की जांच के लिए सेना के शीर्ष अधिकारियों ने जांच शुरू की और आरोपों से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट्स सामने आने लगीं.

2018 तक, कई घटनाओं में रॉबर्ट्स-स्मिथ को कथित अभियुक्त के रूप में पहचाना जाने लगा. इसे उन्होंने सख़्ती से नकारा और इस पर एक ऐतिहासिक मानहानि का मुकदमा दायर किया लेकिन वो ये केस हार गए.

उस सिविल ट्रायल में दिए गए शपथपत्र में रॉबर्ट्स-स्मिथ ने कहा कि उन्होंने कभी युद्ध के नियमों का उल्लंघन नहीं किया. इस शपथपत्र के ट्रांसक्रिप्ट आपराधिक मामले में पेश किए गए दस्तावेज़ों में शामिल हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि 'बंदी को मारना कभी मंज़ूर नहीं किया जा सकता.' उन्होंने "थ्रोडाउन" के इस्तेमाल से भी इनकार किया. थ्रोडाउन में मुठभेड़ के बाद किसी रेडियो या हथियार जैसी चीज़ें मौके पर रखकर कार्रवाई को सही ठहराने की कोशिश की जाती है.

अदालती दस्तावेज़ों में कहा गया है, "रॉबर्ट्स-स्मिथ ने अपने पहले दिए गए शपथपत्र में कुछ जोड़ने, संशोधन करने या टिप्पणी करने के अवसर का उपयोग नहीं किया."

दस्तावेज़ों के मुताबिक, इन कथित हत्याओं में एक पैटर्न दिखता है. हर कथित बंदी को हथकड़ी लगाई गई, कुछ समय तक हिरासत में रखा गया, पूछताछ की गई और फिर उसे सेना के पूरे नियंत्रण में होने के बावजूद मार दिया गया. इस दौरान दुश्मन के साथ कोई सक्रिय मुठभेड़ नहीं चल रही थी.

हर कथित हत्या के लिए कम से कम एक चश्मदीद गवाह भी मौजूद है.

दस्तावेज़ बताते हैं कि इनमें तीन ऐसे गवाह भी शामिल हैं जो कहते हैं कि उन्होंने एक या अधिक बंदियों की हत्या में हिस्सा लिया. उनका कहना है कि ऐसा उन्होंने या तो रॉबर्ट्स-स्मिथ के आदेश पर या उनकी जानकारी या मंज़ूरी से किया.

रॉबर्ट्स-स्मिथ की कानूनी टीम ने अभी तक इन विस्तृत आरोपों पर प्रतिक्रिया नहीं दी है, न ही उन्होंने अदालत में कोई औपचारिक दलील पेश की है. मुकदमा शुरू होने में अभी काफ़ी समय है.

शुक्रवार को कड़ी शर्तों के साथ ज़मानत देते हुए जज ग्रेग ग्रोगिन ने कहा कि रॉबर्ट्स-स्मिथ के अदालत में अभियुक्त के रूप में पेश होने में "हफ़्ते या महीने नहीं, बल्कि साल, शायद कई साल लग सकते हैं."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.