पुतिन का सुरक्षा घेरा भेद पाना क्यों है नामुमकिन, कौन करता है उनकी रक्षा

पुतिन और सुरक्षाबल के जवान

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, राष्ट्रपति पुतिन ने साल 2011 में अशांत चेचन्या में एफ़एसबी की स्पेशल फ़ोर्स से मुलाक़ात की थी
प्रकाशित
पढ़ने का समय: 8 मिनट

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 18वें ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत आ रहे हैं.

12 से 13 दिसंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में होने जा रहे इस सम्मेलन से पहले ही वो भारत पहुंच रहे हैं. पुतिन बीते साल दिसंबर में पूरे चार साल बाद द्विपक्षीय सम्मेलन के लिए भारत आए थे.

क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने मंगलवार में बताया कि इस यात्रा के दौरान राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बीच एक और द्विपक्षीय बैठक की उम्मीद है और यह बैठक शुक्रवार (11 सितंबर) को होनी है.

पेस्कोव ने बताया कि हमेशा की तरह, दोनों देश द्विपक्षीय एजेंडे पर चर्चा करेंगे.

इसके साथ ही उन्होंने कहा, "कई मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से चर्चा नहीं की जा सकती, क्योंकि कुछ ऐसे देश हैं जो हमारे सहयोग को और आगे बढ़ाने में बाधा डालने की कोशिश कर रहे हैं. इसलिए, इन पर गोपनीय तरीके से, लेकिन बहुत ही रचनात्मक ढंग से चर्चा की जा रही है."

हालांकि इन सबके बीच राष्ट्रपति पुतिन की सुरक्षा की हमेशा चर्चा रहती है.

पुतिन के हर क़दम पर सैकड़ों बॉडीगार्ड

पुतिन

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, पुतिन का खाना चुपके से तैयार किया जाता है

व्लादिमीर पुतिन साल 2000 से सत्ता में हैं. सोवियत तानाशाह जोसेफ़ स्टालिन के बाद क्रेमलिन के किसी भी नेता के मुक़ाबले उनका कार्यकाल सबसे लंबा रहा है.

तक़रीबन 73 साल की उम्र में वो राष्ट्रपति के तौर पर अपने पांचवें कार्यकाल में हैं. उनके शासन का विरोध करने वाली कोई भी ताक़त अब नहीं बची है और अगर वो चाहें, तो 2036 तक सत्ता में बने रहने से उन्हें शायद ही कोई रोक पाएगा.

पुतिन की सुरक्षा की बात करें तो उनके हर क़दम पर सैकड़ों बॉडीगार्ड बारीकी से नज़र रखते हैं, जो 24 घंटे उनके साथ रहते हैं.

बीबीसी न्यूज़ की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, पुतिन का खाना चुपके से तैयार किया जाता है और वह जो कुछ भी पीते हैं उसे पहले उनके निकटतम सलाहकार जांचते हैं.

केजीबी के पूर्व अधिकारी पुतिन के आस-पास मौजूद ख़तरों के बारे में अच्छी तरह से जानते हैं.

कौन करता है पुतिन की रक्षा

सुरक्षाबल का जवान

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, एसबीपी के गार्ड परछाईं की तरह दिन-रात पुतिन के साथ रहते हैं
छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
Dinbhar: आवाज़ वही, अंदाज़ नया

देश - दुनिया की बड़ी ख़बरें जिन्होंने बटोरी सुर्खियां.

एपिसोड

समाप्त

रूस की कई सुरक्षा सेवाओं में से एक ख़ासतौर से राष्ट्रपति और उनके परिवार की सुरक्षा के लिए समर्पित है. इसे 'रूसी राष्ट्रपति सुरक्षा सेवा' या एसबीपी के नाम से जाना जाता है.

यह रूस की संघीय सुरक्षा सेवा (एफ़एसओ) को रिपोर्ट करती है, जिसका गठन रूस की ख़ुफ़िया एजेंसी केजीबी से हुआ है. काले सूट पहने कानों में इयरफ़ोन लगाए एसबीपी के गार्ड परछाईं की तरह दिन-रात पुतिन के साथ रहते हैं.

रूस का सरकारी स्वामित्व वाला मीडिया रशिया बियॉन्ड के मुताबिक़, "जब ये एजेंट विदेश में गतिविधियों के दौरान पुतिन के साथ जाते हैं, तो वे ख़ुद को चार मंडलियों में बांट लेते हैं."

