लाइव, जी7 की बैठक से ठीक पहले कनाडा के पीएम ने अमेरिका को लेकर क्या कहा

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा है कि मिडिल पावर देशों को 'महाशक्तियों' का फ़ेवर पाने के लिए आपस में होड़ नहीं करनी चाहिए.

सारांश

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  • भारतीय वायु सेना का विमान क्रैश हुआ
  • ट्रंप
  • एस जयशंकर
  • पॉल एलेक्ज़ेंडर को द मैन इन द आयरन लंग के नाम से भी जाना जाता था
  • ट्रंप
  • शहद निकालने वाले दो शख़्स
  • बांग्लादेश में एक टका लेकर पढ़ात हैं रहमान

लाइव कवरेज

सुमंत सिंह

  1. जी7 की बैठक से ठीक पहले कनाडा के पीएम ने अमेरिका को लेकर क्या कहा

    मार्क कार्नी

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    इमेज कैप्शन, कार्नी ने जी-7 समिट से पहले यह बयान दिया है

    कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा है कि मिडिल पावर देशों को 'महाशक्तियों' का फ़ेवर पाने के लिए आपस में होड़ नहीं करनी चाहिए.

    कार्नी ने यह बात शनिवार को डबलिन में आयरलैंड के नेता से मुलाक़ात के दौरान कही. यह मुलाक़ात आगामी जी-7 शिखर सम्मेलन से पहले हुई.

    कार्नी ने कहा, "महाशक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा वाली दुनिया में मध्यम शक्ति वाले देशों के पास एक विकल्प है. वे या तो फ़ेवर के लिए आपस में प्रतिस्पर्धा करें, या फिर मिलकर प्रभावशाली तीसरा रास्ता तैयार करें."

    समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, कनाडाई पीएम ने कहा कि कनाडा और यूरोपीय संघ की संयुक्त आबादी अमेरिका की आबादी से दोगुने से भी अधिक है.

    उन्होंने कहा कि दोनों की संयुक्त अर्थव्यवस्था का आकार भी लगभग अमेरिका के बराबर है और उनका सामूहिक रक्षा बजट चीन के रक्षा बजट से दोगुना है.

    कार्नी ने कहा कि छोटे देश समान सोच रखने वाले सहयोगी देशों के साथ साझेदारी करके अपनी ताक़त कई गुना बढ़ा सकते हैं.

    डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में अमेरिका और कनाडा के संबंधों में खटास आई है. इसके बाद से कनाडा अपनी निर्भरता अमेरिका से कम करने में लगा हुआ है.

  2. पटना के पाटलिपुत्र रेलवे स्टेशन में पथराव, पुलिस और प्रत्यक्षदर्शी ने क्या बताया, प्रीति प्रभा, बिहार से बीबीसी न्यूज़ हिन्दी के लिए

    पाटलिपुत्र रेलवे स्टेशन पर छात्रों का हंगामा

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    इमेज कैप्शन, पाटलिपुत्र रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों पर पथराव और तोड़ फ़ोड़ की गई

    बिहार के पटना स्थित पाटलिपुत्र रेलवे स्टेशन पर शनिवार और रविवार की दरमियानी रात लगभग तीन बजे स्टूडेंट्स ने भारी हंगामा किया.

    स्टूडेंट्स ने ट्रेन में तोड़-फोड़ और जमकर पथराव किया. इसकी वजह से दो-तीन घंटे स्टेशन में भारी अफरा-तफरी मची रही और ट्रेनों का परिचालन भी बाधित हुआ.

    पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे और हवा में फायरिंग की.

    इस मामले पर पटना डीएम डॉ त्यागराजन ने कहा, "ये सभी छात्र ट्रेन की व्यवस्था जैसे मुद्दों को लेकर विरोध कर रहे थे. जबकि स्पेशल ट्रेनों का इंतजाम किया गया था. स्टेशन पर पहले से दो स्पेशल ट्रेनें खड़ी थीं."

    उन्होंने कहा, "हमें जानकारी मिली कि कुछ लोग रेलवे स्टेशन पर हंगामा कर रहे हैं. मौक़े पर पहुंच कर हमने कम से कम बल का इस्तेमाल करके भीड़ को हटाया. अब स्थिति पूरी तरह शांतिपूर्ण और नियंत्रण में है, आगे कोई समस्या नहीं है."

