'बेख़ौफ़' पाटीदार के पास था गुजरात के ख़िलाफ़ ये प्लान, आरसीबी लगातार दूसरी बार फ़ाइनल में

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- Author, विमल कुमार
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिन्दी के लिए
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साल 2021 में पहली बार रजत पाटीदार को जब इंडियन प्रीमियर लीग यानी आईपीएल ऑक्शन में चुना गया तो उन्हें एक बधाई संदेश ऐसे दिग्गज से आया जिनका फोन नंबर तक उनके पास नहीं था.
साल 2026 में आईपीएल के क्वालिफायर-1 में सिर्फ़ 33 गेंदों पर नाबाद 93 रन बनाने वाले रजत पाटीदार ने एक के बाद एक 9 झन्नाटेदार छक्के लगाए तो वही दिग्गज उनके हर स्ट्रोक्स पर एक साथ भौचक्का भी हो रहा था और खुश भी हो रहा था.
ये वही दिग्गज था जो अब भी रॉयल्स चैलेंजर्स बैंगलोर की सबसे बड़ी पहचान है. लेकिन, दो साल पहले कोच एंडी फ्लावर और डायरेक्ट ऑफ़ क्रिकेट मो बाबट ने उसी दिग्गज की राय जाननी चाहिए तो विराट कोहली की जगह नए कप्तान की काबिलियत के बारे में किसी तरह की हिचकिचाहट नहीं दिखी. उल्टा उन्होंने कहा कि रजत आने वाले कई सालों तक आरसीबी की कप्तानी करते दिखेंगे.
आईपीएल 2026 के क्वालीफायर-1 में डिफेंडिंग चैंपियन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने जीत हासिल की. धर्मशाला के खूबसूरत मैदान पर खेले गए महामुकाबले में आरसीबी ने गुजरात टाइटंस को 92 रनों के विशाल अंतर से शिकस्त देकर सीधे फाइनल में कदम रख लिया है
पाटीदार का बेख़ौफ़ अंदाज़

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आईपीएल के इतिहास में 93 रन किसी भी बल्लेबाज़ ने इस आक्रमकता और बेख़ौफ़ अंदाज़ में शायद ही बनाए हों. मध्य-प्रदेश के इस खिलाड़ी के विनम्र स्वभाव को देखकर ये यकीन कर पाना मुश्किल हो जाता है कि आईपीएल के इतिहास में सबसे तेज़ी से 100 छक्के पूरे करने वाले खिलाड़ियों में पहले तीन नाम में वो इकलौते भारतीय हैं.
वेस्टइंड़ीज़ के आंद्रे रसेल ने 657 गेंदों पर ये मुकाम हासिल किया तो उन्हीं के हमवतन निकोलस पूरन ने 884 गेंदों पर. पाटीदार ने क्रिस गेल (943 गेंद) जैसे दिग्गज को भी 10 गेंदों से पछाड़ा और इस फेहरिस्त में शामिल हुए.
राहुल द्रविड़ को टेस्ट मैचों में स्पिन के ख़िलाफ़ सहजता से बल्लेबाज़ी करते हुए प्रभावित होने वाला एक युवा खिलाड़ी आने वाले वक्त में टी20 फॉर्मेट में ऐसी विध्वंसक बल्लेबाज़ी कर सकता है शायद ही किसी ने सोचा हो. लेकिन, टीम इंडिया के पूर्व विकेटकपर और घरेलू क्रिकेट के दगिग्ज कोच चंद्रकांत पंडित में रजत को वो ख़ास गुण दिख गया था जिसके चलते इस जोड़ी ने 69 सालों के बाद मध्य-प्रदेश को रणजी ट्रॉफी चैंपियन बनाया था.
अब तक अपने छोटे से अंतरराष्ट्रीय करियर में पाटीदार को 3 टेस्ट और 1 वन-डे खेलने का मौका मिला जिसमें उन्हें ज़बरदस्त कामयाबी तो नहीं मिली लेकिन आने वाले ऑयरलैंड और इंग्लैंड दौरे के लिए टी20 टीम का चयन होगा तो पाटीदार का नाम चर्चा का हिस्सा ज़रूर बनेगा.
लेकिन अगर 32 साल की उम्र को उनके ख़िलाफ़ चयन न होने का एक आधार बनाया जाए तो ये गलत होगा. सूर्यकुमार यादव की कामयाबी दिखाती है कि 30 साल के बाद भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में आप ना सिर्फ़ बल्लेबाज़ बल्कि कप्तान के तौर पर अपनी छाप छोड़ सकते हैं.