"उनका पहला और सबसे क़रीबी घेरा उनके अपने निजी गार्ड्स का होता है."

"दूसरा घेरा उन गार्ड्स से बनाया जाता है जिन पर जनता का ध्यान नहीं जाता."

"तीसरा घेरा, भीड़ की परिधि को घेरता है और इसमें संदिग्ध लोगों को आने से रोकता है."

"और चौथा और सबसे आख़िरी घेरा, आसपास की इमारतों की छतों पर स्थित स्नाइपरों का होता है."

मार्क गेलितो रूसी सुरक्षा के विशेषज्ञ और देश में सुरक्षा मुद्दों का विश्लेषण करने वाली कंस्लटिंग फ़र्म, मायाक इंटेलिजेंस के निदेशक हैं.

उन्होंने बीबीसी मुंडो सर्विस से बात करते हुए कहा था, "पुतिन को हेलीकॉप्टर पसंद नहीं है, वह आमतौर पर मोटरसाइकिल सवारों, कई बड़ी काली कारों, आदि के साथ एक बड़े काफ़िले में यात्रा करते हैं. इसके लिए कई बार हवाई क्षेत्र में कोई भी ड्रोन उड़ाने पर पाबंदियां लगा दी जाती है. यातायात रोक दिया जाता है."

राष्ट्रपति की 'व्यक्तिगत सेना'

पुतिन और उनके पूर्व बॉडीगार्ड विक्टर ज़ोलोतोव

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, वर्तमान में नेशनल गार्ड का नेतृत्व पुतिन के पूर्व बॉडीगार्ड विक्टर ज़ोलोतोव कर रहे हैं. वह राष्ट्रपति के वफ़ादार सहयोगी माने जाते हैं.

'रूसी राष्ट्रपति सुरक्षा सेवा' या एसबीपी को 'रूसी नेशनल गार्ड' या रोसग्वर्दिया का समर्थन प्राप्त है. कुछ लोग इसे राष्ट्रपति की "व्यक्तिगत सेना" बताते हैं.

यह रूसी सशस्त्र बलों से अलग है, हालांकि इसका आधिकारिक मिशन रूसी सीमाओं को सुरक्षित रखना, आतंकवाद से लड़ना और सार्वजनिक क़ानून व्यवस्था की रक्षा करना है.

व्यावहारिक रूप से इसका सबसे महत्वपूर्ण काम ख़तरों से पुतिन की रक्षा करना है.

ब्रिटेन के बाथ यूनिवर्सिटी में रूस अकादमिक विशेषज्ञ स्टीफ़न हॉल ने बीबीसी मुंडो को बताया, "हर कोई जानता है कि रूसी नेशनल गार्ड क़ाफी हद तक पुतिन के निजी गार्ड हैं."

"और राष्ट्रपति उनके बाकी सुरक्षा सेवाओं के घेरे में बहुत सुरक्षित हैं.''

वर्तमान में नेशनल गार्ड का नेतृत्व पुतिन के पूर्व बॉडीगार्ड विक्टर ज़ोलोतोव कर रहे हैं. वह राष्ट्रपति के वफ़ादार सहयोगी माने जाते हैं.

हाल के वर्षों में इस सुरक्षा बल में सैनिकों की संख्या में लगभग चार लाख की बढ़ोतरी की गई है.

हॉल कहते हैं, "यह एक बड़ी संख्या है, अमेरिका के राष्ट्रपति की सुरक्षा ईकाई में गार्ड्स की संख्या इन आंकड़ों के आस-पास भी नहीं है."

पुतिन की सुरक्षा किस तरह करते हैं?

पुतिन और बॉडीगार्ड

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, पुतिन के बॉडीगार्ड सभी खाने-पीने की चीज़ें लेते हैं, जो पुतिन खाने वाले होते हैं

यह जानना मुश्किल है कि पुतिन की रक्षा के लिए किस-किस उपाय को किस हद तक इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन क्रेमलिन और रूसी सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस मामले पर कुछ रोशनी डाली है.

जिस चीज़ को लेकर पुतिन का सुरक्षा घेरा सबसे ज़्यादा सख़्त है, वह है उनका खाना.

