नोएडा की सड़कों पर श्रमिकों के उतरने के बाद तोड़फोड़, प्रशासन का मांगें पूरी करने का वादा

वाहनों में लगी आग

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इमेज कैप्शन, नोएडा के इंडस्ट्रियल इलाकों में काम करने वाले श्रमिकों ने वेतन बढ़ाने की मांग लेकर प्रदर्शन किया. उन्होंने कुछ गाड़ियों में आग भी लगा दी
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उत्तर प्रदेश में नोएडा के इंडस्ट्रियल एरिया में सोमवार को बड़ी तादाद में कामगारों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया.

श्रमिकों ने कुछ जगहों पर तोड़फोड़ और पत्थरबाज़ी की और कुछ वाहनों में आग लगा दी.

तोड़फोड़ और प्रदर्शन की घटनाएं नोएडा के फ़ेज़-2 और सेक्टर 60 के फ़ैक्ट्री इलाकों में हुई हैं.

इन इलाकों की फ़ैक्ट्रियों में काम करने वाले श्रमिक वेतन बढ़ाने, बोनस देने, कामकाज का बेहतर माहौल बनाने और वर्किंग प्लेस में यौन उत्पीड़न रोकने के लिए कमेटी बनाने की मांग कर रहे थे.

सोमवार सुबह हुए इस प्रदर्शन की वजह से नोएडा और दिल्ली के बीच की सड़कों पर लंबा जाम लग गया और काम पर जाने वाले हज़ारों लोग जहां के तहां फंस गए.

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गौतमबुद्ध नगर की ज़िलाधिकारी ने कहा है कि औद्योगिक इकाइयों के साथ बैठक के बाद उन्हें श्रमिकों की मांग पूरी करने का निर्देश दिया गया है. प्रशासन ये सुनिश्चित करेगा कि उनकी ये मांगें पूरी हों.

गौतमबुद्ध नगर की ज़िलाधिकारी मेधा रूपम ने कहा कि प्रशासन ने पिछले दो-तीन दिनों के दौरान औद्योगिक यूनिट्स के साथ बैठकें की हैं. औद्योगिक यूनिट्स को दिए निर्देशों के बाद प्रशासन ने इसे सुनिश्चित कराने का फ़ैसला किया है.

वेतन बढ़ाने को लेकर प्रशासन ने क्या कहा

गौतमबुद्धनगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम

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इमेज कैप्शन, गौतमबुद्ध नगर की ज़िलाधिकारी मेधा रूपम श्रमिकों की मांग पूरी करने का भरोसा दिलाते हुए
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श्रमिक पिछले तीन दिनों से वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे. लेकिन सोमवार को प्रदर्शन ने ज़िला प्रशासन के आश्वासन के बावजूद ज़ोर पकड़ लिया.

ज़िलाधिकारी मेधा रूपम ने प्रदर्शन से एक दिन पहले सीनियर श्रम अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की थी.

इसके बाद शनिवार (12 अप्रैल 2026) को ज़िलाधिकारी मेधा रूपम ने ज़िलाधिकारी के एक्स हैंडल पर एक वीडियो अपलोड किया, जिसमें वो कह रही हैं कि श्रमिकों की मांग पूरी की जाए उसके लिए इंडस्ट्रियल यूनिट्स को निर्देश दिए गए हैं. प्रशासन ये सुनिश्चित करेगा कि ये निर्देश पूरे हों.

श्रमिकों की मांग पर ज़िलाधिकारी ने कहा, "ओवरटाइम का भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा. हर श्रमिक को साप्ताहिक अवकाश दिया जाएगा और साप्ताहिक अवकाश पर काम करने पर भुगतान दोगुना होगा.''

उन्होंने कहा, "सभी श्रमिकों को नियम के मुताबिक बोनस दिया जाएगा. बोनस अधिकतम 30 नवंबर से पहले उनके बैंक खातों में ट्रांसफ़र हो जाएगा. सभी वर्किंग प्लेस में यौन उत्पीड़न के ख़िलाफ़ कमेटी बनेगी और इसे सुनिश्चित किया जाएगा. कमेटी की अध्यक्षता महिला करेगी.''

ज़िलाधिकारी के मुताबिक़ ये सुनिश्चित किया जाएगा कि श्रमिकों का वेतन एकमुश्त हर महीने की 10 तारीख़ से पहले उनके बैंक खाते में ट्रांसफ़र हो जाए. साथ ही सभी को अनिवार्य तौर पर वेतन पर्ची दी जाएगी.

ज़िला स्तर पर एक कंट्रोल रूम बनाया जाएगा, जहां श्रमिक अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं.

