गंगा की सफ़ाई का जुनून

गंगा, कानपुर, सूर्योदय
    • Author, रोहित घोष
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
  • प्रकाशित

सूर्योदय हो रहा है. अक्तूबर का महीना है. गुलाबी सर्दी आ चुकी है. गंगा के ऊपर धुंध धीरे-धीरे छंट रही है.

कानपुर में गंगा किनारे गुप्तार घाट के मंदिरों में भक्तों का आना शुरू हो गया है.

ठीक सात बजे, सफ़ेद कुर्ता और पायजामा पहने, औसत से थोड़ा काम क़द और गठीले शरीर का एक वृद्ध व्यक्ति गुप्तार घाट की सीढ़ियां उतर रहे हैं.

गुप्तार घाट पर लगभग हर कोई 70 साल के धरम राज दूबे को जानता है, और जाने भी क्यों नहीं.

सम्मान

धरम राज दूबे पेशे से वकील हैं और पिछले 34 साल से अपनी निजी नाव में सवार होकर, कई घंटे उसे खेकर, कई किलोमीटर दूर गंगा के एक ऐसे तट पर जाते हैं जहाँ पानी साफ़ हो और वो नहा सकें.

धरम राज दूबे, कानपुर
इमेज कैप्शन, धरम राज दूबे 34 साल से गंगा में बह रहे कचरे को साफ करने का काम कर रहे हैं

दूबे कहते हैं, "1970 के आस-पास मैं कानपुर आया और गंगा में नहाना शुरू किया, और तब से गंगा में नहाने की मेरी आदत पड गयी. गंगा स्नान मेरी दिनचर्या में शामिल हो गया है."

घाट पर दूबे कुर्ता पायजामा उतारकर एक केसरिया रंग की धोती पहनते हैं और अपनी नाव में सवार हो जाते हैं.

वे कहते हैं, "जब कानपुर की तरफ़ से बहने वाला पानी गंदा होने लगा, तब मैंने नाव लेकर गंगा की दूसरी तरफ़ जाना शुरू कर दिया. 1980 में 13000 रुपए में मैंने अपनी नाव ख़रीद ली. तब से लेकर आज तक अगर मैं कानपुर शहर में हूँ तो गंगा में ही नहाता हूँ, चाहे बरसात में गंगा में सैलाब आया हो या फिर सर्दियों में गंगा पूरी तरह से कोहरे से ढकी हो. मैं सुबह 7 से 10 बजे तक गंगा मैय्या की गोद में रहता हूँ."

गंगा की सफ़ाई

गुप्तार घाट लौटते समय दूबे गंगा में बह रहे कचरे जैसे फूल, नारियल, प्लास्टिक की थैलियां अपनी नाव में जमा कर लेते हैं. गुप्तार घाट पहुँच कर वे कचरा एक निश्चित स्थान पर डाल देते हैं जहाँ से सफाईकर्मी उसे उठा लेते हैं.

कानपुर, कूड़ा, गंगा

दूबे कहते हैं, "मैं एक एकांत जगह पर जाकर गंगा में नहाता और पूजा करता हूं. लौटते समय गंगा में से कचरा उठा लेता हूं. वह क्रम आज भी चल रहा है."

वो कहते हैं, "कुछ साल पहले मैं गंगा के उद्गम स्थल गंगोत्री भी गया था. पर जो आनंद कानपुर में मिलता है वह मुझे गंगोत्री में नहीं मिला."

अकेला सफ़र

दूबे का कहना है कि गंगा की सफ़ाई के लिए आम आदमी को जागरूक होना होगा.

धरम राज दुबे, कानपुर

वो कहते हैं, "बड़ी-बड़ी सरकारी योजनाएं तो एकतरफ़ हैं, अगर आम आदमी गंगा की सफ़ाई पर थोड़ा ध्यान दे तो बड़ा बदलाव आ सकता है."

लोग गंगा में कचरा न डालकर, गंगा किनारे शौच न कर और नहाते समय साबुन का इस्तेमाल न कर गंगा को प्रदूषित होने से बचा सकते हैं.

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