    वहीं, पुलिस आईजी जितेंद्र राणा ने बताया, "यहां पर लगभग 200-250 छात्र थे, वे ट्रेन को नहीं खुलने (डिपार्चर) दे रहे थे. जब आरपीएफ़, जीआरपी और ज़िला पुलिस ने उनको समझाने का प्रयास किया तो उनकी ओर से पथराव किया गया."

    उन्होंने कहा, "जानमाल की हानि बचाने के लिए पुलिस ने कार्रवाई की है. इसके बाद सभी ट्रेनों को हटाया गया है."

    समाचार एजेंसी आईएएनएस की ओर से जारी एक वीडियो में दिख रहा है कि छात्रों को काबू में करने के लिए पुलिस आंसू गैस के गोले दाग़ रही है और लाठी लेकर छात्रों को खदेड़ने की कोशिश की गई.

    पटना हंगामा

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    इमेज कैप्शन, इस हंगामे की वजह से ट्रेन काफ़ी देर तक रवाना नहीं हो सकी

    दरअसल, ये सभी स्टूडेंट बिहार पुलिस के मद्य निषेध विभाग की भर्ती परीक्षा में शामिल होने वाले थे. परीक्षा दो पालियों में होनी थी, जिसके लिए हज़ारों अभ्यर्थी रात में ही स्टेशन पहुंच गए.

    स्थिति तब बिगड़ गई, जब पाटलिपुत्र से कटिहार के लिए चलाई गई एग्ज़ाम स्पेशल ट्रेन स्टेशन पहुंची. ट्रेन में काफ़ी भीड़ थी, हज़ारों की संख्या में स्टूडेंट ट्रेन नहीं पकड़ पाए. इस दौरान अभ्यर्थियों में अफरा-तफरी मच गई.

    इसके बाद नाराज़ स्टूडेंट ट्रेन के आगे पटरी पर बैठ गए और रेल प्रशासन के ख़िलाफ़ जमकर नारेबाजी शुरू कर दी और पर्याप्त ट्रेनों की मांग करने लगे.

    मौक़े पर पहुंची पुलिस की ओर से लाठीचार्ज के बाद नाराज़ स्टूडेंट्स ने पुलिस पर भी पथराव किया. इस पथराव से स्टूडेंट्स के साथ-साथ कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं.

    इस घटना के एक प्रत्यक्षदर्शी छात्र ने न्यूज़ एजेंसी आईएएनएस को बताया, "बिहार पुलिस की परीक्षा थी, इसी वजह से यहां बहुत भीड़ थी. इसके लिए कोई स्पेशल ट्रेन नहीं चलाई गई थी."

    उन्होंने बताया, "जो भी ट्रेनें आ रहीं थीं, उनमें भीड़ थी. ट्रेन नहीं आई, इसलिए पथराव हुआ. यहां प्रशासन था, लेकिन जब पथराव हुआ तो प्रशासन भी पीछे हट गया."

    इस घटना के बाद डीआरएम दानापुर की ओर से रविवार को जारी एक बयान में कहा गया कि "बिहार कांस्टेबल परीक्षा को ध्यान में रखते हुए, पूर्व मध्य रेलवे (दानापुर मंडल) की ओर से परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए दो परीक्षा स्पेशल ट्रेनों का परिचालन किया गया है."

  3. अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो के बयान पर संजय सिंह ने क्या कहा

    संजय सिंह

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    इमेज कैप्शन, संजय सिंह ने अमेरिका की ओर से जारी बयान को 'भारत का अपमान' बताया (फ़ाइल फ़ोटो)

    फ़ारस की खाड़ी क्षेत्र में हुए अमेरिकी हमले में तीन भारतीयों की मौत के मामले में अमेरिका के बयान को लेकर भारत में विपक्षी नेता सरकार के रुख़ पर सवाल उठा रहे हैं.

    आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने इसे 'भारत का अपमान' बताया.

    उन्होंने कहा, "हमारे विदेश मंत्री जयशंकर ने अमेरिकी सेना द्वारा तीन भारतीयों की हत्या पर अपना विरोध जताने के लिए मार्को रुबियो को फ़ोन किया. रुबियो ने दुख जताने के बजाय उल्टा हमारे विदेश मंत्री को ही 'डाँट' दिया और कहा 'अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा'."