ज़िलाधिकारी ने कहा ये सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी वर्किंग प्लेस पर शिकायत पेटी लगाई जाए और सभी श्रमिकों के साथ सम्मानजनक व्यवहार हो.

पुलिस ने क्या कहा

पुलिस ने कहा है कि अशांति फैलाने वालों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की जाएगी

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समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, उत्तर प्रदेश के डीजीपी राजीव कृष्णा ने कहा कि पुलिस नोएडा में मज़दूरों के विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित रूप से हिंसा भड़काने वाले लोगों की पहचान कर रही है.

पुलिस ने कहा कि उनके ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की जाएगी.

डीजीपी ने कहा कि अशांति में शामिल "उकसाने वाले" और "बाहरी तत्वों" का पता लगाया जा रहा है.

उन्होंने कहा, "जैसे ही उनकी पहचान हो जाएगी, उनके ख़िलाफ़ कड़ी क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी."

दिल्ली पुलिस ने कहा है कि वह पूरी तरह सतर्क और चौकन्नी है, और सभी महत्वपूर्ण स्थानों पर पर्याप्त बल तैनात किया गया है.

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि किसी को भी कानून-व्यवस्था भंग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

उन्होंने कहा कि मुख्य बॉर्डर प्वाइंट्स पर बैरिकेडिंग बढ़ा दी गई है, किसी भी अप्रिय घटना से तुरंत निपटने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल, रैपिड रिस्पॉन्स टीमें और अर्द्धसैनिक बल तैनात किए गए हैं.

पुलिस अधिकारियों ने यह भी कहा कि वे स्थिति पर लगातार नज़र बनाए हुए हैं और उत्तर प्रदेश पुलिस के संपर्क में हैं.

क्या है श्रमिकों की मांग

श्रमिक न्यूनतम 20 हजार रुपये मासिक वेतन की मांग कर रहे हैं

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नोएडा में पिछले दो-तीन दिन से श्रमिक वेतन बढ़ाने और बेहतर कामकाजी परिस्थितियों की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे.

श्रमिक लंबे समय से उत्तर प्रदेश में कम वेतन को लेकर चिंता जता रहे थे. ख़ासकर पड़ोसी हरियाणा से तुलना में, जहां हाल ही में न्यूनतम वेतन लगभग 14,000 रुपये से बढ़ाकर 19,000 रुपये कर दिया गया है.

इसके उलट, नोएडा के श्रमिकों का दावा है कि उन्हें वेतन लगभग 13,000 रुपये के आसपास ही मिलता है, जिससे पूरे औद्योगिक क्षेत्र में असंतोष बढ़ रहा है. श्रमिकों का कहना है कि उनका न्यूनतम वेतन कम से कम 20 हज़ार रुपये किया जाए.

अखिलेश ने की निंदा, सीएम योगी ने किया वादा

समाजवादी पार्टी प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने श्रमिकों की मांग का समर्थन किया है

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उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने श्रमिकों की मांग का समर्थन किया.

वहीं मुज़फ़्फ़रनगर में एक रैली में राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उनकी सरकार श्रमिकों के साथ है.

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, ''नोएडा में वेतन बढ़ाने को लेकर उग्र हुए आंदोलन का कारण भाजपा सरकार की वो एकतरफ़ा नीति है जो पूंजीपतियों का पोषण करती है. लेकिन सामान्य काम करने वाले कर्मचारियों और वेतनभोगी श्रमिकों-मज़दूरों का शोषण.''

उन्होंने लिखा, ''भाजपाई चंदादायी पूंजीपतियों के एटीएम में तो पैसे भरते जा रहे हैं, लेकिन श्रमिकों-मज़दूरों के वेतन के लिए इनके एटीएम खाली हैं.''

''बेतहाशा महंगाई के इस दौर में कम वेतन पर घर चलाना कितना मुश्किल है, ये एक परिवारवाला ही समझ सकता है. वेतनभोगी कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!''

योगी आदित्यनाथ ने कहा, "सरकार उद्यमियों को सुरक्षा देगी और प्रत्येक श्रमिक को संरक्षण प्रदान करते हुए उन्हें उचित मानदेय भी सुनिश्चित करेगी. हमने गत वर्ष ही एक आउटसोर्सिंग कॉरपोरेशन का गठन किया था और इसी महीने उसकी सिफारिशें लागू होने जा रही हैं."

"आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों को न्यूनतम मानदेय की गारंटी दी जाएगी, जो सीधे उनके खातों में हस्तांतरित की जाएगी."

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