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चीन की ये ख़ास जेल जहां लोग वज़न कम करने के लिए आते हैं
- Author, सारा बेल
- पदनाम, ग्लोबल डिजिटल हेल्थ
- पढ़ने का समय: 8 मिनट
सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो देखे जा सकते हैं जिनमें कई लोग एक बड़े स्पोर्ट्स हॉल में एक्सरसाइज़ करते दिख रहे हैं, कैंटीन के खाने के लिए लाइन में लगे हैं और बिस्तरों से भरे डॉर्मेट्री में सोते नज़र आ रहे हैं.
फ़िटनेस का यह नया ठिकाना कोई लग्ज़री स्पा रिट्रीट नहीं, बल्कि चीन का मिलिट्री‑स्टाइल वज़न घटाने का कैंप है. कुछ लोग इन्हें 'फ़ैट जेल' कहते हैं. यहां बीच-बीच में कुछ खाने पर सख़्त पाबंदी होती है और दिन में दो बार वज़न लेना अनिवार्य है.
चीनी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दुनिया के कई देशों की तरह चीन भी मोटापे की समस्या से जूझ रहा है और वहां ऐसे करीब 1,000 कैंप हैं. 600 डॉलर में आप एक महीने का पैकेज बुक कर सकते हैं, जिसमें रहने की जगह, खाना और रोज़ाना एक्सरसाइज़ क्लासेस शामिल होती हैं.
इंस्टाग्राम पर eggeats नाम से अपना अनुभव साझा करने वाली कंटेंट क्रिएटर टीएल हुआंग ने बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के 'वाट इन द वर्ल्ड' (What in the World) पॉडकास्ट से कहा कि यह अनुभव 'पूरी तरह जेल जैसा' लगा, क्योंकि वह 28 दिन तक कैंपस से बाहर नहीं जा पाईं और उन्हें अपना वज़न ट्रैक करना पड़ता था.
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हुआंग कहती हैं, "हमारे ट्रेनर हर वक्त हमारी निगरानी करते थे, यह सुनिश्चित करने के लिए कि हम चुपके से जंक फूड न ला रहे हों, सभी क्लासेस अटेंड कर रहे हों, और बिना ठोस वजह के किसी को न तो कोई क्लास छोड़ने की इजाज़त थी और न ही कैंप से बाहर जाने की."
हालांकि उनका कहना है कि उन्हें यह तरीका असरदार लगा, लेकिन न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसे बेहद सख़्त तरीकों से शारीरिक और मानसिक, दोनों तरह के गंभीर ख़तरे हो सकते हैं.
पर्सनल ट्रेनर और न्यूट्रिशनिस्ट ल्यूक हाना कहते हैं, "कुछ कैंप रोज़ एक किलो वज़न घटाने का लक्ष्य रखते हैं. यह दर, मेडिकल निगरानी में रहने वाले वयस्कों के लिए सुरक्षित मानी जाने वाली सीमा से भी कहीं ज़्यादा है."
तो फिर ये कैंप चलते कैसे हैं, और इतनी तेज़ी से लोकप्रिय कैसे हो गए?
'बदलाव का वक्त'
हुआंग बताती हैं कि उन्होंने इन कैंपों के बारे में सबसे पहले अपनी मां से सुना था, जो चीनी हैं. चीन में अकेले घूमने के बाद वह खुद को 'काफ़ी अस्वस्थ' महसूस कर रही थीं, उनकी दिनचर्या बिगड़ गई थी और वह बहुत ज़्यादा फ़ूड डिलीवरी मंगाने लगी थीं.
हुआंग के मुताबिक, तीन साल में उनका वज़न करीब 20 किलो बढ़ गया था. इस वजह से रिश्तेदार टिप्पणियां करने लगे थे, जिनसे उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि "अब कुछ बदलने का समय आ गया है."
वह कहती हैं, "मुझे लगा कि मोटापे की वजह से मेरा मज़ाक बनाया जा रहा है. लेकिन साथ ही, शायद वे थोड़ा सख्ती के साथ मुझसे प्यार भी जता रहे थे."
कैंप में जाना उनके लिए 'एक बहुत बड़ा सांस्कृतिक झटका' था, लेकिन हुआंग का कहना है कि वहां मौजूद लोगों के बीच एक मज़बूत अपनापन था, क्योंकि सब मिलकर वज़न कम करने की कोशिश कर रहे थे.
