काली-पीली नहीं रंग-बिरंगी टैक्सियां

    • Author, किंजल पांड्या-वाग
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़, मुंबई
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 4 मिनट

मुंबई की कई ट्रेडमार्क निशानियों में से एक 'काली पीली टैक्सी' को अब बाहर से तो नहीं लेकिन अंदर से एक नया अवतार दिया जा रहा है.

कुछ डिज़ाइनर्स मिलकर इन टैक्सियों के अंदर के कपड़े को बदलकर डिज़ाइनर फ़ैब्रिक से सजा रहे हैं.

इन फ़ैब्रिक्स पर अलग-अलग प्रकार की डिज़ाइन हैं जिनमें कभी सामाजिक संदेश तो कभी बॉलीवुड के मशहूर डॉयलॉग नज़र आ रहे हैं.

इस प्रोजेक्ट का नाम 'टैक्सी फ़ैब्रिक' है और इसका लक्ष्य है टैक्सी डिज़ाइनर्स को एक मौक़ा देना जिससे वो अपनी कला का प्रदर्शन कर सकें.

मुंबई की टैक्सियां शहर के भीतर यातायात का एक अहम हिस्सा है और रोज़ाना लाखों लोग इन टैक्सियों का इस्तमाल करते हैं.

हाल ही में रिलीज़ हुए ब्रितानी रॉक बैंड 'कोल्ड प्ले' के नए एल्बम का गाना 'हम्म फॉर वीकएन्ड' के वीडियो में भी इन टैक्सियों को दिखाया गया है.

मुंबई के रहने वाले संकेत अवलानी ने 'टैक्सी फ़ैब्रिक' की शुरुआत की. पेशे से डिज़ाइनर संकेत ने अपने चार दोस्तों के साथ धीरे-धीरे कुछ टैक्सियों में यह डिज़ाइनर फ़ैब्रिक लगाना शुरू किया.

संकेत ने बीबीसी को बताया, "भारत में अभी तक कला को अपना सही स्थान नहीं मिला है हमें आर्थिक रूप से भी भारत से किसी ने सहयोग नहीं दिया."

संकेत ने बताया कि उन्होंने अपने प्रोजेक्ट को जब एक अमरीकी वेबसाइट पर प्रदर्शित किया तब उन्हें कई विदेशी कंपनियों से आर्थिक मदद मिली.

कंपनियों से मिली इस आर्थिक मदद से वे मुंबई की 30 टैक्सियों में नया डिज़ाइनर फ़ैब्रिक लगाएंगे जिनमें से 25 टैक्सियों में अब तक वे नया फ़ैब्रिक लगा चुके है.

मुंबई की ही रहने वाली एक और डिज़ाइनर नम्रता गोस्वामी ने बॉलीवुड की थीम पर टैक्सियों में डिज़ाइनर फ़ैब्रिक लगवाया है.

नम्रता कहती हैं, "लोग बॉलीवुड की फ़िल्मों से प्रेरणा लेते हैं जिसमें दिखता है कि बुराई पर अच्छाई की जीत होती है और यही कोशिश मैंने अपनी डिज़ाइन में दिखाने की कोशिश की है."

मुंबई में टैक्सी चलाने वाले अंकुर खड़े ने अपनी गाड़ी में यह फ़ैब्रिक लगवाया है और वे इसे एक नई कला के तौर पर देखते हैं.

वे कहते हैं, "मुझे ख़ुद को यह डिज़ाइन बड़ा पसंद आया और हमारे यात्री भी ये डिज़ाइन देख कर चौक जाते है और जब भी बच्चे इसे देखते हैं तो तालियां बजाने लगते हैं."

टैक्सी फ़ैब्रिक की टीम ड्राइवर से मिलकर उन्हें फ़ैब्रिक लगाने के लिए मनाती है.

इस कार्य में वे ड्राईवर या टैक्सी मालिकों से किसी भी प्रकार की रक़म नहीं लेते और इतना ही नहीं, जितना वक्त उनकी टैक्सी में फैब्रिक लगाने में लगता है उतने वक्त का टैक्सी चालकों को किराया भी दिया जाता है.

टैक्सी फ़ैब्रिक की टीम को भी उनके निवेशकों से कपड़ा बनाने और सिलाई की रक़म दी जाती है साथ ही डिज़ाइनर्स का भी ख़र्चा उठाया जाता है.

अब टैक्सियों के साथ-साथ मुंबई के ऑटो रिक्शा को भी फ़ैब्रिक लगाने का काम शुरू कर दिया गया है.

आने वाले दिनों में संकेत इस काम को जारी रखना चाहते हैं. वो कहते हैं, "हम सरकार और कुछ ब्रांड्स के साथ मिलकर काम करना चाहते है जिससे वे अपने संदेश लोगों तक एक नए तरीक़े से पहुंचा सकें."

इसमें एक अहम फ़ैब्रिक है 'मूक बधिर' लोगों की 'साइन लैंग्वेज' वाला फ़ैब्रिक जिस पर साइन लैंग्वेज के निशान और उनका अर्थ बना है.

संकेत के अनुसार,"यह एक सामाजिक कोशिश है जिसके ज़रिए हम लोगों को साईन लैंग्वेज के प्रति भी जागरुक कर सकते हैं."

हालांकि साईन लैंग्वेज पर आधारित फ़ैब्रिक एक थीम है और ऐसी ही कई थीम वाले फ़्रैबिक इस योजना में लगाए जाएंगे.

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