    कांग्रेस सांसद और पूर्व विदेश राज्य मंत्री शशि थरूर ने अमेरिका के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें 'निर्दोष भारतीयों की मौत पर दुख या संवेदना' का एक भी शब्द नहीं है.

    उन्होंने कहा, "कोई 'मित्र' और रणनीतिक साझेदार इतना असंवेदनशील कैसे हो सकता है?"

    दरअसल, भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस मामले में कहा था कि उन्होंने इस हमले को लेकर अमेरिकी विदेश मंत्री के सामने 'कड़ा विरोध' दर्ज कराया है.

    वहीं, अमेरिकी विदेश मंत्री ने शनिवार को जारी एक बयान में कहा कि "सभी कमर्शियल जहाज़ों को अमेरिकी सेना के आदेशों का तुरंत पालन करना चाहिए, क्योंकि वो इस स्ट्रेट में शांति और सुरक्षा बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं."

    उन्होंने कहा कि अमेरिकी नाकाबंदी का उल्लंघन और ईरानी तेल की अवैध ढुलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

  4. ईरान के इन शहरों में अमेरिका से 'समझौते' के ख़िलाफ़ क्यों हुए प्रदर्शन

    ईरान में विरोध प्रदर्शन

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    इमेज कैप्शन, प्रदर्शनकारियों ने विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची और संसद के स्पीकर बग़र ग़ालिबाफ़ के ख़िलाफ़ नारे लगाए, ये दोनों नेता अमेरिका के साथ बातचीत में मुख्य भूमिका में हैं (फ़ाइल फ़ोटो)

    अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने को लेकर रविवार को समझौता होने की उम्मीद जताई जा रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसको लेकर बयान भी जारी किया.

    हालांकि, ईरान की ओर से हस्ताक्षर का समय या तारीख़ स्पष्ट तौर पर नहीं बताई गई है.

    इस बीच दोनों देशों के बीच समझौते के ख़िलाफ़ ईरान के शहरों में प्रदर्शन हुए हैं.

    बीबीसी फ़ारसी सेवा के मुताबिक़, ईरान में समझौते के कुछ विरोधियों ने इसके ख़िलाफ़ प्रदर्शन किए और विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची और संसद के स्पीकर मोहम्मद बग़र ग़ालिबाफ़ के ख़िलाफ़ नारे लगाए.

    यह रैली तेहरान के इब्न सिना स्क्वायर में आयोजित की गई थी, जिसमें शामिल प्रदर्शनकारी ईरान के एक कट्टरपंथी और चरमपंथी संगठन "परसिस्टेंस फ़्रंट" के क़रीबी बताए जा रहे हैं.

    शनिवार शाम को भी मशहद में विदेश मंत्रालय के इमारत के सामने दर्जनों लोग अब्बास अराग़ची के अमेरिका के साथ संभावित समझौते के बारे में दिए गए बयानों के विरोध में जमा हुए.

    फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी ने एक वीडियो जारी किया है, जिसमें मशहद में प्रदर्शनकारी अराग़ची के ख़िलाफ़ नारे लगाते दिख रहे हैं.

    समझौते का विरोध करने वालों का मानना ​​है कि यह समझौता ईरान के हित में नहीं है और इससे होर्मुज़ स्ट्रेट में ईरान का प्रभाव कमज़ोर होगा.

    बीबीसी फ़ारसी सेवा के मुताबिक़, अराग़ची ने एक टेलीविजन इंटरव्यू में कहा था कि समझौते में ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को हटाना शामिल होगा. उन्होंने होर्मुज़ स्ट्रेट को ईरान के प्रमुख डेटेरेंट (निरोधक क्षमता) में से एक बताया.

  5. पीएम मोदी और ट्रंप के बीच फ़्रांस में हो सकती है मुलाक़ात

    नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप

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    इमेज कैप्शन, दोनों नेताओं के बीच आखिरी बैठक पिछले साल फ़रवरी में हुई थी (फ़ाइल फ़ोटो)

    फ़्रांस में होने वाली जी-7 बैठक से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच मुलाक़ात होने की संभावना है.

    समाचार एजेंसी पीटीआई ने अमेरिकी मीडिया के हवाले से ये जानकारी दी है.