हर दिन की शुरुआत सुबह 7.30 बजे वज़न तौलने से होती थी. इसके बाद चार घंटे की एक्सरसाइज़ होती थी- जिसमें स्पिन क्लास, ट्रैम्पोलिनिंग, हाई‑इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग (HIIT), तबाता (HIIT का और भी तीव्र रूप) और वेट ट्रेनिंग शामिल थीं.
नाश्ते में चार उबले अंडे, आधा टमाटर और खीरे के दो टुकड़े मिलते थे. एक वीडियो में हुआंग अपने लंच को रेटिंग देती दिखती हैं- जिसमें झींगे, उबली हुई सब्ज़ियां और टोफ़ू या फिर उबली हुई मछली, चीनी-सेलेरी, उबली हरी पत्तेदार सब्ज़ियां और फूलगोभी शामिल थी.
वह कहती हैं, ये खाने "अच्छे, संतुलित और आम चीनी घरेलू खाने जैसे डिज़ाइन किए गए" होते हैं.
डिनर के बाद मेहमानों से उम्मीद की जाती थी कि वे आख़िरी एक घंटे की स्पिन क्लास में भाग लें, इसके बाद शाम 7.30 बजे दोबारा वज़न तौला जाता था. फिर वे नहा सकते थे और आराम कर सकते थे.
हुआंग कहती हैं कि पहले हफ़्ते यह रूटीन उन्हें 'काफ़ी नया और अलग' लगा, लेकिन बाद में उन्हें एहसास हुआ कि तीन हफ़्ते तक और इसी तरह रहना होगा. दोस्तों से लगातार मैसेज करना ही उन्हें आगे बढ़ते रहने की ताक़त देता रहा.
हालांकि वह सुविधाओं को जेल जैसा बताती हैं, फिर भी हुआंग का मानना है कि यह सब इसके लायक था- 28 दिनों में उन्होंने 13.2 पाउंड (6 किलो) वज़न कम किया.
वह कहती हैं, "इसने मुझे एक तरह से हार्ड रीसेट दिया और वह ढांचा दिया, जिसकी मुझे ज़रूरत थी."
'सामान्य विकास पर असर'
लेकिन एक्सपर्ट्स सावधानी बरतने की सलाह देते हैं. लंदन के पर्सनल ट्रेनर ल्यूक हाना कहते हैं कि इन कैंपों का तरीका इसलिए ख़ास तौर पर चिंता की बात है, क्योंकि जब वज़न कम होता है तो शरीर से सिर्फ़ चर्बी ही नहीं, मसल टिश्यू भी घटता है. ऐसे में अगर ज़रूरत से ज़्यादा एक्सरसाइज़ जैसे बेहद सख्त तरीकों का इस्तेमाल किया जाए, तो मसल्स गंवाने का ख़तरा और बढ़ जाता है.
यह समस्या तब और गंभीर हो जाती है जब बच्चे या युवा इसी तरह वज़न घटाते हैं.
वह कहते हैं, "इससे सामान्य शारीरिक विकास पर भी असर पड़ सकता है. मुमकिन है कि इसका असर आपकी हड्डियों की सेहत पर पड़े और अंततः आपकी कुल लंबाई कितनी होने वाली है, उस पर भी पड़ सकता है."
इसके अलावा, इससे मानसिक समस्याएं भी हो सकती हैं, जैसे ईटिंग डिसऑर्डर होने का ख़तरा काफ़ी बढ़ जाना.
हाना कहते हैं, "कुछ लोग बहुत तेज़ी से काफ़ी वज़न घटा लेते हैं, जो सुनने में बहुत अच्छा लगता है, लेकिन उनमें से ज़्यादातर लोगों का वज़न सामान्य ज़िंदगी में लौटते ही वापस बढ़ जाता है, क्योंकि इससे असली वजहों या समस्याओं का समाधान नहीं होता."
यूके की नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) धीरे‑धीरे वज़न घटाने की सलाह देती है- 1 से 2 पाउंड या आधे से 1 किलो तक.
हाना कहते हैं कि लोगों को इसके बजाय अपने सामान्य माहौल में धीरे‑धीरे आदतें बदलने पर ध्यान देना चाहिए, नियमित पौष्टिक खाना खाना, भरपूर प्रोटीन लेना और सज़ा के तौर पर नहीं, बल्कि सीखने, खेलने और मज़े के लिए एक्सरसाइज़ करना.