कोहली भी मुरीद

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पाटीदार के पास मध्य क्रम के बल्लेबाज़ के तौर पर वो हुनर है- स्पिन और तेज़ गेंदबाज़ों के ख़िलाफ़ मिडल ऑर्डर में पहली ही गेंद से हमला बोलने की ताकत- जो श्रैय्यस अय्यर के अलावा फिलहाल किसी और भारतीय बल्लेबाज़ में नहीं दिखती है.
पिछले महीने चेन्नई सुपर किंग्स के ख़िलाफ़ भी बैंगलोर के कप्तान ने 19 गेंदों पर 49 रन बनाये थे और 6 छक्के लगाये थे.
2022 में लखनऊ सुपर जाएंट्स के ख़िलाफ़ नॉकआउट मुक़ाबले में शतक लगाकर पाटीदार ने पहली बार बल्लेबाज़ के तौर पर पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींचा था और अब लगातार दो साल बैंगोलर को फाइनल में ले जाकर उन्होंने साबित किया है कि पिछले साल की खिताबी जीत कोई तुक्का नहीं थी.
साल 2014 में पाटीदार इंदौर में खाली समय में विराट कोहली के साथ कभी एक मुलाकात के बारे में सोचते थे और आज ना सिर्फ वो कोहली के साथ बल्लेबाज़ी करते दिखते हैं बल्कि उन्हें अपना मुरीद भी बना लिया है जिनकी लीडरशीप में खुद कोहली भी लगातार दूसरी बार ट्रॉफी जीतने की ओर बढ़ रहे हैं.
आक्रमण की रणनीति

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धर्मशाला में जब गुजरात ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाज़ी करने का फैसला किया और कप्तान पाटीदार का निर्देश अपने बल्लेबाज़ों के लिए साफ था. किसी भी हालत में पावर प्ले के 6 ओवर में मोहम्मद सिराज और कगीसो रबाडा को लगातार गेंदबाज़ी करने नहीं देनी है.
मैच के बाद पाटीदार ने कहा भी उनकी टीम का इरादा शुरू से ही विरोधियों पर हावी होने का था.
कोहली और वेंकेटश अय्यर ने विरोधी गेंदबाज़ों की लय आक्रामकता से तोड़ी और उसके बाद साउथ अफ्रीका के रबाडा ने पाटादीर का कैच छोड़कर उन्हें जब जीवनदान दिया तो लगने लगा था कि गुजरात टाइटंस का शायद आज दिन नहीं है. गुजरात टाइटंस ने जिस तरह से इतने अहम मैच में अचानक से ही कुलवंत खजरोलिया को पहला मैच खेलने का मौका दिया उससे भी हर कोई हतप्रभ था.
लेकिन पावर प्ले में लक्ष्य का पीछा करते हुए पहले 6 ओवर के भीतर ही आधी टीम का सिर्फ़ 51 रनों पर पवेलियन लौटना गुजरात के हौसले को पस्त कर गया.
निचले क्रम में राहुल तेवातिया ने भले ही संघर्ष करते हुए एक अर्धशतक बनाया और हार के अंतर को 100 रनों के भीतर (92 रन) पर लाने में कामयाब हुए लेकिन फिर से दोबारा अपने घरेलू मैदान अहमदाबाद में फाइनल के लिए वापस लौटना शुभमन गिल और उनके साथियों के लिए कठिन दिख रहा है.
पाटीदार ने अगर अपने बल्ले से पूरी तरह दबदबा मैच में बनाये रखा तो उनके गेंदबाज़ी आक्रमण ने भी दिखाया कि इसमें विविधता के साथ साथ ज़बरदस्त पैनापन भी है.
जैकब डफी ने अगर सबसे ज़्यादा तीन विकेट हासिल किये तो भुवनेश्वर कुमार ने चिर-परिचित अंदाज़ में किफायती गेंदबाज़ी करते हुए 2 विकेट चटकाए और पर्पल कैप 26 विकेटों के साथ अपने पास रखी.
जोश हेज़लवुड भले ही असाधारण लय में ना दिखे हों लेकिन उन्होंने जोश बटलर का कीमती विकेट लिया. युवा तेज़ गेंदबाज़ राशिख सलाम ने भी छाप छोड़ी तो क्रुणाल पंड्या ने बल्ले से 43 रन बनाने के बाद गेंद से भी 2 विकेट झटके.
कुल मिलाकर बैंगोलर की टीम डिफेंडिंग चैंपियन नहीं बल्कि अपने कप्तान पाटीदार की सोच यानी की एटेकिंग चैंपियन के तौर पर खेली. और किंग कोहली ने लगातार 4 साल 600 से ज़्यादा रन बनाकर एक नया रिकॉर्ड बनाया.
वैसे एक आईपीएल सीज़न में 6 मौकों पर 600 से ज़्यादा रन बनाने वाले भी इकलौते खिलाड़ी कोहली ही हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.































