चीन की मंदी की मार ऑस्ट्रेलिया में!

ऑस्ट्रेलिया खनन उद्योग
    • Author, जूलियन लॉर्किन
    • पदनाम, सिडनी
  • प्रकाशित

पिछले 23 सालों के विकास के बाद लौह अयस्क और कोयले की अचानक गिरी कीमतों ने ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था पर एक तरह से ब्रेक लगा दिया है.

इस दौरान ऑस्ट्रेलिया ने अपने इतिहास में खनन क्षेत्र का सबसे बड़ा उछाल भी देखा लेकिन इसके खदानों वाले शहर अब इसकी कीमत चुका रहे हैं.

खनन क्षेत्र में आई इस मंदी की कीमत चुकाने वालों में से पीटर विंडल भी हैं. वे न्यू साउथ वेल्स में एक खनन कंपनी में अच्छी खासी नौकरी कर रहे थे.

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ऑस्ट्रेलिया खनन उद्योग

कंपनी की कार, सालाना बोनस और मोटी पगार. कंपनी से निकाले जाते वक्त उन्हें मुआवज़ा दिया गया था ताकि उनकी तकलीफ कुछ कम हो सके.

लेकिन इसके बावजूद पीटर विंडल को अपनी संपत्ति का कुछ हिस्सा बेचना पड़ा. अब पीटर म्यूज़वेलब्रुक के छोटे से शहर में स्कूल बस चलाते हैं.

इस शहर ने दशकों तक कोयला उद्योग में आए उछाल को करीब से देखा है.

खनन उद्योग

ऑस्ट्रेलिया खनन उद्योग

पीटर कहते हैं, "खनन उद्योग की ऐसी खराब हालत मैंने पिछले 28 सालों में कभी भी नहीं देखी. हर कोई इसे छोड़कर जा रहा है. मेरे शहर में तीन सौ मकान बिक्री के लिए हैं. तीन मेरी गली में हैं. किराये भी बहुत कम हो गए हैं."

विंडल की कंपनी ने अचानक 500 लोगों की छंटनी और खनन रोकने की घोषणा कर दी. पीटर विंडल की कहानी ऑस्ट्रेलिया में कोई अनोखी नहीं है.

कोयला और लौह इस्पात के खनन में लगी कंपनियां अपने कर्मचारियों को नौकरी से निकाल रही हैं, खनन का काम रोका जा रहा है, नए निवेश के फैसले टाले जा रहे हैं.

मुनाफ़े का कारोबार

ऑस्ट्रेलिया खनन उद्योग

जानकारों का कहना है कि ये लंबे समय से चल रहे मुनाफ़े के कारोबार का बंद होना है और खनन क्षेत्र में में आई उछाल की वजह चीन से होने वाली मांग थी.

ऑस्ट्रेलिया के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वहां 2001 में कोयला खनन में 15 हज़ार लोगों को काम मिला हुआ था जबकि 2014 में ये संख्या बढ़कर 60 हज़ार हो गई.

खनन कंपनियों ने दूसरे उद्योगों के कर्मचारियों को लुभाने के लिए मोटी पगार की पेशकश की क्योंकि खनन का ज़्यादातर काम दूरदराज़ की जगहों पर था.

कोयला निर्यात

ऑस्ट्रेलिया खनन उद्योग

शुरुआती अनुमानों के अनुसार बीते इस साल ऑस्ट्रेलिया ने 40 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर या तकरीबन 2000 अरब रुपये का कोयला निर्यात किया.

इनमें से ज्यादातर निर्यात चीन को किया गया था. लेकिन जैसे ही चीन की अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में आई, बिजली बनाने के काम में आनेवाले कोयले की कीमत में गिरावट आ गई.

जनवरी, 2011 में यह कीमत नौ हज़ार रुपये प्रति टन के करीब थी लेकिन नवंबर, 2014 में यह गिरकर 4200 रुपये प्रति टन के करीब आ गईं.

खराब असर

ऑस्ट्रेलिया पर्यटन उद्योग
इमेज कैप्शन, खनन उद्योग में गिरावट से प्रभावित क्षेत्रों में पर्यटन कौ बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है.

लौह अयस्क की कीमतों में आई गिरावट का भी कुछ ऐसा ही हाल था. साल 2009 के बाद से ये अपने सबसे निचले स्तर पर हैं.

खनन क्षेत्र में आई मंदी का म्यूज़ेलब्रुक जैसे शहरों पर सबके खराब असर पड़ा है. नौकरियों में हुई कटौती से निपटने के लिए अब ये शहर पर्यटन और घोड़े के कारोबार पर ध्यान दे रहा है.

सेंट जॉर्ज बैंक में वरिष्ठ अर्थशास्त्री जानू चेन कहती हैं, "कोयले की कीमतों में आई ये गिरावट मांग और आपूर्ति का मामला है. पिछले दशक में कीमतें ऊपर चढ़ीं. इससे कोयले की आपूर्ति बढ़ी, नए खान खुले और उनसे लाभ होने लगा. फिर जब क्षमता बढ़ने से कोयले का अधिक उत्पादन होने लगा तो कीमतें फिर से गिर गईं."

सबसे बड़ी गिरावट

ऑस्ट्रेलिया खनन उद्योग

जानू चेन बताती हैं कि मंदी के कारण चीन ने कोयले और लौह अयस्क की खरीद में कमी कर दी है और इससे दुनिया भर में संसाधनों की भरमार हो गई है.

ऑस्ट्रेलिया के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक उसके निर्यात राजस्व में भी गिरावट दर्ज की गई है.

फेडेरल ट्रेज़रर जोए हॉकी ने कहा है कि यह ऑस्ट्रेलिया के व्यापार में 1959 के बाद सबसे बड़ी गिरावट है.

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