दरअसल, इंस्टाग्राम पर बाद के एक वीडियो में टीजे हुआंग खुद कहती हैं कि सबसे मुश्किल हिस्सा घर लौटना था, क्योंकि उनके शरीर को अब यह समझ ही नहीं आ रहा था कि 'सामान्य' खाना कैसा लगता है.
एक हेल्दी डाइट में रोज़ कम से कम पांच हिस्से फल और सब्ज़ियां शामिल होनी चाहिए, साथ ही हफ्ते में 150 मिनट तक एक्टिव रहने का लक्ष्य रखना चाहिए.
मीठे ड्रिंक्स की जगह पानी पीना और ज़्यादा फ़ैट और ज़्यादा चीनी वाले खाने को कम करना भी मददगार हो सकता है.
भेदभाव
बीबीसी की ग्लोबल चाइना यूनिट से वानक़िंग झांग के मुताबिक, चीन में ये कैंप 2000 के शुरुआती सालों में शुरू हुए थे. इसकी वजह एक टीवी कार्यक्रम था, जिसमें वज़न घटाने वाली संस्थाओं के अंदर की ज़िंदगी दिखाई गई थी. उन शोज़ के कोचों ने बाद में अपने खुद के वज़न घटाने के कैंप खोल लिए. लेकिन असली तेज़ बढ़ोतरी पिछले दस सालों में हुई, जब सोशल मीडिया का ज़ोर बढ़ा.
झांग कहती हैं, "अगर आप चीनी सोशल मीडिया पर जाएं, तो आपको बहुत तरह का कंटेंट दिखेगा. उसे या तो कैंप के आयोजकों ने डाला होगा या फिर इन कैंपों में हिस्सा लेने वाले लोगों ने."
झांग बताती हैं कि ये कैंप कई तरह के हो सकते हैं. कुछ उसी तरह के सख्त, अनुशासन वाले कैंप होते हैं, जिसमें हुआंग गई थीं. लेकिन कुछ इतने ज़्यादा सख़्त भी हो सकते हैं कि डॉर्मेट्री के बाहर सीसीटीवी लगा होता है, ताकि अगर कोई खाना मंगाने की कोशिश करे तो पकड़ा जा सके.
वहीं दूसरी तरफ, कुछ कैंप इसके बिल्कुल उलट होते हैं, "बहुत फैंसी, हाई‑एंड रिट्रीट टाइप, जहां आप किसी खूबसूरत झील को देखते हुए ट्रेडमिल पर दौड़ रहे होते हैं."
इन कैंपों के पीछे सबसे बड़ी वजह दुनिया भर में बढ़ता मोटापा है. करीब दो‑तिहाई देशों में 50% से ज़्यादा वयस्कों को ज़्यादा वज़न वाले या मोटे की श्रेणी में रखा जाता है. चीनी स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, देश में करीब 34% वयस्क ज़्यादा वज़न वाले हैं, जबकि 16% मोटापे से ग्रस्त माने जाते हैं.
बीबीसी की झांग का कहना है कि इसके पीछे एक सांस्कृतिक पहलू भी है. "चीन ऐसा देश है जहां वज़न को लेकर विविधता को स्वीकार करने की क्षमता और सहनशीलता काफ़ी कम है. इसका मतलब यह है कि अगर आपका वज़न ज़्यादा है, तो आपको नौकरी के माहौल या डेटिंग की दुनिया में ज़्यादा भेदभाव का सामना करना पड़ सकता है."
चावल, डम्पलिंग्स और नूडल्स जैसे खाने में मौजूद रिफाइंड कार्ब्स एक समस्या हैं, साथ ही यह भी कि दुनिया भर में लोग खाली समय बाहर बिताने के बजाय फ़ोन या टैबलेट के साथ घरों के अंदर ही रहते हैं.
इस बीच, हुआंग के इंस्टाग्राम से पता चलता है कि वह अब थाईलैंड में हैं, जहां वह एक और 30‑दिन की वज़न घटाने की चुनौती में हिस्सा ले रही हैं, बेहद ज़्यादा गर्मी में रोज़ दो घंटे एक्सरसाइज़ करते हुए.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.