मार्क गेलोति के मुताबिक़, ज़हर के डर से, पुतिन के पास एक व्यक्तिगत टेस्टर है, जो राष्ट्रपति के पास आने वाली खाने की हर चीज़ की जांच करता है.

उन्होंने बीबीसी मुंडो को बताया था, "यह एक ऐसे स्टाइल का हिस्सा है, जो एक आधुनिक राष्ट्रपति की तुलना में मध्ययुगीन सम्राट के जैसा है."

साथ ही, जब वो रूस से बाहर यात्रा करते हैं तो राष्ट्रपति की टीम उनके इस्तेमाल करने वाली हर चीज़ की जांच करती है.

गेलोति बताते हैं, "वे सभी खाने-पीने की चीज़ें लेते हैं, जो पुतिन खाने वाले होते हैं. उदाहरण के लिए, अगर कोई आधिकारिक शैंपेन टोस्ट है तो पुतिन उस बोतल से शैंपेन लेते हैं जो उनकी टीम उनके लिए लाती है. बाकी बोतलों से नहीं."

स्मार्टफ़ोन का इस्तेमाल नहीं

पुतिन

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, क्रेमलिन के प्रवक्ता दमित्री पेस्कोव ने बार-बार कहा है कि पुतिन मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल नहीं करते

एक अन्य उपाय जिसे पुतिन की सुरक्षा के लिए अहम माना जाता है, वह है क्रेमलिन के अंदर स्मार्टफ़ोन को ब्लॉक करना.

रूसी राष्ट्रपति ने ख़ुद इस बात की पुष्टि की है कि वह इन उपकरणों का इस्तेमाल नहीं करते हैं.

2020 में, रूसी समाचार एजेंसी तास के साथ एक इंटरव्यू में, उन्होंने इस बात को स्वीकार किया. यह भी बताया कि अगर वह किसी के साथ संपर्क करना चाहते हैं तो ऐसा करने के लिए एक आधिकारिक लाइन होती है.

उनके सलाहकारों ने भी ये माना है. क्रेमलिन के प्रवक्ता दमित्री पेस्कोव ने बार-बार कहा है कि पुतिन मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल नहीं करते क्योंकि उनके पास "समय नहीं होता है."

लेकिन सचाई यह है कि पुतिन ऐसा इसलिए नहीं करते क्योंकि उन्हें इंटरनेट पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं है.

अतीत में, उन्होंने इशारों में कहा था कि इंटरनेट एक "सीआईए यानी - अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसी परियोजना" है और रूसियों से अपील की थी कि गूगल सर्च का इस्तेमाल ना करें. उनका मानना है कि अमेरिकी सभी सूचनाओं की निगरानी करते हैं.

गेलोति कहते हैं, ''पुतिन शायद ही इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं, यह बात तो सभी जानते हैं कि उन्हें फ़ोन पसंद नहीं हैं. और ये ठीक है. वह सुरक्षा के लिहाज़ से ईमानदार हैं. पुतिन बिल्कुल सही हैं. स्मार्टफोन बहुत सुरक्षित नहीं हैं.''

जानकार बताते हैं कि पुतिन को काग़ज़ी फ़ाइलों के माध्यम से सूचित किया जाता है जो उनके सलाहकार उन्हें देते हैं.

हॉल कहते हैं, "पुतिन अपने दिन की शुरुआत तीन सुरक्षा ब्रीफिंग के साथ करते हैं. एक जो पूरी दुनिया से संबंधित है. एक उसके बारे में जो रूस में चल रहा है और तीसरा वह जो अभिजात वर्ग में चल रहा है."

"उनके लिए, यह सबसे महत्वपूर्ण जानकारी है और ये उनके दिन के एजेंडे को तय करती है"

वह बताते हैं, "मुझे याद है कि मैंने राजनयिकों और विदेश मंत्रालय के अधिकारियों से बात की थी. उन्होंने मुझसे कहा था कि अगर उनके पास ऐसी जानकारी है जो उनकी खुफ़िया सेवाओं को सही नहीं लगती तो पुतिन यह मान लेते हैं कि उनके जासूस सही हैं और राजनयिक ग़लत हैं."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

BBC World Service के नए ऐप को डाउनलोड करें

BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट... सब एक जगह

कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.