    अमेरिकी मीडिया ने अधिकारियों के हवाले से जानकारी दी है कि दोनों नेताओं के बीच बुधवार, 17 जून को द्विपक्षीय बैठक होगी. ट्रंप सोमवार सुबह जी-7 शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए फ़्रांस रवाना होंगे.

    पिछले साल फ़रवरी में वॉशिंगटन में मुलाक़ात के बाद दोनों नेताओं के बीच यह पहली मुलाक़ात होगी.

    वहीं, समाचार एजेंसी एएनआई ने एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी का बयान जारी किया है. इसमें भी बुधवार 17 जून को दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठक का ज़िक्र है.

    इस मुलाक़ात की ख़बर ऐसे समय आई है जब खाड़ी में तीन भारतीय नाविकों की मौत को लेकर भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक तनाव चल रहा है.

    बीते दिनों ओमान की खाड़ी क्षेत्र में एक कार्गो जहाज़ पर हुए हमले में तीन भारतीयों की मौत हुई थी. भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फ़ोन पर बात कर इस घटना पर 'कड़ा विरोध' दर्ज किया था.

    हालांकि, अमेरिका की ओर से आए बयान में कहा गया कि अमेरिकी नाकाबंदी का उल्लंघन और ईरानी तेल की अवैध ढुलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

    नरेंद्र मोदी

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    इमेज कैप्शन, पीएम मोदी फ़्रांस और स्लोवाकिया के दौरे पर हैं, वह शनिवार को फ़्रांस के नीस शहर में उतरे

    पीएम मोदी का फ़्रांस दौरा

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार, 13 जून को फ़्रांस पहुंच गए हैं. नीस में उतरने के बाद पीएम मोदी ने कहा कि वह इस यात्रा के दौरान द्विपक्षीय और बहुपक्षीय स्तर पर कई बैठकों और कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे.

    उन्होंने फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से भी मुलाक़ात की बात कही.

    भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक़, पीएम मोदी 13 से 18 जून तक फ़्रांस और स्लोवाकिया में रहेंगे. वह 13 से 14 जून तक फ़्रांस के नीस और 16 से 18 जून 2026 तक एवियान और पेरिस की यात्रा करेंगे.

    इस बीच वह 14 से 16 जून तक स्लोवाकिया की आधिकारिक यात्रा करेंगे.

  6. डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को समझौते पर हस्ताक्षर करने की बात कही, ईरान क्या बोला

    डोनाल्ड ट्रंप

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    इमेज कैप्शन, ट्रंप ने समझौते को लेकर एलान तो कर दिया है लेकिन ईरान की ओर से अभी सतर्कता बरती जा रही है

    फ़ारस की खाड़ी में संघर्ष समाप्त करने को लेकर डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि रविवार यानी आज दोनों पक्षों में हस्ताक्षर होंगे, जबकि ईरान ने कहा है कि हस्ताक्षर का अभी कोई सटीक समय तय नहीं हुआ है.

    ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने शनिवार को कहा कि अमेरिका के साथ समझौते पर हस्ताक्षर करने का समय अभी तक निर्धारित नहीं किया गया है.

    उन्होंने एक बयान में कहा, "समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने के सटीक समय का हमें इंतजार करना होगा."

    उन्होंने कहा कि रविवार को हस्ताक्षर नहीं होंगे, "हालांकि, आने वाले दिनों में हस्ताक्षर होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है. दूसरे पक्ष के रुख़ में असंगति को देखते हुए, हमें इस प्रक्रिया के बारे में कोई भी बयान देते समय सावधानी बरतनी चाहिए.

    हालांकि बक़ाई के बयान के कुछ घंटों बाद ही अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में लिखा, "समझौते पर कल (रविवार) हस्ताक्षर होने वाले हैं, और जैसे ही इस पर हस्ताक्षर हो जाएंगे, होर्मुज़ स्ट्रेट सभी के लिए खुल जाएगा."

    ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार की ओर इशारा करते हुए ट्रंप ने कहा कि "सही समय पर, जब सब कुछ शांत होगा, हम वहां जाएंगे और 'न्यूक्लियर डस्ट' को हासिल करेंगे."

    इस प्रक्रिया में अहम मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान ने भी शनिवार को कहा था कि समझौते को अगले 24 घंटों के भीतर अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है और दोनों देश 'इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर की तैयारी कर रहे हैं.'

  7. नमस्कार!

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